Rinex Kid Tablet - Uses, Price and Side Effects

Rinex Kid Tablet: Uses in Hindi (Fayde), Price, Side Effects & Substitutes

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🏭 Hamax Pharmaceuticals 📦 strip of 10 tablets 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 16, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is Rinex Kid Tablet used for? (Quick Answer)

🩺 Primary Use:
Rinex Kid Tablet (manufactured by Hamax Pharmaceuticals) is a highly effective medicine primarily used for the treatment of . It helps in relieving symptoms and improving your overall health. Find the complete list of Rinex Kid Tablet uses in Hindi, alternatives, price in India, and dosage on SaathiMed below.
🧪 Active Ingredient & Working:
It contains Rifampicin (100mg) + Isoniazid (100mg) which works by treating the underlying condition effectively.
⚠️ Safety Warning:
Always consult your doctor before using this medicine, especially to check if it is safe during pregnancy or if you suffer from liver or kidney issues.

🇮🇳 Rinex Kid Tablet के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

Rinex Kid Tablet का उपयोग मुख्य रूप से और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Rifampicin (100mg) + Isoniazid (100mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? The first generic medicine was introduced in India in 1970 after the Patents Act was amended.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Rifampicin (100mg) + Isoniazid (100mg)
Manufacturer / BrandHamax Pharmaceuticals
Packaging / Formstrip of 10 tablets (Allopathy)
Therapeutic Class
Action Class
Prescription Required✓ Yes (Schedule H Drug)
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Onset of Action:
30 to 60 minutes
Duration:
6 to 8 hours
Habit Forming:
No (Non-addictive)
Food:
Take after meal

💊 Rinex Kid Tablet Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

💡 How to Take Rinex Kid Tablet (Dosage & Khane ka tarika)

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💡 Expert Tips for Best Results

  • Follow the prescription: Always use Rinex Kid Tablet exactly as prescribed by your healthcare provider. Do not alter the dosage yourself.
  • Check Expiry: Never consume expired medicines. Always double-check the manufacturing and expiry date on the packaging before use.
  • Storage: Store the medicine in a cool, dry place away from direct sunlight and out of reach of children.
  • Report Side Effects: If you experience severe allergic reactions, swelling, or breathing issues after taking Rinex Kid Tablet, seek emergency medical help immediately.
  • Don't self-medicate: Do not share this medicine with others even if their symptoms seem similar to yours.

⚠️ Rinex Kid Tablet Side Effects (Nuksan) & Precautions

Common and serious side effects may include:

  • Consult your doctor for complete side effect profile.

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🛑 Myths vs. Facts about Rinex Kid Tablet

  • Myth: Generic substitutes of Rinex Kid Tablet are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Rifampicin (100mg) + Isoniazid (100mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of Rinex Kid Tablet can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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Bhai, maths ka sawaal bana trigger! Job chhote 4 mahine, ego ya depression?

Bhai log, aaj kuch zyada hi heavy feel ho raha hai. Bacche school se aaye toh homework mein help maang rahe the. Maths ka sawaal tha, simple addition. Main dekh raha tha par dimaag mein kuch nahi aa raha tha. Aankhon ke saamne andhera sa chha gaya. Usse kaha "baad mein beta", aur room mein aake baith gaya. Pata nahi kyun, ek chhoti si baat bhi trigger kar deti hai. Job chhote hue 4 mahine ho gaye. Bivi ka toh mann hai ki chhoti si job bhi kar lo, par mard hoon yaar. Ego ke saath compromise karna mushkil hai. Par aaj laga shayad ego hi mujhe maar rahi hai. Koi hai jo same situation se guzra ho? Kaise handle karte ho ye sab? Koi chhota sa tip batao jo tumne use kiya. Bahar jaake walk karta hoon toh thoda acha lagta hai, par wapas aate hi wahi soch. Kya karein?

