ROSCILOX 125MG/125MG TABLET DT - Uses, Price and Side Effects

ROSCILOX 125MG/125MG TABLET DT: Uses in Hindi (Fayde), Price, Side Effects & Substitutes

No reviews yet
⬆️ Click any salt to see similar medicines
🏭 Sun Pharmaceutical Industries Ltd 📦 strip of 10 tablet dt 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 14, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is ROSCILOX 125MG/125MG TABLET DT used for? (Quick Answer)

🩺 Primary Use:
ROSCILOX 125MG/125MG TABLET DT (manufactured by Sun Pharmaceutical Industries Ltd) is a highly effective medicine primarily used for the treatment of . It helps in relieving symptoms and improving your overall health. Find the complete list of ROSCILOX 125MG/125MG TABLET DT uses in Hindi, alternatives, price in India, and dosage on SaathiMed below.
🧪 Active Ingredient & Working:
It contains Ampicillin (125mg) + Cloxacillin (125mg) which works by treating the underlying condition effectively.
⚠️ Safety Warning:
Always consult your doctor before using this medicine, especially to check if it is safe during pregnancy or if you suffer from liver or kidney issues.

🇮🇳 ROSCILOX 125MG/125MG TABLET DT के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

ROSCILOX 125MG/125MG TABLET DT का उपयोग मुख्य रूप से और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Ampicillin (125mg) + Cloxacillin (125mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? The Indian pharmaceutical market is expected to reach $130 billion by 2030.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Ampicillin (125mg) + Cloxacillin (125mg)
Manufacturer / BrandSun Pharmaceutical Industries Ltd
Packaging / Formstrip of 10 tablet dt (Allopathy)
Therapeutic Class
Action Class
Prescription Required✓ Yes (Schedule H Drug)
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Onset of Action:
30 to 60 minutes
Duration:
6 to 8 hours
Habit Forming:
No (Non-addictive)
Food:
Take after meal

💊 ROSCILOX 125MG/125MG TABLET DT Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

💡 How to Take ROSCILOX 125MG/125MG TABLET DT (Dosage & Khane ka tarika)

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💡 Expert Tips for Best Results

  • Follow the prescription: Always use ROSCILOX 125MG/125MG TABLET DT exactly as prescribed by your healthcare provider. Do not alter the dosage yourself.
  • Check Expiry: Never consume expired medicines. Always double-check the manufacturing and expiry date on the packaging before use.
  • Storage: Store the medicine in a cool, dry place away from direct sunlight and out of reach of children.
  • Report Side Effects: If you experience severe allergic reactions, swelling, or breathing issues after taking ROSCILOX 125MG/125MG TABLET DT, seek emergency medical help immediately.
  • Don't self-medicate: Do not share this medicine with others even if their symptoms seem similar to yours.

⚠️ ROSCILOX 125MG/125MG TABLET DT Side Effects (Nuksan) & Precautions

Common and serious side effects may include:

  • Consult your doctor for complete side effect profile.

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🛑 Myths vs. Facts about ROSCILOX 125MG/125MG TABLET DT

  • Myth: Generic substitutes of ROSCILOX 125MG/125MG TABLET DT are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Ampicillin (125mg) + Cloxacillin (125mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of ROSCILOX 125MG/125MG TABLET DT can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

💬 Real Patient Experiences (Astitva)

Join Community

Read real stories and discussions from our patient community regarding similar health conditions.

