dexarab it 20mg/150mg capsule - Uses, Price and Side Effects

dexarab it 20mg/150mg capsule: Uses in Hindi (Fayde), Price, Side Effects & Substitutes

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🏭 Megnesia Neurocare 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 15, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is dexarab it 20mg/150mg capsule used for? (Quick Answer)

🩺 Primary Use:
dexarab it 20mg/150mg capsule (manufactured by Megnesia Neurocare) is a highly effective medicine primarily used for the treatment of gastro intestinal. It helps in relieving symptoms and improving your overall health. Find the complete list of dexarab it 20mg/150mg capsule uses in Hindi, alternatives, price in India, and dosage on SaathiMed below.
🧪 Active Ingredient & Working:
It contains Rabeprazole (20mg) + Itopride (150mg) which works by treating the underlying condition effectively.
⚠️ Safety Warning:
Always consult your doctor before using this medicine, especially to check if it is safe during pregnancy or if you suffer from liver or kidney issues.

🇮🇳 dexarab it 20mg/150mg capsule के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

dexarab it 20mg/150mg capsule का उपयोग मुख्य रूप से gastro intestinal और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Rabeprazole (20mg) + Itopride (150mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? The Indian pharmaceutical market is expected to reach $130 billion by 2030.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Rabeprazole (20mg) + Itopride (150mg)
Manufacturer / BrandMegnesia Neurocare
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassGASTRO INTESTINAL
Action Class
Prescription Required✓ Yes (Schedule H Drug)
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Onset of Action:
30 to 60 minutes
Duration:
6 to 8 hours
Habit Forming:
No (Non-addictive)
Food:
Take after meal

💊 dexarab it 20mg/150mg capsule Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

💡 How to Take dexarab it 20mg/150mg capsule (Dosage & Khane ka tarika)

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💡 Expert Tips for Best Results

  • Follow the prescription: Always use dexarab it 20mg/150mg capsule exactly as prescribed by your healthcare provider. Do not alter the dosage yourself.
  • Check Expiry: Never consume expired medicines. Always double-check the manufacturing and expiry date on the packaging before use.
  • Storage: Store the medicine in a cool, dry place away from direct sunlight and out of reach of children.
  • Report Side Effects: If you experience severe allergic reactions, swelling, or breathing issues after taking dexarab it 20mg/150mg capsule, seek emergency medical help immediately.
  • Don't self-medicate: Do not share this medicine with others even if their symptoms seem similar to yours.

⚠️ dexarab it 20mg/150mg capsule Side Effects (Nuksan) & Precautions

Common and serious side effects may include:

  • Stomach pain
  • Diarrhea
  • Constipation
  • Headache
  • Dizziness
  • Flatulence
  • Weakness
  • Flu-like symptoms
  • Increased saliva production

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🛑 Myths vs. Facts about dexarab it 20mg/150mg capsule

  • Myth: Generic substitutes of dexarab it 20mg/150mg capsule are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Rabeprazole (20mg) + Itopride (150mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of dexarab it 20mg/150mg capsule can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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Acidity ka exam season! Hostel khana kha kha ke pet kharab, koi gharelu nuskha batao?

Yaar seriously ab hostel ka khana kha kha ke pet ki aisi halat ho gayi hai. Aaj subah exam tha, toh raat ko soya nahi theek se. Uth ke sabse pehle chai pi li canteen wali, aur phir do parathe aloo ke. Bas 2 ghante mein pet mein aisi marod utthi ki class chod ke washroom bhagna pada. Pata nahi kyun har baar exam ke time ye problem zyada hoti hai. Shayad stress bhi trigger kar raha hai. Koi remedy batao bhai, kya karein? Hostel mein kuch healthy milega bhi nahi. Din mein 3-4 baar acidity ki goli khani padti hai. Aur ye junk food ka chakkar hai ki mana nahi kar paate. Kal ek dosto ne golgappe khilaye, aaj pachtawa ho raha hai. Pet mein jal raha hai har time. Koi ayurvedic ya gharelu nuskha bata do jo hostel mein bhi follow kar sakun. Please help karo, exam season mein aur kya karein.

