oftros-m oral suspension - Uses, Price and Side Effects

oftros-m oral suspension: Uses in Hindi (Fayde), Price, Side Effects & Substitutes

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🏭 MRG Pharmaceuticals 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 14, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is oftros-m oral suspension used for? (Quick Answer)

🩺 Primary Use:
oftros-m oral suspension (manufactured by MRG Pharmaceuticals) is a highly effective medicine primarily used for the treatment of gastro intestinal. It helps in relieving symptoms and improving your overall health. Find the complete list of oftros-m oral suspension uses in Hindi, alternatives, price in India, and dosage on SaathiMed below.
🧪 Active Ingredient & Working:
It contains Ofloxacin (50mg/5ml) + Metronidazole (120mg/5ml) which works by treating the underlying condition effectively.
⚠️ Safety Warning:
Always consult your doctor before using this medicine, especially to check if it is safe during pregnancy or if you suffer from liver or kidney issues.

🇮🇳 oftros-m oral suspension के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

oftros-m oral suspension का उपयोग मुख्य रूप से gastro intestinal और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Ofloxacin (50mg/5ml) + Metronidazole (120mg/5ml) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? Over 80% of the antiretroviral drugs used globally to combat AIDS are supplied by Indian pharmaceutical companies.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Ofloxacin (50mg/5ml) + Metronidazole (120mg/5ml)
Manufacturer / BrandMRG Pharmaceuticals
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassGASTRO INTESTINAL
Action Class
Prescription Required✓ Yes (Schedule H Drug)
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Onset of Action:
30 to 60 minutes
Duration:
6 to 8 hours
Habit Forming:
No (Non-addictive)
Food:
Take after meal

💊 oftros-m oral suspension Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

💡 How to Take oftros-m oral suspension (Dosage & Khane ka tarika)

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💡 Expert Tips for Best Results

  • Follow the prescription: Always use oftros-m oral suspension exactly as prescribed by your healthcare provider. Do not alter the dosage yourself.
  • Check Expiry: Never consume expired medicines. Always double-check the manufacturing and expiry date on the packaging before use.
  • Storage: Store the medicine in a cool, dry place away from direct sunlight and out of reach of children.
  • Report Side Effects: If you experience severe allergic reactions, swelling, or breathing issues after taking oftros-m oral suspension, seek emergency medical help immediately.
  • Don't self-medicate: Do not share this medicine with others even if their symptoms seem similar to yours.

⚠️ oftros-m oral suspension Side Effects (Nuksan) & Precautions

Common and serious side effects may include:

  • Vomiting
  • Nausea
  • Weight loss
  • Abdominal pain
  • Headache
  • Diarrhea
  • Loss of appetite
  • Dizziness
  • Insomnia (difficulty in sleeping)
  • Metallic taste
  • Urine discoloration

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🛑 Myths vs. Facts about oftros-m oral suspension

  • Myth: Generic substitutes of oftros-m oral suspension are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Ofloxacin (50mg/5ml) + Metronidazole (120mg/5ml)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of oftros-m oral suspension can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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Complete Guide to Hyperthyroidism - 08-06-2026