Complete Guide to Heart Healthy Diet - 01-06-2026

दिल को स्वस्थ रखने वाला आहार (Heart Healthy Diet) – संपूर्ण मार्गदर्शिका नमस्ते! आज हम बात करेंगे हार्ट हेल्दी डाइट के बारे में। यह सिर्फ एक डाइट प्लान नहीं है, बल्कि एक जीवनशैली है जो आपके दिल को मजबूत और बीमारियों से दूर रखती है। भारत में दिल की बीमारियाँ (Heart Diseases) तेजी से बढ़ रही हैं, खासकर युवाओं में। इस गाइड में हम आपको हर छोटी-बड़ी बात समझाएंगे – बीमारी कैसे होती है, लक्षण क्या हैं, क्या खाएं और क्या न खाएं, दवाइयाँ, घरेलू उपाय, और मानसिक स्वास्थ्य पर असर। 1. गहरा परिचय और रोग तंत्र (Deep Introduction & Disease Mechanism) दिल की बीमारी कैसे होती है? दिल हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण पंप है। यह हर मिनट 5-6 लीटर खून पंप करता है। जब दिल की धमनियाँ (Coronary Arteries) संकरी या ब्लॉक हो जाती हैं, तो हार्ट अटैक, एनजाइना, या दिल की विफलता (Heart Failure) हो सकती है। इसका मुख्य कारण है एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) – धमनियों में कोलेस्ट्रॉल, फैट, कैल्शियम और अन्य पदार्थों का जमना जिसे प्लाक (Plaque) कहते हैं। कैसे होता है यह तंत्र? खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) धमनियों की दीवारों में घुस जाता है। सूजन (Inflammation) शुरू होती है – शरीर की इम्यून कोशिकाएँ (जैसे मैक्रोफेज) उस फैट को खाने लगती हैं, जिससे फोम कोशिकाएँ बनती हैं। यह प्लाक धीरे-धीरे सख्त हो जाता है (कैल्सीफिकेशन)। अगर प्लाक फट जाए, तो खून का थक्का (Clot) बनता है, जो धमनी को पूरी तरह ब्लॉक कर सकता है – यही हार्ट अटैक है। जोखिम कारक (Risk Factors) अनियंत्रित आहार – तला-भुना, मीठा, प्रोसेस्ड फूड मोटापा – खासकर पेट की चर्बी डायबिटीज – हाई ब्लड शुगर धमनियों को नुकसान पहुँचाता है हाई ब्लड प्रेशर – धमनियों पर दबाव बढ़ाता है धूम्रपान और शराब तनाव और नींद की कमी 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Common & Rare Symptoms) सामान्य लक्षण (Common Symptoms) सीने में दर्द या भारीपन (Chest Pain/Angina) – दबाव, जलन या निचोड़ने जैसा महसूस होना। यह बाएँ कंधे, गर्दन, जबड़े या पीठ तक फैल सकता है। सांस फूलना (Shortness of Breath) – चलने या सीढ़ियाँ चढ़ने में तकलीफ। थकान और कमजोरी – बिना मेहनत के थक जाना। धड़कन तेज होना या अनियमित (Palpitations) – दिल की धड़कन का तेज या रुक-रुक कर होना। पैरों या टखनों में सूजन (Edema) – दिल कमजोर होने पर तरल जमा होना। दुर्लभ या कम ज्ञात लक्षण (Rare Symptoms) पेट में दर्द या अपच (Indigestion-like pain) – खासकर महिलाओं में हार्ट अटैक का लक्षण हो सकता है। जबड़े या दाँत में दर्द – बिना किसी दाँत की समस्या के। मतली, उल्टी या चक्कर आना – खासकर डायबिटीज के मरीजों में (साइलेंट हार्ट अटैक)। बाएँ हाथ या कंधे में सुन्नता/झुनझुनी – नसों में ब्लॉकेज का संकेत। नींद में अचानक पसीना आना (Night Sweats) – हृदय पर दबाव का संकेत। लगातार खांसी (Cough) – खासकर सफेद या गुलाबी बलगम के साथ (दिल की विफलता में)। नोट: महिलाओं में लक्षण अक्सर हल्के होते हैं – जैसे थकान, अपच, या पीठ दर्द। इसे नज़रअंदाज़ न करें। 