Stispas 10mg/150mg Tablet - Uses, Price and Side Effects

Stispas 10mg/150mg Tablet: Uses, Price & Side Effects

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🏭 Biomorph Lifesciences 📦 strip of 10 tablets 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 11, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is Stispas 10mg/150mg Tablet used for? (Quick Answer)

🩺 Primary Use:
Stispas 10mg/150mg Tablet is primarily used for the treatment of .
🧪 Active Ingredient & Working:
It contains Dicyclomine (10mg) + Mefenamic Acid (150mg) which works by treating the underlying condition effectively.
⚠️ Safety Warning:
Always consult your doctor before using this medicine, especially to check if it is safe during pregnancy or if you suffer from liver or kidney issues.
💡 Did You Know? India has the highest number of USFDA-compliant plants outside the USA.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Dicyclomine (10mg) + Mefenamic Acid (150mg)
Manufacturer / BrandBiomorph Lifesciences
Packaging / Formstrip of 10 tablets (Allopathy)
Therapeutic Class
Action Class
Prescription Required✓ Yes (Schedule H Drug)
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture

💊 Stispas 10mg/150mg Tablet Uses in Hindi & English (Ke Fayde)

Detailed medical information is being added to our database.

💡 How to Take Stispas 10mg/150mg Tablet (Khane ka tarika)

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

⚠️ Side Effects of Stispas 10mg/150mg Tablet (Nuksan)

Common and serious side effects may include:

  • Consult your doctor for complete side effect profile.

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

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Medical Note: Always consult your doctor before switching medications. Generic alternatives with same salts are therapeutically equivalent.

📖 Patient Counseling & Warnings

  • 🔹 Do not stop suddenly without consulting your doctor
  • 🔹 Inform your doctor about all other medications you're taking
  • 🔹 Avoid alcohol while taking this medication
  • 🔹 If you miss a dose, take it as soon as you remember
  • 🔹 Seek immediate medical help if you experience severe allergic reactions

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Haath kaampne ka ilaaj? Nimbu paani se fark padta hai ya main galat hoon?

Yaar, aaj subah uthke haath ka kaanpna phir se shuru ho gaya. Bahut dar lagta hai jab yeh tremors aate hain. Pichhle hafte se maine ek chhota sa remedy try kiya hai - subah khali pet thoda sa nimbu paani with a pinch of salt and sugar. Kya isse koi fark padta hai? Ya main kuch aur galat kar raha hoon? Pata nahi, lekin aaj thoda kam laga. Mera liver thoda weak hai, doctor ne bola hai ki withdrawal symptoms normal hain, par jab haath kaampne lagte hain toh lagta hai jaise main phir se gir jaunga. Family bahut support kar rahi hai - meri biwi roz mere saath baithti hai aur beta puchhta hai, "Papa, aap thik ho?" Bahut shame feel hoti hai, yaar. Unke saamne aise kamzor dikhna. Koi batao, yeh tremors kab tak rehte hain? Aur koi natural remedy hai jo safe ho? Main daru ko chhodna chahta hoon, par yeh physical pain aur shame mujhe rok deti hai. Koi experience share karo, please. Bahut akela feel ho raha hai aaj.