हाइपरथायरॉइडिज्म (Hyperthyroidism) की पूरी गाइड: कारण, लक्षण, इलाज और डाइट नमस्कार! अगर आप या आपके परिवार में किसी को हाइपरथायरॉइडिज्म (Hyperthyroidism) है, तो यह गाइड आपके लिए ही है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें थायरॉइड ग्रंथि बहुत ज़्यादा हार्मोन बनाने लगती है, जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज़ हो जाता है। इसे "ओवरएक्टिव थायरॉइड" भी कहते हैं। इस लेख में हम आपको हर छोटी-बड़ी जानकारी देंगे – बीमारी कैसे होती है, इसके लक्षण, खानपान, दवाइयाँ, घरेलू उपाय, और मानसिक स्वास्थ्य पर असर। चलिए, शुरू करते हैं। 1. गहरा परिचय और रोग का तंत्र (Deep Introduction & Disease Mechanism) थायरॉइड ग्रंथि क्या है? थायरॉइड ग्रंथि आपकी गर्दन के सामने, एडम्स एप्पल के नीचे तितली के आकार की होती है। यह T3 (ट्राईआयोडोथायरोनिन) और T4 (थायरोक्सिन) नामक हार्मोन बनाती है। ये हार्मोन शरीर की हर कोशिका को बताते हैं कि कितनी तेज़ी से काम करना है – जैसे दिल की धड़कन, पाचन, और ऊर्जा का उपयोग। हाइपरथायरॉइडिज्म कैसे होता है? जब थायरॉइड ग्रंथि बिना किसी नियंत्रण के बहुत ज़्यादा T3 और T4 बनाने लगती है, तो शरीर का मेटाबॉलिज्म ओवरड्राइव में चला जाता है। यह आमतौर पर इन कारणों से होता है: ग्रेव्स डिजीज (Graves' Disease): यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की इम्यूनिटी थायरॉइड पर हमला करके उसे ज़्यादा हार्मोन बनाने के लिए उत्तेजित करती है। यह सबसे आम कारण है (भारत में लगभग 70-80% मामले)। थायरॉइड नोड्यूल्स (Toxic Nodules): थायरॉइड में गांठें बन जाती हैं, जो अकेले ही हार्मोन बनाने लगती हैं। थायरॉइडाइटिस (Thyroiditis): वायरल इंफेक्शन या प्रसव के बाद थायरॉइड में सूजन आ जाती है, जिससे स्टोर किए हुए हार्मोन ब्लड में लीक हो जाते हैं। ज्यादा आयोडीन: आयोडीन युक्त दवाइयाँ या सप्लीमेंट्स लेने से भी थायरॉइड ओवरएक्टिव हो सकता है। शरीर के अंदर क्या होता है? जब T3/T4 का लेवल बढ़ता है, तो शरीर हर जगह "फास्ट फॉरवर्ड" मोड में चला जाता है: दिल तेज़ धड़कने लगता है (Tachycardia)। कोशिकाएँ ज़्यादा ऑक्सीजन जलाती हैं, जिससे वजन कम होता है और गर्मी लगती है। पाचन तंत्र तेज़ हो जाता है, जिससे बार-बार भूख लगती है और दस्त हो सकते हैं। नर्वस सिस्टम ओवरस्टिम्युलेट हो जाता है, जिससे घबराहट और कंपन (Tremors) होता है। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Common AND Rare Symptoms) सामान्य लक्षण (Common Symptoms) वजन कम होना: भूख बढ़ने के बावजूद अचानक वज़न घटना। तेज़ दिल की धड़कन: आराम करने पर भी दिल 100+ बीट प्रति मिनट। हाथों में कंपन (Tremors): हाथ फैलाने पर उंगलियाँ कांपना। गर्मी असहिष्णुता: दूसरों को ठंड लगे, आपको पसीना आए। थकान और कमज़ोरी: मांसपेशियाँ कमज़ोर, खासकर जांघों में। बार-बार मल त्याग: दस्त या पतला मल। नींद न आना (Insomnia): रात को बिस्तर पर करवटें बदलना। मूड स्विंग्स: चिड़चिड़ापन, बेचैनी, या अचानक गुस्सा। गर्दन में सूजन (Goiter): थायरॉइड का बढ़ना, जो निगलने में मुश्किल कर सकता है। दुर्लभ लक्षण (Rare Symptoms) आँखों की समस्या (Graves' Ophthalmopathy): आँखें बाहर निकलना (Exophthalmos), आँखों में जलन, डबल विजन। त्वचा पर लाल चकत्ते (Pretibial Myxedema): पिंडलियों पर मोटी, लाल, खुजलीदार त्वचा। हड्डियों का कमज़ोर होना (Osteoporosis): कैल्शियम का तेज़ी से निकलना। पीरियड्स में बदलाव: महिलाओं में कम या बंद पीरियड्स। पुरुषों में स्तन वृद्धि (Gynecomastia): हार्मोनल असंतुलन के कारण। थायरॉइड स्टॉर्म (Thyroid Storm): यह एक मेडिकल इमरजेंसी है – तेज़ बुखार, भ्रम, उल्टी, और बेहोशी। 