Complete Guide to Type 1 Diabetes - 30-05-2026

```html टाइप 1 डायबिटीज: एक संपूर्ण गाइड (कारण, लक्षण, डाइट और जीवनशैली) नमस्कार! यह गाइड आपको टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) के बारे में हर छोटी-बड़ी जानकारी देगी। चाहे आप खुद इस बीमारी से जूझ रहे हों या किसी परिवार के सदस्य की देखभाल कर रहे हों, यह लेख आपको पूरी तरह से शिक्षित और सशक्त बनाएगा। हम बात करेंगे शरीर के अंदर क्या होता है, कौन से लक्षण नज़रअंदाज़ नहीं करने चाहिए, कैसा खाना खाएं, कैसी दवाएं काम करती हैं, और मेंटल हेल्थ पर कैसे असर पड़ता है। नोट: यह जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी उपचार या दवा को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें। 1. गहन परिचय और रोग तंत्र (Disease Mechanism) टाइप 1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है। इसका मतलब है कि शरीर का अपना इम्यून सिस्टम गलती से अपने ही पैंक्रियाज (अग्न्याशय) के उन कोशिकाओं पर हमला कर देता है जो इंसुलिन बनाती हैं। इन कोशिकाओं को बीटा कोशिकाएं (Beta cells) कहते हैं। शरीर के अंदर क्या होता है? इंसुलिन की भूमिका: जब आप खाना खाते हैं, तो शरीर ग्लूकोज (शुगर) में तोड़ता है। इंसुलिन एक चाबी की तरह काम करता है जो कोशिकाओं के दरवाजे खोलता है ताकि ग्लूकोज अंदर जा सके और एनर्जी में बदल सके। टाइप 1 में क्या होता है: इम्यून सिस्टम बीटा कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। जब 80-90% कोशिकाएं खत्म हो जाती हैं, तो शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है। परिणाम: ग्लूकोज कोशिकाओं में नहीं जा पाता, खून में जमा हो जाता है, और शरीर को एनर्जी नहीं मिलती। इससे हाइपरग्लाइसीमिया (Hyperglycemia) होता है। टाइप 1 और टाइप 2 में अंतर टाइप 1: शरीर बिल्कुल इंसुलिन नहीं बनाता। यह ज्यादातर बच्चों और युवाओं में होता है, लेकिन किसी भी उम्र में हो सकता है। टाइप 2: शरीर इंसुलिन बनाता है लेकिन कोशिकाएं उसका सही जवाब नहीं देतीं (इंसुलिन रेजिस्टेंस)। यह अक्सर वयस्कों और अधिक वजन वाले लोगों में होता है। महत्वपूर्ण: टाइप 1 डायबिटीज को "इंसुलिन-डिपेंडेंट डायबिटीज" भी कहा जाता है। इसका कोई इलाज नहीं है, लेकिन इसे अच्छी तरह से मैनेज किया जा सकता है। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Symptoms) सामान्य लक्षण (Common Symptoms) बार-बार पेशाब आना (Polyuria): खून में अतिरिक्त शुगर किडनी के ज़रिए बाहर निकलती है, जिससे पेशाब ज्यादा आता है। रात में भी बार-बार उठना पड़ता है। अत्यधिक प्यास लगना (Polydipsia): पेशाब ज्यादा होने से शरीर डिहाइड्रेट हो जाता है, जिससे बहुत प्यास लगती है। अचानक वजन कम होना: शरीर को एनर्जी के लिए ग्लूकोज नहीं मिलता, तो वह फैट और मसल्स को तोड़ने लगता है। भूख बढ़ना (Polyphagia): कोशिकाओं को एनर्जी नहीं मिलती, इसलिए दिमाग बार-बार भूख का संकेत भेजता है। थकान और कमजोरी: शरीर में ग्लूकोज का सही उपयोग नहीं हो पाता, जिससे एनर्जी कम हो जाती है। धुंधला दिखना (Blurry Vision): हाई ब्लड शुगर आंखों के लेंस में तरल पदार्थ को प्रभावित करता है, जिससे धुंधलापन