xplat 100mg injection allopathy (Oxaliplatin (100mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India
xplat 100mg injection allopathy (Oxaliplatin (100mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India manufactured by Cipla Ltd. Contains Oxaliplatin (100mg).

xplat 100mg injection - Uses, Price, Side Effects & Substitutes

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Oxaliplatin (100mg) (Click to see all medicines with same salt)
🏭 Cipla Ltd 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 22, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is xplat 100mg injection used for?

xplat 100mg injection (Oxaliplatin (100mg)) is used to treat anti neoplastics. It contains Oxaliplatin (100mg), which works by treating the condition effectively. Always consult your doctor before use. Take as prescribed.

  • Generic Name: Oxaliplatin (100mg)
  • Manufacturer: Cipla Ltd
  • Medicine Form: Allopathy
  • Pregnancy Category: Consult doctor

🇮🇳 xplat 100mg injection के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

xplat 100mg injection का उपयोग मुख्य रूप से anti neoplastics और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Oxaliplatin (100mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? The Indian pharmaceutical market is expected to reach $130 billion by 2030.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Oxaliplatin (100mg)
Brand Namexplat 100mg injection
ManufacturerCipla Ltd
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassANTI NEOPLASTICS
Action ClassPlatinum compounds-Anticancer
Route of AdministrationOral
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Shelf LifeAs per manufacturer

💡 How and when to take xplat 100mg injection?

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💊 xplat 100mg injection Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

⚠️ What are the side effects of xplat 100mg injection?

  • Nausea
  • Fatigue
  • Anemia (low number of red blood cells)
  • Vomiting
  • Diarrhea
  • Decreased white blood cell count (neutrophils)
  • Low blood platelets
  • Increased liver enzymes
  • Peripheral neuropathy (tingling and numbness of feet and hand)
  • Stomatitis (Inflammation of the mouth)

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🔬 Drug Interactions

🛡️ Safety & Warnings

🛑 Myths vs. Facts about xplat 100mg injection

  • Myth: Generic substitutes of xplat 100mg injection are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Oxaliplatin (100mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of xplat 100mg injection can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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Frozen Shoulder ne khel khel diya 😭 Bas haath uthaya aur chaku chubh gaya! Koi gharelu upaay batao?

Aaj physiotherapy session tha. Usually mummy ji se comb karwati hu, but aaj unhone ghar se bahar jana tha to maine socha khud hi kar lungi. Bas haath upar uthaya aur shoulder mein aisa dard hua jaise koi chaku chubho raha ho. 😭 Physiotherapist ne bhi kaha hai ki slowly range of motion badhane ki koshish karo, but aaj toh bilkul nahi hua. Pata nahi kya halat hai is frozen shoulder ne kar di. 3 mahine se physiotherapy chal rahi hai, lekin har baar session ke baad thoda better lagta hai, phir agle din wahi dard. Aaj toh session ke baad bhi ro di main wahan. Therapist ne bola "Mamta ji, aapko patience rakhna hoga, yeh slow process hai." But jab daily kaam bhi nahi ho paate, tab patience kaise aaye? Kisi ko koi gharelu upaay pata ho toh batayein. Garam saink (hot pack) karti hu, light stretching bhi karti hu, but lagta hai jaise shoulder joint band ho gaya hai. Kya massage se koi fayda hota hai? Ya koi aasan hai jo ghar par kar sakti hu? Please help. 🙏

36 weeks pregnant bed rest pe hoon, depression aur loneliness se tang aa gayi! Koi tip?

Yaar honestly bohot tang aa gayi hoon. 36 weeks pregnant, second baby hai but first time itna高风险 pregnancy hai. Gestational diabetes ke chalte doctor ne bed rest strict kar diya hai, aur insulin bhi chal raha hai. Par ye bed rest ka depression kuch zyada hi ho raha hai. Aaj subah uth ke socha chai pi loon, lekin fridge tak jaana bhi mana hai. Bahar baithi hoon window ke paas, but lagta hai jaise ek cage mein band hoon. Bohot lonely feel hota hai, especially jab ghar mein sab busy hain. Pata nahi kya karoon, koi tip ho to batao. Kya aapne bhi ye phase face kiya? Kya koi aasan sa activity hai jo bore nahi kare? Ya fir koi show ya book suggest karo jo mind fresh rakhe. Main mostly anxious rehti hoon baby ke liye bhi, par ab depression bhi add ho gaya hai. Please help yaar, koi idea do.

