Toslin Expectorant allopathy (Diphenhydramine (15mg) + Sodium Citrate (50mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India
Toslin Expectorant allopathy (Diphenhydramine (15mg) + Sodium Citrate (50mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India manufactured by TOSC International Pvt Ltd. Contains Diphenhydramine (15mg) + Sodium Citrate (50mg).

Toslin Expectorant - Uses, Price, Side Effects & Substitutes

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🏭 TOSC International Pvt Ltd 📦 bottle of 50 ml Expectorant 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 22, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is Toslin Expectorant used for?

Toslin Expectorant (Diphenhydramine (15mg) + Sodium Citrate (50mg)) is used to treat . It contains Diphenhydramine (15mg) + Sodium Citrate (50mg), which works by treating the condition effectively. Always consult your doctor before use. Take as prescribed.

  • Generic Name: Diphenhydramine (15mg) + Sodium Citrate (50mg)
  • Manufacturer: TOSC International Pvt Ltd
  • Medicine Form: Allopathy
  • Pregnancy Category: Consult doctor

🇮🇳 Toslin Expectorant के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

Toslin Expectorant का उपयोग मुख्य रूप से और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Diphenhydramine (15mg) + Sodium Citrate (50mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

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📋 Drug Information

Generic Name(s)Diphenhydramine (15mg) + Sodium Citrate (50mg)
Brand NameToslin Expectorant
ManufacturerTOSC International Pvt Ltd
Packaging / Formbottle of 50 ml Expectorant (Allopathy)
Therapeutic Class
Action ClassInformation pending
Route of AdministrationOral
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Shelf LifeAs per manufacturer

💡 How and when to take Toslin Expectorant?

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💊 Toslin Expectorant Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

⚠️ What are the side effects of Toslin Expectorant?

  • Consult your doctor for complete side effect profile.

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🔬 Drug Interactions

🛡️ Safety & Warnings

🛑 Myths vs. Facts about Toslin Expectorant

  • Myth: Generic substitutes of Toslin Expectorant are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Diphenhydramine (15mg) + Sodium Citrate (50mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of Toslin Expectorant can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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Gluten dairy band karne se thyroid antibodies kam hote hain ya sirf hype hai? 🥲

Yaar seriously koi batao... gluten free aur dairy free diet se thyroid patients ko actually fayda hota hai ya yeh sab trend hai? Mera endocrinologist toh kehta hai “just eat balanced diet” but aaj kal har jagah dekh rahi hu ki gluten-dairy cutoff se symptoms improve hote hain. Maine do hafte try kiya - no roti, no doodh, no paneer. Thoda better feel hui but honestly itna difficult hai yaar! Ghar mein alag banana padega khana. Aur mere husband ko toh roti chahiye hi. Upar se ghar wale kehte hain “bas stress ka bahana hai”. Hashimoto’s hai toh body ache already rehti hai. Gluten-dairy band karne ke baad bhi pain kam nahi hua fully, lekin haan bloating definitely kam hua. Thoda light feel kiya. Koi hai jo long term follow kar raha ho? Tips chahiye. Specially Indian diet mein kya substitute use karo? Aur yeh batao ki kya thyroid antibodies actually kam hote hain isse? Mujhe toh kabhi doctor ne clearly nahi bataya. Bas “keep taking thyronorm” bolke bhej dete hain. Help karo yaar. Thak gayi hu trial and error se. 🥲

Raat 2 baje body mein aag! Kya koi gharelu nuskha hai?

Yaar, raat ko 2 baje achanak se aisi garmi lagti hai jaise kisi ne body ke andar aag laga di ho. Kapde bheeg jaate hain, fan bhi chal raha hai but kuch kaam nahi karta. Kal toh AC bhi chalaya, phir bhi neend nahi aayi. Pata nahi kya ho raha hai. Main sochti hoon ki kya koi ghar ka nuskha hai? Maine thoda sa nariyal paani piya tha but usse bhi fayda nahi hua. Kya aap logon ko bhi aise hot flashes aate hain? Koi tips ho toh batao please. Bahut pareshan hoon.