Complete Guide to Diabetes Diet Plan - 29-05-2026

डायबिटीज डाइट प्लान: संपूर्ण गाइड (Diabetes Diet Plan: Complete Guide in Hinglish) नमस्ते! अगर आप या आपके परिवार में किसी को डायबिटीज (मधुमेह) है, तो यह गाइड आपके लिए ही है। डायबिटीज कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक लाइफस्टाइल है जिसे सही डाइट, एक्सरसाइज और दवाओं से कंट्रोल किया जा सकता है। इस गाइड में हम आपको हर छोटी-बड़ी बात बताएंगे – क्या खाएं, क्या न खाएं, कैसे शरीर में शुगर बढ़ती है, और कैसे इसे मैनेज करें। यह जानकारी पूरी तरह से SEO-optimized है और भारतीय पाठकों के लिए हिंग्लिश (Hinglish) में लिखी गई है। 1. गहरी परिचय और रोग तंत्र (Deep Introduction & Disease Mechanism) डायबिटीज एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है, जिसमें शरीर में ब्लड शुगर (ग्लूकोज) का लेवल बहुत ज्यादा हो जाता है। यह तब होता है जब पैंक्रियाज (अग्न्याशय) पर्याप्त इंसुलिन नहीं बनाता या शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन का सही से जवाब नहीं देतीं। शरीर के अंदर क्या होता है? (How it happens inside the body?) इंसुलिन का काम: जब आप खाना खाते हैं, तो कार्बोहाइड्रेट ग्लूकोज में टूट जाता है। यह ग्लूकोज ब्लड में आता है। पैंक्रियाज इंसुलिन रिलीज करता है, जो एक चाबी की तरह काम करता है और कोशिकाओं के दरवाजे खोलता है ताकि ग्लूकोज अंदर जा सके और एनर्जी बने। टाइप 1 डायबिटीज: इसमें इम्यून सिस्टम पैंक्रियाज की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं (बीटा कोशिकाओं) पर हमला करता है। इसलिए इंसुलिन बनना बंद हो जाता है। यह ज्यादातर बच्चों और युवाओं में होता है। टाइप 2 डायबिटीज: इसमें शरीर इंसुलिन रेजिस्टेंट हो जाता है – कोशिकाएं इंसुलिन को पहचानती नहीं हैं। पैंक्रियाज पहले ज्यादा इंसुलिन बनाता है, लेकिन धीरे-धीरे थक जाता है। यह 90% मामलों में होता है और मोटापा, खराब डाइट और एक्सरसाइज की कमी से जुड़ा है। गर्भकालीन डायबिटीज (Gestational Diabetes): प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोनल बदलाव से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ जाता है। यह आमतौर पर डिलीवरी के बाद ठीक हो जाता है, लेकिन बाद में टाइप 2 का खतरा बढ़ा देता है। ब्लड शुगर क्यों बढ़ता है? जब इंसुलिन कम होता है या काम नहीं करता, ग्लूकोज कोशिकाओं में नहीं जा पाता और ब्लड में जमा हो जाता है। इससे हाइपरग्लाइसीमिया (हाई ब्लड शुगर) होता है। लंबे समय तक हाई शुगर रहने से नसों, किडनी, आंखों और दिल को नुकसान पहुंचता है। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Common & Rare Symptoms) डायबिटीज के लक्षण धीरे-धीरे आते हैं, खासकर टाइप 2 में। कई लोगों को पता भी नहीं चलता। यहां हर लक्षण को विस्तार से समझिए: सामान्य लक्षण (Common Symptoms) बार-बार पेशाब आना (Polyuria): खासकर रात में। किडनी ज्यादा शुगर को फिल्टर करने के लिए ज्यादा पानी खींचती है। अत्यधिक प्यास लगना (Polydipsia): बार-बार पेशाब से पानी की कमी होती है, जिससे मुंह सूखता है और प्यास बढ़ती है। भूख