Tabocef CV Plus Dry Syrup - Uses, Price and Side Effects

Tabocef CV Plus Dry Syrup: Uses in Hindi (Fayde), Price, Side Effects & Substitutes

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🏭 Albia Biocare 📦 bottle of 30 ml Dry Syrup 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 16, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is Tabocef CV Plus Dry Syrup used for? (Quick Answer)

🩺 Primary Use:
Tabocef CV Plus Dry Syrup (manufactured by Albia Biocare) is a highly effective medicine primarily used for the treatment of . It helps in relieving symptoms and improving your overall health. Find the complete list of Tabocef CV Plus Dry Syrup uses in Hindi, alternatives, price in India, and dosage on SaathiMed below.
🧪 Active Ingredient & Working:
It contains Cefixime (50mg) + Clavulanic Acid (31.25mg) which works by treating the underlying condition effectively.
⚠️ Safety Warning:
Always consult your doctor before using this medicine, especially to check if it is safe during pregnancy or if you suffer from liver or kidney issues.

🇮🇳 Tabocef CV Plus Dry Syrup के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

Tabocef CV Plus Dry Syrup का उपयोग मुख्य रूप से और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Cefixime (50mg) + Clavulanic Acid (31.25mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? The first generic medicine was introduced in India in 1970 after the Patents Act was amended.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Cefixime (50mg) + Clavulanic Acid (31.25mg)
Manufacturer / BrandAlbia Biocare
Packaging / Formbottle of 30 ml Dry Syrup (Allopathy)
Therapeutic Class
Action Class
Prescription Required✓ Yes (Schedule H Drug)
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Onset of Action:
30 to 60 minutes
Duration:
6 to 8 hours
Habit Forming:
No (Non-addictive)
Food:
Take after meal

💊 Tabocef CV Plus Dry Syrup Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

💡 How to Take Tabocef CV Plus Dry Syrup (Dosage & Khane ka tarika)

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💡 Expert Tips for Best Results

  • Follow the prescription: Always use Tabocef CV Plus Dry Syrup exactly as prescribed by your healthcare provider. Do not alter the dosage yourself.
  • Check Expiry: Never consume expired medicines. Always double-check the manufacturing and expiry date on the packaging before use.
  • Storage: Store the medicine in a cool, dry place away from direct sunlight and out of reach of children.
  • Report Side Effects: If you experience severe allergic reactions, swelling, or breathing issues after taking Tabocef CV Plus Dry Syrup, seek emergency medical help immediately.
  • Don't self-medicate: Do not share this medicine with others even if their symptoms seem similar to yours.

⚠️ Tabocef CV Plus Dry Syrup Side Effects (Nuksan) & Precautions

Common and serious side effects may include:

  • Consult your doctor for complete side effect profile.

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🛑 Myths vs. Facts about Tabocef CV Plus Dry Syrup

  • Myth: Generic substitutes of Tabocef CV Plus Dry Syrup are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Cefixime (50mg) + Clavulanic Acid (31.25mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of Tabocef CV Plus Dry Syrup can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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Complete Guide to Diabetes Home Remedies - 29-05-2026