Complete Guide to Stress Management - 30-05-2026

तनाव प्रबंधन (Stress Management) का संपूर्ण गाइड: कारण, लक्षण, इलाज और घरेलू उपाय नमस्ते! आज हम बात करेंगे एक ऐसी समस्या के बारे में जो आजकल लगभग हर व्यक्ति को किसी न किसी रूप में प्रभावित कर रही है – तनाव (Stress)। यह कोई सामान्य थकान या चिंता नहीं है, बल्कि एक गंभीर शारीरिक और मानसिक स्थिति है जो आपके पूरे शरीर को अंदर से बदल सकती है। इस गाइड में हम तनाव के हर पहलू को विस्तार से समझेंगे – यह कैसे होता है, इसके लक्षण क्या हैं, क्या खाएं और क्या न खाएं, दवाइयां कैसे काम करती हैं, और घरेलू उपाय जो आपको राहत दिला सकते हैं। यह जानकारी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है, लेकिन आपको एक मजबूत आधार देगी। 1. गहरा परिचय और रोग तंत्र (Deep Introduction & Disease Mechanism) तनाव क्या है? (What is Stress?) तनाव शरीर की एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है जो किसी भी खतरे, चुनौती या मांग के जवाब में होती है। यह पूरी तरह से बुरा नहीं है – थोड़ा तनाव आपको प्रेरित कर सकता है, जैसे परीक्षा से पहले पढ़ने का दबाव। लेकिन जब यह लगातार बना रहे (क्रोनिक स्ट्रेस), तो यह शरीर के हर सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है। शरीर के अंदर क्या होता है? (Mechanism Inside the Body) जब आप तनाव में होते हैं, तो आपका हाइपोथैलेमस-पिट्यूटरी-एड्रेनल (HPA) एक्सिस सक्रिय हो जाता है। यह एक हार्मोनल चेन रिएक्शन है: हाइपोथैलेमस (मस्तिष्क का एक हिस्सा) CRH (कॉर्टिकोट्रोपिन-रिलीज़िंग हार्मोन) रिलीज़ करता है। यह पिट्यूटरी ग्रंथि को ACTH (एड्रेनोकॉर्टिकोट्रोपिक हार्मोन) बनाने के लिए संकेत देता है। ACTH आपके एड्रेनल ग्रंथियों (किडनी के ऊपर) को उत्तेजित करता है, जो कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन (एपिनेफ्रिन) रिलीज़ करती हैं। एड्रेनालाईन तुरंत प्रभाव डालता है: दिल की धड़कन तेज़, ब्लड प्रेशर बढ़ना, सांस तेज़ होना, और मांसपेशियों में ऊर्जा का संचार – इसे "फाइट-या-फ्लाइट" रिस्पॉन्स कहते हैं। कोर्टिसोल लंबे समय तक काम करता है: यह ब्लड शुगर बढ़ाता है, इम्यून सिस्टम को दबाता है, और पाचन को धीमा करता है। जब तनाव पुराना हो जाता है, तो कोर्टिसोल का स्तर लगातार ऊंचा रहता है। इससे: इंसुलिन रेजिस्टेंस (डायबिटीज़ का खतरा) हाई ब्लड प्रेशर पेट की चर्बी बढ़ना (विसरल फैट) इम्यूनिटी कमज़ोर होना (बार-बार बीमार पड़ना) मस्तिष्क के हिप्पोकैम्पस (याददाश्त का केंद्र) का सिकुड़ना यह सिर्फ मानसिक नहीं है – यह एक पूर्ण शारीरिक रोग है जो कोशिकाओं के स्तर पर नुकसान पहुंचाता है। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Common & Rare Symptoms) सामान्य लक्षण (Common Symptoms) मानसिक: लगातार चिंता (Anxiety), चिड़चिड़ापन (Irritability), ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, नकारात्मक विचार, बेचैनी, याददाश्त कमज़ोर होना। शारीरिक: सिरदर्द (Tension headache), गर्दन और कंधों में अकड़न, पेट खराब (गैस, एसिडिटी, दस्त या कब्ज), थकान, नींद न आना (Insomnia), दिल की धड़कन तेज़ होना, पसीना आना, भूख में बदलाव (ज़्यादा या कम खाना), बार-बार सर्दी-खांसी लगना। व्यवहारिक: सामाजिक अलगाव (लोगों से मिलना-जुलना कम करना), शराब या सिगरेट का बढ़ना, काम में लापरवाही, जल्दी गुस्सा आना। दुर्लभ या गंभीर लक्षण (Rare & Severe Symptoms) पैरों और हाथों में झुनझुनी या सुन्नता (Tingling/Numbness): लंबे समय तक तनाव से नसों पर दबाव या सूजन हो सकती है, जिससे "पेरिफेरल न्यूरोपैथी" जैसा एहसास होता है। धुंधली दृष्टि (Blurry Vision): तनाव से आंखों की