3. विस्तृत आहार योजना (Detailed Diet Plan – Exactly Kya Khaye & Kya Na Khaye) क्या खाएं (Heart-Healthy Foods) साबुत अनाज (Whole Grains) – ओट्स, ब्राउन राइस, ज्वार, बाजरा, रागी (मोटा अनाज)। फाइबर कोलेस्ट्रॉल कम करता है। फल और सब्जियाँ – रोज 5-6 सर्विंग। खासकर हरी पत्तेदार सब्जियाँ (पालक, मेथी), ब्रोकली, गाजर, टमाटर, बेरीज़, सेब, अनार, केला (पोटैशियम के लिए)। हेल्दी फैट्स – जैतून का तेल, सरसों का तेल, अलसी के बीज, चिया सीड्स, अखरोट, बादाम, मूँगफली। ओमेगा-3 फैटी एसिड दिल के लिए वरदान है। लीन प्रोटीन – दालें (मूंग, अरहर, चना), सोया, पनीर (कम फैट), चिकन (बिना त्वचा), मछली (सैल्मन, मैकेरल – ओमेगा-3 भरपूर)। डेयरी – कम फैट वाला दूध, दही, छाछ। मसाले – हल्दी (करक्यूमिन), अदरक, लहसुन, दालचीनी, जीरा – सूजन कम करते हैं। पेय पदार्थ – ग्रीन टी, नारियल पानी, नींबू पानी (बिना नमक), हर्बल चाय। क्या न खाएं (Foods to Avoid) ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट – बाजार के समोसे, पकौड़े, बिस्कुट, केक, पेस्ट्री, मार्जरीन, वनस्पति घी। प्रोसेस्ड फूड – पैकेज्ड नमकीन, चिप्स, मैगी, फ्रोज़न पिज्जा। रेड मीट – मटन, पोर्क, बीफ – इनमें सैचुरेटेड फैट ज्यादा होता है। अत्यधिक नमक – अचार, पापड़, सोया सॉस, ब्रेड, चीज़ – सोडियम ब्लड प्रेशर बढ़ाता है। चीनी और मीठे पेय – कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस, मिठाई (गुलाब जामुन, जलेबी), आइसक्रीम। शराब और धूम्रपान – दिल की धमनियों को सीधा नुकसान। भारतीय डाइट चार्ट (Sample Indian Diet Plan) समयक्या खाएं सुबह (7:00)गुनगुना पानी + 1 चम्मच अलसी पाउडर + 4-5 भीगे बादाम नाश्ता (8:30)ओट्स/दलिया (दूध में) + 1 सेब + 1 मुट्ठी अखरोट मिड-मॉर्निंग (11:00)ग्रीन टी + 2-3 मूँगफली/मखाना दोपहर का खाना (1:00)1 रोटी (ज्वार/बाजरा) + 1 कटोरी दाल + 1 कटोरी हरी सब्जी + सलाद (खीरा, टमाटर, गाजर) + 1 कटोरी दही शाम (4:00)नारियल पानी या छाछ + 1 फल (पपीता/अनार) रात का खाना (7:30)1 रोटी + 1 कटोरी पालक पनीर/मछली करी + सलाद सोने से पहले (10:00)1 गिलास गर्म दूध (हल्दी डालकर) 4. चिकित्सा प्रबंधन (Medical Management – दवाइयाँ और उनका काम) डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न लें। यहाँ केवल शैक्षिक जानकारी दी गई है। सामान्य दवाइयाँ और उनका तंत्र स्टैटिन (Statins) – जैसे एटोरवास्टेटिन, रोसुवास्टेटिन – ये लीवर में कोलेस्ट्रॉल बनने को रोकते हैं, LDL कम करते हैं और प्लाक को स्थिर करते हैं। बीटा-ब्लॉकर्स (Beta-blockers) – जैसे मेटोप्रोलोल, एटेनोलोल – दिल की धड़कन धीमी करते हैं, ब्लड प्रेशर कम करते हैं, दिल पर काम का बोझ कम करते हैं। एसीई इनहिबिटर्स (ACE Inhibitors) – जैसे रामिप्रिल, लिसिनोप्रिल – रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करते हैं, ब्लड प्रेशर कम करते हैं, दिल की विफलता में मददगार। एंटीप्लेटलेट/एंटीकोआगुलेंट (Aspirin, Clopidogrel) – खून को पतला करते हैं, थक्का बनने से रोकते हैं। डाइयूरेटिक्स (Diuretics) – जैसे फ्यूरोसेमाइड – शरीर से अतिरिक्त पानी और नमक निकालते हैं, सूजन और सांस फूलना कम करते हैं। नाइट्रेट्स (Nitrates) – जैसे नाइट्रोग्लिसरीन – सीने में दर्द (एनजाइना) के लिए तुरंत राहत देते हैं, धमनियों को फैलाते हैं। महत्वपूर्ण: दवाइयों के साइड इफेक्ट हो सकते हैं (जैसे स्टैटिन से मांसपेशियों में दर्द)। डॉक्टर से नियमित जाँच कराएँ। 