menotas 150iu/ml injection allopathy (Menotrophin (150IU/ml)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India
menotas 150iu/ml injection allopathy (Menotrophin (150IU/ml)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India manufactured by Intas Pharmaceuticals Ltd. Contains Menotrophin (150IU/ml).

menotas 150iu/ml injection - Uses, Price, Side Effects & Substitutes

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Menotrophin (150IU/ml) (Click to see all medicines with same salt)
🏭 Intas Pharmaceuticals Ltd 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 21, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is menotas 150iu/ml injection used for?

menotas 150iu/ml injection (Menotrophin (150IU/ml)) is used to treat gynaecological. It contains Menotrophin (150IU/ml), which works by treating the condition effectively. Always consult your doctor before use. Take as prescribed.

  • Generic Name: Menotrophin (150IU/ml)
  • Manufacturer: Intas Pharmaceuticals Ltd
  • Medicine Form: Allopathy
  • Pregnancy Category: Consult doctor

🇮🇳 menotas 150iu/ml injection के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

menotas 150iu/ml injection का उपयोग मुख्य रूप से gynaecological और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Menotrophin (150IU/ml) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? The Indian pharmaceutical market is expected to reach $130 billion by 2030.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Menotrophin (150IU/ml)
Brand Namemenotas 150iu/ml injection
ManufacturerIntas Pharmaceuticals Ltd
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassGYNAECOLOGICAL
Action ClassGonadotropins
Route of AdministrationOral
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Shelf LifeAs per manufacturer

💡 How and when to take menotas 150iu/ml injection?

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💊 menotas 150iu/ml injection Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

⚠️ What are the side effects of menotas 150iu/ml injection?

  • Headache
  • Injection site pain
  • Injection site allergic reaction
  • Abdominal pain
  • Abdominal cramp
  • Nausea
  • Ovarian hyperstimulation syndrome

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🔬 Drug Interactions

🛡️ Safety & Warnings

🛑 Myths vs. Facts about menotas 150iu/ml injection

  • Myth: Generic substitutes of menotas 150iu/ml injection are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Menotrophin (150IU/ml)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of menotas 150iu/ml injection can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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Stent laga, ab biryani dekhte hi guilt ho raha hai – kya kabhi life normal hogi?

Yaar, 3 months ho gaye stent lage hue. Dil ka darr to kam ho raha hai but ek naya dar aa gaya hai – kya kabhi normal life wapas milegi? Office wapas join kiya, but 2 hours baithte hi lagta hai pressure aa raha hai. Pehle jaisa stamina nahi hai, choti si stair climb karte hi saans phool jaati hai. Aaj ek incident hua – lunch me colleague ne biryani order kari, sab kha rahe the. Maine socha "thoda sa toh chalega", but fir yaad aaya doctor ka warning – oil, masala, sodium sab band. Ek bite liya aur guilt ho gaya. Plate side kar di. Bahar ka khana ab permanently bye bye. Ek positive cheez bataun? Mene walking start ki hai – subah 20 min, sham 20 min. Starting me legs pain hota tha but ab adapt ho raha hai. Lekin ek sawaal hai seniors se: **Stent lene ke baad kab feel hota hai ki ab sab normal hai?** Ya yeh darr hamesha rahega? Koi tips ho toh share karo, please.

