tuneup-d capsule sr - Uses, Price and Side Effects

tuneup-d capsule sr: Uses in Hindi (Fayde), Price, Side Effects & Substitutes

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🏭 Kee Pharma 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 14, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is tuneup-d capsule sr used for? (Quick Answer)

🩺 Primary Use:
tuneup-d capsule sr (manufactured by Kee Pharma) is a highly effective medicine primarily used for the treatment of gastro intestinal. It helps in relieving symptoms and improving your overall health. Find the complete list of tuneup-d capsule sr uses in Hindi, alternatives, price in India, and dosage on SaathiMed below.
🧪 Active Ingredient & Working:
It contains Domperidone (10mg) + Rabeprazole (20mg) which works by treating the underlying condition effectively.
⚠️ Safety Warning:
Always consult your doctor before using this medicine, especially to check if it is safe during pregnancy or if you suffer from liver or kidney issues.

🇮🇳 tuneup-d capsule sr के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

tuneup-d capsule sr का उपयोग मुख्य रूप से gastro intestinal और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Domperidone (10mg) + Rabeprazole (20mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? The first generic medicine was introduced in India in 1970 after the Patents Act was amended.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Domperidone (10mg) + Rabeprazole (20mg)
Manufacturer / BrandKee Pharma
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassGASTRO INTESTINAL
Action Class
Prescription Required✓ Yes (Schedule H Drug)
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Onset of Action:
30 to 60 minutes
Duration:
6 to 8 hours
Habit Forming:
No (Non-addictive)
Food:
Take after meal

💊 tuneup-d capsule sr Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

💡 How to Take tuneup-d capsule sr (Dosage & Khane ka tarika)

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💡 Expert Tips for Best Results

  • Follow the prescription: Always use tuneup-d capsule sr exactly as prescribed by your healthcare provider. Do not alter the dosage yourself.
  • Check Expiry: Never consume expired medicines. Always double-check the manufacturing and expiry date on the packaging before use.
  • Storage: Store the medicine in a cool, dry place away from direct sunlight and out of reach of children.
  • Report Side Effects: If you experience severe allergic reactions, swelling, or breathing issues after taking tuneup-d capsule sr, seek emergency medical help immediately.
  • Don't self-medicate: Do not share this medicine with others even if their symptoms seem similar to yours.

⚠️ tuneup-d capsule sr Side Effects (Nuksan) & Precautions

Common and serious side effects may include:

  • Diarrhea
  • Stomach pain
  • Dryness in mouth
  • Headache
  • Dizziness
  • Flatulence
  • Weakness
  • Flu-like symptoms

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🛑 Myths vs. Facts about tuneup-d capsule sr

  • Myth: Generic substitutes of tuneup-d capsule sr are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Domperidone (10mg) + Rabeprazole (20mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of tuneup-d capsule sr can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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Complete Guide to Diabetes Diet Plan - 07-06-2026

