nithra 10mg tablet - Uses, Price and Side Effects

nithra 10mg tablet: Uses in Hindi (Fayde), Price, Side Effects & Substitutes

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Nitrazepam (10mg) (Click to see all medicines with same salt)
🏭 East West Pharma 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 14, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is nithra 10mg tablet used for? (Quick Answer)

🩺 Primary Use:
nithra 10mg tablet (manufactured by East West Pharma) is a highly effective medicine primarily used for the treatment of neuro cns. It helps in relieving symptoms and improving your overall health. Find the complete list of nithra 10mg tablet uses in Hindi, alternatives, price in India, and dosage on SaathiMed below.
🧪 Active Ingredient & Working:
It contains Nitrazepam (10mg) which works by treating the underlying condition effectively.
⚠️ Safety Warning:
Always consult your doctor before using this medicine, especially to check if it is safe during pregnancy or if you suffer from liver or kidney issues.

🇮🇳 nithra 10mg tablet के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

nithra 10mg tablet का उपयोग मुख्य रूप से neuro cns और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Nitrazepam (10mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? India is the largest provider of generic medicines globally, supplying over 50% of global vaccine demand.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Nitrazepam (10mg)
Manufacturer / BrandEast West Pharma
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassNEURO CNS
Action ClassBenzodiazepines
Prescription Required✓ Yes (Schedule H Drug)
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Onset of Action:
30 to 60 minutes
Duration:
6 to 8 hours
Habit Forming:
No (Non-addictive)
Food:
Take after meal

💊 nithra 10mg tablet Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

💡 How to Take nithra 10mg tablet (Dosage & Khane ka tarika)

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💡 Expert Tips for Best Results

  • Follow the prescription: Always use nithra 10mg tablet exactly as prescribed by your healthcare provider. Do not alter the dosage yourself.
  • Check Expiry: Never consume expired medicines. Always double-check the manufacturing and expiry date on the packaging before use.
  • Storage: Store the medicine in a cool, dry place away from direct sunlight and out of reach of children.
  • Report Side Effects: If you experience severe allergic reactions, swelling, or breathing issues after taking nithra 10mg tablet, seek emergency medical help immediately.
  • Don't self-medicate: Do not share this medicine with others even if their symptoms seem similar to yours.

⚠️ nithra 10mg tablet Side Effects (Nuksan) & Precautions

Common and serious side effects may include:

  • Dizziness
  • Sedation
  • Drowsiness
  • Unsteadiness
  • Impaired coordination
  • Fatigue

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🛑 Myths vs. Facts about nithra 10mg tablet

  • Myth: Generic substitutes of nithra 10mg tablet are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Nitrazepam (10mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of nithra 10mg tablet can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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Belly fat se button khul rahe, rishta bhi gaya haath se! Office chair se pet kaise kam karein?

Yaar seriously ab bahut ho gaya. Bank mein 9 hours baith ke data entry aur customer handling... ghar aake bas let jaana. Belly fat itna badh gaya hai ki shirt ke buttons khul jaate hain. Aaj ek ladki ke ghar rishta lekar gaya, toh papa ne dekha aur seedha pucha "beta gym jaate ho?" Maa ne bada bachaya "office mein time nahi milta" par woh shakal dekh ke samajh gaye. Koi easy solution batao bhai. Main Roti kam kha raha hoon, par kuch fark nahi pad raha. Ek hafte pehle 10 min walk shuru kiya, par aaj subah uthne ka mann nahi kiya. Office mein lift ki jagah stairs use karta hoon, par 3rd floor tak hi. Kya koi gharelu nuskha hai? Ya koi aasan exercise jo office chair mein baith ke kar sakte hain? Please help, warna shadi ka season khatam hone wala hai. 😭