मांसपेशियों में खिंचाव या ब्लड प्रेशर बढ़ने से अस्थायी धुंधलापन आ सकता है। टिनिटस (Tinnitus): कानों में लगातार घंटी या सीटी बजने की आवाज़ आना। ब्रुक्सिज़्म (Bruxism): नींद में दांत पीसना या जबड़ा भींचना, जिससे जबड़े में दर्द और दांत घिस सकते हैं। डिपर्सनलाइज़ेशन/डीरियलाइज़ेशन: खुद को या अपने आस-पास की दुनिया को अवास्तविक या सपने जैसा महसूस करना। हार्ट पैल्पिटेशन्स: दिल का अचानक बहुत तेज़ या अनियमित धड़कना, जो कभी-कभी पैनिक अटैक जैसा लगता है। साइकोसोमैटिक दर्द: बिना किसी शारीरिक कारण के पीठ, जोड़ों या मांसपेशियों में दर्द (जैसे फाइब्रोमायल्जिया)। 3. विस्तृत आहार योजना (Detailed Diet Plan) क्या खाएं (What to Eat) – तनाव कम करने वाले आहार जटिल कार्बोहाइड्रेट (Complex Carbs): ओट्स, ब्राउन राइस, बाजरा, ज्वार, क्विनोआ। ये सेरोटोनिन (खुशी का हार्मोन) बढ़ाते हैं और ब्लड शुगर को स्थिर रखते हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड: अलसी (Flaxseeds), चिया सीड्स, अखरोट, सरसों का तेल, मछली (यदि शाकाहारी न हों)। ये मस्तिष्क की सूजन कम करते हैं और मूड को बेहतर बनाते हैं। मैग्नीशियम युक्त खाद्य पदार्थ: पालक, मेथी, कद्दू के बीज, बादाम, केला, डार्क चॉकलेट (70% कोको)। मैग्नीशियम मांसपेशियों को आराम देता है और कोर्टिसोल को कम करता है। विटामिन B कॉम्प्लेक्स: दालें (मसूर, मूंग), हरी पत्तेदार सब्जियां, अंडे (यदि अंडा खाते हैं), दूध, दही। ये नर्व सिस्टम को स्वस्थ रखते हैं। एंटीऑक्सीडेंट: आंवला, अमरूद, संतरा, बेरीज, हल्दी, अदरक, ग्रीन टी। ये ऑक्सीडेटिव तनाव (सेल्युलर डैमेज) से बचाते हैं। प्रोबायोटिक्स: दही, छाछ, किमची, अचार (प्राकृतिक)। आंत का स्वास्थ्य सीधे मस्तिष्क से जुड़ा है (गट-ब्रेन एक्सिस)। हर्बल चाय: कैमोमाइल, तुलसी, लैवेंडर, अश्वगंधा (वैज्ञानिक रूप से तनाव कम करने वाली जड़ी-बूटी)। क्या न खाएं (What to Avoid) – तनाव बढ़ाने वाले आहार रिफाइंड शुगर और मीठा: मिठाई, कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस, केक, बिस्कुट। ये ब्लड शुगर को तेज़ी से बढ़ाते और गिराते हैं, जिससे चिड़चिड़ापन और थकान बढ़ती है। कैफीन: चाय, कॉफी, एनर्जी ड्रिंक्स। अधिक मात्रा में कोर्टिसोल बढ़ाता है और नींद खराब करता है। दिन में 1-2 कप से ज़्यादा न लें। प्रोसेस्ड फूड: पैकेज्ड नमकीन, फ्रोजन फूड, फास्ट फूड (पिज्जा, बर्गर, मोमोज)। इनमें ट्रांस फैट और सोडियम अधिक होता है, जो सूजन बढ़ाता है। शराब और सिगरेट: ये अस्थायी राहत देते हैं लेकिन लंबे समय में तनाव को बढ़ाते हैं और नींद की गुणवत्ता खराब करते हैं। अत्यधिक नमक: अचार, पापड़, चिप्स। हाई सोडियम ब्लड प्रेशर बढ़ाता है, जो तनाव का शारीरिक लक्षण है। नमूना दैनिक आहार (Sample Daily Diet) सुबह (7-8 AM): 1 गिलास गुनगुना पानी + नींबू + शहद। 15 मिनट बाद 1 कटोरी ओट्स या दलिया (दूध के साथ) + मुट्ठी भर बादाम और अखरोट। मिड-मॉर्निंग (10 AM): 1 केला या 1 सेब + 1 कप ग्रीन टी या तुलसी की चाय। दोपहर (12:30-1 PM): 2 रोटी (बाजरा या ज्वार) + 1 कटोरी दाल (मूंग या मसूर) + हरी सब्जी (पालक या मेथी) + 1 कटोरी दही। शाम (4 PM): 1 मुट्ठी भुने चने या मखाना + 1 कप कैमोमाइल चाय। रात (7-8 PM): 1 कटोरी खिचड़ी (चावल+मूंग दाल) + घी + 1 कटोरी सब्जी (लौकी या तोरी) + 1 गिलास गर्म दूध (हल्दी के साथ) सोने से पहले। 