5. सिद्ध घरेलू उपाय और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) घरेलू उपाय (Home Remedies) लहसुन (Garlic) – रोज सुबह खाली पेट 1 कली कच्चा लहसुन चबाएँ। यह कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर कम करता है। अदरक और हल्दी – गर्म पानी में अदरक और हल्दी डालकर चाय बनाएँ। सूजन कम करता है। अलसी के बीज (Flaxseeds) – पीसकर दही या दलिया में मिलाएँ। ओमेगा-3 से भरपूर। मेथी दाना (Fenugreek Seeds) – रात भर भिगोकर सुबह पानी पिएँ। शुगर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करता है। अनार का जूस – एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर, धमनियों को लचीला रखता है। त्रिफला (Triphala) – पाचन सुधारता है और विषाक्त पदार्थ निकालता है। जीवनशैली में बदलाव रोज 30-45 मिनट व्यायाम – तेज चलना, साइकिलिंग, स्विमिंग, योग (प्राणायाम – अनुलोम-विलोम, भ्रामरी)। वजन नियंत्रित रखें – BMI 18.5-24.9 के बीच। पेट की चर्बी (Waist Circumference) पुरुषों में 90 सेमी, महिलाओं में 80 सेमी से कम। नींद पूरी लें – 7-8 घंटे। नींद की कमी से तनाव हार्मोन (कोर्टिसोल) बढ़ता है। तनाव प्रबंधन – ध्यान (Meditation), संगीत, प्रकृति में समय बिताएँ। धूम्रपान और शराब छोड़ें – ये दिल के सबसे बड़े दुश्मन हैं। नियमित जाँच – ब्लड प्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्रॉल, ईसीजी – साल में एक बार जरूर कराएँ। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Mental Health & Daily Life) मानसिक स्वास्थ्य पर असर चिंता (Anxiety) – हार्ट अटैक या दर्द का डर हमेशा बना रहता है। मरीज छोटी-छोटी बातों से घबरा जाते हैं। अवसाद (Depression) – दिल की बीमारी के बाद 20-30% मरीजों में डिप्रेशन होता है। यह इलाज को मुश्किल बनाता है। सामाजिक अलगाव – खाने-पीने की पाबंदियों के कारण पार्टियों या शादी-ब्याह में जाने से कतराना। सेक्सुअल हेल्थ पर असर – दवाइयों (बीटा-ब्लॉकर्स) से इरेक्टाइल डिसफंक्शन हो सकता है, जिससे रिश्तों में तनाव आता है। दैनिक जीवन में चुनौतियाँ खाने की आदतें बदलना – घर का बना हेल्दी खाना ही खाना पड़ता है, बाहर का खाना वर्जित। थकान और कमजोरी – दिल कमजोर होने पर रोजमर्रा के काम (जैसे बाजार जाना) भी मुश्किल हो जाते हैं। आर्थिक बोझ – दवाइयाँ, जाँच, और अच्छे खाने का खर्च बढ़ जाता है। परिवार का सहयोग – परिवार वालों को भी डाइट और जीवनशैली में बदलाव करना पड़ता है, जो हमेशा आसान नहीं होता। सुझाव: मानसिक स्वास्थ्य के लिए काउंसलिंग, सपोर्ट ग्रुप, और परिवार से बातचीत बहुत जरूरी है। योग और ध्यान से मन शांत रहता है। 7. 10 विस्तृत FAQs (Long-Tail Search Queries) 1. क्या भारतीय मसाले दिल के लिए फायदेमंद हैं? हाँ, हल्दी (करक्यूमिन), अदरक, लहसुन, दालचीनी, और जीरा सूजन कम करते हैं, कोलेस्ट्रॉल घटाते हैं, और ब्लड प्रेशर नियंत्रित करते हैं। रोजाना खाने में शामिल करें। 2. क्या नारियल तेल दिल के लिए अच्छा है? नारियल तेल में सैचुरेटेड फैट होता है, लेकिन यह मीडियम-चेन ट्राइग्लिसराइड्स (MCTs) से भरपूर है। सीमित मात्रा में (1-2 चम्मच रोज) इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन जैतून या सरसों का तेल बेहतर है। 3. क्या हार्ट पेशेंट के लिए केला खाना सुरक्षित है? हाँ, केला पोटैशियम से भरपूर है, जो ब्लड प्रेशर कम करता है। लेकिन अगर किडनी की समस्या है या पोटैशियम बढ़ा हुआ है, तो डॉक्टर से पूछें। 4. क्या दिल की बीमारी में चावल खा सकते हैं? सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस, ज्वार या बाजरा खाएँ। सफेद चावल में फाइबर कम और ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होता है, जो शुगर और ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ा सकता है। 