आता है। हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नता (Tingling/Numbness): लंबे समय तक हाई शुगर नसों को नुकसान पहुंचा सकता है (न्यूरोपैथी)। दुर्लभ लक्षण (Rare Symptoms) त्वचा में खुजली या ड्राईनेस: डिहाइड्रेशन और खराब ब्लड सर्कुलेशन के कारण। बार-बार इन्फेक्शन (Frequent Infections): जैसे कि यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI), फंगल इन्फेक्शन (जैसे मुंह में या जननांगों पर)। धीरे-धीरे घाव भरना (Slow Healing): हाई शुगर ब्लड फ्लो और इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है। केटोएसिडोसिस (DKA): यह एक जानलेवा स्थिति है। जब शरीर में इंसुलिन नहीं होता, तो फैट तेजी से टूटता है और कीटोन्स (Ketones) बनते हैं। लक्षण: उल्टी, पेट दर्द, फल जैसी सांस, गहरी सांस लेना, कंफ्यूजन। कब डॉक्टर से मिलें? अगर आपको या आपके बच्चे को उपरोक्त लक्षण दिखें, तो तुरंत ब्लड शुगर टेस्ट कराएं। टाइप 1 डायबिटीज का निदान रैंडम ब्लड शुगर टेस्ट (200 mg/dL से ऊपर) और HbA1c टेस्ट से होता है। 3. विस्तृत डाइट प्लान (क्या खाएं, क्या न खाएं) टाइप 1 डायबिटीज में डाइट का मतलब है कार्बोहाइड्रेट काउंटिंग और ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) को समझना। इंसुलिन की डोज़ खाने के कार्ब्स के हिसाब से लगाई जाती है। क्या खाएं (What to Eat) साबुत अनाज (Whole Grains): जई (Oats), ब्राउन राइस, क्विनोआ, ज्वार, बाजरा, रागी (Nachni)। ये धीरे-धीरे शुगर बढ़ाते हैं। दालें और फलियां (Legumes): मूंग, चना, राजमा, सोयाबीन। प्रोटीन और फाइबर से भरपूर। हरी सब्जियां (Green Vegetables): पालक, मेथी, ब्रोकली, करेला, लौकी, तोरी। कम कार्ब और विटामिन से भरपूर। प्रोटीन स्रोत (Protein Sources): अंडे, चिकन (बिना त्वचा के), मछली (सैल्मन, टूना), पनीर, टोफू। हेल्दी फैट (Healthy Fats): नट्स (बादाम, अखरोट), बीज (चिया, फ्लैक्स), एवोकाडो, जैतून का तेल। फल (Fruits in Moderation): जामुन (ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी), सेब, नाशपाती, संतरा। केला और आम कम मात्रा में खाएं। डेयरी (Dairy): दही (ग्रीक योगर्ट), दूध (लो-फैट), छाछ। क्या न खाएं (What to Avoid) रिफाइंड कार्ब्स (Refined Carbs): सफेद चावल, मैदा (सफेद ब्रेड, नान, पराठा), पास्ता, बिस्कुट। मीठी चीजें (Sugary Foods): सोडा, जूस, मिठाई (गुलाब जामुन, जलेबी), आइसक्रीम, केक, कैंडी। फ्राइड फूड (Fried Foods): समोसा, पकौड़े, फ्रेंच फ्राइज। ट्रांस फैट इंसुलिन को बाधित करता है। प्रोसेस्ड फूड (Processed Foods): चिप्स, पैकेज्ड स्नैक्स, सॉसेज, बेकन। हाई-जीआई फल (High-GI Fruits): तरबूज, खजूर, अंगूर (ज्यादा मात्रा में)। भारतीय डाइट का उदाहरण (Sample Indian Meal Plan) नाश्ता (Breakfast): 1 कटोरी ओट्स (दूध या पानी के साथ) + मुट्ठी भर बादाम + 1 सेब। लंच (Lunch): 2 रोटी (आटा या ज्वार) + 1 कटोरी मूंग दाल + सब्जी (जैसे लौकी या करेला) + सलाद। शाम का नाश्ता (Snack): 1 कप ग्रीन टी + 2 मूंग दाल चीला (बिना तेल के)। डिनर (Dinner): 1 कटोरी ब्राउन राइस + 1 कटोरी राजमा + सब्जी (जैसे ब्रोकली) + दही। सोने से पहले (Bedtime): 1 गिलास गर्म दूध (बिना चीनी) + 1 चम्मच चिया सीड्स। महत्वपूर्ण: हर भोजन के बाद ब्लड शुगर चेक करें और इंसुलिन की डोज़ एडजस्ट करें। डाइटीशियन से सलाह ज़रूर लें। 