Complete Guide to Thyroid Diet - 27-05-2026

थायरॉइड डाइट: संपूर्ण गाइड – क्या खाएं, क्या न खाएं और कैसे रखें अपना ख्याल थायरॉइड एक छोटी सी तितली के आकार की ग्रंथि है जो हमारे गले के सामने, एडम्स एप्पल के ठीक नीचे स्थित होती है। यह ग्रंथि हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म, हार्ट रेट, बॉडी टेम्परेचर और एनर्जी लेवल को कंट्रोल करने के लिए थायरॉइड हार्मोन (T3 और T4) बनाती है। जब यह ग्रंथि ज्यादा या कम हार्मोन बनाने लगती है, तो थायरॉइड की बीमारी हो जाती है। थायरॉइड की दो मुख्य समस्याएं हैं: हाइपोथायरॉइडिज्म (थायरॉइड हार्मोन की कमी) और हाइपरथायरॉइडिज्म (थायरॉइड हार्मोन का अधिक उत्पादन)। इसके अलावा, हाशिमोटो थायरॉइडिटिस (एक ऑटोइम्यून बीमारी) और ग्रेव्स डिजीज भी आम हैं। इस गाइड में हम आपको थायरॉइड डाइट, लक्षण, इलाज और घरेलू उपायों के बारे में पूरी जानकारी देंगे, खासकर भारतीय संदर्भ में। 1. Deep Introduction & Disease Mechanism (बीमारी कैसे और क्यों होती है?) थायरॉइड ग्रंथि हमारे दिमाग के एक हिस्से पिट्यूटरी ग्रंथि से कंट्रोल होती है। पिट्यूटरी ग्रंथि TSH (Thyroid Stimulating Hormone) रिलीज करती है, जो थायरॉइड को T3 और T4 हार्मोन बनाने का सिग्नल देती है। हाइपोथायरॉइडिज्म (Hypothyroidism) – हार्मोन की कमी क्यों होता है: जब थायरॉइड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बना पाती। सबसे आम कारण हाशिमोटो थायरॉइडिटिस है, जिसमें शरीर की इम्यून सिस्टम खुद की थायरॉइड ग्रंथि पर हमला कर देती है। आयोडीन की कमी, थायरॉइड सर्जरी, या रेडिएशन थेरेपी भी इसका कारण बन सकते हैं। शरीर पर प्रभाव: मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। शरीर को एनर्जी बनाने में दिक्कत होती है, जिससे थकान, वजन बढ़ना, ठंड लगना और कब्ज जैसी समस्याएं होती हैं। हाइपरथायरॉइडिज्म (Hyperthyroidism) – हार्मोन का अधिक उत्पादन क्यों होता है: जब थायरॉइड ग्रंथि बहुत ज्यादा T3 और T4 बनाने लगती है। सबसे आम कारण ग्रेव्स डिजीज है, जो एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है। थायरॉइड नोड्यूल्स या थायरॉइडाइटिस भी इसका कारण बन सकते हैं। शरीर पर प्रभाव: मेटाबॉलिज्म तेज हो जाता है। शरीर बहुत जल्दी कैलोरी बर्न करता है, जिससे वजन घटना, घबराहट, हाथों का कांपना, गर्मी लगना और दिल की धड़कन तेज होना जैसे लक्षण दिखते हैं। थायरॉइड नोड्यूल्स और कैंसर थायरॉइड ग्रंथि में गांठें (नोड्यूल्स) बन सकती हैं, जो ज्यादातर मामलों में सौम्य (benign) होती हैं, लेकिन कुछ मामलों में कैंसर का खतरा भी होता है। डाइट और लाइफस्टाइल से इन्हें कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन डॉक्टर की सलाह जरूरी है। 2. Common AND Rare Symptoms (सामान्य और दुर्लभ लक्षण) हाइपोथायरॉइडिज्म के सामान्य लक्षण थकान और कमजोरी: दिनभर नींद आना, एनर्जी की कमी। वजन बढ़ना: बिना कारण वजन बढ़ना, खासकर पेट और चेहरे पर। ठंड लगना: हाथ-पैर ठंडे रहना, गर्मी सहन न होना। कब्ज: पाचन धीमा होना। त्वचा और बाल: त्वचा रूखी, बाल झड़ना, भौंहों का पतला होना। मानसिक प्रभाव: याददाश्त कमजोर, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी (ब्रेन फॉग), डिप्रेशन। मांसपेशियों में दर्द: जोड़ों और मांसपेशियों में अकड़न। हाइपोथायरॉइडिज्म के दुर्लभ लक्षण मायक्सेडेमा: चेहरे, हाथों और पैरों में