Complete Guide to Anxiety Disorder - 31-05-2026

एंग्ज़ाइटी डिसऑर्डर (Anxiety Disorder) की पूरी गाइड: कारण, लक्षण, इलाज और घरेलू उपाय नमस्कार दोस्तों! आज हम बात करेंगे एक ऐसी बीमारी के बारे में जो आजकल हर दूसरे इंसान को प्रभावित कर रही है – एंग्ज़ाइटी डिसऑर्डर (Anxiety Disorder). ये सिर्फ़ “घबराहट” या “टेंशन” नहीं है, बल्कि एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या है जो आपके शरीर, दिमाग और रोज़मर्रा की ज़िंदगी को पूरी तरह बदल सकती है। इस गाइड में हम इसे हर एंगल से समझेंगे – बीमारी कैसे होती है, इसके लक्षण क्या हैं, क्या खाएं और क्या न खाएं, दवाइयां, घरेलू उपाय, और आपके मन में आने वाले हर सवाल का जवाब। चलिए शुरू करते हैं! 1. गहरी परिचय और रोग तंत्र (Deep Introduction & Disease Mechanism) एंग्ज़ाइटी डिसऑर्डर क्या है? एंग्ज़ाइटी डिसऑर्डर सिर्फ़ सामान्य चिंता नहीं है। यह एक ऐसी स्थिति है जहां आपका दिमाग लगातार “खतरे” के सिग्नल भेजता रहता है, भले ही कोई खतरा न हो। यह आपकी फाइट-या-फ्लाइट (Fight-or-Flight) प्रतिक्रिया का ओवरएक्टिव होना है। शरीर के अंदर क्या होता है? (Disease Mechanism) ब्रेन केमिस्ट्री: आपके दिमाग में अमिग्डाला (Amygdala) नाम का एक हिस्सा होता है जो खतरे को पहचानता है। एंग्ज़ाइटी में यह हिस्सा बहुत ज़्यादा संवेदनशील हो जाता है, जिससे छोटी-छोटी बातों पर भी डर का अहसास होता है। हार्मोन्स का खेल: जब आपको एंग्ज़ाइटी होती है, तो आपका शरीर कोर्टिसोल (Cortisol) और एड्रेनालाईन (Adrenaline) जैसे स्ट्रेस हार्मोन्स छोड़ता है। ये हार्मोन्स दिल की धड़कन तेज़ करते हैं, सांस फूलने लगती है, और मांसपेशियां तन जाती हैं। न्यूरोट्रांसमीटर असंतुलन: दिमाग में सेरोटोनिन (Serotonin), डोपामाइन (Dopamine), और GABA जैसे रसायनों का असंतुलन हो जाता है। GABA आमतौर पर दिमाग को शांत रखता है, लेकिन एंग्ज़ाइटी में इसका स्तर गिर जाता है। जेनेटिक और पर्यावरणीय कारण: अगर परिवार में किसी को एंग्ज़ाइटी है, तो आपको भी होने का खतरा बढ़ जाता है। बचपन का ट्रॉमा, तनावपूर्ण जीवन, या कोई बड़ी घटना (जैसे नौकरी छूटना) भी इसे ट्रिगर कर सकते हैं। सीधी भाषा में: आपका दिमाग एक अलार्म सिस्टम की तरह है जो बिना वजह बजने लगता है, और आपका शरीर हर बार “भागो या लड़ो” मोड में आ जाता है। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Common & Rare Symptoms) सामान्य लक्षण (Common Symptoms) मानसिक लक्षण: बेचैनी, लगातार डर या घबराहट, ध्यान केंद्रित न कर पाना, चिड़चिड़ापन, “कुछ बुरा होने वाला है” का अहसास। शारीरिक लक्षण: दिल की धड़कन तेज़ होना (Palpitations), सीने में जकड़न या दर्द, सांस फूलना, पसीना आना, कांपना (Tremors), मांसपेशियों में तनाव, सिरदर्द, पेट खराब होना (जैसे दस्त या कब्ज)। नींद से जुड़े लक्षण: नींद न आना (Insomnia), बार-बार जागना, बुरे सपने आना। भारतीय संदर्भ में: “सीने में घबराहट”, “गला सूखना”, “हाथ-पैर ठंडे होना”, “बार-बार पेशाब लगना” जैसी शिकायतें आम हैं। दुर्लभ लक्षण (Rare Symptoms) डिपर्सनलाइज़ेशन (Depersonalization): ऐसा महसूस होना जैसे आप अपने शरीर से बाहर हैं या खुद को दूसरे नज़रिए से देख रहे हैं। डिरियलाइज़ेशन (Derealization): दुनिया को “असत्य” या “सपने जैसा” महसूस करना। हाइपरवेंटिलेशन सिंड्रोम: बहुत तेज़ सांस लेने से हाथ-पैर में झुनझुनी, मुंह के आसपास सुन्नता, और चक्कर आना। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं: चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम (IBS) जैसी स्थिति, जहां पेट में दर्द, गैस, या एसिडिटी होती है। स्किन संबंधी समस्याएं: बिना कारण खुजली, रैशेज़, या पसीने से त्वचा में जलन। मांसपेशियों में ऐंठन: जबड़े का जकड़ना (Bruxism), गर्दन या कंधों में अकड़न। नोट: अगर आपको सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, या बेहोशी जैसा महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें – यह हार्ट अटैक या अन्य गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। 3. विस्तृत डाइट प्लान (Detailed Diet Plan) सही खान-पान एंग्ज़ाइटी को कम करने में बहुत मदद करता है। यहां बताया गया है कि क्या खाएं और क्या न खाएं – खासकर भारतीय खाने के हिसाब से। क्या खाएं (Eat These Foods) मैग्नीशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ: मैग्नीशियम नर्वस सिस्टम को शांत करता है। खाएं: पालक (Spinach), मेथी के पत्ते, कद्दू के बीज, बादाम, केला, और डार्क चॉकलेट। ओमेगा-3 फैटी एसिड: ये दिमाग की सूजन कम करते हैं। खाएं: अलसी के बीज (Flaxseeds), चिया सीड्स, अखरोट, और मछली (जैसे सैल्मन या मैकेरल)। शाकाहारियों के लिए अलसी और अखरोट बेस्ट हैं। प्रोबायोटिक्स (Probiotics): आंत और दिमाग का सीधा संबंध है (Gut-Brain Axis)। खाएं: दही, छाछ, किमची, या फर्मेंटेड फूड्स जैसे इडली-डोसा का बैटर। विटामिन B कॉम्प्लेक्स: ये नर्वस सिस्टम को हेल्दी रखता है। खाएं: हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, अंडे (अंडे खाने वालों के लिए), और साबुत अनाज (जैसे ब्राउन राइस, जई)। ट्रिप्टोफैन (Tryptophan): यह सेरोटोनिन बनाने में मदद करता है। खाएं: केला, दूध, पनीर, टोफू, और चना। हर्बल चाय: कैमोमाइल चाय, लैवेंडर चाय, या अश्वगंधा चाय – ये नेचुरल कैल्मिंग एजेंट हैं। पानी: डिहाइड्रेशन एंग्ज़ाइटी को बढ़ा सकता है। दिन में 8-10 गिलास पानी पिएं। क्या न खाएं (Avoid These Foods) कैफीन (Caffeine): चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स, और एनर्जी ड्रिंक्स – ये एंग्ज़ाइटी को ट्रिगर करते हैं। अगर बहुत ज़रूरी हो, तो दिन में एक कप से ज़्यादा न लें। शुगर और प्रोसेस्ड फूड्स: मिठाई, बिस्कुट, पैकेज्ड स्नैक्स, और सोडा – ब्लड शुगर को तेज़ी से बढ़ाते और गिराते हैं, जिससे घबराहट बढ़ती है। शराब (Alcohol): शुरू में शांत कर सकता है, लेकिन बाद में एंग्ज़ाइटी को और बदतर बनाता है। मसालेदार और तला हुआ खाना: जैसे समोसा, पकौड़े, या ज़्यादा मिर्च-मसाले वाली सब्जियां – पाचन खराब कर सकते हैं और एंग्ज़ाइटी बढ़ा सकते हैं। नमक का अधिक सेवन: ब्लड प्रेशर बढ़ाकर एंग्ज़ाइटी को ट्रिगर कर सकता है। अचार, पापड़, और प्रोसेस्ड फूड्स से बचें। नमूना डाइट प्लान (Sample Indian Diet Plan) सुबह (7 AM): 1 गिलास गुनगुना पानी + 4-5 भीगे हुए बादाम। नाश्ता (8 AM): ओट्स या दलिया (दूध और केले के साथ) + 1 कप कैमोमाइल चाय। मिड-मॉर्निंग (11 AM): 1 कटोरी फल (जैसे सेब, पपीता) या मुट्ठी भर अखरोट। दोपहर का खाना (1 PM): 2 रोटी (गेहूं या ज्वार) + हरी सब्जी (जैसे पालक या मेथी) + दाल + 1 कटोरी दही। शाम का नाश्ता (4 PM): 1 कप हर्बल चाय + मूंगफली या भुने चने। रात का खाना (7 PM): ब्राउन राइस या क्विनोआ + सब्जी + छाछ। सोने से पहले (9 PM): 1 गिलास गर्म दूध (हल्दी के साथ) या अश्वगंधा पाउडर मिलाकर। 