4. चिकित्सा प्रबंधन (Medical Management) डॉक्टर कब देखें? यदि तनाव 2-3 हफ्तों से अधिक रह रहा है, दैनिक जीवन में बाधा डाल रहा है (काम, रिश्ते), या आत्महत्या के विचार आ रहे हैं, तो तुरंत मनोचिकित्सक (Psychiatrist) या मनोवैज्ञानिक (Psychologist) से मिलें। आमतौर पर दी जाने वाली दवाइयां (Commonly Prescribed Medications) ध्यान दें: यह केवल शैक्षिक जानकारी है। कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह के बिना न लें। SSRIs (Selective Serotonin Reuptake Inhibitors): जैसे एस्सिटालोप्राम (Escitalopram), सेरट्रालिन (Sertraline), फ्लुओक्सेटीन (Fluoxetine)। ये मस्तिष्क में सेरोटोनिन (खुशी का न्यूरोट्रांसमीटर) का स्तर बढ़ाते हैं। इन्हें काम करने में 2-4 हफ्ते लगते हैं और ये चिंता और अवसाद दोनों में मदद करते हैं। SNRIs (Serotonin-Norepinephrine Reuptake Inhibitors): जैसे वेनलाफैक्सीन (Venlafaxine), डुलोक्सेटीन (Duloxetine)। ये सेरोटोनिन और नॉरएपिनेफ्रिन दोनों को बढ़ाते हैं, जो ऊर्जा और ध्यान में सुधार करते हैं। बेंजोडायजेपाइन (Benzodiazepines): जैसे लोराज़ेपाम (Lorazepam), अल्प्राज़ोलम (Alprazolam)। ये तुरंत राहत देते हैं (15-30 मिनट में) लेकिन नशे की लत लग सकती है, इसलिए केवल थोड़े समय (2-4 हफ्ते) के लिए दी जाती हैं। बीटा-ब्लॉकर्स (Beta-Blockers): जैसे प्रोप्रानोलोल (Propranolol)। ये तनाव के शारीरिक लक्षणों (तेज़ दिल, कांपना) को कम करते हैं, खासकर परफॉरमेंस एंग्ज़ाइटी (जैसे स्टेज पर बोलना) में। आयुर्वेदिक/हर्बल सप्लीमेंट्स: अश्वगंधा (Withania somnifera), ब्राह्मी (Bacopa monnieri), और शंखपुष्पी को कुछ अध्ययनों में तनाव कम करने में प्रभावी पाया गया है। लेकिन डॉक्टर से सलाह लें, क्योंकि ये अन्य दवाओं के साथ इंटरैक्ट कर सकते हैं। थेरेपी (Therapy) – दवाओं से भी ज़रूरी CBT (Cognitive Behavioral Therapy): यह सबसे प्रभावी थेरेपी है। इसमें नकारात्मक विचार पैटर्न (जैसे "मैं हमेशा असफल हूं") को पहचानकर उन्हें बदलना सिखाया जाता है। माइंडफुलनेस-बेस्ड स्ट्रेस रिडक्शन (MBSR): ध्यान और योग के माध्यम से वर्तमान क्षण में जीना सिखाता है। रिलैक्सेशन तकनीक: प्रोग्रेसिव मसल रिलैक्सेशन (PMR) – मांसपेशियों को कसना और छोड़ना। 5. सिद्ध घरेलू उपाय और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) घरेलू उपाय (Home Remedies) गहरी सांस लेना (Deep Breathing): 4-7-8 तकनीक: 4 सेकंड सांस लें, 7 सेकंड रोकें, 8 सेकंड छोड़ें। दिन में 3-4 बार करें। यह वेगस नर्व को सक्रिय करता है और पैरासिम्पेथेटिक सिस्टम (आराम) को चालू करता है। हल्दी वाला दूध (Golden Milk): रात को 1 गिलास गर्म दूध में 1/2 चम्मच हल्दी, 1 चुटकी काली मिर्च, और 1 चम्मच घी मिलाकर पिएं। हल्दी में करक्यूमिन होता है जो सूजन कम करता है और नींद में मदद करता है। तुलसी के पत्ते: 5-6 ताजे तुलसी के पत्ते रोज सुबह चबाएं या चाय में डालें। तुलसी एक एडाप्टोजेन है जो कोर्टिसोल को संतुलित करती है। अश्वगंधा पाउडर: 1/2 चम्मच अश्वगंधा गर्म पानी या दूध के साथ रात को लें। यह तनाव हार्मोन को कम करता है और ऊर्जा बढ़ाता है। गुनगुने पानी से स्नान: नहाने के पानी में एप्सम सॉल्ट (मैग्नीशियम सल्फेट) डालें। यह मांसपेशियों को आराम देता है और तनाव कम करता है। जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes) नियमित व्यायाम: दिन में कम से कम 30 मिनट तेज़ चलना (Brisk Walking), योग, या साइकिलिंग। व्यायाम एंडोर्फिन (प्राकृतिक दर्द निवारक) रिलीज़ करता है। शुरुआत में 10 मिनट से शुरू करें। नींद की दिनचर्या: हर दिन एक ही समय पर सोएं और जागें। सोने से 1 घंटे पहले फोन/लैपटॉप बंद करें। कमरे को अंधेरा और ठंडा रखें। स्क्रीन टाइम कम करें: दिन में 1-2 घंटे से अधिक सोशल मीडिया न देखें। नकारात्मक खबरों से दूर रहें। समय प्रबंधन (Time Management): "टू-डू लिस्ट" बनाएं और काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटें। पोमोडोरो तकनीक (25 मिनट काम, 5 मिनट आराम) आज़माएं। सामाजिक जुड़ाव: परिवार और दोस्तों से बात करें। अकेलापन तनाव को बढ़ाता है। हर हफ्ते किसी से मिलने का समय निकालें। शौक अपनाएं: बागवानी, पेंटिंग, संगीत, किताबें पढ़ना – कोई भी गतिविधि जो आपको आनंद दे। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Mental Health & Daily Life) मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव चिंता विकार (Anxiety Disorders): लगातार बेचैनी, पैनिक अटैक, और अत्यधिक डर। तनाव से एमिग्डाला (मस्तिष्क का डर केंद्र) अति-सक्रिय हो जाता है। अवसाद (Depression): उदासी, रुचि की कमी, थकान, और निराशा। क्रोनिक तनाव से सेरोटोनिन और डोपामाइन का स्तर गिर जाता है। बर्नआउट (Burnout): काम या देखभाल से भावनात्मक थकावट, जहां व्यक्ति खुद को पूरी तरह से खाली महसूस करता है। PTSD (Post-Traumatic Stress Disorder): किसी दर्दनाक घटना (दुर्घटना, हिंसा) के बाद तनाव का लंबे समय तक बने रहना। दैनिक जीवन पर प्रभाव काम पर: एकाग्रता की कमी, गलतियां बढ़ना, प्रोडक्टिविटी गिरना, सहकर्मियों से झगड़ा, नौकरी छूटने का डर। रिश्तों में: पार्टनर या बच्चों से दूरी, बहस, अकेलापन, अविश्वास। तनावग्रस्त व्यक्ति अक्सर दूसरों पर चिल्लाता या उन्हें नज़रअंदाज़ करता है। शारीरिक स्वास्थ्य पर: हृदय रोग, डायबिटीज़, मोटापा, पाचन विकार (IBS), कमज़ोर इम्यूनिटी, और समय से पहले बुढ़ापा। वित्तीय जीवन: तनाव में लोग अक्सर आवेग में खर्च करते हैं (रिटेल थेरेपी) या बिल भूल जाते हैं, जिससे कर्ज बढ़ता है। 7. 10 विस्तृत FAQ (Frequently Asked Questions) 1. तनाव और चिंता में क्या अंतर है? तनाव किसी बाहरी कारण (जैसे काम का दबाव, परीक्षा) की प्रतिक्रिया है, जो आमतौर पर अस्थायी होता है। चिंता (Anxiety) बिना किसी स्पष्ट कारण के भी हो सकती है और लंबे समय तक बनी रहती है। तनाव कम होने पर चिंता भी कम हो जाती है, लेकिन चिंता विकार में यह अपने आप बनी रहती है। 2. क्या तनाव से वजन बढ़ सकता है? हाँ, बिल्कुल। क्रोनिक तनाव से कोर्टिसोल बढ़ता है, जो पेट की चर्बी (विसरल फैट) बढ़ाता है। साथ ही, तनाव में लोग अक्सर ज़्यादा मीठा और तला-भुना खाते हैं (इमोशनल ईटिंग)। इससे मोटापा और डायबिटीज़ का खतरा बढ़ता है। 3. क्या तनाव से बाल झड़ सकते हैं? हाँ। तनाव से टेलोजेन एफ्लुवियम (Telogen Effluvium) नामक स्थिति हो सकती है, जहां बालों के रोम (फॉलिकल्स) समय से पहले आराम की अवस्था में चले जाते हैं, जिससे 2-3 महीने बाद अचानक बाल झड़ने लगते हैं। यह आमतौर पर अस्थायी होता है और तनाव कम होने पर ठीक हो जाता है। 4. क्या तनाव से पेट में गैस और एसिडिटी हो सकती है? हाँ, तनाव सीधे पाचन तंत्र को प्रभावित करता है। यह गैस्ट्रिक एसिड के उत्पादन को बढ़ाता है, आंतों की गति को बदलता है (दस्त या कब्ज), और गट बैक्टीरिया के संतुलन को बिगाड़ता है। इसे "स्ट्रेस-इंड्यूस्ड IBS" (Irritable Bowel Syndrome) कहते हैं। 5. क्या बच्चों और किशोरों में तनाव होता है? बिल्कुल। बच्चों में तनाव के लक्षण अलग हो सकते हैं: चिड़चिड़ापन, सिरदर्द, पेट दर्द, स्कूल जाने से मना करना, या पढ़ाई में गिरावट। किशोरों में सोशल मीडिया, परीक्षा का दबाव, और पहचान संबंधी चिंताएं तनाव का कारण बनती हैं। 6. क्या योग और ध्यान तनाव में मदद करते हैं? हाँ, वैज्ञानिक अध्ययनों ने साबित किया है कि योग और ध्यान (मेडिटेशन) कोर्टिसोल को कम करते हैं, हृदय गति को धीमा करते हैं, और मस्तिष्क के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (निर्णय लेने वाला हिस्सा) को मजबूत करते हैं। रोज 10-15 मिनट का ध्यान भी फायदेमंद है। 7. क्या तनाव से दिल की बीमारी हो सकती है? हाँ, क्रोनिक तनाव हृदय रोग (हार्ट अटैक, स्ट्रोक) के प्रमुख जोखिम कार