Complete Guide to Gestational Diabetes - 12-06-2026

गर्भावस्था में डायबिटीज (Gestational Diabetes) का संपूर्ण मार्गदर्शिका गर्भावस्था एक खूबसूरत सफर है, लेकिन इस दौरान शरीर में कई हार्मोनल और मेटाबॉलिक बदलाव होते हैं। कभी-कभी ये बदलाव ब्लड शुगर लेवल को प्रभावित करते हैं, जिसे Gestational Diabetes Mellitus (GDM) कहते हैं। यह एक ऐसी स्थिति है जो केवल गर्भावस्था के दौरान विकसित होती है और आमतौर पर बच्चे के जन्म के बाद ठीक हो जाती है। लेकिन अगर इसे नजरअंदाज किया जाए, तो यह मां और बच्चे दोनों के लिए जटिलताएं पैदा कर सकती है। इस गाइड में हम आपको हर पहलू को गहराई से समझाएंगे - बीमारी कैसे होती है, लक्षण क्या हैं, क्या खाएं-क्या न खाएं, दवाइयां, घरेलू उपाय, मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव, और अक्सर पूछे जाने वाले सवाल। 1. गहन परिचय और रोग तंत्र (Disease Mechanism) गर्भावस्था में डायबिटीज कैसे और क्यों होती है? गर्भावस्था के दौरान, प्लेसेंटा (जो बच्चे को पोषण देता है) कई हार्मोन रिलीज करता है, जैसे ह्यूमन प्लेसेंटल लैक्टोजन (hPL), एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन, और कोर्टिसोल। ये हार्मोन इंसुलिन (insulin) के प्रभाव को कम कर देते हैं, यानी शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति प्रतिरोधी (resistant) हो जाती हैं। इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस (insulin resistance) कहते हैं। सामान्य गर्भावस्था में, पैंक्रियाज (pancreas) अधिक इंसुलिन बनाकर इस प्रतिरोध की भरपाई करता है। लेकिन कुछ महिलाओं में पैंक्रियाज इतना इंसुलिन नहीं बना पाता, जिससे ब्लड शुगर बढ़ जाता है। यही Gestational Diabetes है। यह आमतौर पर गर्भावस्था के 24वें से 28वें सप्ताह के बीच विकसित होता है, जब प्लेसेंटा सबसे अधिक सक्रिय होता है। शरीर के अंदर क्या होता है? इंसुलिन रेजिस्टेंस: प्लेसेंटल हार्मोन कोशिकाओं पर इंसुलिन रिसेप्टर्स को ब्लॉक करते हैं, जिससे ग्लूकोज (glucose) कोशिकाओं में प्रवेश नहीं कर पाता और खून में जमा रहता है। पैंक्रियाज की विफलता: कुछ महिलाओं में पैंक्रियाज की बीटा कोशिकाएं (beta cells) पर्याप्त इंसुलिन स्रावित नहीं कर पातीं। हाइपरग्लाइसीमिया (Hyperglycemia): ब्लड शुगर 140 mg/dL से ऊपर चला जाता है, जो प्लेसेंटा के जरिए बच्चे तक पहुंचता है। बच्चे का पैंक्रियाज अतिरिक्त इंसुलिन बनाकर इस ग्लूकोज को स्टोर करता है, जिससे बच्चा बहुत बड़ा (macrosomia) हो सकता है। प्लेसेंटा का प्रभाव: जैसे-जैसे गर्भावस्था बढ़ती है, प्लेसेंटा बड़ा होता है और अधिक हार्मोन बनाता है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस और बढ़ता है। जोखिम कारक (Risk Factors) वजन: गर्भावस्था से पहले अधिक वजन (BMI > 25) होना। उम्र: 25 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में अधिक सामान्य। पारिवारिक इतिहास: टाइप 2 डायबिटीज का परिवार में होना। पिछली गर्भावस्था: पहले GDM का इतिहास या बड़े बच्चे (4 kg से अधिक) का जन्म। जातीयता: भारतीय महिलाओं में यह अधिक आम है (दक्षिण एशियाई जातीयता एक प्रमुख जोखिम कारक है)। PCOS: पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम होना। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Symptoms) सामान्य लक्षण (Common Symptoms) अक्सर GDM के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, इसलिए इसे 'साइलेंट डायबिटीज' भी कहते हैं। लेकिन कुछ महिलाओं में ये लक्षण दिख सकते हैं: अत्यधिक प्यास (Polydipsia): बार-बार पानी पीने का मन करना, मुंह सूखना। बार-बार पेशाब आना (Polyuria): दिन-रात बार-बार टॉयलेट जाना, खासकर रात में। थकान और कमजोरी: शरीर में एनर्जी की कमी महसूस होना। धुंधला दिखाई देना (Blurry Vision): ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव से आंखों के लेंस में सूजन आ सकती है। बार-बार संक्रमण: यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) या यीस्ट इन्फेक्शन (खुजली, सफेद डिस्चार्ज) होना। दुर्लभ लक्षण (Rare Symptoms) हाथ-पैरों में जलन या झुनझुनी (Tingling/Numbness): नसों पर हाई शुगर के प्रभाव से पेरिफेरल न्यूरोपैथी (peripheral neuropathy) हो सकती है। मतली और उल्टी: अगर शुगर बहुत अधिक बढ़ जाए (डायबिटिक कीटोएसिडोसिस न हो, लेकिन GDM में यह दुर्लभ है)। बार-बार भूख लगना (Polyphagia): खाने के बाद भी भूख लगना, लेकिन यह गर्भावस्था में सामान्य भी हो सकता है। त्वचा में बदलाव: गर्दन, बगल या जांघों के बीच काले धब्बे (Acanthosis Nigricans) - यह इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत है। ध्यान दें: अधिकांश महिलाओं में कोई लक्षण नहीं होते, इसलिए 24-28 सप्ताह में ग्लूकोज चैलेंज टेस्ट (GCT) या ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (OGTT) जरूरी है। 3. विस्तृत आहार योजना (Detailed Diet Plan) GDM को नियंत्रित करने का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा डाइट है। आपको अपने ब्लड शुगर को स्थिर रखने के लिए कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फैट का सही संतुलन बनाना होगा। यहां भारतीय खाद्य पदार्थों के साथ विस्तृत गाइड है। क्या खाएं (Kya Khayein) - ग्रीन लिस्ट साबुत अनाज (Whole Grains): ब्राउन राइस, ओट्स, ज्वार, बाजरा, रागी (nachni), क्विनोआ। ये फाइबर से भरपूर होते हैं और शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाते हैं। दालें और फलियां: मूंग दाल, चना, राजमा, सोयाबीन, मसूर दाल। प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत। हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक, मेथी, सरसों का साग, ब्रोकोली, फूलगोभी। कैलोरी में कम, पोषक तत्वों में उच्च। प्रोटीन के स्रोत: अंडे, चिकन (ग्रिल्ड या उबला), मछली, पनीर, टोफू। प्रोटीन भूख को नियंत्रित करता है और शुगर को स्थिर रखता है। हेल्दी फैट: नट्स (बादाम, अखरोट), बीज (चिया, फ्लैक्स, सूरजमुखी), एवोकाडो, नारियल तेल, जैतून का तेल। फल (सीमित मात्रा में): सेब, नाशपाती, जामुन (स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी), संतरा, अमरूद, पपीता (कम मीठा)। केला और आम से बचें या बहुत कम लें। डेयरी: दही (बिना मीठा), छाछ, दूध (स्किम्ड या टोंड)। कैल्शियम के लिए अच्छा। पेय पदार्थ: नारियल पानी, नींबू पानी (बिना चीनी), हर्बल चाय (ग्रीन टी, कैमोमाइल), खूब पानी। क्या न खाएं (Kya Na Khayein) - रेड लिस्ट रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट: सफेद चावल, मैदा (पाव, ब्रेड, नूडल्स, बिस्कुट), सफेद आटे की रोटी। मीठे पदार्थ: चीनी, मिठाई (गुलाब जामुन, जलेबी, लड्डू), कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस, आइसक्रीम, केक, पेस्ट्री। तले हुए और फैटी खाद्य पदार्थ: समोसे, पकौड़े, फ्रेंच फ्राइज, बर्गर, पिज्जा, चिप्स। ये वजन बढ़ाते हैं और इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाते हैं। अधिक मीठे फल: आम, अंगूर, चीकू, लीची, केला (पका हुआ), खजूर। प्रोसेस्ड फूड: सॉस, मेयोनेज़, पैकेज्ड सूप, इंस्टेंट नूडल्स (इनमें छिपी हुई चीनी और सोडियम होता है)। शराब और कैफीन: गर्भावस्था में शराब पूरी तरह वर्जित है; कैफीन (चाय, कॉफी) सीमित मात्रा में लें (दिन में 1-2 कप)। नमूना डाइट प्लान (Sample Diet Plan) समयभोजनसुझाव सुबह (7:00 AM)1 गिलास गुनगुना पानी + 1 चम्मच मेथी दाना (भिगोया हुआ)मेथी शुगर कंट्रोल