4. चिकित्सा प्रबंधन (Medical Management) टाइप 1 डायबिटीज का एकमात्र इलाज इंसुलिन थेरेपी है। यह मरीज के जीवनभर चलती है। यहां दवाओं और उनके काम करने के तरीके को समझें: इंसुलिन के प्रकार (Types of Insulin) रैपिड-एक्टिंग इंसुलिन (Rapid-acting): जैसे लिस्प्रो (Humalog), एस्पार्ट (NovoLog)। यह 15 मिनट में काम शुरू करता है, 1-2 घंटे में पीक पर होता है, और 3-5 घंटे तक रहता है। इसे खाने से ठीक पहले लिया जाता है। शॉर्ट-एक्टिंग इंसुलिन (Short-acting): जैसे रेगुलर इंसुलिन (Humulin R)। 30 मिनट में शुरू, 2-4 घंटे में पीक, 5-8 घंटे तक असर। इंटरमीडिएट-एक्टिंग इंसुलिन (Intermediate-acting): जैसे NPH (Humulin N)। 1-2 घंटे में शुरू, 4-8 घंटे में पीक, 10-18 घंटे तक रहता है। लॉन्ग-एक्टिंग इंसुलिन (Long-acting): जैसे ग्लार्जिन (Lantus), डिटेमिर (Levemir)। 1-2 घंटे में शुरू, कोई पीक नहीं, 24 घंटे तक असर। बेसल इंसुलिन के रूप में दिन में एक बार लिया जाता है। इंसुलिन डिलीवरी के तरीके (Delivery Methods) इंसुलिन पेन (Insulin Pen): पहले से भरी हुई डिवाइस, जिसमें डोज़ सेट करके इंजेक्ट करते हैं। सुविधाजनक और कम दर्दनाक। इंसुलिन पंप (Insulin Pump): एक छोटी मशीन जो लगातार इंसुलिन देती है। इसमें एक कैथेटर त्वचा के नीचे लगा होता है। बेहतर कंट्रोल के लिए। इंसुलिन सिरिंज (Syringe): पारंपरिक तरीका, जिसमें शीशी से इंसुलिन निकालकर इंजेक्ट किया जाता है। ब्लड शुगर मॉनिटरिंग (Blood Sugar Monitoring) ग्लूकोमीटर (Glucometer): दिन में 4-8 बार फिंगरप्रिक करके ब्लड शुगर चेक करें। CGM (Continuous Glucose Monitor): जैसे Dexcom, Freestyle Libre। यह त्वचा के नीचे एक सेंसर लगाकर हर 5 मिनट में शुगर रीडिंग देता है। ट्रेंड देखने में मददगार। अन्य दवाएं (Other Medications) प्रामलिंटाइड (Pramlintide): इंसुलिन के साथ लिया जाता है। यह पेट खाली होने की गति को धीमा करता है और भूख कम करता है। मेटफॉर्मिन (Metformin): कभी-कभी टाइप 1 में भी दी जाती है, खासकर अगर इंसुलिन रेजिस्टेंस हो। ध्यान दें: टाइप 1 में मुंह से ली जाने वाली दवाएं (जैसे सल्फोनील्यूरिया) काम नहीं करतीं। केवल इंसुलिन ही जीवनरक्षक है। 5. सिद्ध घरेलू उपचार और जीवनशैली में बदलाव (Home Remedies & Lifestyle) घरेलू उपचार (Home Remedies) – सहायक लेकिन प्रतिस्थापन नहीं करेला (Bitter Gourd): इसमें पॉलीपेप्टाइड-पी (p-insulin) होता है, जो ब्लड शुगर को कम कर सकता है। जूस पिएं या सब्जी खाएं। मेथी दाना (Fenugreek Seeds): रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाएं। फाइबर शुगर अब्जॉर्प्शन को धीमा करता है। दालचीनी (Cinnamon): इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ा सकती है। 