Complete Guide to Iron Deficiency Anemia - 11-06-2026

आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया (Iron Deficiency Anemia): एक संपूर्ण मार्गदर्शिका नमस्ते! क्या आप अक्सर थकान महसूस करते हैं? सीढ़ियाँ चढ़ते ही सांस फूलने लगती है? या फिर चक्कर आने की समस्या बनी रहती है? ये सब आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया (Iron Deficiency Anemia) के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। यह एक बहुत ही आम समस्या है, खासकर भारत में, लेकिन इसे नजरअंदाज करना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। इस गाइड में हम आपको हर वो चीज़ बताएंगे जो आपको इस बीमारी के बारे में जाननी चाहिए – बिल्कुल सरल हिंग्लिश में। 1. गहरा परिचय और रोग की प्रक्रिया (Deep Introduction & Disease Mechanism) आयरन क्यों ज़रूरी है? हमारे शरीर में खून का लाल रंग हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) नाम के प्रोटीन की वजह से होता है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) के अंदर पाया जाता है और इसका काम फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर के हर हिस्से (दिमाग, मांसपेशियां, दिल) तक पहुंचाना है। अब आयरन इस हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए सबसे ज़रूरी तत्व है। जब शरीर में आयरन की कमी हो जाती है, तो हीमोग्लोबिन ठीक से नहीं बन पाता। नतीजा? लाल रक्त कोशिकाएं छोटी (microcytic) और पीली (hypochromic) हो जाती हैं। उनमें ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे पूरे शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। इसे ही आयरन डेफिशिएंसी एनीमिया कहते हैं। शरीर में क्या होता है? (Step-by-Step Mechanism) स्टेज 1 (आयरन स्टोरेज खत्म): शरीर पहले अपने स्टोर किए हुए आयरन (फेरिटिन) का इस्तेमाल करता है। जब यह खत्म होने लगता है, तो ब्लड टेस्ट में फेरिटिन लेवल गिर जाता है, लेकिन हीमोग्लोबिन अभी नॉर्मल रहता है। स्टेज 2 (आयरन की कमी): स्टोर खत्म होने पर शरीर नए RBCs बनाने के लिए पर्याप्त आयरन नहीं जुटा पाता। बोन मैरो (हड्डियों का गूदा) को कम आयरन मिलता है। स्टेज 3 (एनीमिया): अब हीमोग्लोबिन का लेवल गिरने लगता है। RBCs छोटे और कमजोर बनने लगते हैं। यही वह स्टेज है जब लक्षण दिखाई देने लगते हैं। सबसे आम कारण क्या हैं? खून की कमी (Blood Loss): महिलाओं में हैवी पीरियड्स (menorrhagia) सबसे बड़ा कारण है। पेट के अल्सर, बवासीर (piles), या कोलन कैंसर की वजह से भी धीरे-धीरे खून बह सकता है। डाइट में कमी: शाकाहारी भोजन में अक्सर आयरन की कमी होती है, खासकर अगर विटामिन C (जो आयरन को अब्सॉर्ब करने में मदद करता है) भी कम लिया जाए। अब्सॉर्प्शन की समस्या: सीलिएक डिजीज, गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी, या पेट की दूसरी बीमारियों में शरीर आयरन को सही से सोख (absorb) नहीं पाता। बढ़ी हुई ज़रूरत: प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग के दौरान शरीर को ज़्यादा आयरन चाहिए होता है। बच्चों में ग्रोथ के समय भी यह ज़रूरत बढ़ जाती है। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Common & Rare Symptoms) आम लक्षण जिन्हें आप अनदेखा कर सकते हैं: थकान और कमजोरी (Fatigue): सबसे आम लक्षण। दिनभर सुस्ती छाई रहती है, जैसे शरीर में बैटरी खत्म हो गई हो। सांस फूलना (Shortness of Breath): थोड़ा चलने या सीढ़ियाँ चढ़ने पर भी सांस फूलने लगती है। पीली त्वचा (Pale Skin): चेहरा, होंठ, पलकों के अंदर का हिस्सा और नाखून पीले या सफेद दिखने लगते हैं। चक्कर आना और सिरदर्द (Dizziness & Headaches): दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलने की वजह से। हाथ-पैर ठंडे रहना (Cold Hands & Feet): ब्लड सर्कुलेशन कम होने के कारण। दिल की धड़कन तेज़ होना (Palpitations): दिल ज़्यादा मेहनत करके ऑक्सीजन पहुंचाने की कोशिश करता है। कम ज्ञात और दुर्लभ लक्षण (Less Known & Rare Symptoms): पैरों में बेचैनी (Restless Legs Syndrome): रात को सोते समय पैरों में खिंचाव, झुनझुनी या हिलाने की तीव्र इच्छा होना। यह आयरन की कमी से जुड़ा हुआ है। नाखूनों का चम्मच जैसा होना (Koilonychia): नाखून पतले होकर अंदर की ओर मुड़ने लगते हैं, जैसे चम्मच हो। मुंह के कोने फटना (Angular Cheilitis): मुंह के दोनों कोनों पर दरारें या छाले पड़ जाना। जीभ में दर्द या चिकनापन (Glossitis): जीभ लाल, चिकनी और दर्द करने लगती है। अजीब चीज़ें खाने की इच्छा (Pica): बर्फ, मिट्टी, चाक, कागज, या स्टार्च (कच्चा चावल, आलू) खाने की तीव्र इच्छा होना। यह एक बहुत ही अजीब लेकिन असली लक्षण है। बालों का झड़ना (Hair Loss): आयरन की कमी से हेयर फॉलिकल्स कमजोर हो जाते हैं, जिससे बाल झड़ने लगते हैं। निगलने में कठिनाई (Dysphagia): गले में कुछ अटकने जैसा महसूस होना (Plummer-Vinson syndrome का हिस्सा हो सकता है)। 3. विस्तृत डाइट प्लान (Detailed Diet Plan) याद रखें: आयरन दो तरह का होता है – हेम आयरन (Heme Iron) जो नॉन-वेज में पाया जाता है और शरीर जल्दी अब्सॉर्ब कर लेता है, और नॉन-हेम आयरन (Non-Heme Iron) जो पौधों में पाया जाता है और इसे अब्सॉर्ब करने के लिए विटामिन C की मदद चाहिए। ✅ क्या खाएं (What to Eat) – Indian Foods: नॉन-वेज स्रोत (Heme Iron): चिकन लिवर (Chicken Liver): सबसे अमीर स्रोत। हफ्ते में एक बार ज़रूर खाएं। मटन (Mutton) और फिश (Fish): खासकर सार्डिन, मैकेरल (बंगड़ा) और टूना। अंडे की जर्दी (Egg Yolk): अंडे का पीला भाग आयरन से भरपूर होता है। वेज स्रोत (Non-Heme Iron): हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक (Spinach), मेथी (Fenugreek), सरसों का साग, चौलाई (Amaranth) – इन्हें पकाकर खाएं, क्योंकि कच्ची पालक में ऑक्सलेट होता है जो आयरन को अब्सॉर्ब होने से रोकता है। दालें और बीन्स: मसूर दाल (Red Lentils), राजमा (Kidney Beans), छोले (Chickpeas), सोयाबीन (Soybean) और ब्लैक आइड पीज़ (Lobia)। बीज और मेवे: कद्दू के बीज (Pumpkin Seeds), तिल (Sesame Seeds), सूरजमुखी के बीज, काजू, बादाम। अनाज: रागी (Finger Millet), बाजरा (Pearl Millet), ज्वार (Sorghum), और फोर्टिफाइड गेहूं का आटा। गुड़ (Jaggery): सफेद चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल करें। इसमें आयरन और मिनरल्स होते हैं। खजूर (Dates) और किशमिश (Raisins): नाश्ते में भिगोकर खाएं। आयरन अब्सॉर्प्शन बढ़ाने के लिए (The Vitamin C Trick): जब भी आयरन वाली चीज़ खाएं, साथ में विटामिन C ज़रूर लें। यह नॉन-हेम आयरन को 6 गुना तक बेहतर अब्सॉर्ब करने में मदद करता है। खाने के साथ नींबू का रस (Lemon Juice) डालें। संतरा, मौसंबी (Sweet Lime), आंवला (Amla), कीवी, या टमाटर खाएं। पालक की सब्जी में टमाटर डालें। दाल में नींबू निचोड़कर खाएं। ❌ क्या न खाएं (What to Avoid) – ये चीज़ें आयरन को ब्लॉक करती हैं: चाय और कॉफी (Tannins): खाने के तुरंत बाद चाय या कॉफी न पिएं। इनमें मौजूद टैनिन आयरन को अब्सॉर्ब होने से रोकते हैं। खाने के कम से कम 1 घंटे बाद ही पिएं। दूध और दूध से बनी चीज़ें (Calcium): कैल्शियम आयरन के अब्सॉर्प्शन को कम करता है। आयरन वाला खाना और दूध अलग-अलग टाइम पर लें। साबुत अनाज और फाइबर (Phytates): चोकर (Wheat Bran), ओट्स, और साबुत अनाज में फाइटेट होता है जो आयरन को बाइंड कर लेता है। इन्हें भिगोकर या अंकुरित करके खाएं ताकि फाइटेट कम हो जाए। सोडा और कोल्ड ड्रिंक्स (Phosphates): इनमें मौजूद फॉस्फेट भी आयरन को रोकते हैं। 