ज्यादा लगना (Polyphagia): कोशिकाओं को ग्लूकोज नहीं मिलता, तो शरीर सोचता है कि उसे और खाना चाहिए। अचानक वजन कम होना: खासकर टाइप 1 में। शरीर एनर्जी के लिए मांसपेशियों और फैट को तोड़ने लगता है। थकान और कमजोरी: कोशिकाओं में एनर्जी नहीं बनती, इसलिए हर काम में थकान महसूस होती है। धुंधला दिखना (Blurry Vision): हाई शुगर आंखों के लेंस में तरल पदार्थ खींचता है, जिससे फोकस बिगड़ता है। घाव का धीरे भरना: हाई शुगर ब्लड सर्कुलेशन और इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है। बार-बार इंफेक्शन: जैसे यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI), स्किन इंफेक्शन, या फंगल इंफेक्शन (खासकर पैरों के बीच में खुजली)। दुर्लभ या कम ज्ञात लक्षण (Rare Symptoms) पैरों में जलन या झुनझुनी (Peripheral Neuropathy): "पैर में जलन" – यह नसों के डैमेज होने का संकेत है। शुरू में पैरों में सुन्नता या सुई चुभने जैसा महसूस होता है। त्वचा में काले धब्बे (Acanthosis Nigricans): गर्दन, बगल या जांघों के बीच मखमली, काले धब्बे – यह इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत है। बार-बार मसूड़ों में इंफेक्शन: मसूड़ों से खून आना, दांत ढीले होना – डायबिटीज मुंह के बैक्टीरिया को बढ़ाता है। सेक्सुअल डिसफंक्शन: पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन, महिलाओं में योनि सूखापन – यह नसों और ब्लड वेसल्स के डैमेज से होता है। बार-बार भूख लगने के बावजूद वजन बढ़ना: खासकर टाइप 2 में, जब इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण फैट जमा होता है। हाथों और पैरों में सुन्नता (Numbness): यह न्यूरोपैथी का अगला स्टेज है – संवेदना खत्म हो सकती है, जिससे चोट लगने का पता नहीं चलता। 3. विस्तृत डाइट प्लान: क्या खाएं और क्या न खाएं (Detailed Diet Plan: What to Eat & Avoid) डायबिटीज डाइट का मतलब भूखा रहना नहीं है, बल्कि सही फूड चॉइस लेना है। भारतीय खाने में बहुत सारे हेल्दी ऑप्शन हैं। यहां हर चीज का विस्तार से जिक्र है: क्या खाएं (What to Eat – Green List) साबुत अनाज (Whole Grains): ब्राउन राइस, ज्वार, बाजरा, रागी (nachni), ओट्स, क्विनोआ। ये फाइबर से भरपूर होते हैं और धीरे-धीरे शुगर बढ़ाते हैं। दालें और बीन्स: मूंग दाल, चना, राजमा, काबुली चना, सोयाबीन। इनमें प्रोटीन और फाइबर होता है जो शुगर को स्थिर रखता है। हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक, मेथी, सरसों का साग, बथुआ। ये कैलोरी में कम और विटामिन से भरपूर हैं। अन्य सब्जियां: करेला (karela), लौकी (lauki), तोरी, बैंगन, भिंडी, फूलगोभी, गोभी, खीरा, टमाटर। करेला विशेष रूप से ब्लड शुगर कम करने में मदद करता है। फल (सीमित मात्रा में): जामुन, सेब, नाशपाती, अमरूद, पपीता, संतरा, कीवी। केला, आम और अंगूर से बचें या बहुत कम लें। प्रोटीन स्रोत: अंडे, मछली (सैल्मन, सार्डिन), चिकन (बिना त्वचा), पनीर, दही (ग्रीक यॉर्ट), सोया चंक्स। हेल्दी फैट: बादाम, अखरोट, अलसी (flax seeds), चिया सीड्स, जैतून का तेल, सरसों का तेल, नारियल तेल (सीमित)। मसाले और जड़ी-बूटियां: हल्दी, दालचीनी, मेथी