सूजन (गंभीर मामला)। आवाज का भारी होना: गले में सूजन के कारण। मासिक धर्म में बदलाव: पीरियड्स अनियमित या भारी होना। बहरापन: सुनने की क्षमता कम होना। हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नता: नसों पर दबाव के कारण। हाइपरथायरॉइडिज्म के सामान्य लक्षण वजन घटना: भूख बढ़ने के बावजूद वजन कम होना। दिल की धड़कन तेज होना: पल्पिटेशन, एरिथमिया। घबराहट और चिड़चिड़ापन: बेचैनी, नींद न आना। हाथों का कांपना: बारीक कंपन। गर्मी लगना: अत्यधिक पसीना, गर्मी सहन न होना। दस्त: पाचन तेज होना। आंखों की समस्या: आंखें बाहर निकलना (ग्रेव्स डिजीज में), ड्राई आइज। हाइपरथायरॉइडिज्म के दुर्लभ लक्षण थायरॉइड स्टॉर्म: अचानक बुखार, तेज धड़कन, भ्रम – यह एक मेडिकल इमरजेंसी है। हड्डियों का कमजोर होना: ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा। त्वचा में बदलाव: पैरों के निचले हिस्से पर लाल, मोटी त्वचा (प्रीटिबियल मायक्सेडेमा)। मासिक धर्म बंद होना: अनियमित पीरियड्स या एमेनोरिया। 3. Detailed Diet Plan (थायरॉइड डाइट: क्या खाएं और क्या न खाएं) थायरॉइड की बीमारी में डाइट का बहुत महत्व है। सही पोषण हार्मोन को संतुलित करने, इम्यूनिटी को मजबूत करने और लक्षणों को कम करने में मदद करता है। नीचे हम आपको भारतीय खाद्य पदार्थों के साथ डिटेल में बता रहे हैं। हाइपोथायरॉइडिज्म के लिए डाइट (क्या खाएं) आयोडीन युक्त आहार: आयोडीन थायरॉइड हार्मोन बनाने के लिए जरूरी है। लेकिन ध्यान रखें, ज्यादा आयोडीन भी नुकसानदायक हो सकता है। आयोडीन युक्त नमक (संतुलित मात्रा में), समुद्री शैवाल (सीवीड), मछली, अंडे, दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स खाएं। सेलेनियम: यह थायरॉइड हार्मोन को एक्टिव करने में मदद करता है। ब्राजील नट्स (रोज 1-2), सूरजमुखी के बीज, मछली (टूना, सार्डिन), अंडे, चिकन, और मशरूम खाएं। जिंक: हार्मोन उत्पादन के लिए जरूरी। कद्दू के बीज, चने, दालें, नट्स, सीफूड (झींगा, केकड़ा), और लीन मीट खाएं। फाइबर युक्त आहार: कब्ज से बचने के लिए। साबुत अनाज (जई, ब्राउन राइस, बाजरा), फल (सेब, नाशपाती, जामुन), सब्जियां (पालक, ब्रोकली, गाजर), और दालें खाएं। एंटी-इंफ्लेमेटरी फूड्स: सूजन कम करने के लिए। हल्दी, अदरक, हरी पत्तेदार सब्जियां, जैतून का तेल, और ओमेगा-3 फैटी एसिड (अलसी के बीज, चिया सीड्स, अखरोट) शामिल करें। प्रोटीन: मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है। दालें, चना, सोया, पनीर, दूध, अंडे, चिकन, मछली खाएं। हाइपोथायरॉइडिज्म में क्या न खाएं (Avoid List) गोइट्रोजेनिक फूड्स: ये थायरॉइड हार्मोन के उत्पादन को बाधित कर सकते हैं। इन्हें कच्चा न खाएं, बल्कि पकाकर या भाप में पकाकर खाएं। गोभी, ब्रोकली, फूलगोभी, केल, पत्तागोभी, ब्रसेल्स स्प्राउट्स, शलजम, सोया प्रोडक्ट्स (टोफू, सोया मिल्क) को सीमित मात्रा में लें। प्रोसेस्ड फूड्स: पैकेज्ड स्नैक्स, फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक्स – इनमें ट्रांस फैट और शुगर होता है, जो सूजन बढ़ाते हैं। शुगर और रिफाइंड कार्ब्स: मिठाई, सफेद ब्रेड, पास्ता, केक – ब्लड शुगर को बिगाड़ते हैं और थकान बढ़ाते हैं। कैफीन: चाय, कॉफी – थायरॉइड दवा (जैसे लेवोथायरोक्सिन) के अवशोषण को कम कर सकते हैं। दवा लेने के 30-60 मिनट बाद ही चाय/कॉफी पिएं। शराब और धूम्रपान: ये थायरॉइड फंक्शन को खराब करते हैं और दवा की