coolgut 800mg tablet - Uses, Price and Side Effects

coolgut 800mg tablet: Uses in Hindi (Fayde), Price, Side Effects & Substitutes

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Mesalazine (800mg) (Click to see all medicines with same salt)
🏭 Torrent Pharmaceuticals Ltd 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 14, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is coolgut 800mg tablet used for? (Quick Answer)

🩺 Primary Use:
coolgut 800mg tablet (manufactured by Torrent Pharmaceuticals Ltd) is a highly effective medicine primarily used for the treatment of gastro intestinal. It helps in relieving symptoms and improving your overall health. Find the complete list of coolgut 800mg tablet uses in Hindi, alternatives, price in India, and dosage on SaathiMed below.
🧪 Active Ingredient & Working:
It contains Mesalazine (800mg) which works by treating the underlying condition effectively.
⚠️ Safety Warning:
Always consult your doctor before using this medicine, especially to check if it is safe during pregnancy or if you suffer from liver or kidney issues.

🇮🇳 coolgut 800mg tablet के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

coolgut 800mg tablet का उपयोग मुख्य रूप से gastro intestinal और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Mesalazine (800mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? India has the highest number of USFDA-compliant plants outside the USA.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Mesalazine (800mg)
Manufacturer / BrandTorrent Pharmaceuticals Ltd
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassGASTRO INTESTINAL
Action Class5- Aminosalicylic acid (5-ASA)
Prescription Required✓ Yes (Schedule H Drug)
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Onset of Action:
30 to 60 minutes
Duration:
6 to 8 hours
Habit Forming:
No (Non-addictive)
Food:
Take after meal

💊 coolgut 800mg tablet Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

💡 How to Take coolgut 800mg tablet (Dosage & Khane ka tarika)

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💡 Expert Tips for Best Results

  • Follow the prescription: Always use coolgut 800mg tablet exactly as prescribed by your healthcare provider. Do not alter the dosage yourself.
  • Check Expiry: Never consume expired medicines. Always double-check the manufacturing and expiry date on the packaging before use.
  • Storage: Store the medicine in a cool, dry place away from direct sunlight and out of reach of children.
  • Report Side Effects: If you experience severe allergic reactions, swelling, or breathing issues after taking coolgut 800mg tablet, seek emergency medical help immediately.
  • Don't self-medicate: Do not share this medicine with others even if their symptoms seem similar to yours.

⚠️ coolgut 800mg tablet Side Effects (Nuksan) & Precautions

Common and serious side effects may include:

  • Flatulence
  • Headache
  • Itching
  • Diarrhea
  • Nausea
  • Stomach pain/epigastric pain
  • Dizziness
  • Joint pain
  • Muscle pain
  • Vomiting

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🛑 Myths vs. Facts about coolgut 800mg tablet

  • Myth: Generic substitutes of coolgut 800mg tablet are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Mesalazine (800mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of coolgut 800mg tablet can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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Office wale mazak uda rahe, gym jaane ka mann kare na kare? Mera weight loss journey kaise handle karun?

Yaar, aaj office mein kya hua pata hai? Main subah subah gym se aaya, thoda walking karke, light stretching. Toh mere colleagues ne dekha. Ek toh bolta hai, "Oye Ramesh ji, body builder ban gaye?" Doosra bolta hai, "Yeh toh 2 hafta bhi nahi chalega, pichli baar bhi aise hi karte the." Bahut bura laga yaar. Main toh seriously try kar raha hoon. Wife ne bhi suna toh ghar pe fir se lecture di, "Dekho log kya bolte hain, tum toh wahi ho." Mera problem yeh hai ki main pre-diabetic hoon, BMI 42 hai. Doctor ne kaha hai weight kam karo. Pichle 40 saal office ki kursi se utha nahi hoon. Ab first time gym join kiya hai. Muscles mein pain hai, lekin haar nahi maanta. Wife roz daal-roti kam karke salad aur besan ka cheela de rahi hai. Mujhe lagta hai log mazak karte hain kyunki unhone mujhe kabhi motivation mein dekha nahi. Par main change chahta hoon. Aap logon ko bhi aisa experience hua hai? Ke colleagues ya family support nahi karte toh kaise handle kiya? Koi tip do bhai, ki in baaton ko ignore karke gym jaate raho?