दाना, अदरक, लहसुन, जीरा। ये इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाते हैं। पेय पदार्थ: पानी (दिन में 8-10 गिलास), नारियल पानी (बिना चीनी), हर्बल चाय (ग्रीन टी, तुलसी चाय), नींबू पानी (बिना नमक/चीनी)। क्या न खाएं (What to Avoid – Red List) रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट: सफेद चावल, मैदा, सफेद ब्रेड, नूडल्स, पास्ता। ये तुरंत शुगर बढ़ाते हैं। चीनी और मीठी चीजें: मिठाई (गुलाब जामुन, जलेबी, रसगुल्ला), कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस, केक, बिस्कुट, आइसक्रीम। फ्राइड और तला-भुना: समोसा, पकौड़ा, फ्रेंच फ्राइज, चिप्स, भटूरे। ये ट्रांस फैट और कैलोरी से भरे होते हैं। फुल फैट डेयरी: मलाई, क्रीम, फुल क्रीम दूध, मक्खन, घी (सीमित मात्रा में ले सकते हैं)। प्रोसेस्ड मीट: सॉसेज, बेकन, सलामी। इनमें सोडियम और अनहेल्दी फैट होता है। फल (ज्यादा मात्रा में): केला, आम, अंगूर, चीकू, खजूर – इनमें नेचुरल शुगर ज्यादा होती है। अल्कोहल: बीयर, वाइन, शराब – यह ब्लड शुगर को अस्थिर करता है और लिवर को प्रभावित करता है। नमक का अधिक सेवन: अचार, पापड़, चटनी, पैकेज्ड फूड – हाई ब्लड प्रेशर का खतरा। सैंपल डेली डाइट चार्ट (Indian Style) सुबह (6:30-7:00 AM): 1 गिलास गुनगुना पानी + 1 चम्मच मेथी दाना (रात भर भिगोया हुआ) या 1 कप ग्रीन टी। नाश्ता (8:00-9:00 AM): 1 कटोरी ओट्स/दलिया (सब्जियों के साथ) + 1 अंडा उबला या 2 मूंग दाल का चीला + 1 कप दही। मिड-मॉर्निंग (10:30-11:00 AM): 1 सेब या अमरूद + 5-6 बादाम। दोपहर का खाना (1:00-2:00 PM): 1 कटोरी ब्राउन राइस या 2 रोटी (ज्वार/बाजरा) + 1 कटोरी दाल + हरी सब्जी + सलाद (खीरा, टमाटर, प्याज) + 1 कटोरी दही। शाम (4:00-5:00 PM): 1 कप हर्बल चाय + 1 मुट्ठी भुने चने या भेल (बिना चटनी के)। रात का खाना (7:30-8:30 PM): 1 कटोरी सूप (टमाटर/मिक्स वेज) + 1 रोटी (गेहूं) + ग्रिल्ड पनीर/चिकन + सब्जी। रात को सोने से पहले (9:30-10:00 PM): 1 गिलास गर्म दूध (हल्दी के साथ) या 1 कटोरी दही। टिप: खाने के बाद 10-15 मिनट टहलें। इससे शुगर कंट्रोल में रहता है। 4. चिकित्सा प्रबंधन: दवाएं और उनका काम (Medical Management: Medicines & How They Work) डायबिटीज का इलाज डॉक्टर की सलाह से ही करें। यहां केवल शैक्षिक जानकारी दी गई है। दवाएं आमतौर पर टाइप 2 के लिए दी जाती हैं, जबकि टाइप 1 में इंसुलिन जरूरी है। टाइप 2 डायबिटीज की दवाएं मेटफॉर्मिन (Metformin): सबसे आम दवा। यह लिवर से ग्लूकोज बनना कम करता है और कोशिकाओं को इंसुलिन के प्रति संवेदनशील बनाता है। साइड इफेक्ट: पेट खराब, दस्त (शुरू में)। सल्फोनिलयूरिया (Sulfonylureas) – जैसे ग्लिमेपीराइड: ये पैंक्रियाज को ज्यादा इंसुलिन बनाने के लिए उत्तेजित करते हैं। खतरा: हाइपोग्लाइसीमिया (लो शुगर)। डीपीपी-4 इनहिबिटर (DPP-4 Inhibitors) – जैसे सीताग्लिप्टिन: ये इंसुलिन रिलीज को बढ़ाते हैं और ग्लूकागन (शुगर बढ़ाने वाला हार्मोन) को कम करते हैं। एसजीएलटी2 इनहिबिटर (SGLT2 Inhibitors) – जैसे डापाग्लिफ्लोजिन: ये किडनी के जरिए पेशाब में शुगर निकालते हैं। वजन घटाने में