प्रभावशीलता को घटाते हैं। हाइपरथायरॉइडिज्म के लिए डाइट (क्या खाएं) कैलोरी और प्रोटीन बढ़ाएं: तेज मेटाबॉलिज्म के कारण वजन घटता है, इसलिए प्रोटीन रिच फूड्स (दालें, पनीर, अंडे, चिकन, मछली) और हेल्दी फैट (नट्स, एवोकाडो, घी) खाएं। कैल्शियम और विटामिन डी: हड्डियों की कमजोरी से बचने के लिए। दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां, बादाम खाएं। धूप में बैठें। एंटी-थायरॉइड फूड्स (गोइट्रोजेनिक): हाइपरथायरॉइडिज्म में ये फायदेमंद हो सकते हैं। पकी हुई गोभी, ब्रोकली, फूलगोभी, शलजम, सोया (सीमित मात्रा में) खाएं। मैग्नीशियम: दिल की धड़कन को शांत करता है। केला, पालक, कद्दू के बीज, डार्क चॉकलेट खाएं। हाइड्रेशन: पानी, नारियल पानी, हर्बल टी (कैमोमाइल, पेपरमिंट) पिएं। हाइपरथायरॉइडिज्म में क्या न खाएं आयोडीन युक्त आहार: समुद्री शैवाल, आयोडीन युक्त नमक, सीफूड (झींगा, केकड़ा) – इनसे हार्मोन और बढ़ सकता है। कैफीन और उत्तेजक पदार्थ: चाय, कॉफी, एनर्जी ड्रिंक्स – दिल की धड़कन और घबराहट बढ़ाते हैं। शुगर और रिफाइंड फूड्स: ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव और एनर्जी की कमी। शराब और धूम्रपान: थायरॉइड स्टॉर्म का खतरा बढ़ाते हैं। थायरॉइड के लिए नमूना डाइट चार्ट (भारतीय) समय हाइपोथायरॉइडिज्म हाइपरथायरॉइडिज्म सुबह (7 बजे) गुनगुना पानी + नींबू, 1 ब्राजील नट गुनगुना पानी + नींबू, 1 केला नाश्ता (8 बजे) ओट्स/दलिया + दूध + अखरोट + सेब 2 अंडे का आमलेट + पालक + ब्राउन ब्रेड दोपहर (1 बजे) रोटी + दाल + हरी सब्जी + सलाद + दही ब्राउन राइस + चिकन/पनीर + ब्रोकली + सलाद शाम (4 बजे) मुट्ठी भर कद्दू के बीज + हर्बल टी नारियल पानी + 1 मुट्ठी बादाम रात (7 बजे) ग्रिल्ड मछली/चिकन + सलाद + सूप दाल + रोटी + लौकी की सब्जी + सलाद सोने से पहले 1 गिलास गर्म दूध + हल्दी 1 गिलास गर्म दूध + हल्दी 4. Medical Management (दवाइयां और इलाज) थायरॉइड का इलाज डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए। यहां हम आपको सामान्य दवाइयों और उनके काम करने के तरीके के बारे में शैक्षिक जानकारी दे रहे हैं। हाइपोथायरॉइडिज्म की दवाएं लेवोथायरोक्सिन (Levothyroxine): यह सबसे आम दवा है। यह सिंथेटिक T4 हार्मोन है, जो शरीर में थायरॉइड हार्मोन की कमी को पूरा करता है। इसे खाली पेट, सुबह उठने के बाद कम से कम 30-60 मिनट पहले लेना चाहिए। कैल्शियम, आयरन, या कैफीन के साथ न लें। लियोथायरोनिन (Liothyronine): यह सिंथेटिक T3 हार्मोन है, जो कभी-कभी लेवोथायरोक्सिन के साथ दिया जाता है, खासकर जब T3 का स्तर कम हो। हाइपरथायरॉइडिज्म की दवाएं एंटी-थायरॉइड दवाएं: जैसे मेथीमाजोल (Methimazole) या प्रोपाइलथायोरासिल (PTU)। ये थायरॉइड ग्रंथि को हार्मोन बनाने से रोकती हैं। बीटा-ब्लॉकर्स: जैसे प्रोप्रानोलोल (Propranolol)। ये दिल की धड़कन, घबराहट और हाथों के कंपन को कम करते हैं, लेकिन थायरॉइड हार्मोन के स्तर को नहीं बदलते। रेडियोएक्टिव आयोडीन थेरेपी: इसमें रेडियोएक्टिव आयोडीन की गोली दी जाती है, जो थायरॉइड ग्रंथि के अतिरिक्त कोशिकाओं को नष्ट कर देती है। इसके बाद अक्सर हाइपोथायरॉइडिज्म हो जाता है, जिसके लिए लेवोथायरोक्सिन लेनी पड़ती है। सर्जरी (थायरॉइडेक्टॉमी): थायरॉइड ग्रंथि को पूरी तरह या आंशिक रूप से हटा दिया जाता है। यह ग्रेव्स डिजीज, बड़े नोड्यूल्स या कैंसर में किया जाता है। हाशिमोटो थायरॉइडिटिस का इलाज यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें इम्यून सिस्टम थायरॉइड पर हमला करता है। इसका कोई सीधा इलाज नहीं है, लेकिन लेवोथायरोक्सिन से हार्मोन की कमी को पूरा किया जाता है। एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट और तनाव प्रबंधन से लक्षणों को कम किया जा सकता है। 