Complete Guide to Diabetic Neuropathy & Foot Pain - 03-06-2026

डायबिटिक न्यूरोपैथी और पैरों का दर्द: एक संपूर्ण गाइड (Diabetic Neuropathy & Foot Pain) नमस्कार! यह गाइड खासतौर पर उन लोगों के लिए है जो डायबिटीज (मधुमेह) के कारण होने वाली न्यूरोपैथी (नसों की कमजोरी) और पैरों के दर्द से परेशान हैं। यहाँ हम हर छोटी-बड़ी बात को विस्तार से, सरल हिंग्लिश (हिंदी + इंग्लिश) में समझाएँगे। अगर आप या आपके परिवार में किसी को यह समस्या है, तो यह लेख आपके लिए वरदान साबित हो सकता है। 1. गहन परिचय और रोग की क्रियाविधि (Deep Introduction & Disease Mechanism) डायबिटिक न्यूरोपैथी क्या है? डायबिटिक न्यूरोपैथी एक प्रकार का नर्व डैमेज (तंत्रिका क्षति) है जो लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर (hyperglycemia) के कारण होता है। यह मुख्य रूप से पैरों और हाथों की नसों को प्रभावित करता है, लेकिन शरीर के किसी भी हिस्से की नसों को नुकसान पहुँचा सकता है। यह अंदर कैसे होता है? (Pathophysiology) ग्लूकोज का जहर (Glucose Toxicity): जब ब्लड शुगर लगातार बढ़ा रहता है, तो ग्लूकोज अणु नसों के अंदर की छोटी रक्त वाहिकाओं (vasa nervorum) को नुकसान पहुँचाते हैं। इससे नसों तक ऑक्सीजन और पोषण नहीं पहुँच पाता। AGEs का निर्माण (Advanced Glycation End-products): हाई शुगर प्रोटीन और वसा के साथ मिलकर AGEs नामक हानिकारक यौगिक बनाता है, जो नसों की संरचना को कमजोर कर देते हैं। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (Oxidative Stress): शरीर में फ्री रेडिकल्स बढ़ जाते हैं, जो नसों की कोशिकाओं (neurons) को नष्ट करते हैं। इंसुलिन रेजिस्टेंस: नसों की कोशिकाओं में इंसुलिन सिग्नलिंग खराब हो जाती है, जिससे नसों की मरम्मत (regeneration) रुक जाती है। इस प्रक्रिया के कारण सेंसरी नसें (स्पर्श, दर्द, तापमान महसूस करने वाली), मोटर नसें (मांसपेशियों को हिलाने वाली) और ऑटोनॉमिक नसें (पसीना, ब्लड प्रेशर, पाचन नियंत्रित करने वाली) सभी प्रभावित हो सकती हैं। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Common & Rare Symptoms) सामान्य लक्षण (Common Symptoms) पैरों में जलन (Burning sensation): खासकर रात के समय पैरों के तलवों में आग जैसी जलन होना। झुनझुनी (Tingling): पैर की उंगलियों या हाथों में सुई चुभने जैसा अहसास। सुन्नता (Numbness): पैरों में feeling कम हो जाना, जैसे मोज़े पहने हों। तेज़ दर्द (Sharp, stabbing pain): अचानक बिजली के झटके जैसा दर्द। संवेदनशीलता (Hypersensitivity): हल्का सा स्पर्श भी बहुत दर्दनाक लगना (allodynia)। मांसपेशियों में कमजोरी: पैर उठाने में परेशानी, बार-बार लड़खड़ाना। त्वचा में बदलाव: पैरों की त्वचा सूखी, फटी हुई या लाल हो जाना। दुर्लभ लक्षण (Rare Symptoms) ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी के लक्षण: चक्कर आना (orthostatic hypotension), पाचन खराब होना (gastroparesis), पेशाब में रुकावट, अत्यधिक पसीना या बिल्कुल पसीना न आना। प्रॉक्सिमल न्यूरोपैथी: जांघ या कूल्हे में अचानक तेज़ दर्द, वज़न कम होना। फोकल न्यूरोपैथी: एक तरफ की आंख या चेहरे की मांसपेशियों का लकवा (Bell's palsy जैसा), कार्पल टनल सिंड्रोम। चारकोट फुट (Charcot foot): पैर की हड्डियों का कमजोर होकर टूटना या विकृत होना, जिसमें दर्द महसूस नहीं होता। 