4. मेडिकल मैनेजमेंट (Medical Management) नोट: यह केवल शैक्षिक जानकारी है। कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें। डॉक्टर क्या लिख सकते हैं? ओरल आयरन सप्लीमेंट्स (Oral Iron): फेरस सल्फेट (Ferrous Sulfate): सबसे आम और सस्ता। इसमें 20% एलिमेंटल आयरन होता है। फेरस ग्लूकोनेट (Ferrous Gluconate): कम साइड इफेक्ट्स, लेकिन इसमें आयरन की मात्रा कम (12%) होती है। फेरस फ्यूमरेट (Ferrous Fumarate): 33% एलिमेंटल आयरन, लेकिन पेट खराब कर सकता है। इंट्रावेनस (IV) आयरन: जब मरीज़ ओरल आयरन बर्दाश्त नहीं कर पाता, या बहुत ज़्यादा कमी हो, या प्रेग्नेंसी के आखिरी महीनों में। इसे सीधे नस में चढ़ाया जाता है। (जैसे – Iron Sucrose, Ferric Carboxymaltose) विटामिन C सप्लीमेंट: डॉक्टर अक्सर आयरन के साथ विटामिन C लेने की सलाह देते हैं ताकि अब्सॉर्प्शन बढ़े। दवा लेने के टिप्स: खाली पेट लें (या संतरे के जूस के साथ) – इससे अब्सॉर्प्शन बेहतर होता है, लेकिन पेट खराब हो सकता है। अगर पेट खराब हो, तो थोड़ा खाना खाकर लें। दवा लेने के 2 घंटे पहले और बाद में चाय/कॉफी/दूध न लें। दवा से मल (stool) काला हो सकता है – यह नॉर्मल है, घबराएं नहीं। कब्ज (constipation) हो सकती है – खूब पानी पिएं और फाइबर लें। 5. सिद्ध घरेलू उपाय और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) घरेलू नुस्खे (Home Remedies): खजूर और गुड़ का सेवन: रोज़ सुबह 2-3 भीगे हुए खजूर और एक छोटा टुकड़ा गुड़ खाएं। चुकंदर (Beetroot) का जूस: चुकंदर, गाजर और सेब का जूस मिलाकर पिएं। यह खून बढ़ाने का रामबाण उपाय है। आंवला (Amla): आंवला विटामिन C का सबसे अच्छा स्रोत है। एक आंवला रोज़ खाएं या इसका मुरब्बा लें। तिल और गुड़ के लड्डू: काले तिल (Black Sesame) को गुड़ में मिलाकर लड्डू बनाएं और रोज़ 1-2 खाएं। पुदीना (Mint) की चटनी: पुदीने में भी आयरन होता है। इसे खाने के साथ लें। जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes): लोहे की कढ़ाई में खाना पकाएं (Cook in Iron Utensils): खासकर खट्टी चीज़ें (जैसे टमाटर की चटनी, दाल) लोहे की कढ़ाई में पकाने से खाने में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है। पीरियड्स का ध्यान रखें: हैवी पीरियड्स होने पर डॉक्टर से मिलें। हार्मोनल इम्बैलेंस या फाइब्रॉएड की जांच कराएं। धूम्रपान और शराब छोड़ें: ये दोनों ही खून की कमी और अब्सॉर्प्शन को खराब करते हैं। पर्याप्त नींद लें: शरीर को रिपेयर होने का समय दें। हल्का व्यायाम करें: योग, वॉकिंग या स्ट्रेचिंग करें, लेकिन ज़्यादा थकान न करें। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Mental Health & Daily Life) आयरन की कमी सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक सेहत को भी गहरा नुकसान पहुंचाती है। मानसिक स्वास्थ्य पर असर: डिप्रेशन और चिंता (Depression & Anxiety): दिमाग में सेरोटोनिन (खुशी का हार्मोन) बनाने के लिए भी आयरन ज़रूरी है। कमी होने पर मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन और उदासी बढ़ जाती है। ब्रेन फॉग (Brain Fog): ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, चीज़ें भूलना, और धीमी सोच। इसे 'मेंटल फॉग' कहते हैं। नींद की समस्या: रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम और बेचैनी की वजह से नींद पूरी नहीं हो पाती। दैनिक जीवन पर असर: प्रोडक्टिविटी में कमी: ऑफिस या घर का काम करना मुश्किल हो जाता है। सामाजिक जीवन प्रभावित: थकान के कारण लोग पार्टी या मिलने-जुलने से कतराने लगते हैं। सेक्स ड्राइव में कमी: शरीर में ऊर्जा की कमी से इच्छा कम हो जाती है। 