1-2 ग्राम रोजाना लें (चाय या पाउडर के रूप में)। आंवला (Indian Gooseberry): विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर। जूस या मुरब्बा (बिना चीनी) लें। हल्दी (Turmeric): करक्यूमिन इंसुलिन फंक्शन को बेहतर करता है। दूध में मिलाकर पिएं। जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes) नियमित व्यायाम (Regular Exercise): रोजाना कम से कम 30 मिनट की एक्सरसाइज (जैसे तेज चलना, साइकिलिंग, योगा)। यह इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाता है। तनाव प्रबंधन (Stress Management): तनाव से कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो ब्लड शुगर को बढ़ाता है। ध्यान (Meditation), डीप ब्रीदिंग, या हॉबी अपनाएं। नींद (Sleep): 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें। नींद की कमी से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है। हाइड्रेशन (Hydration): दिन में 8-10 गिलास पानी पिएं। डिहाइड्रेशन से शुगर लेवल बढ़ सकता है। फुट केयर (Foot Care): रोजाना पैरों का निरीक्षण करें। न्यूरोपैथी के कारण छोटे घाव भी नज़र नहीं आते। सूती मोजे पहनें और नाखून सीधे काटें। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Mental Health & Daily Life) टाइप 1 डायबिटीज सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक चुनौती भी है। मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डायबिटीज डिस्ट्रेस (Diabetes Distress): ब्लड शुगर को मैनेज करने का लगातार दबाव, डर और थकान। यह डिप्रेशन से अलग है लेकिन ओवरलैप हो सकता है। डिप्रेशन और चिंता (Depression & Anxiety): हाई और लो शुगर के चक्कर, इंसुलिन की डोज़ का डर, और सामाजिक अलगाव (जैसे पार्टी में खाना न खा पाना) मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। हाइपोग्लाइसीमिया का डर (Fear of Hypoglycemia): लो ब्लड शुगर (हाइपो) का डर, जो बेहोशी या दौरे का कारण बन सकता है। दैनिक जीवन में चुनौतियां स्कूल और कॉलेज: बच्चों को बार-बार शुगर चेक करना और इंसुलिन लेना पड़ता है। शिक्षकों और दोस्तों को जागरूक करना ज़रूरी है। नौकरी और करियर: शिफ्ट ड्यूटी, ट्रैवल, या स्ट्रेसफुल जॉब में शुगर मैनेज करना मुश्किल हो सकता है। सामाजिक जीवन: शादी, पार्टी, या रेस्तरां में खाने का चुनाव सीमित हो जाता है। कैसे संभालें (How to Cope) सपोर्ट ग्रुप (Support Groups): ऑनलाइन या ऑफलाइन डायबिटीज कम्युनिटी से जुड़ें। अनुभव साझा करने से मन हल्का होता है। काउंसलिंग (Counseling): मनोवैज्ञानिक या थेरेपिस्ट से बात करें। संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (CBT) बहुत मददगार हो सकती है। परिवार और दोस्तों को शामिल करें: उन्हें डायबिटीज के बारे में शिक्षित करें ताकि वे इमरजेंसी में मदद कर सकें। टेक्नोलॉजी का उपयोग: CGM, इंसुलिन पंप, और स्मार्टफोन ऐप्स (जैसे MySugr) मैनेजमेंट को आसान बनाते हैं। 7. 10 विस्तृत FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न) 1. क्या टाइप 1 डायबिटीज ठीक हो सकता है? नहीं, फिलहाल इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है। लेकिन इंसुलिन थेरेपी, डाइट, और एक्सरसाइज से इसे पूरी तरह से मैनेज किया जा सकता है। कुछ रिसर्च (जैसे आइलेट सेल ट्रांसप्लांट) चल रही है, लेकिन यह अभी व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है। 