3. विस्तृत डाइट प्लान (Detailed Diet Plan) डायबिटिक न्यूरोपैथी में डाइट का मकसद ब्लड शुगर को स्थिर रखना और नसों की मरम्मत में मदद करना है। क्या खाएं (Kya Khaye) – नसों के लिए सुपरफूड्स विटामिन B12 और B कॉम्प्लेक्स: दूध, दही, पनीर, अंडे, मछली, चिकन। शाकाहारी लोग पालक, चुकंदर, मूंग दाल खाएं। ओमेगा-3 फैटी एसिड: अलसी (flax seeds), चिया सीड्स, अखरोट, सरसों का तेल, मछली (सैल्मन, मैकेरल)। एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर: हल्दी (curcumin), अदरक, लहसुन, ग्रीन टी, बेरीज (जामुन, स्ट्रॉबेरी), अनार। मैग्नीशियम: पालक, कद्दू के बीज, बादाम, केला, राजमा, सोयाबीन। फाइबर युक्त कार्बोहाइड्रेट: जई (oats), ज्वार, बाजरा, कुट्टू का आटा, ब्राउन राइस, चना। भारतीय मसाले: मेथी दाना (fenugreek seeds), दालचीनी, जीरा – ये इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाते हैं। पानी: दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं ताकि नसों में हाइड्रेशन बना रहे। क्या न खाएं (Kya Na Khaye) – बचने वाली चीजें रिफाइंड शुगर: मिठाई, कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस, केक, बिस्कुट। रिफाइंड कार्ब्स: सफेद चावल, मैदा (white flour), सफेद ब्रेड, नूडल्स। ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट: तला हुआ भोजन (समोसा, पकौड़ा), प्रोसेस्ड मीट, बटर, वनस्पति घी। अल्कोहल और सिगरेट: ये नसों के डैमेज को तेज़ करते हैं। हाई सोडियम फूड्स: अचार, पापड़, चिप्स, सॉस – ब्लड प्रेशर बढ़ाकर नसों पर दबाव डालते हैं। एक दिन का नमूना डाइट चार्ट (Sample Indian Diet Plan) सुबह (6:30 AM): गुनगुने पानी में 1 चम्मच मेथी दाना पाउडर + 1 चम्मच नींबू। नाश्ता (8:00 AM): 1 कटोरी जई का दलिया (oats) + 1 कप ग्रीन टी + मुट्ठी भर बादाम। मिड-मॉर्निंग (10:30 AM): 1 सेब या 1 नाशपाती। दोपहर का खाना (1:00 PM): 2 ज्वार की रोटी + 1 कटोरी मूंग दाल + पालक की सब्जी + हरी सलाद (खीरा, टमाटर, गाजर) + 1 कटोरी दही। शाम का नाश्ता (4:30 PM): 1 कप मूंगफली या चना चाट (बिना तला) + 1 कप नारियल पानी। रात का खाना (7:30 PM): 1 कटोरी बाजरा खिचड़ी + तोरी या लौकी की सब्जी + 1 कटोरी सलाद। सोने से पहले (9:30 PM): 1 गिलास गुनगुना दूध + 1 चुटकी हल्दी। 