3. विस्तृत डाइट प्लान (Detailed Diet Plan) सही खानपान हाइपरथायरॉइडिज्म को कंट्रोल करने में मदद करता है। यहाँ बताया गया है कि क्या खाएं और क्या न खाएं – खासकर भारतीय खाने के हिसाब से। क्या खाएं (What to Eat) कम आयोडीन वाली चीज़ें: आयोडीन थायरॉइड हार्मोन बनाने में मदद करता है, इसलिए इसे सीमित करें। बिना नमक की दालें (मूंग, मसूर, चना)। ताज़ी सब्जियाँ – लौकी, तोरी, कद्दू, भिंडी, फूलगोभी। फल – सेब, नाशपाती, अनार, तरबूज (केला और संतरा सीमित मात्रा में)। अनाज – ब्राउन राइस, ओट्स, ज्वार, बाजरा (बिना नमक के)। क्रूसिफेरस सब्जियाँ (Goitrogenic Foods): ये थायरॉइड हार्मोन बनने को धीमा करती हैं। गोभी, ब्रोकोली, पत्तागोभी, मूली, शलजम, सरसों का साग। इन्हें पकाकर खाएं (कच्चा कम खाएं)। प्रोटीन से भरपूर चीज़ें: मांसपेशियों की कमज़ोरी दूर करने के लिए। अंडे का सफेद भाग, चिकन (त्वचा रहित), मछली (सीमित मात्रा में)। दूध और दही (कम मात्रा में, क्योंकि इनमें आयोडीन होता है)। हेल्दी फैट्स: ऊर्जा के लिए। नारियल तेल, घी (सीमित), एवोकाडो, अखरोट (1-2 रोज़)। हाइड्रेशन: दिन में 8-10 गिलास पानी, नारियल पानी (बिना नमक का), हर्बल चाय (कैमोमाइल, पुदीना)। क्या न खाएं (What to Avoid) आयोडीन युक्त नमक: सेंधा नमक या आयोडीन युक्त टेबल सॉल्ट से बचें। काला नमक सीमित मात्रा में ले सकते हैं। समुद्री खाद्य पदार्थ: मछली, झींगा, केकड़ा, समुद्री शैवाल (Seaweed)। प्रोसेस्ड फूड: पैकेट वाले स्नैक्स, सॉस, अचार (जिनमें आयोडीन युक्त नमक होता है)। कैफीन: चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक – ये दिल की धड़कन और बेचैनी बढ़ा सकते हैं। रेड मीट और तला-भुना: ये सूजन बढ़ा सकते हैं। सोया उत्पाद: टोफू, सोया मिल्क (थायरॉइड दवाओं के अवशोषण को रोक सकते हैं)। शराब और सिगरेट: ये थायरॉइड फंक्शन को और खराब करते हैं। नमूना डाइट प्लान (Sample Diet Plan) सुबह (7 AM): 1 गिलास गुनगुना पानी + 2 भीगे हुए बादाम। नाश्ता (8 AM): 1 कटोरी दलिया (बिना नमक) + 1 उबला अंडे का सफेद भाग। मिड-मॉर्निंग (11 AM): 1 सेब या नाशपाती। दोपहर का खाना (1 PM): 1 कटोरी ब्राउन राइस + 1 कटोरी मूंग दाल (बिना नमक) + 1 कटोरी लौकी की सब्जी। शाम (4 PM): 1 कप हर्बल चाय + 2-3 मखाने। रात का खाना (7 PM): 1 रोटी (बाजरा या ज्वार) + 1 कटोरी ब्रोकोली और पत्तागोभी की सब्जी। सोने से पहले (9 PM): 1 गिलास गुनगुना दूध (बिना चीनी) + 1/2 चम्मच हल्दी। 