5. Proven Home Remedies & Lifestyle Changes (सिद्ध घरेलू उपाय और जीवनशैली में बदलाव) घरेलू उपाय (प्राकृतिक तरीके) अश्वगंधा: यह एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है जो थायरॉइड हार्मोन को संतुलित करने और तनाव कम करने में मदद करती है। हाइपोथायरॉइडिज्म में फायदेमंद है, लेकिन हाइपरथायरॉइडिज्म में सावधानी बरतें। डॉक्टर से सलाह लें। हल्दी वाला दूध: हल्दी में करक्यूमिन होता है, जो सूजन कम करता है और इम्यूनिटी को मजबूत करता है। रात को सोने से पहले पिएं। अदरक और नींबू की चाय: अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। यह पाचन सुधारता है और थायरॉइड फंक्शन को सपोर्ट करता है। त्रिफला: यह आयुर्वेदिक मिश्रण कब्ज और पाचन संबंधी समस्याओं में मदद करता है, जो हाइपोथायरॉइडिज्म में आम हैं। कोकोनट ऑयल: इसमें मीडियम-चेन ट्राइग्लिसराइड्स (MCTs) होते हैं, जो मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करते हैं। खाना पकाने में इस्तेमाल करें या 1 चम्मच रोज लें। जीवनशैली में बदलाव नियमित व्यायाम: हाइपोथायरॉइडिज्म में हल्का व्यायाम (योग, वॉक, स्विमिंग) मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है। हाइपरथायरॉइडिज्म में हल्का व्यायाम (जैसे ताई ची, वॉक) घबराहट कम करता है। जोरदार व्यायाम से बचें। तनाव प्रबंधन: तनाव से कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो थायरॉइड फंक्शन को बाधित करता है। मेडिटेशन, डीप ब्रीदिंग, और प्राणायाम (अनुलोम-विलोम) करें। नींद: रोज 7-8 घंटे की नींद लें। नींद की कमी से हार्मोन असंतुलन बढ़ता है। दवा समय पर लें: थायरॉइड की दवा हमेशा एक ही समय पर, खाली पेट लें। कैल्शियम, आयरन, या फाइबर सप्लीमेंट्स के साथ कम से कम 4 घंटे का अंतर रखें। धूप में बैठें: विटामिन डी की कमी थायरॉइड से जुड़ी है। रोज 15-20 मिनट धूप में बैठें। 6. Impact on Mental Health and Daily Life (मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव) थायरॉइड सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी गहराई से प्रभावित करता है। हाइपोथायरॉइडिज्म का मानसिक प्रभाव डिप्रेशन और उदासी: हार्मोन की कमी से ब्रेन के न्यूरोट्रांसमीटर (जैसे सेरोटोनिन) प्रभावित होते हैं, जिससे डिप्रेशन हो सकता है। ब्रेन फॉग: याददाश्त कमजोर होना, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, और मानसिक थकान। चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स: छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना या रोना आना। सामाजिक अलगाव: थकान और मूड खराब होने के कारण लोगों से मिलना-जुलना कम हो जाता है। हाइपरथायरॉइडिज्म का मानसिक प्रभाव चिंता और घबराहट: लगातार बेचैनी, पैनिक अटैक का खतरा। अनिद्रा: नींद न आना या बार-बार जागना। चिड़चिड़ापन और आक्रामकता: छोटी बातों पर गुस्सा फूटना। मैनिया जैसे लक्षण: अत्यधिक उत्तेजना, बातें करने की तेज गति, और जोखिम भरा व्यवहार (गंभीर म

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