करती है नाश्ता (8:00 AM)1 कटोरी ओट्स (दूध में पका हुआ) + मुट्ठी भर बादाम और अखरोटया 2 रागी डोसा + दही मिड-मॉर्निंग (10:30 AM)1 सेब या 1 संतराफल के साथ 1 मुट्ठी भुने चने दोपहर का भोजन (1:00 PM)1 कटोरी ब्राउन राइस + 1 कटोरी मूंग दाल + हरी सब्जी + सलाद (खीरा, टमाटर, गाजर)रोटी (ज्वार/बाजरा) भी ले सकते हैं शाम (4:00 PM)1 कप ग्रीन टी + 2 भुने हुए मखानेया 1 कटोरी फल का सलाद रात का खाना (7:00 PM)1 कटोरी पालक पनीर + 1 रोटी (गेहूं/मल्टीग्रेन) + खीरे का रायताहल्का भोजन करें रात (9:00 PM)1 गिलास गुनगुना दूध (हल्दी के साथ)बिना चीनी महत्वपूर्ण: छोटे-छोटे भोजन (हर 2-3 घंटे में) लें, ताकि शुगर स्पाइक न हो। कार्बोहाइड्रेट की मात्रा प्रति भोजन 30-45 ग्राम से अधिक न रखें। 4. चिकित्सा प्रबंधन (Medical Management) अगर डाइट और एक्सरसाइज से ब्लड शुगर कंट्रोल नहीं होता, तो डॉक्टर दवाइयां लिख सकते हैं। यहां केवल शैक्षिक जानकारी दी गई है; कभी भी खुद से दवा न लें। इंसुलिन (Insulin) कैसे काम करता है: इंसुलिन एक हार्मोन है जो कोशिकाओं को ग्लूकोज अवशोषित करने में मदद करता है। GDM में, जब शरीर का इंसुलिन काम नहीं करता, तो बाहरी इंसुलिन दिया जाता है। प्रकार: आमतौर पर मानव इंसुलिन (NPH या Regular) या एनालॉग इंसुलिन (Lispro, Aspart) का उपयोग होता है। ये तेजी से काम करते हैं और शुगर स्पाइक को रोकते हैं। देने का तरीका: इंजेक्शन (पेन या सिरिंज) के जरिए पेट या जांघ में दिया जाता है। गर्भावस्था में यह सुरक्षित माना जाता है और प्लेसेंटा को पार नहीं करता। खुराक: डॉक्टर आपके ब्लड शुगर रीडिंग के आधार पर खुराक तय करते हैं। आमतौर पर भोजन से पहले या रात में दिया जाता है। मौखिक दवाइयां (Oral Medications) मेटफॉर्मिन (Metformin): यह इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करता है और लीवर में ग्लूकोज उत्पादन को घटाता है। यह गर्भावस्था में सुरक्षित माना जाता है, लेकिन कभी-कभी मतली या डायरिया जैसे साइड इफेक्ट हो सकते हैं। ग्लाइबुराइड (Glyburide): यह पैंक्रियाज को अधिक इंसुलिन बनाने के लिए उत्तेजित करता है। हालांकि, कुछ अध्ययनों में यह पाया गया है कि यह प्लेसेंटा को पार कर सकता है, इसलिए इसका उपयोग सीमित है। ध्यान दें: इंसुलिन को GDM के लिए पहली पसंद माना जाता है, क्योंकि यह प्लेसेंटा को पार नहीं करता और बच्चे के लिए सुरक्षित है। मौखिक दवाइयां केवल कुछ मामलों में दी जाती हैं। ब्लड शुगर मॉनिटरिंग कब चेक करें: दिन में 4-6 बार - सुबह खाली पेट (फास्टिंग), और प्रत्येक भोजन के 1-2 घंटे बाद (पोस्टप्रैंडियल)। लक्ष्य: फास्टिंग < 95 mg/dL, 1 घंटा बाद < 140 mg/dL, 2 घंटे बाद < 120 mg/dL। उपकरण: ग्लूकोमीटर (glucometer) का उपयोग करें। रीडिंग को एक डायरी में नोट करें और डॉक्टर को दिखाएं। 5. सिद्ध घरेलू उपाय और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) घरेलू उपाय (Home Remedies) मेथी दाना (Fenugreek Seeds): रात भर 1 चम्मच मेथी दाना पानी में भिगो दें। सुबह खाली पेट पानी के साथ दाना चबाएं। मेथी में फाइबर और गैलेक्टोमैनन होता है, जो शुगर अवशोषण को धीमा करता है। दालचीनी (Cinnamon): 1/2 चम्मच दालचीनी पाउडर को गुनगुने पानी या चाय में मिलाकर पिएं। यह इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाती है। लेकिन गर्भावस्था में अधिक मात्रा से बचें (प्रति दिन 1 ग्राम से कम)। करेला (Bitter Gourd): करेले का जूस (थोड़ा नमक डालकर) पिएं, या करेले की सब्जी खाएं। इसमें चारैंटिन (charantin) होता है, जो ब्लड शुगर कम करता है। आंवला (Indian Gooseberry): 1 आंवला रोज खाएं या इसका जूस पिएं। विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर, यह पैंक्रियाज को