5. क्या हार्ट अटैक के बाद वजन कम करना जरूरी है? हाँ, मोटापा दिल पर दबाव डालता है। 5-10% वजन घटाने से ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और शुगर में सुधार होता है। हेल्दी डाइट और एक्सरसाइज से धीरे-धीरे वजन घटाएँ। 6. क्या शाकाहारी लोगों को दिल की बीमारी कम होती है? शाकाहारी डाइट में फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और हेल्दी फैट ज्यादा होते हैं, जो दिल के लिए फायदेमंद हैं। लेकिन अगर शाकाहारी खाने में तला-भुना और मीठा ज्यादा हो, तो फायदा नहीं होगा। 7. क्या हार्ट पेशेंट के लिए दही खाना सही है? हाँ, कम फैट वाला दही प्रोबायोटिक्स और कैल्शियम देता है। यह पाचन सुधारता है और सूजन कम करता है। रोज 1 कटोरी दही लें। 8. क्या हार्ट अटैक के बाद सेक्स करना सुरक्षित है? आमतौर पर 4-6 हफ्ते बाद डॉक्टर की अनुमति से सेक्स कर सकते हैं। शुरुआत में हल्की शारीरिक गतिविधि से शुरू करें। अगर सीने में दर्द या सांस फूले, तो तुरंत रुकें और डॉक्टर से मिलें। 9. क्या हार्ट पेशेंट को रोजाना एस्पिरिन लेनी चाहिए? डॉक्टर की सलाह के बिना एस्पिरिन न लें। यह खून पतला करती है, लेकिन पेट में अल्सर या ब्लीडिंग का खतरा बढ़ा सकती है। डॉक्टर ही तय करेंगे कि आपको लो-डोज़ एस्पिरिन (75-100 mg) की जरूरत है या नहीं। 10. क्या तनाव सीधे दिल की बीमारी का कारण बनता है? हाँ, लगातार तनाव से कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन बढ़ता है, जो ब्लड प्रेशर, हृदय गति और सूजन को बढ़ाता है। इससे धमनियों में प्लाक जमने की गति तेज हो जाती है। ध्यान, योग और पर्याप्त नींद से तनाव कम करें। महत्वपूर्ण चिकित्सा अस्वीकरण (Medical Disclaimer): यह लेख केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी चिकित्सकीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी आहार, दवा या जीवनशैली में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी योग्य स्वास्थ्य पेशेवर से परामर्श करें। दिल की बीमारी एक गंभीर स्थिति है, और स्व-चिकित्सा खतरनाक हो सकती है। हमेशा विशेषज्ञ की राय लें। अपने दिल का ख्याल रखें, क्योंकि यही आपकी जिंदगी की धड़कन है। ❤️

Sar dard aur BP dono ka dard! Kachori ne khel khela? 😅

Yaar aaj subah se sar mein dard ho raha hai. Pata nahi kyun, bas aise hi achanak. Socha chai peeke thoda aaram karein, par kuch fark nahi pada. Dukaan pe aaya to tension aur badh gaya - ek order galat deliver ho gaya, customer phone pe gaali de raha tha. Fir yaad aaya doctor ne kaha tha ki BP ka dhyan rakhna hai, tension se high BP hota hai aur phir sar dard shuru ho jata hai. Maine kal raat ko kachori bhi kha li thi thodi, shaam ko bazaar mein bhook lagi thi. Patni bhi bolti hai "khaana mat oil ka", par muh nahee maanta. Aaj subah BP check kiya to 145/95 dikha raha tha, pichle hafte 130 tha. Lagta hai wahi kachori ka asar hai. Bhai log, koi gharelu nuskha batao jo sar dard aur BP dono mein kaam kare. Doctor ki dawai toh leta hoon, par kabhi kabhi lagta hai ki bas thoda aaram aur kuch natural chahiye. Subah subah halka walk karna chahiye shayad, par time nahi milta. Kya karein, family ki zimmedari hai. 🙏

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