Cholesterol 245, Triglycerides 380! Kya ab bach paunga? Koi remedy batao yaar!

Yaar, aaj reports aaye. Cholesterol 245 hai, triglycerides toh 380 ke upar. Dimaag kaam karna band kar diya. Pichhle mahine doctor ne kaha tha control karo warna serious ho sakta hai. Main soch raha tha ki thoda walk karta hoon, daru bhi reduce kar di hai, par shayad kuch fark nahi pada. Pata nahi kya karna hai. Ghar wale tension mein hain. Main government office mein baithta hoon, poori din kursi pe, exercise ka time nahi milta. Aur sham ko jab ghar aata hoon, toh bhook lagti hai toh non-veg ya oily cheez hi yaad aati hai. Aaj toh sirf daal-roti khaayi, par lagta hai yeh kaafi nahi hai. Kya koi remedy hai jo aapne use kiya ho? Jaise nimbu pani subah piya ya koi aasan exercise? Main seriously soch raha hoon ki daru aur non-veg bilkul band kar doon. Lekin itna mushkil lagta hai. Kisi ne fatty liver se bhi recover kiya ho toh bataye. Thanks.

68 ke umar mein pota ke saath khelna hai! Koi gharelu nuskha ya aasan exercise batao

Namaste doston. Aaj mera pota, 10 saal ka chhota hai, usne mujhe yeh site bataya aur sikhaya ki aap sab se baat kaise karein. Bahut ajeeb laga pehle, par ab thoda maza aa raha hai. Maine socha, aaj subah uth ke thoda chalne ki koshish ki, bas ghar ke bahar 200 kadam hi chal paaya, saans phool gayi. Pota bolta hai, "Dada, aap doctor se pucho, shayad kuch naya dawa ho." Lekin doctor to pehle hi bol chuke hain, zyada mehnat nahi karna. Ab lagta hai, bypass ke baad bhi dil kamzoor ho raha hai. Koi aapas mein koi gharelu nuskha bataye? Jaise adrak aur shahad ka pani peena, kya faida hoga? Ya phir koi aasan exercise ho to batao. Main 68 ka hoon, lekin ab bhi thoda active rehna chahta hoon. Pota ke saath khelna hai, usko park le jaana hai. Aap sab ka experience sunkar achha lagega. Dhanyavaad.

Browse SaathiMed's Medicines A-Z

Search our extensive medical database alphabetically to find uses, price, composition, and side effects.

A B C D E F G H I J K L M N O P Q R S T U V W X Y Z
Back to Medicines Directory
SaathiMed App
SaathiMed App Consult doctors & order medicines faster
Install