4. चिकित्सा प्रबंधन (Medical Management) नोट: यह केवल शैक्षिक जानकारी है। कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। डॉक्टर द्वारा आमतौर पर दी जाने वाली दवाएं ब्लड शुगर नियंत्रित करने वाली दवाएं: Metformin: लिवर से ग्लूकोज उत्पादन कम करता है। Sulfonylureas (जैसे, Glimepiride): पैंक्रियाज से इंसुलिन रिलीज बढ़ाता है। Insulin: जब मौखिक दवाएं काम न करें। न्यूरोपैथिक दर्द की दवाएं: Gabapentin या Pregabalin: ये नसों से मस्तिष्क तक दर्द के सिग्नल को कम करती हैं। शुरुआत में चक्कर आ सकता है, इसलिए धीरे-धीरे डोज़ बढ़ाई जाती है। Amitriptyline या Nortriptyline (Tricyclic Antidepressants): कम डोज़ में दर्द निवारक का काम करती हैं। नींद भी अच्छी आती है। Duloxetine (SNRI): यह सेरोटोनिन और नॉरएड्रेनालिन को बढ़ाकर दर्द कम करती है। सामयिक उपचार (Topical Treatments): Capsaicin Cream: मिर्च से बनी क्रीम, जो त्वचा पर लगाने से दर्द के रिसेप्टर्स को सुन्न कर देती है। Lidocaine Patches: स्थानीय एनेस्थेटिक की तरह काम करते हैं। एंटीऑक्सीडेंट सप्लीमेंट्स: Alpha-Lipoic Acid (ALA): यह शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो नसों की मरम्मत में मदद करता है। 600 mg प्रतिदिन ले सकते हैं (डॉक्टर की सलाह से)। Benfotiamine (Vitamin B1 derivative): यह AGEs के निर्माण को रोकता है। अन्य चिकित्सीय प्रक्रियाएं फिजिकल थेरेपी: मांसपेशियों की कमजोरी और संतुलन सुधारने के लिए। TENS (Transcutaneous Electrical Nerve Stimulation): हल्की बिजली के झटकों से दर्द कम करना। पैरों की सर्जरी: चारकोट फुट या गंभीर विकृति के मामलों में। 5. सिद्ध घरेलू उपचार और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) घरेलू उपचार (Home Remedies) गुनगुने पानी में पैर भिगोएँ: रोज़ रात को 10-15 मिनट के लिए पैरों को गुनगुने पानी (गर्म नहीं) में भिगोएँ। इसमें 1 चम्मच सेंधा नमक या एप्सम सॉल्ट मिलाएं। यह दर्द और सूजन कम करता है। हल्दी और दूध: एक गिलास गर्म दूध में 1 चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर पिएं। हल्दी में curcumin होता है जो नसों की सूजन कम करता है। मेथी दाना का पानी: रात को 1 चम्मच मेथी दाना पानी में भिगो दें। सुबह खाली पेट पानी पिएं और दाने चबाएं। यह ब्लड शुगर कंट्रोल करता है। अलसी का तेल मालिश: पैरों पर हल्के हाथों से अलसी का तेल या सरसों का तेल मालिश करें। यह नसों में रक्त प्रवाह बढ़ाता है। नीम के पत्ते: नीम के पत्तों को पीसकर पैरों पर लगाएं। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। योग और प्राणायाम: अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम तनाव कम करके नसों को शांत करते हैं। वज्रासन और पादहस्तासन पैरों की नसों के लिए फायदेमंद हैं। जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes) रोज़ाना पैरों की जाँच: हर रात पैरों को अच्छी तरह देखें। कोई कट, छाला, लालिमा या सूजन हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। सही जूते पहनें: डायबिटिक फुटवियर पहनें जो नरम, गद्देदार और सांस लेने वाला हो। तंग या नुकीले जूते न पहनें। मॉइस्चराइज़र लगाएं: पैरों पर रोज़ाना मॉइस्चराइज़र लगाएं, लेकिन उंगलियों के बीच न लगाएं (फंगल इंफेक्शन से बचने के लिए)। धूम्रपान और शराब छोड़ें: ये दोनों नसों के डैमेज को तेज़ करते हैं। नियमित व्यायाम: रोज़ 30 मिनट तक तेज़ चलना, तैराकी या साइकिल चलाना। इससे ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है। वजन नियंत्रित रखें: मोटापा नसों पर दबाव बढ़ाता है। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Mental Health & Daily Life) मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डिप्रेशन और चिंता: लगातार दर्द और सुन्नता के कारण मरीज अक्सर उदास रहने लगते हैं। "यह दर्द कभी खत्म नहीं होगा" ऐसा सोचकर मानसिक तनाव बढ़ जाता है। नींद की कमी: रात के समय दर्द बढ़ने से नींद पूरी नहीं होती, जिससे दिनभर थकान और चिड़चिड़ापन रहता है। सामाजिक अलगाव: पैरों में दर्द के कारण बाहर जाने, परिवार के साथ घूमने या दोस्तों से मिलने में हिचक होती है। दैनिक जीवन पर प्रभाव चलने-फिरने में परेशानी: पैर उठाने या चलने में दर्द होता है, जिससे रोज़मर्रा के काम जैसे खाना बनाना, बाजार जाना मुश्किल हो जाता है। नौकरी पर असर: जिन लोगों को खड़े होकर काम करना पड़ता है (जैसे दुकानदार, फैक्ट्री वर्कर), उनके लिए यह बहुत कठिन हो जाता है। ड्राइविंग में खतरा: पैरों में सुन्नता के कारण ब्रेक या क्लच का सही अंदाज़ा नहीं लग पाता, जिससे एक्सीडेंट का खतरा बढ़ जाता है। कैसे संभालें? मेडिटेशन और माइंडफुलनेस: रोज़ 10 मिनट ध्यान करें। इससे दर्द के प्रति आपकी धारणा बदल जाएगी। सपोर्ट ग्रुप: अपने शहर में डायबिटीज सपोर्ट ग्रुप से जुड़ें। दूसरों के अनुभव सुनकर हिम्मत मिलती है। थेरेपी: अगर डिप्रेशन ज़्यादा हो, तो काउंसलर या साइकियाट्रिस्ट से मिलें। 7. 10 विस्तृत FAQs (Long-Tail Search Queries) 1. क्या डायबिटिक न्यूरोपैथी पूरी तरह ठीक हो सकती है? नहीं, यह पूरी तरह ठीक नहीं होती, लेकिन ब्लड शुगर को सख्ती से कंट्रोल करके, दवाओं और जीवनशैली में बदलाव से इसके लक्षणों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। शुरुआती स्टेज में पकड़ में आने पर नसों की मरम्मत संभव है। 2. डायबिटिक न्यूरोपैथी में पैरों की देखभाल कैसे करें? रोज़ाना पैरों को धोएं, अच्छी तरह सुखाएं, मॉइस्चराइज़र लगाएं, नाखून सीधे काटें, और कभी भी नंगे पैर न चलें। हर दिन पैरों की जाँच करें और किसी भी घाव को तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। 3. क्या डायबिटिक न्यूरोपैथी में पैरों में सूजन आना सामान्य है? हां, सूजन (edema) आम है, खासकर अगर ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी हो। लेकिन अगर सूजन के साथ लालिमा या गर्मी हो, तो यह इंफेक्शन का संकेत हो सकता है – तुरंत डॉक्टर से मिलें। 4. डायबिटिक न्यूरोपैथी के लिए सबसे अच्छा विटामिन कौन सा है? विटामिन B12 सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह नसों की माइलिन शीथ (protective layer) को मजबूत करता है। इसके अलावा विटामिन D और मैग्नीशियम भी फायदेमंद हैं। 5. क्या डायबिटिक न्यूरोपैथी से पैर काटने (amputation) की नौबत आ सकती है? हां, अगर पैरों में सुन्नता के कारण छोटे घावों पर ध्यान न दिया जाए और वे संक्रमित हो जाएं, तो गैंग्रीन (ऊतक मृत्यु) हो सकता है, जिससे अंग काटना पड़ सकता है। इसलिए पैरों की देखभाल बहुत ज़रूरी है। 