डायबिटीज के घरेलू उपचार: संपूर्ण और विस्तृत गाइड (Diabetes Home Remedies: Complete Guide in Hinglish) नमस्ते! यह गाइड आपके लिए है जो डायबिटीज (मधुमेह) को समझना चाहते हैं और इसे कंट्रोल करने के लिए प्राकृतिक और घरेलू उपायों की तलाश में हैं। यहाँ हम बीमारी के मैकेनिज्म से लेकर डाइट प्लान, लक्षण, दवाइयाँ और मेंटल हेल्थ तक सब कुछ कवर करेंगे। यह आर्टिकल पूरी तरह से SEO-optimized है और आपकी हर छोटी-बड़ी क्वेरी का जवाब देगा। 1. गहन परिचय और रोग तंत्र (Deep Introduction & Disease Mechanism) डायबिटीज कोई साधारण बीमारी नहीं है, यह एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है जो आपके शरीर के एनर्जी सिस्टम को प्रभावित करता है। चलिए समझते हैं कि यह कैसे और क्यों होता है। शरीर में क्या होता है? (What happens inside the body?) ग्लूकोज और इंसुलिन का खेल: जब आप खाना खाते हैं, खासकर कार्बोहाइड्रेट (चावल, रोटी, मीठा), तो आपका पाचन तंत्र उसे ग्लूकोज (शुगर) में तोड़ता है। यह ग्लूकोज खून में मिलता है। फिर आपका पैंक्रियाज (अग्न्याशय) एक हार्मोन छोड़ता है जिसे इंसुलिन कहते हैं। इंसुलिन एक चाबी की तरह काम करता है जो शरीर की कोशिकाओं (cells) के दरवाजे खोलता है, ताकि ग्लूकोज अंदर जाकर एनर्जी में बदल जाए। डायबिटीज में क्या बिगड़ता है? टाइप 1 डायबिटीज: इसमें शरीर की इम्यून सिस्टम गलती से पैंक्रियाज की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं (beta cells) पर हमला करके उन्हें नष्ट कर देती है। नतीजा: इंसुलिन बनता ही नहीं। यह आमतौर पर बच्चों और युवाओं में होता है। टाइप 2 डायबिटीज: यह सबसे आम है (90% मामले)। इसमें दो समस्याएँ होती हैं: इंसुलिन रेजिस्टेंस: शरीर की कोशिकाएँ इंसुलिन को इग्नोर करने लगती हैं (चाबी काम नहीं करती)। इंसुलिन की कमी: पैंक्रियाज ज्यादा इंसुलिन बनाने की कोशिश करता है, लेकिन धीरे-धीरे थक जाता है और कम बनाने लगता है। गर्भावस्था डायबिटीज (Gestational Diabetes): गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलावों के कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस हो जाता है। हाइपरग्लाइसीमिया (High Blood Sugar): जब ग्लूकोज कोशिकाओं में नहीं जा पाता, तो खून में शुगर का लेवल बढ़ जाता है। यह धीरे-धीरे नसों, किडनी, आँखों और दिल को नुकसान पहुँचाता है। महत्वपूर्ण बात: डायबिटीज सिर्फ शुगर की बीमारी नहीं है, यह पूरे शरीर के मेटाबॉलिज्म को असंतुलित कर देती है। इसलिए इसे कंट्रोल करना बहुत जरूरी है। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Common AND Rare Symptoms) डायबिटीज के लक्षण धीरे-धीरे आते हैं, इसलिए कई लोग इसे नज़रअंदाज कर देते हैं। यहाँ हर तरह के लक्षण बता रहे हैं। सामान्य लक्षण (Common Symptoms) बार-बार पेशाब आना (Polyuria): खून में ज्यादा शुगर को किडनी फिल्टर करती है और पानी खींचकर पेशाब बनाती है। खासकर रात में कई बार उठना पड़ता है। अत्यधिक प्यास लगना (Polydipsia): बार-बार पेशाब से पानी कम हो जाता है, जिससे दिमाग प्यास का सिग्नल भेजता है। भूख बहुत लगना (Polyphagia): कोशिकाओं को ग्लूकोज नहीं मिलता, इसलिए शरीर सोचता है कि उसे और खाना चाहिए। वजन का अचानक कम होना: खासकर टाइप 1 में। जब कोशिकाओं को ग्लूकोज नहीं मिलता, तो शरीर फैट और मसल्स को तोड़ने लगता है। थकान और कमजोरी: एनर्जी की कमी के कारण पूरे दिन सुस्ती रहती है। धुंधला दिखना (Blurry Vision): हाई ब्लड शुगर आँखों के लेंस में तरल पदार्थ खींच लेता है, जिससे शेप बदल जाती है। घाव का जल्दी न भरना: हाई शुगर नसों और ब्लड फ्लो को खराब करता है, जिससे हीलिंग