4. चिकित्सा प्रबंधन (Medical Management) ध्यान दें: यह केवल शैक्षिक जानकारी है। दवाइयाँ हमेशा डॉक्टर की सलाह से लें। एंटी-थायरॉइड दवाइयाँ (Antithyroid Drugs) मेथीमाज़ोल (Methimazole / Thiamazole): यह थायरॉइड को T3/T4 बनाने से रोकता है। यह सबसे आम दवा है। प्रोपिलथायोरासिल (Propylthiouracil / PTU): यह भी हार्मोन बनने को रोकता है, लेकिन लिवर पर साइड इफेक्ट हो सकते हैं। आमतौर पर प्रेग्नेंसी के पहले तीन महीनों में दी जाती है। बीटा-ब्लॉकर्स (Beta-Blockers) प्रोप्रानोलोल (Propranolol): यह दिल की तेज़ धड़कन, कंपन, और बेचैनी को कम करता है। यह थायरॉइड हार्मोन को नहीं घटाता, बल्कि लक्षणों को कंट्रोल करता है। रेडियोआयोडीन थेरेपी (Radioactive Iodine Therapy) इसमें रेडियोएक्टिव आयोडीन की एक गोली दी जाती है, जो थायरॉइड कोशिकाओं को नष्ट कर देती है। इसके बाद मरीज़ को हाइपोथायरॉइडिज्म (थायरॉइड हार्मोन की कमी) हो जाती है, जिसे जीवनभर थायरॉक्सिन (Thyroxine) से ठीक किया जाता है। सर्जरी (Thyroidectomy) अगर दवाइयाँ काम न करें या बड़ा गोइटर हो, तो थायरॉइड का हिस्सा या पूरा निकाल दिया जाता है। इसके बाद भी हार्मोन रिप्लेसमेंट की ज़रूरत होती है। 5. सिद्ध घरेलू उपाय और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) घरेलू उपाय (Home Remedies) अश्वगंधा (Ashwagandha): यह एडाप्टोजेन है, जो थायरॉइड हार्मोन को संतुलित करता है। 1 चम्मच पाउडर गुनगुने दूध में लें। लेकिन ग्रेव्स डिजीज में डॉक्टर से पूछें। नीम (Neem): नीम की पत्तियों का काढ़ा पीने से इम्यून सिस्टम शांत होता है। गुड़हल (Hibiscus): गुड़हल की चाय (बिना चीनी) पीने से थायरॉइड हार्मोन कम हो सकता है। लौंग (Clove): 2-3 लौंग रात को भिगोकर सुबह चबाएं। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण हैं। हल्दी (Turmeric): गुनगुने दूध में हल्दी मिलाकर पीने से सूजन कम होती है। जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes) तनाव प्रबंधन: ध्यान (Meditation), प्राणायाम (अनुलोम-विलोम), और योग (जैसे शवासन, बालासन) करें। तनाव थायरॉइड को और बढ़ा सकता है। नींद का शेड्यूल: रोज़ 7-8 घंटे की नींद लें। सोने से पहले मोबाइल से दूर रहें। हल्का व्यायाम: तेज़ दौड़ने से बचें। वॉक, स्विमिंग, या साइकलिंग करें। ज़्यादा एक्सरसाइज से दिल पर दबाव पड़ सकता है। ठंडा रखें: गर्मी से बचने के लिए पंखा, एसी, या ठंडे पानी से नहाएं। नियमित जाँच: हर 3-6 महीने में थायरॉइड फंक्शन टेस्ट (T3, T4, TSH) कराएं। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Mental Health and Daily Life) मानसिक स्वास्थ्य पर असर हाइपरथायरॉइडिज्म सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी बहुत प्रभावित करता है: चिंता और घबराहट (Anxiety): हार्मोन के ओवरलोड से ब्रेन में "फाइट या फ्लाइट" मोड ऑन हो जाता है। आप बिना वजह डर या बेचैनी महसूस कर सकते हैं। डिप्रेशन: कुछ मरीज़ों को उदासी, थकान, और निराशा होती है, खासकर जब इलाज शुरू होता है। चिड़चिड़ापन (Irritability): छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना या रोना आना। एकाग्रता में कमी (Brain Fog): काम पर ध्यान केंद्रित न कर पाना, भूलने की समस्या। दैनिक जीवन पर असर काम पर प्रभाव: तेज़ दिल की धड़कन और कंपन के कारण ऑफिस का काम मुश्किल हो सकता है। रिश्तों पर प्रभाव: मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ापन से परिवार और दोस्तों से दूरी बन सकती है। सामाजिक जीवन: गर्मी लगने और पसीने के कारण बाहर जाना अवॉइड करना। ड्राइविंग: कंपन और ध्यान की कमी से ड्राइविंग खतरनाक हो सकती है। सुझाव: मानसिक स्वास्थ्य के लिए काउंसलर से बात करें, सपोर्ट ग्रुप जॉइन करें, और अपने डॉक्टर को अपनी मेंटल हेल्थ के बारे में बताएं। 