2. क्या टाइप 1 डायबिटीज वंशानुगत है? हां, आनुवंशिक प्रवृत्ति (genetic predisposition) होती है। अगर माता-पिता को टाइप 1 है, तो बच्चे में जोखिम 5-10% तक बढ़ जाता है। लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर बच्चे को हो। 3. क्या टाइप 1 डायबिटीज में मीठा खाना पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए? पूरी तरह से नहीं, लेकिन सीमित मात्रा में। आप कम मात्रा में मीठा खा सकते हैं, लेकिन उसके हिसाब से इंसुलिन की डोज़ एडजस्ट करनी होगी। बेहतर होगा कि नेचुरल मिठास (जैसे स्टीविया) का उपयोग करें। 4. क्या टाइप 1 डायबिटीज में प्रेग्नेंसी संभव है? हां, बिल्कुल संभव है। लेकिन प्रेग्नेंसी से पहले और दौरान ब्लड शुगर को बहुत सख्ती से कंट्रोल करना जरूरी है। डॉक्टर और डायबिटीज एजुकेटर की निगरानी में रहें। हाई शुगर से बच्चे को नुकसान हो सकता है। 5. क्या टाइप 1 डायबिटीज में एक्सरसाइज करना सुरक्षित है? हां, लेकिन सावधानी बरतें। एक्सरसाइज से ब्लड शुगर कम हो सकता है (हाइपोग्लाइसीमिया)। हमेशा अपने साथ ग्लूकोज टैबलेट या जूस रखें। एक्सरसाइज से पहले और बाद में शुगर चेक करें। 6. क्या टाइप 1 डायबिटीज में शराब पी सकते हैं? सीमित मात्रा में और डॉक्टर की सलाह से। शराब ब्लड शुगर को कम कर सकती है, खासकर अगर खाली पेट पीते हैं। हमेशा खाने के साथ पिएं और शुगर चेक करते रहें। 7. क्या टाइप 1 डायबिटीज में केटोएसिडोसिस (DKA) से बचा जा सकता है? हां, नियमित इंसुलिन लेने, ब्लड शुगर मॉनिटर करने, और बीमारी के दौरान कीटोन्स चेक करने से। अगर उल्टी या पेट दर्द हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। 8. क्या टाइप 1 डायबिटीज में आयुर्वेदिक दवाएं काम करती हैं? कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि आयुर्वेदिक दवाएं टाइप 1 को ठीक कर सकती हैं। ये सहायक हो सकती हैं, लेकिन इंसुलिन का विकल्प नहीं। किसी भी आयुर्वेदिक उपचार को शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। 9. क्या टाइप 1 डायबिटीज में वज

Office meeting 15 min ka, BP high ho gaya! Heart attack survivors ke liye stress ka solution batao!

Yaar, aaj office mein ek chhoti si meeting thi… bas 15 minute ki. But project milestone nahi touch hua tha, toh senior management ka pressure tha. Mera BP suddenly upar chala gaya. Dimag mein ek dum se wohi feeling — heart attack ke time jaisi tightness. Felt like I’m going to black out. I had to step out, drink water, and just breathe for 5 minutes. Mujhe abhi angioplasty hue sirf 3 mahine hue hai. Doctors ne kaha tha stress kam karo, but IT project management mein stress kaise avoid karun? Deadline, client calls, late night emails. Aur ghar mein bhi tension hai — EMI, kids ka future. Kisi ne koi small tip di hai office stress handle karne ki? Main ab lunch break pe 10 minute walk try kar raha hoon. Aur chai-cookie skip karta hoon. Magar yeh sudden panic attacks ka kya karein? Koi natural way hai? Please share your experience.

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