धीमी हो जाती है। बार-बार इंफेक्शन: स्किन, मसूड़ों या यूरिनरी ट्रैक्ट में इंफेक्शन आम है। महिलाओं में यीस्ट इंफेक्शन (खुजली) हो सकता है। हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्नता (Tingling/Numbness): इसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहते हैं। हाई शुगर नसों को नुकसान पहुँचाता है। दुर्लभ या गंभीर लक्षण (Rare or Severe Symptoms) डार्क स्किन पैच (Acanthosis Nigricans): गर्दन, बगल या जाँघों के बीच गहरे, मखमली धब्बे। यह इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत है। बार-बार फोड़े या गांठें (Boils): कमजोर इम्यूनिटी के कारण त्वचा पर बार-बार फोड़े होना। नपुंसकता (Erectile Dysfunction): पुरुषों में ब्लड फ्लो और नसों के खराब होने से यह समस्या हो सकती है। पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS): महिलाओं में इंसुलिन रेजिस्टेंस PCOS का कारण बन सकता है, जिससे अनियमित पीरियड्स और बाल झड़ना होता है। डायबिटिक केटोएसिडोसिस (DKA): टाइप 1 में जानलेवा स्थिति। जब शरीर फैट तोड़ता है, तो कीटोन्स बनते हैं, जो खून को अम्लीय बना देते हैं। लक्षण: मतली, उल्टी, फल जैसी साँस, कन्फ्यूजन। हाइपरोस्मोलर हाइपरग्लाइसीमिक स्टेट (HHS): टाइप 2 में गंभीर डिहाइड्रेशन और बेहोशी। नोट: अगर आपको ये लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। 3. विस्तृत डाइट प्लान (Detailed Diet Plan - Kya Khaye aur Kya Na Khaye) डायबिटीज कंट्रोल में डाइट का सबसे बड़ा रोल है। यहाँ पूरा इंडियन डाइट प्लान दिया गया है। क्या खाएँ (What to Eat - Include in Diet) साबुत अनाज (Whole Grains): ब्राउन राइस, जौ (Barley), बाजरा, रागी (Finger Millet), ओट्स। ये फाइबर से भरपूर होते हैं और शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाते हैं। दालें और बीन्स (Legumes): मूंग दाल, चना, राजमा, सोयाबीन। इनमें प्रोटीन और फाइबर होता है जो ब्लड शुगर को स्थिर रखता है। हरी पत्तेदार सब्जियाँ (Leafy Greens): पालक, मेथी, सरसों का साग, बथुआ। ये कैलोरी में कम और न्यूट्रिएंट्स में हाई होते हैं। कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली सब्जियाँ: करेला (Karela), लौकी (Bottle Gourd), तोरी (Zucchini), बैंगन, फूलगोभी। फल (Fruits in Moderation): जामुन, सेब, नाशपाती, अमरूद, संतरा, पपीता। केला, अंगूर और आम सीमित मात्रा में खाएँ। प्रोटीन स्रोत: अंडे, मछली (सैल्मन, टूना), चिकन (बिना त्वचा के), पनीर, टोफू, दही (ग्रीक योगर्ट)। हेल्दी फैट्स: नट्स (बादाम, अखरोट), बीज (चिया, फ्लैक्स, सूरजमुखी), जैतून का तेल, नारियल का तेल (सीमित), एवोकाडो। मसाले और जड़ी-बूटियाँ: हल्दी, दालचीनी, मेथी दाना, अदरक, लहसुन, करी पत्ता। ये इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाते हैं। क्या न खाएँ (What to Avoid - Strictly Avoid) रिफाइंड कार्ब्स: सफेद चावल, मैदा (White Flour), सफेद ब्रेड, नूडल्स, पास्ता। ये तुरंत शुगर बढ़ाते हैं। मीठी चीज़ें: चीनी, मिठाई (लड्डू, जलेबी, गुलाब जामुन), कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस, एनर्जी ड्रिंक्स, आइसक्रीम। फ्राइड और प्रोसेस्ड फूड्स: समोसा, पकौड़ा, चिप्स, बिस्कुट, पैकेज्ड नमकीन, फास्ट फूड (बर्गर, पिज्जा)। हाई फैट डेयरी: फुल क्रीम दूध, क्रीम, बटर, घी (सीमित मात्रा में ही)। फलों का जूस: भले ही ताजा हो, इसमें फाइबर नहीं होता और शुगर तेजी से बढ़ती है। पूरा फल खाएँ। अल्कोहल और स्मोकिंग: ये ब्लड शुगर को अस्थिर करते हैं और कॉम्प्लिकेशन बढ़ाते हैं। नमूना डाइट चार्ट (Sample Diet Plan for One Day) सुबह (7:00 AM): गुनगुने पानी में नींबू और मेथी दाना पाउडर। नाश्ता (8:00 AM): 1 कटोरी ओट्स या बाजरे की रोटी + हरी सब्जी + 1 उबला अंडा। मिड-मॉर्निंग (10:00 AM): 1 सेब या 1 मुट्ठी बादाम। दोपहर का खाना (1:00 PM): 1 रोटी (गेहूं/जौ) + 1 कटोरी करेला सब्जी + 1 कटोरी मूंग दाल + सलाद (खीरा, टमाटर)। शाम का नाश्ता (4:00 PM): 1 कप ग्रीन टी + 2-3 मखाने (भुने हुए)। रात का खाना (7:00 PM): 1 कटोरी ग्रिल्ड चिकन या पनीर + 1 कटोरी लौकी सब्जी + 1 रोटी। सोने से पहले (9:30 PM): 1 कप गुनगुना दूध (बिना चीनी) + चुटकी भर हल्दी। सुझाव: दिन में कम से कम 2-3 लीटर पानी पिएँ। खाने के तुरंत बाद न सोएँ, 15-20 मिनट टहलें। 4. चिकित्सा प्रबंधन (Medical Management - Educational Only) डायबिटीज का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन दवाइयों और इंसुलिन से इसे कंट्रोल किया जा सकता है। यहाँ मुख्य दवाइयों के बारे में समझाया गया है। दवाइयाँ (Medicines) मेटफॉर्मिन (Metformin): यह सबसे पहली दवा है। यह लीवर में ग्लूकोज बनना कम करता है और कोशिकाओं को इंसुलिन के प्रति संवेदनशील बनाता है। साइड इफेक्ट: पेट खराब हो सकता है। सल्फोनील्यूरिया (Sulfonylureas): जैसे ग्लिपिजाइड, ग्लिमेपीराइड। ये पैंक्रियाज से ज्यादा इंसुलिन छोड़ने के लिए उत्तेजित करते हैं। साइड इफेक्ट: वजन बढ़ना और हाइपोग्लाइसीमिया (लो शुगर) का खतरा। डीपीपी-4 इनहिबिटर (DPP-4 Inhibitors): जैसे सीताग्लिप्टिन। ये इंसुलिन छोड़ने में मदद करते हैं और ग्लूकागन (शुगर बढ़ाने वाला हार्मोन) को कम करते हैं। एसजीएलटी2 इनहिबिटर (SGLT2 Inhibitors): जैसे डापाग्लिफ्लोजिन। ये किडनी के जरिए पेशाब में अतिरिक्त शुगर बाहर निकालते हैं। ये दिल और किडनी के लिए भी फायदेमंद हैं। जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट (GLP-1 Agonists): जैसे सेमाग्लूटाइड। ये इंजेक्शन के रूप में लिए जाते हैं, भूख कम करते हैं, वजन घटाते हैं और शुगर कंट्रोल करते हैं। इंसुलिन थेरेपी (Insulin Therapy) टाइप 1 डायबिटीज: इंसुलिन लेना अनिवार्य है। कई प्रकार के इंसुलिन होते हैं: रैपिड-एक्टिंग: खाने से पहले लें, 15 मिनट में काम शुरू करता है। बेसल इंसुलिन: दिन में एक या दो बार लें, पूरे दिन बेसल लेवल बनाए रखता है। टाइप 2 डायबिटीज: जब दवाइयाँ काम न करें, तब इंसुलिन शुरू किया जाता है। महत्वपूर्ण: कोई भी दवा या इंसुलिन डॉक्टर की सलाह के बिना न लें। यहाँ केवल शैक्षणिक जानकारी दी गई है। 5. सिद्ध घरेलू उपचार और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) घरेलू उपचार दवाइयों का विकल्प नहीं हैं, लेकिन ये ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में बहुत मदद कर सकते हैं। यहाँ सबसे प्रभावी उपाय दिए गए हैं। घरेलू उपचार (Home Remedies) करेला (Karela): इसमें 'चारंटिन' नामक कंपाउंड होता है जो इंसुलिन जैसा काम करता है। रोजाना सुबह खाली पेट करेले का जूस पिएँ (1/2 कप) या सब्जी के रूप में खाएँ। मेथी दाना (Fenugreek Seeds): इसमें फाइबर और गैलेक्टोमैनन होता है जो शुगर अब्जॉर्प्शन को धीमा करता है। रात भर 1 चम्मच मेथी दाना पानी में भिगोएँ, सुबह पानी पिएँ और दाने चबाएँ। दालचीनी (Cinnamon): यह इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाता है और ब्लड शुगर कम करता है। 1/2 चम्मच दालचीनी पाउडर गुनगुने पानी या चाय में डालकर पिएँ। जामुन (Jamun): जामुन के बीज का पाउडर डायबिटीज के लिए रामबाण माना जाता है। यह पैंक्रियाज को उत्तेजित करता है। 