भी मदद करते हैं। जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट (GLP-1 Agonists) – जैसे सेमाग्लूटाइड: ये इंसुलिन स्राव बढ़ाते हैं, भूख कम करते हैं और वजन घटाते हैं। इंजेक्शन के रूप में लिया जाता है। टाइप 1 डायबिटीज का इलाज इंसुलिन थेरेपी: यह जरूरी है। इंसुलिन के प्रकार: तेज-अभिनय (लिसप्रो), लंबे समय तक काम करने वाला (ग्लार्गिन)। डॉक्टर दिन में 2-4 बार इंजेक्शन या इंसुलिन पंप लगाने की सलाह देते हैं। मॉनिटरिंग कैसे करें? फास्टिंग ब्लड शुगर: सुबह खाली पेट – 70-130 mg/dL लक्ष्य। पोस्टप्रैंडियल (खाने के 2 घंटे बाद): 180 mg/dL से कम। HbA1c: 3 महीने का औसत शुगर – 7% से कम रखना चाहिए। ध्यान दें: कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह के बिना न लें। हर व्यक्ति की डोज अलग होती है। 5. सिद्ध घरेलू उपचार और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) ये उपाय दवाओं के साथ मिलकर काम करते हैं, लेकिन इन्हें दवा का विकल्प न समझें। घरेलू उपचार (Home Remedies) करेला (Bitter Gourd): इसमें पॉलीपेप्टाइड-पी (पी-इंसुलिन) होता है जो शुगर कम करता है। 1 कटोरी करेले का जूस रोज सुबह पिएं (नमक/चीनी न डालें)। मेथी दाना (Fenugreek Seeds): 1 चम्मच मेथी दाना रात भर पानी में भिगोएं, सुबह खाली पेट चबाकर खाएं। यह इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाता है। दालचीनी (Cinnamon): आधा चम्मच दालचीनी पाउडर रोज खाने में डालें। यह ब्लड शुगर को 10-15% तक कम कर सकता है। जामुन (Indian Blackberry): जामुन के बीजों को पीसकर पाउडर बनाएं और रोज 1 चम्मच पानी के साथ लें। जामुन का फल भी खाएं। एलोवेरा: एलोवेरा जूस (बिना चीनी) आधा कप रोज पिएं। यह पैंक्रियाज की कोशिकाओं को रिपेयर करता है। नीम: नीम की पत्तियों का काढ़ा या 2-3 पत्तियां रोज चबाएं। यह ब्लड शुगर और इंफेक्शन दोनों में मदद करता है। जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes) रोजाना एक्सरसाइज: कम से कम 30 मिनट तेज चलना, योग (सूर्य नमस्कार, कपालभाति), साइकिलिंग या स्विमिंग। एक्सरसाइज से मांसपेशियां ग्लूकोज ज्यादा एब्जॉर्ब करती हैं। वजन कम करें: शरीर के वजन का 5-10% कम करने से इंसुलिन सेंसिटिविटी में बड़ा सुधार होता है। तनाव कम करें: तनाव से कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो शुगर बढ़ाता है। मेडिटेशन, प्राणायाम (अनुलोम-विलोम) करें। नींद पूरी करें: 7-8 घंटे की नींद जरूरी है। नींद की कमी से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है। धूम्रपान और शराब छोड़ें: ये ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाते हैं और डायबिटीज कॉम्प्लिकेशन को बढ़ाते हैं। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Mental Health & Daily Life) डायबिटीज सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण है। इसे समझना जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डायबिटीज डिस्ट्रेस: ब्लड शुगर को लेकर लगातार चिंता, डाइट पर नियंत्रण का दबाव, और दवाओं का पालन करने का तनाव। यह डिप्रेशन और एंग्जायटी का कारण बन सकता है। डिप्रेशन: डायबिटीज के मरीजों में डिप्रेशन का खतरा 2-3 गुना ज्यादा होता है। लक्षण: उदासी, रुचि कम होना, नींद की समस्या। हाइपोग्लाइसीमिया का डर: लो शुगर का डर (जैसे बेहोशी या कंपकंपी) मरीजों को सामाजिक गतिविधियों से दूर कर सकता है। सामाजिक कलंक: कुछ लोग डायबिटीज को कमजोरी या "बुढ़ापे की बीमारी" समझते हैं, जिससे शर्मिंदगी महसूस होती है। दैनिक जीवन पर प्रभाव खाने की योजना: हर भोजन की प्लानिंग करनी पड़ती है। बाहर खाने पर मेनू चेक करना पड़ता है। शारीरिक गतिविधि: एक्सरसाइज का समय निकालना मुश्किल हो सकता है, खासकर कामकाजी लोगों के लिए। यात्रा: दवाएं, इंसुलिन और ब्लड शुगर मॉनिटर हमेशा साथ रखना पड़ता है। टाइम जोन बदलने पर शुगर प्रभावित हो सकता है। काम पर प्रभाव: बार-बार पेशाब या थकान के कारण काम में ध्यान कम लग सकता है। समाधान: परिवार और दोस्तों से बात करें, सपोर्ट ग्रुप जॉइन करें, और मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल से मदद लें। याद रखें, डायबिटीज आपकी पहचान नहीं है – यह सिर्फ एक स्थिति है जिसे मैनेज किया जा सकता है। 7. 10 विस्तृत अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (10 Detailed FAQs) ये सवाल लोग अक्सर गूगल पर सर्च करते हैं। हर सवाल का जवाब विस्तार से दिया गया है। FAQ 1: क्या डायबिटीज में चावल खा सकते हैं? जवाब: हां, लेकिन सीमित मात्रा में और सही तरीके से। सफेद चावल की बजाय ब्राउन राइस, बासमती चावल या उबले चावल का चुनाव करें। 1 कटोरी (150 ग्राम) से ज्यादा न लें। चावल के साथ दाल, सब्जी और दही जरूर लें ताकि फाइबर और प्रोटीन शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाए। FAQ 2: डायबिटीज में कौन से फल नहीं खाने चाहिए? जवाब: जिन फलों में शुगर ज्यादा होती है, उनसे बचें या बहुत कम लें: केला (खासकर पका हुआ), आम, अंगूर, चीकू, लीची, खजूर। सेब, अमरूद, नाशपाती, पपीता, संतरा जैसे फल कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले होते हैं और सुरक्षित हैं। एक बार में 1 फल से ज्यादा न लें। FAQ 3: क्या डायबिटीज में गुड़ या शहद खा सकते हैं? जवाब: नहीं, गुड़ और शहद भ

Bhai onion juice ya minoxidil? Kya hai asli baat? Mera 2 hafte ka experience sun lo! 😭🔥

Bhai onion juice ka koi genuine result hai ya bas social media ka hype hai? Mene kal raat pehli baar lagaya, aankhon mein itna jal raha tha ki lag raha tha koi ro raha hai 😭. 2 hafte se minoxidil use kar raha hu, par side effects ka dar lagta hai. Koi batao, onion juice actually hair regrowth karta hai ya bas basel aur aloe wale influencers ka commission ka scene hai? Mera friend kehta hai "ye sab fake hai, bas bakwas hai", lekin main desperate hu. Hairline pe patches dekh ke dil dukhta hai. College mein "takla" bol ke chidhate hain, ab toh cap pehne bina bahar nikalna mushkil ho gaya hai. Kya koi genuine experience share kar sakta hai? Pls bina sarcasm ke, main seriously try kar raha hu.

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