7. 10 विस्तृत FAQ (10 Detailed FAQs) 1. क्या हाइपरथायरॉइडिज्म ठीक हो सकता है? हाँ, लेकिन यह बीमारी के कारण पर निर्भर करता है। ग्रेव्स डिजीज में दवाइयों से कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन कुछ मामलों में रेडियोआयोडीन या सर्जरी के बाद जीवनभर हार्मोन लेना पड़ता है। शुरुआती पहचान से पूरी तरह ठीक होना संभव है। 2. क्या हाइपरथायरॉइडिज्म में प्रेग्नेंसी सेफ है? प्रेग्नेंसी से पहले थायरॉइड को कंट्रोल करना ज़रूरी है। अनियंत्रित हाइपरथायरॉइडिज्म से मिसकैरेज, प्रीटर्म लेबर, या बच्चे में थायरॉइड समस्या हो सकती है। डॉक्टर PTU जैसी सेफ दवाइयाँ देते हैं। 3. क्या हाइपरथायरॉइडिज्म से वज़न बढ़ सकता है? आमतौर पर वज़न कम होता है, लेकिन कुछ मरीज़ों में भूख बढ़ने के कारण वज़न बढ़ सकता है। हालांकि, मेटाबॉलिज्म तेज़ होने के कारण वज़न घटना ज़्यादा आम है। 4. क्या हाइपरथायरॉइडिज्म में दूध पीना चाहिए? दूध में कैल्शियम और आयोडीन होता है, इसलिए सीमित मात्रा में (दिन में 1 गिलास) पी सकते हैं। लेकिन अगर आप रेडियोआयोडीन थेरेपी ले रहे हैं, तो डॉक्टर से पूछें। 5. क्या हाइपरथायरॉइडिज्म से बाल झड़ते हैं? हाँ, हार्मोनल असंतुलन से बाल पतले हो सकते हैं या झड़ सकते हैं। इलाज शुरू करने के बाद यह ठीक हो जाता है। 6. क्या हाइपरथायरॉइडिज्म में व्यायाम करना चाहिए? हल्का व्यायाम (जैसे वॉक, योग) फायदेमंद है, लेकिन ज़ोरदार व्यायाम (जैसे वेट लिफ्टिंग) से बचें, क्योंकि इससे दिल पर दबाव पड़ सकता है। 7. क्या हाइपरथायरॉइडिज्म में चावल खाना चाहिए? ब्राउन राइस या बासमती चावल सीमित मात्रा में खा सकते हैं। सफेद चावल से बचें, क्योंकि इसमें ज़्यादा कार्बोहाइड्रेट होता है, जो मेटाबॉलिज्म को और तेज़ कर सकता है। 8. क्या हाइपरथायरॉइडिज्म से आँखों पर असर पड़ता है? ग्रेव्स डिजीज में आँखें बाहर निकल सकती हैं (Exophthalmos), आँखों में जलन, सूखापन, या डबल विजन हो सकता है। इसके लिए आई ड्रॉप्स और कभी-कभी सर्जरी की ज़रूरत होती है। 9. क्या हाइपरथायरॉइडिज्म में शराब पी सकते हैं? नहीं, शराब थायरॉइड फंक्शन को और खराब कर सकती है और दवाइयों के साथ इंटरैक्ट कर सकती है। पूरी तरह से बचें। 10. क्या हाइपरथायरॉइडिज्म का कोई परमानेंट इलाज है? रेडियोआयोडीन थेरेपी या सर्जरी से थायरॉइड को नष्ट करके हाइपरथायरॉइडिज्म को ठीक किया जा सकता है, लेकिन इसके बाद आपको जीवनभर थायरॉइड हार्मोन लेना होगा। दवाइयों से बीमारी कंट्रोल में रहती है, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं होती। मेडिकल डिस्क्लेमर: यह लेख केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी भी चिकित्सा सलाह, निदान, या उपचार का विकल्प नहीं है। हाइपरथायरॉइडिज्म एक गंभीर स्थिति है, जिसका इलाज केवल एक योग्य डॉक्टर (एंडोक्रिनोलॉजिस्ट) की देखरेख में ही किया जाना चाहिए। किसी भी दवा, डाइट, या घरेलू उपाय को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करें। लेखक या प्रकाशक किसी भी प्रकार की चिकित्सीय समस्या के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