1 चम्मच पाउडर पानी के साथ दिन में दो बार लें। आंवला (Indian Gooseberry): विटामिन C से भरपूर, यह पैंक्रियाज के बीटा सेल्स की रक्षा करता है। रोजाना 1 आंवला खाएँ या जूस पिएँ। गिलोय (Giloy): यह इम्यूनिटी बढ़ाता है और ब्लड शुगर कंट्रोल करता है। गिलोय के पत्तों का काढ़ा बनाकर पिएँ। हल्दी (Turmeric): करक्यूमिन इंसुलिन रेजिस्टेंस कम करता है। एक गिलास गर्म दूध में चुटकी भर हल्दी और काली मिर्च डालकर पिएँ। नीम (Neem): नीम के पत्ते ब्लड शुगर लेवल को कम करते हैं। रोजाना 4-5 नीम की पत्तियाँ चबाएँ या नीम की चाय बनाएँ। एलोवेरा (Aloe Vera): एलोवेरा जूस इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधारता है। 1/4 कप एलोवेरा जूस रोजाना पिएँ (बिना चीनी)। व्यायाम और योग: रोजाना 30-45 मिनट तेज चलना, दौड़ना, साइकिलिंग या योग (जैसे सूर्य नमस्कार, कपालभाति) करें। इससे मसल्स ग्लूकोज का उपयोग बेहतर तरीके से करती हैं। जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes) नियमित रूप से ब्लड शुगर चेक करें: दिन में कम से कम 2-3 बार (खासकर खाने से पहले और बाद में) अपने शुगर लेवल को मॉनिटर करें। पर्याप्त नींद लें: 7-8 घंटे की नींद जरूरी है। नींद की कमी से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है। स्ट्रेस मैनेजमेंट: तनाव से कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो ब्लड शुगर को बढ़ाता है। ध्यान (मेडिटेशन), गहरी साँसें लें या अपने शौक पूरे करें। पैरों की देखभाल: रोजाना पैरों को धोएँ, मॉइश्चराइज़ करें और किसी भी घाव, फफोले या लालिमा की जाँच करें। डायबिटीज में पैरों में इंफेक्शन का खतरा ज्यादा होता है। धूम्रपान और शराब से बचें: ये ब्लड शुगर को अस्थिर करते हैं और दिल व किडनी की बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं। वजन कंट्रोल करें: अगर आप ओवरवेट हैं, तो 5-10% वजन घटाने से इंसुलिन सेंसिटिविटी में बहुत सुधार होता है। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Mental Health & Daily Life) डायबिटीज सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक बीमारी भी है। इसे मैनेज करना एक फुल-टाइम जॉब जैसा है, जो मेंटल हेल्थ को गहराई से प्रभावित करता है। मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डायबिटिक डिस्ट्रेस (Diabetes Distress): ब्लड शुगर मॉनिटरिंग, डाइट, दवाइयाँ और डॉक्टर के पास जाने का दबाव। लगातार चिंता बनी रहती है कि शुगर बढ़ या घट न जाए। डिप्रेशन और एंग्जायटी: डायबिटीज के मरीजों में डिप्रेशन का खतरा दोगुना होता है। कारण: हार्मोनल असंतुलन, थकान, और सामाजिक अलगाव। खाने से डर (Fear of Food): कई मरीज खाने से डरने लगते हैं कि कहीं शुगर न बढ़ जाए। इससे ईटिंग डिसऑर्डर (जैसे बुलिमिया) हो सकता है। सामाजिक जीवन पर असर: पार्टियों, शादियों या दोस्तों के साथ खाने में परहेज करना पड़ता है। लोग पूछते हैं, "यह क्यों नहीं खा रहे?" जिससे शर्मिंदगी महसूस होती है। हाइपोग्लाइसीमिया का डर: लो शुगर (हाइपो) का अटैक आने का डर हमेशा बना रहता है, जिससे ड्राइविंग या अकेले बाहर जाने में हिचक होती है। दैनिक जीवन पर प्रभाव रूटीन में बदलाव: हर दिन एक ही समय पर खाना, दवा लेना और व्यायाम करना जरूरी हो जाता है। शिफ्ट ड्यूटी या अनियमित जीवनशैली वालों के लिए यह मुश्किल होता है। नींद की समस्या: रात में बार-बार पेशाब आना या हाई शुगर के कारण नींद पूरी नहीं होती। काम पर असर: थकान और कमजोरी के कारण प्रोडक्टिविटी कम हो जाती है। कई बार ऑफिस में शुगर चेक करने या इंसुलिन लेने के लिए ब्रेक लेना पड़ता है। वित्तीय बोझ: दवाइयाँ, इंसुलिन, ग्लूकोमीटर, स्ट्रिप्स और डॉक्टर की फीस पर हर महीने अच्छा-खासा खर्च होता है। कैसे संभालें? (How to Cope?) सपो