6. क्या डायबिटिक न्यूरोपैथी में एक्यूपंक्चर (Acupuncture) काम करता है? कुछ अध्ययनों में एक्यूपंक्चर को न्यूरोपैथिक दर्द में राहत देने वाला पाया गया है। यह नसों में एंडोर्फिन (प्राकृतिक दर्द निवारक) रिलीज करता है। लेकिन केवल प्रशिक्षित एक्यूपंक्चरिस्ट से ही कराएं। 7. क्या डायबिटिक न्यूरोपैथी में व्यायाम करना सुरक्षित है? हां, लेकिन हल्का व्यायाम जैसे चलना, तैराकी, योग करना सुरक्षित है। भारी वजन उठाने या दौड़ने से बचें, क्योंकि पैरों पर दबाव बढ़ सकता है। व्यायाम से ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है। 8. क्या डायबिटिक न्यूरोपैथी में पैरों में ठंडक महसूस होना सामान्य है? हां, नसों के डैमेज के कारण पैरों में ठंडक या गर्मी का अहसास गलत हो सकता है। कुछ मरीजों को पैर ठंडे लगते हैं, जबकि छूने पर वे सामान्य होते हैं। यह न्यूरोपैथी का ही लक्षण है। 9. क्या डायबिटिक न्यूरोपैथी में मेथी दाना फायदेमंद है? बिल्कुल! मेथी दाना में फाइबर और कंपाउंड होते हैं जो ब्लड शुगर को धीरे-धीरे अवशोषित करने में मदद करते हैं। यह इंसुलिन सेंसिटिविटी भी बढ़ाता है। रोज़ाना 1 चम्मच मेथी दाना पानी में भिगोकर पीना फायदेमंद है। 10. क्या डायबिटिक न्यूरोपैथी से पैरों में छाले (blisters) हो सकते हैं? हां, सुन्नता के कारण पैरों पर अत्यधिक दबाव या घर्षण से छाले हो सकते हैं। चूंकि दर्द महसूस नहीं होता, ये छाले जल्दी संक्रमित हो सकते हैं। इसलिए हमेशा मोज़े और मुलायम जूते पहनें। चिकित्सा अस्वीकरण (Medical Disclaimer): यह लेख केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। डायबिटिक न्यूरोपैथी एक गंभीर स्थिति है, जिसके लिए हमेशा एक योग्य डॉक्टर (एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट या डायबिटीज विशेषज्ञ) से परामर्श लें। किसी भी दवा, सप्लीमेंट या घरेलू उपचार को शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें। लेखक या प्रकाशक किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

Dil ka dhak dhak bina kaam ke! Kya resting mein bhi arrhythmia ho sakta hai?

Namaste doston. Aaj subah uthke chai bana rahi thi, tabhi achanak mera dil tez tez dhadakne laga jaise koi dhak dhak kar raha ho. Main to bas sofa pe baith gayi, haath pair thande ho gaye. Pichle hafte bhi aisa hua tha, tab ECG karaya to doctor ne kaha arrhythmia hai. Lekin aaj to maine koi kaam nahi kiya tha, bas aise hi baithe baithe... kya ye resting me bhi ho sakta hai? Koi remedy bataye jo ghar par try kar sakoon. Main blood thinner bhi le rahi hoon, isliye koi dabao ya jyada dawai nahi le sakti. Bada dar lagta hai jab aisa hota hai. Kya aapke saath bhi aisa hota hai? Kya karte ho aap?

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