Subah pet saaf nahi hota, raat tak wait, exam mein focus off? Koi remedy batao bhai!

Arre yaar, ye kya ho raha hai mere saath. Subah utho toh pet saaf nahi hota, tab tak raat ko 10 baje tak wait karna padta hai. Phir jab exam ka pressure hota hai, tab toh aur bhi gandh mach jaati hai. Kal raat ko hostel ka khana khaaya—daal chawal aur aloo sabzi—socha aaram se digest hoga, lekin aaj subah fatafat uthna pada par kuch nahi hua. Behosh sa feel ho raha tha. IBS aur acidity ki vajah se pura din lethargic lagta hai. Koi remedy batado bhai. Maine try kiya isabgol lekin usse gas ban gayi zyada. Kya subah warm water with lemon kaam karta hai? Ya koi aur simple tip jo padhai ke beech mein follow kar sakun? Hostel mein toh healthy options limited hote hain. Exam ke din toh aur tension hoti hai—pet saaf nahi hua toh pura focus off ho jata hai. Pls help, seniors aur experienced log. (26M, CA student, IBS + acidity ka patient)

BC college ki ladki ne udne bola, 2 saal gym aur mass gainer ka kuch nahi hua! 😭 Koi desi nuskha batao, jaldi mota hona hai!

Bc college mein aaj class me ek ladki ne boli "Pradeep tu itna patla hai ki hawa mein udh jaayega". Pure batch ke samne bol diya. Andheri raat me koi hanger nahi dikhta toh mujhe dekh leti hai. 2 saal se gym jaata hu, ₹3000 ka mass gainer piya tha lekin liver pe asar hua, doctor ne mana kar diya. Ab kya karu? Koi natural remedy batao jo desi ho aur safe bhi. Doodh, kela, makhana sab try kiya, kuch nahi badalta. Mummy bhi bolti hai "beta mota hoja, ladkiyan dekhti nahi tujhe". Genuinely help chahiye, kisi ko pata ho toh batao.

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