Bhai bank job ka pet 🍔 aur engagement ka pressure 💔 - koi genuine solution batao?

Yaar ye bank job ne meri life kharab kar di hai. Subah 9 se raat 8 tak ek hi jagah baitha rehta hoon. Pet nikal aaya hai aisa lagta hai 4 mahine ka pregnant hoon. Kal ghar wale ne photo bheji engagement ke liye, ladki wale bol rahe hain "dubla patla ladka chahiye". Ab kya bataun ki ye computer screen ke saamne baith baith ke aaya hai. Maine socha gym join karun, 1 hafta gaya, phir laziness aur back pain ne pakad liya. Ab ghar par hi kuch karta hoon - 10 pushups karta hoon toh 2 din ka badi dard hoti hai. Ek dost ne kaha "walking kar, 10000 steps roz". Ab toh office ke lunch break me 20 min walk karta hoon, par kya fayda? Pet to waise hi hai. Koi genuine remedy batao bhai. Koi aisa exercise ya diet jo bank employees ke liye kaam kare. Main toh soch raha hoon kya khana band kar du? Par ghar ka khana to healthy hai, bas ghee aur roti zyada hai. Pls help, warna shadi ki umar nikal jayegi. 😂

Canteen mein akeli baithi thi, sabke group the, meri taraf kisi ne dekha bhi nahi 😔

Okay so today in college, I was literally sitting alone in the canteen during lunch break. Everyone around me was with their groups, laughing, sharing food. And I just sat there with my phone, pretending to scroll even though I wasn't seeing anything. One girl from my class looked at me twice, I think she felt bad? But she didn't come over. Not blaming her, it's just... that moment hit different. The worst part is I have friends from school, but they're in different colleges now. And here, everyone already has their "groups" from first year. Ab second year mein aa gayi, still feels like I don't belong. I tried joining a club but the people there are so loud and confident, I just felt more out of place. My parents would be like "padhai pe dhyaan de, doston se kya karna?" but honestly, loneliness is messing with my concentration. I can't even focus on studies when I feel like I'm invisible. Has anyone else dealt with this? How do you even make friends when your social anxiety makes you freeze? Or do you just accept being alone for the rest of college? 🥲

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