डायबिटीज डाइट प्लान: एक संपूर्ण गाइड (Diabetes Diet Plan: A Complete Guide) डायबिटीज (मधुमेह) एक ऐसी बीमारी है जो आज के समय में भारत में तेज़ी से फैल रही है। इसे "साइलेंट किलर" भी कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण अक्सर धीरे-धीरे नज़र आते हैं। सही डाइट और जीवनशैली से इसे कंट्रोल किया जा सकता है। इस गाइड में हम आपको डायबिटीज के हर पहलू को विस्तार से समझाएंगे—बीमारी कैसे होती है, इसके लक्षण, सही खान-पान, दवाइयां, घरेलू उपाय, और मानसिक स्वास्थ्य पर इसका असर। यह गाइड पूरी तरह SEO-optimized है और भारतीय पाठकों के लिए हिंग्लिश (Hinglish) में लिखी गई है। 1. गहरी भूमिका और बीमारी का तंत्र (Deep Introduction & Disease Mechanism) डायबिटीज तब होती है जब आपका शरीर इंसुलिन (Insulin) नामक हार्मोन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता या पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता। इंसुलिन अग्न्याशय (Pancreas) में बनता है और इसका काम है ग्लूकोज (Glucose) को खून से कोशिकाओं तक पहुंचाना ताकि वह ऊर्जा में बदल सके। कैसे होती है बीमारी? टाइप 1 डायबिटीज: यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है जहां शरीर की इम्यून सिस्टम अग्न्याशय की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं (बीटा कोशिकाओं) पर हमला करती है। इससे इंसुलिन का उत्पादन लगभग बंद हो जाता है। यह आमतौर पर बचपन या किशोरावस्था में शुरू होता है। टाइप 2 डायबिटीज: यह सबसे आम प्रकार है (भारत में 90% से अधिक मामले)। इसमें शरीर इंसुलिन का विरोध करने लगता है (इंसुलिन रेजिस्टेंस) या पर्याप्त इंसुलिन नहीं बनाता। मोटापा, गलत खान-पान, और शारीरिक निष्क्रियता इसके मुख्य कारण हैं। गर्भकालीन डायबिटीज (Gestational Diabetes): गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलावों के कारण ब्लड शुगर बढ़ जाता है। यह आमतौर पर बच्चे के जन्म के बाद ठीक हो जाता है, लेकिन बाद में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ा देता है। शरीर के अंदर क्या होता है? जब आप खाना खाते हैं, तो कार्बोहाइड्रेट ग्लूकोज में टूट जाता है। ग्लूकोज खून में आता है और इंसुलिन इसे कोशिकाओं में ले जाने का काम करता है। डायबिटीज में यह प्रक्रिया बाधित होती है, जिससे खून में ग्लूकोज जमा हो जाता है (हाइपरग्लाइसेमिया)। लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से नसों, किडनी, आंखों, और हृदय को नुकसान पहुंच सकता है। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Common AND Rare Symptoms) डायबिटीज के लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं, इसलिए कई लोगों को पता ही नहीं चलता। यहां हम आम और कम ज्ञात लक्षणों को विस्तार से बता रहे हैं। सामान्य लक्षण (Common Symptoms): बार-बार पेशाब आना (Polyuria): खासकर रात में। शरीर अतिरिक्त ग्लूकोज को पेशाब के जरिए बाहर निकालने की कोशिश करता है। अत्यधिक प्यास लगना (Polydipsia): बार-बार पेशाब आने से शरीर डिहाइड्रेट हो जाता है, जिससे प्यास बढ़ती है। भूख का अधिक लगना (Polyphagia): कोशिकाओं तक ग्लूकोज नहीं पहुंचने से शरीर को ऊर्जा नहीं मिलती, जिससे भूख लगती है। अचानक वजन कम होना: खासकर टाइप 1 डायबिटीज में, शरीर ऊर्जा के लिए मांसपेशियों और वसा को तोड़ने लगता है। थकान और कमजोरी: शरीर में ग्लूकोज का सही उपयोग न होने से ऊर्जा की कमी होती है। धुंधला दिखना (Blurry Vision): हाई ब्लड शुगर आंखों के लेंस में तरल पदार्थ को प्रभावित करता है, जिससे दृष्टि धुंधली हो जाती है। घाव का धीरे-भरना: हाई शुगर रक्त प्रवाह और इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है, जिससे घाव जल्दी नहीं भरते। बार-बार संक्रमण होना: जैसे मूत्र मार्ग संक्रमण (UTI), त्वचा संक्रमण, या फंगल इंफेक्शन। दुर्लभ या कम ज्ञात लक्षण (Rare Symptoms): पैरों में जलन या झुनझुनी (Peripheral Neuropathy): "पैर में जलन" या "सुन्नपन" महसूस होना। यह नसों को नुकसान का संकेत है। त्वचा का काला पड़ना (Acanthosis Nigricans): गर्दन, बगल, या जांघों के आसपास त्वचा मोटी और काली हो जाती है। यह इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत है। यौन समस्याएं: पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन, महिलाओं में योनि का सूखापन या संक्रमण। मसूड़ों की समस्या: मसूड़ों में सूजन, खून आना, या दांतों का ढीला होना। हाथों-पैरों में ठंडक या सुन्नपन: खासकर टाइप 2 डायबिटीज में। बार-बार फंगल इंफेक्शन: जैसे मुंह में थ्रश (Candidiasis) या त्वचा पर खुजली। चेतावनी: अगर आपको ये लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डायबिटीज का जल्दी पता लगना बहुत जरूरी है। 3. विस्तृत डाइट प्लान: क्या खाएं और क्या न खाएं (Detailed Diet Plan: Kya Khaye and Kya Na Khaye) डायबिटीज डाइट का मतलब भूखा रहना नहीं है। इसका मतलब है सही चीज़ों को सही मात्रा में खाना। भारतीय खानपान में कई ऐसी चीज़ें हैं जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करती हैं। यहां हम एक पूरा डाइट प्लान दे रहे हैं। क्या खाएं (Kya Khaye) – ब्लड शुगर कंट्रोल करने वाले फूड्स: अनाज और दालें (Grains & Lentils): साबुत अनाज (Whole Grains): जैसे ब्राउन राइस, जई (Oats), क्विनोआ (Quinoa), और ज्वार (Sorghum)। ये फाइबर से भरपूर होते हैं और धीरे-धीरे ग्लूकोज छोड़ते हैं। दालें: मूंग दाल, मसूर दाल, चना दाल। प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत। रोटी: गेहूं की रोटी की जगह बाजरा, रागी (Finger Millet), या जौ (Barley) की रोटी खाएं। सब्जियां (Vegetables): हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक, मेथी, सरसों का साग। ये कैलोरी में कम और पोषक तत्वों में भरपूर होती हैं। क्रूसिफेरस सब्जियां: ब्रोकली, फूलगोभी, पत्ता गोभी। अन्य सब्जियां: करेला (Bitter Gourd), लौकी (Bottle Gourd), तोरी (Zucchini), शिमला मिर्च, और खीरा। जड़ वाली सब्जियां (सीमित मात्रा में): गाजर, चुकंदर (Beetroot) – इनमें नेचुरल शुगर होती है, इसलिए संयम से खाएं। फल (Fruits): कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फल: जामुन, सेब, नाशपाती, संतरा, अमरूद, कीवी, और बेरीज (स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी)। आम, केला, अंगूर, और चीकू: इनमें शुगर अधिक होती है, इसलिए बहुत कम मात्रा में खाएं या डॉक्टर से पूछकर खाएं। प्रोटीन (Protein): दालें और बीन्स: राजमा, छोले (सीमित मात्रा में), सोयाबीन। अंडे: प्रोटीन का अच्छा स्रोत। मछली: खासकर सैल्मन, मैकेरल (सालमन, बांगड़ा) – ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर। चिकन (बिना त्वचा के): ग्रिल या उबालकर खाएं। पनीर और दही: कम वसा वाला पनीर और दही (बिना मीठा) खाएं। डेयरी (Dairy): दूध: बिना मीठा या कम वसा वाला दूध। दही: प्रोबायोटिक्स से भरपूर, पाचन के लिए अच्छा। मक्खन या घी: सीमित मात्रा में (1-2 चम्मच रोजाना)। नट्स और बीज (Nuts & Seeds): बादाम, अखरोट, पिस्ता, और काजू: मुट्ठी भर (लगभग 10-12) रोजाना। अलसी के बीज (Flaxseeds), चिया सीड्स, और सूरजमुखी के बीज: फाइबर और ओमेगा-3 के लिए अच्छे। पेय पदार्थ (Beverages): पानी: दिन में कम से कम 8-10 गिलास। ग्रीन टी: एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर, ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद करती है। नारियल पानी: बिना मीठा, इलेक्ट्रोलाइट्स के लिए अच्छा। सब्जी का सूप: बिना क्रीम के। क्या न खाएं (Kya Na Khaye) – बचने के लिए फूड्स: रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट: सफेद चावल, मैदा (White Flour), ब्रेड, पास्ता, और नूडल्स। शक्कर और मीठी चीज़ें: चीनी, मिठाई (गुलाब जामुन, जलेबी, लड्डू), कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस, और आइसक्रीम। तले हुए खाद्य पदार्थ: समोसा, पकौड़ा, फ्रेंच फ्राइज, और भुजिया। फास्ट फूड: बर्गर, पिज्जा, और चाउमीन। अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थ: अचार, पापड़, और प्रोसेस्ड मीट (सॉसेज, बेकन)। अल्कोहल: खासकर बीयर और मीठी वाइन। अगर पीना है तो डॉक्टर से सलाह लें। फलों का जूस: भले ही ताजा हो, लेकिन इसमें फाइबर नहीं होता और शुगर तेज़ी से बढ़ती है। फल को पूरा खाएं। एक दिन का सैंपल डाइट प्लान (Sample Daily Diet Plan): समय भोजन सुबह (7:00 AM) 1 गिलास गुनगुना पानी + 1 चम्मच मेथी दाना (भिगोया हुआ) या 1 कप ग्रीन टी नाश्ता (8:00 AM) 1 कटोरी ओट्स या 2 बाजरे की रोटी + 1 कटोरी सब्जी + 1 अंडा उबला मिड-मॉर्निंग (10:30 AM) 1 सेब या 1 मुट्ठी बादाम दोपहर का खाना (1:00 PM) 1 कटोरी ब्राउन राइस + 1 कटोरी दाल + 1 कटोरी सब्जी + हरी सलाद शाम का नाश्ता (4:00 PM) 1 कप दही या 1 कप सब्जी का सूप रात का खाना (7:00 PM) 2 रोटी (गेहूं या रागी) + 1 कटोरी सब्जी + 1 कटोरी दाल सोने से पहले (9:30 PM) 1 गिलास दूध (बिना मीठा) + 1/2 चम्मच हल्दी नोट: यह एक सामान्य प्लान है। अपनी बीमारी और शरीर के अनुसार पोर्शन साइज़ और खाने की चीज़ों को डॉक्टर या डायटीशियन से कस्टमाइज़ करवाएं। 4. चिकित्सा प्रबंधन: दवाइयां और उनका काम (Medical Management: Medicines and How They Work) डायबिटीज का इलाज डाइट, एक्सरसाइज, और दवाइयों के संयोजन से होता है। यहां हम आमतौर पर प्रिस्क्राइब की जाने वाली दवाइयों के बारे में शैक्षिक जानकारी दे रहे हैं। ध्यान दें: यह जानकारी केवल शिक्षा के लिए है। कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। टाइप 1 डायबिटीज के लिए: इंसुलिन थेरेपी: टाइप 1 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन नहीं बनाता, इसलिए इंसुलिन इंजेक्शन या पंप के जरिए देना जरूरी है। इंसुलिन कई प्रकार के होते हैं: रैपिड-एक्टिंग इंसुलिन: खाने के तुरंत बाद काम करता है (जैसे लिस्प्रो, एस्पार्ट)। शॉर्ट-एक्टिंग इंसुलिन: खाने से 30 मिनट पहले लगाया जाता है (जैसे रेगुलर इंसुलिन)। इंटरमीडिएट-एक्टिंग इंसुलिन: दिन में दो बार लगाया जाता है (जैसे एनपीएच इंसुलिन)। लॉन्ग-एक्टिंग इंसुलिन: 24 घंटे तक काम करता है (जैसे ग्लार्जिन, डिटेमिर)। टाइप 2 डायबिटीज के लिए: मेटफॉर्मिन (Metformin): यह पहली पसंद की दवा है। यह लीवर में ग्लूकोज उत्पादन को कम करती है और इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाती है। सल्फोनील्यूरिया (Sulfonylureas): जैसे ग्लिपिजाइड, ग्लाइबुराइड। ये अग्न्याशय को अधिक इंसुलिन बनाने के लिए उत्तेजित करती हैं। डीपीपी-4 इनहिबिटर (DPP-4 Inhibitors): जैसे सीटाग्लिप्टिन, विल्डाग्लिप्टिन। ये इंसुलिन स्राव को बढ़ाती हैं और ग्लूकागन को कम करती हैं। एसजीएलटी2 इनहिबिटर (SGLT2 Inhibitors): जैसे डापाग्लिफ्लोज़िन, एम्पाग्लिफ्लोज़िन। ये किडनी के जरिए अतिरिक्त ग्लूकोज को पेशाब में बाहर निकालती हैं। जीएलपी-1 एगोनिस्ट (GLP-1 Agonists): जैसे लिराग्लूटाइड, सेमाग्लूटाइड। ये इंसुलिन बढ़ाती हैं, भूख कम करती हैं, और वजन घटाने में मदद करती हैं। थियाजोलिडाइनडायोन (Thiazolidinediones): जैसे पियोग्लिटाज़ोन। ये इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाती हैं। दवाइयां कैसे काम करती हैं? इंसुलिन बढ़ाना: कुछ दवाएं (जैसे सल्फोनील्यूरिया) अग्न्याशय को अधिक इंसुलिन बनाने के लिए कहती हैं। इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाना: मेटफॉर्मिन और पियोग्लिटाज़ोन कोशिकाओं को इंसुलिन के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती हैं। ग्लूकोज उत्पादन कम करना: मेटफॉर्मिन लीवर में ग्लूकोज उत्पादन को कम करती है। ग्लूकोज उत्सर्जन बढ़ाना: एसजीएलटी2 इनहिबिटर किडनी के जरिए ग्लूकोज को बाहर निकालती हैं। चेतावनी: दवाइयों के साइड इफेक्ट हो सकते हैं (जैसे मेटफॉर्मिन से पेट खराब, सल्फोनील्यूरिया से लो ब्लड शुगर)। डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न बदलें या बंद न करें। 5. सिद्ध घरेलू उपाय और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) डायबिटीज को कंट्रोल करने में घरेलू उपाय और जीवनशैली में बदलाव बहुत मददगार साबित हो सकते हैं। ये उपाय वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हैं और भारतीय घरों में आसानी से उपलब्ध हैं। घरेलू उपाय (Home Remedies): मेथी दाना (Fenugreek Seeds): रात भर 1 चम्मच मेथी दाना पानी में भिगो दें। सुबह खाली पेट पानी समेत पी लें। मेथी में फाइबर और कंपाउंड होते हैं जो ब्लड शुगर को कम करते हैं। करेला (Bitter Gourd): करेले का जूस या सब्जी खाएं। इसमें चारैंटिन (Charantin) नामक तत्व होता है जो ब्लड शुगर को कम करने में मदद करता है। जामुन (Indian Blackberry): जामुन के बीजों को पीसकर पाउडर बना लें और रोजाना 1 चम्मच पानी के साथ लें। जामुन में एंथोसायनिन और एलाजिक एसिड होता है जो इंसुलिन गतिविधि को बढ़ाता है। दालचीनी (Cinnamon): 1/2 चम्मच दालचीनी पाउडर को गुनगुने पानी या चाय में मिलाकर पिएं। यह इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाती है। गिलोय (Giloy): गिलोय की पत्तियों का जूस पिएं। यह इम्यूनिटी बढ़ाता है और ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है। हल्दी (Turmeric): 1 गिलास दूध में 1/2 चम्मच हल्दी मिलाकर पिएं। हल्दी में करक्यूमिन होता है जो सूजन कम करता है और ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है। आंवला (Indian Gooseberry): आंवला का जूस या चूर्ण लें। यह विटामिन सी से भरपूर है और अग्न्याशय की कोशिकाओं को स्वस्थ रखता है। जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes): नियमित व्यायाम: हर दिन कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि करें। जैसे तेज़ चलना, योग, साइकिल चलाना, या तैराकी। यह इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाता है और वजन कम करने में मदद करता है। वजन कम करें: अगर आप अधिक वजन वाले हैं, तो सिर्फ 5-10% वजन कम करने से ब्लड शुगर कंट्रोल में काफी सुधार हो सकता है। तनाव प्रबंधन: तनाव (Stress) ब्लड शुगर को बढ़ाता है। ध्यान (Meditation), प्राणायाम, और गहरी सांस लेने के व्यायाम करें। नींद पूरी करें: हर रात 7-8 घंटे की नींद लें। नींद की कमी से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है। धूम्रपान और शराब छोड़ें: धूम्रपान और शराब डायबिटीज के जोखिम को बढ़ाते हैं और दवाओं के प्रभाव को कम करते हैं। ब्लड शुगर मॉनिटरिंग: नियमित रूप से अपने ब्लड शुगर की जांच करें (खाली पेट और खाने के बाद)। इससे पता चलता है कि आपकी डाइट और दवाइयां कितनी प्रभावी हैं। पैरों की देखभाल: डायबिटीज में पैरों में संक्रमण का खतरा अधिक होता है। रोजाना पैरों को धोएं, सुख