7. 10 विस्तृत अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) 1. क्या सिर्फ पालक खाने से आयरन की कमी पूरी हो सकती है? नहीं, पालक में आयरन होता है, लेकिन इसमें ऑक्सलेट भी होता है जो आयरन को अब्सॉर्ब होने से रोकता है। पालक को पकाकर और साथ में विटामिन C (जैसे नींबू) लेने से ही फायदा होता है। सिर्फ पालक पर निर्भर न रहें, डाइट में विविधता लाएं। 2. क्या आयरन की गोलियां लेने से वजन बढ़ता है? सीधे तौर पर नहीं। हालांकि, कुछ लोगों को आयरन सप्लीमेंट से भूख बढ़ सकती है, जिससे वजन बढ़ सकता है। लेकिन यह आम नहीं है। 3. क्या प्रेग्नेंसी में आयरन लेना सुरक्षित है? हाँ, बिल्कुल। प्रेग्नेंसी में आयरन की ज़रूरत दोगुनी हो जाती है। डॉक्टर आमतौर पर प्रेग्नेंसी के दूसरे और तीसरे तिमाही में आयरन सप्लीमेंट लिखते हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी सप्लीमेंट न लें। 4. क्या चाय पीने से एनीमिया हो सकता है? चाय पीने से सीधे एनीमिया नहीं होता, लेकिन अगर आप खाने के तुरंत बाद चाय पीते हैं, तो इसमें मौजूद टैनिन आयरन के अब्सॉर्प्शन को 60% तक कम कर सकता है। खाने के 1-2 घंटे बाद ही चाय पिएं। 5. क्या नाखूनों पर सफेद निशान आयरन की कमी का संकेत हैं? ज़रूरी नहीं। नाखूनों पर छोटे-छोटे सफेद धब्बे (Leukonychia) अक्सर मामूली चोट या जिंक की कमी के कारण होते हैं। लेकिन अगर नाखून चम्मच की तरह मुड़ रहे हैं (Koilonychia), तो यह आयरन की कमी का पक्का संकेत है। 6. क्या बच्चों में आयरन की कमी आम है? हाँ, खासकर 6 महीने से 2 साल के बच्चों में। इस उम्र में तेज़ी से ग्रोथ होती है और मां के दूध में आयरन कम होता है। बच्चों को आयरन-फोर्टिफाइड सीरियल या आयरन ड्रॉप्स देने की सलाह दी जाती है। 7. क्या एनीमिया से दिल की बीमारी हो सकती है? हाँ, गंभीर एनीमिया में दिल को ज़्यादा पंप करना पड़ता है, जिससे दिल की धड़कन अनियमित (Arrhythmia) हो सकती है या दिल बड़ा (Enlarged Heart) हो सकता है। लंबे समय तक इलाज न कराने से हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। 8. क्या आयरन की कमी से बाल झड़ते हैं? हाँ, यह एक आम लक्षण है। आयरन की कमी से हेयर फॉलिकल्स को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, जिससे बाल कमजोर होकर झड़ने लगते हैं। आयरन लेवल सही होने पर यह रुक जाता है। 9. क्या मैं आयरन की गोलियां बिना डॉक्टर के ले सकता हूं? बिल्कुल नहीं। पहले ब्लड टेस्ट (CBC, Ferritin) करवाएं। अगर आयरन की कमी नहीं है, तो अतिरिक्त आयरन शरीर में जमा होकर लिवर और दिल को नुकसान पहुंचा सकता है (Hemochromatosis)। 10. क्या वेट लॉस डाइट से एनीमिया हो सकता है? हाँ, अगर डाइट में आयरन और विटामिन B12 की कमी हो। क्रैश डाइटिंग या सिर्फ सलाद खाने से शरीर को ज़रूरी पोषक तत्व नहीं मिलते। संतुलित डाइट लें और अगर वेट लॉस कर रहे हैं, तो आयरन सप्लीमेंट की जांच कराएं। मेडिकल डिस्क्लेमर (Medical Disclaimer): यह लेख केवल शैक्षिक और जानकारी के उद्देश्यों के लिए लिखा गया है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। आयरन डेफिशिएंसी एनीमिया एक गंभीर बीमारी हो सकती है जिसके लिए डॉक्टर की सलाह और ब्लड टेस्ट ज़रूरी है। कृपया किसी भी दवा, सप्लीमेंट या डाइट में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर या हेल्थकेयर प्रोफेशनल से परामर्श करें। स्व-चिकित्सा आपकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकती है।

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