स्वस्थ रखता है। जामुन (Black Plum): जामुन के बीजों को पीसकर पाउडर बनाएं और 1/2 चम्मच पानी के साथ लें। यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है। जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes) नियमित व्यायाम: दिन में कम से कम 30 मिनट की मध्यम गतिविधि करें। वॉकिंग सबसे सुरक्षित है। योग (प्राणायाम, ताड़ासन), तैराकी, या स्टेशनरी साइक्लिंग भी अच्छे विकल्प हैं। व्यायाम मांसपेशियों को ग्लूकोज का उपयोग करने में मदद करता है। तनाव प्रबंधन: तनाव से कोर्टिसोल बढ़ता है, जो शुगर को बढ़ाता है। ध्यान (meditation), गहरी सांस लेना, संगीत सुनना, या प्रियजनों से बात करना मददगार है। पर्याप्त नींद: 7-9 घंटे की नींद लें। नींद की कमी से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है। हाइड्रेशन: दिन में 8-10 गिलास पानी पिएं। पानी किडनी को अतिरिक्त शुगर निकालने में मदद करता है। धूम्रपान और शराब से बचें: ये ब्लड शुगर को बढ़ाते हैं और गर्भावस्था को जटिल बना सकते हैं। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Mental Health and Daily Life) मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव GDM का निदान सुनकर कई महिलाएं चिंतित, डरी हुई या दोषी महसूस करती हैं। यह सामान्य है, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। चिंता (Anxiety): ब्लड शुगर को लेकर लगातार चिंता, इंजेक्शन का डर, या बच्चे को नुकसान पहुंचने का भय। अवसाद (Depression): उदासी, रुचि में कमी, अकेलापन महसूस करना। GDM वाली महिलाओं में प्रसवोत्तर अवसाद (postpartum depression) का खतरा अधिक होता है। तनाव (Stress): डाइट, व्यायाम और मॉनिटरिंग की दिनचर्या को संभालना मुश्किल हो सकता है। सामाजिक अलगाव: मिठाई या पारिवारिक समारोहों में भाग लेने में असमर्थता महसूस करना। दैनिक जीवन पर प्रभाव भोजन योजना: हर भोजन की योजना बनानी पड़ती है, जो थकाऊ हो सकता है। बार-बार डॉक्टर के पास जाना: अधिक बार प्रसवपूर्व जांच, शुगर टेस्ट और अल्ट्रासाउंड कराने पड़ सकते हैं। काम और परिवार: नौकरी करने वाली महिलाओं के लिए समय प्रबंधन चुनौतीपूर्ण हो सकता है। नींद में खलल: रात में शुगर चेक करने या बार-बार पेशाब आने से नींद प्रभावित होती है। सामना कैसे करें (Coping Strategies) समर्थन लें: अपने पति, परिवार या दोस्तों से बात करें। उन्हें अपनी स्थिति समझाएं। प्रोफेशनल हेल्प: काउंसलर या मनोवैज्ञानिक से मिलें, खासकर अगर चिंता या अवसाद बढ़ रहा हो। सपोर्ट ग्रुप: ऑनलाइन या स्थानीय GDM सपोर्ट ग्रुप से जुड़ें। दूसरों के अनुभव सुनकर साहस मिलता है। आत्म-देखभाल: अपने लिए समय निकालें - किताब पढ़ें, हल्का संगीत सुनें, या प्रकृति में टहलें। 7. 10 विस्तृत अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) ये प्रश्न लंबी-पूंछ वाली खोज क्वेरी (long-tail search queries) को कवर करते हैं, जो भारतीय महिलाएं अक्सर पूछती हैं। 1. क्या गर्भावस्था में डायबिटीज बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती है? हां, अगर अनियंत्रित रहे, तो यह बच्चे को प्रभावित कर सकती है। बच्चा बहुत बड़ा (macrosomia - 4 kg से अधिक) हो सकता है, जिससे डिलीवरी में कठिनाई हो सकती है (सिजेरियन सेक्शन की आवश्यकता)। जन्म के बाद बच्चे का ब्लड शुगर अचानक गिर सकता है (नियोनेटल हाइपोग्लाइसीमिया), या उसे सांस लेने में समस्या (respiratory distress syndrome) हो सकती है। लेकिन अगर समय पर इलाज किया जाए, तो अधिकांश बच्चे स्वस्थ पैदा होते हैं। 2. क्या गर्भावस्था में डायबिटीज ठीक हो जाती है? हां, आमतौर पर बच्चे के जन्म के बाद GDM ठीक हो जाती है। प्लेसेंटा

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