Subah 6 se raat 8 bina khaye driving, diabetes ka level gira aur haath kaapne lage, kya karein?

Yaar aaj pata nahi kya ho gaya mujhe. Subah 6 baje ghar se nikla, shift khatam karke raat 8 baje wapas aaya. Bech mein sirf 2 min ka break liya ek chai ke liye. Par diabetes ka level itna gira ke paseena nikal gaya aur haath kaapne lage. Ekdum ghabrahat si ho gayi. Maine socha nahi tha ki itna zyada asar hoga. Ghar aake dekha to feet mein soojan aur badh gaya. Lagta hai sitting job aur time pe na khana dono mil ke mujhe maar rahe hain. Koi batao, 12 hours driving ke beech mein kya karein? Chai ke alawa kuch aur le jaaun? Main soch raha hoon ab ek dabba bhar ke chana ya roasted mungfali rakh loon gaadi mein. Par kya wo kaafi hoga? Aur edema ke liye koi upay? Doctor ne bola hai salt kam karo, par cab chalao to chai bhi toh leni padti hai. Bada tension hai yaar. Koi haath pakdao.

Bhai, palang se utne ka mann nahi, par ghar ka kharcha kaise chale? Koi dua karo ya naya kaam dhundo!

Doston, aaj subah utha toh mann kiya hi nahi ki palang se utru. Do teen din se ghar ke samne wali dukaan se bhi gurr nahi li, bivi ne hi chai banayi. Usse bhi gila nahi hai, bas... aadmi hoon na, ego hurt hoti hai. Kal raat bivi ne kaha "beta ko school ke liye naye shoes chahiye". 10 haath jod ke bola, "thoda aur time de de". Woh toh chup ho gayi, lekin uski aankhon mein jo dard tha woh dekha maine. Aaj lagta hai khud ko kisi kone mein chhupa loon. Kya pata kya hoga aage? Koi dua karo bhai, ya batao ki is umar mein naya kaam dhudhne ki himmat kaise aati hai? Ghar ka kharcha, bacho ki padhai... sab dimaag mein ghoom raha hai. Thoda sa bhi motivation mile toh batao.

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