4. चिकित्सा प्रबंधन (Medical Management) ध्यान दें: यह केवल शैक्षिक जानकारी है। कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। आमतौर पर दी जाने वाली दवाएं और उनका काम SSRIs (Selective Serotonin Reuptake Inhibitors): जैसे एस्सिटालोप्राम (Escitalopram) या फ्लुओक्सेटीन (Fluoxetine)। ये दिमाग में सेरोटोनिन का स्तर बढ़ाते हैं, जिससे मूड बेहतर होता है और एंग्ज़ाइटी कम होती है। आमतौर पर 2-4 हफ्तों में असर दिखता है। SNRIs (Serotonin-Norepinephrine Reuptake Inhibitors): जैसे वेनलाफैक्सीन (Venlafaxine) या डुलोक्सेटीन (Duloxetine)। ये सेरोटोनिन और नॉरपाइनफ्रिन दोनों को बढ़ाते हैं, जो एंग्ज़ाइटी और तनाव दोनों में मदद करते हैं। बेंजोडायजेपाइन (Benzodiazepines): जैसे अल्प्राजोलम (Alprazolam) या क्लोनाज़ेपम (Clonazepam)। ये तुरंत असर करते हैं (15-30 मिनट में), लेकिन इनकी लत लग सकती है। इसलिए डॉक्टर इन्हें कम समय के लिए देते हैं। बीटा-ब्लॉकर्स (Beta-Blockers): जैसे प्रोप्रानोलोल (Propranolol)। ये दिल की धड़कन और हाथों के कांपने जैसे शारीरिक लक्षणों को कम करते हैं, खासकर परफॉरमेंस एंग्ज़ाइटी (जैसे स्टेज पर जाने का डर) में। बसपिरोन (Buspirone): यह एक नॉन-एडिक्टिव दवा है जो एंग्ज़ाइटी के लिए दी जाती है, लेकिन असर होने में 2-3 हफ्ते लगते हैं। थेरेपी (Therapy) CBT (Cognitive Behavioral Therapy): यह सबसे प्रभावी थेरेपी है। इसमें आपको सिखाया जाता है कि कैसे नकारात्मक विचारों को पहचानें और बदलें। एक्सपोज़र थेरेपी: धीरे-धीरे उन चीज़ों का सामना करना जिनसे आप डरते हैं, ताकि डर कम हो। माइंडफुलनेस-बेस्ड थेरेपी: ध्यान और सांस पर फोकस करके वर्तमान में जीना सीखना। 5. सिद्ध घरेलू उपाय और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) घरेलू उपाय (Home Remedies) गहरी सांस लेना (Deep Breathing): 4 सेकंड सांस लें, 7 सेकंड रोकें, 8 सेकंड छोड़ें। यह “4-7-8” तकनीक नर्वस सिस्टम को शांत करती है। अश्वगंधा (Ashwagandha): यह एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है जो कोर्टिसोल के स्तर को कम करती है। 1 चम्मच पाउडर गर्म दूध में मिलाकर पिएं। ब्राह्मी (Brahmi): यह दिमाग को शांत करती है और याददाश्त बढ़ाती है। ब्राह्मी का तेल सिर पर लगाएं या इसकी चाय पिएं। जटामांसी (Jatamansi): यह नींद और एंग्ज़ाइटी दोनों में मदद करती है। इसका पाउडर शहद के साथ लें। गर्म पानी से स्नान: एप्सम सॉल्ट (Epsom Salt) डालकर नहाएं – मैग्नीशियम त्वचा के ज़रिए अवशोषित होता है और मांसपेशियों को आराम देता है। अरोमाथेरेपी: लैवेंडर, रोज़मेरी, या कैमोमाइल तेल की कुछ बूंदें डिफ्यूज़र में डालें या रूमाल पर लगाकर सूंघें। जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes) नियमित व्यायाम: रोज़ 30 मिनट तेज़ चलना, योग, या जॉगिंग करें। एक्सरसाइज एंडोर्फिन (खुशी के हार्मोन) छोड़ती है। योग और मेडिटेशन: “शवासन” और “अनुलोम-विलोम” प्राणायाम बहुत फायदेमंद हैं। रोज़ 10 मिनट मेडिटेशन करें। नींद का नियमित शेड्यूल: रोज़ एक ही समय पर सोएं और उठें। सोने से 1 घंटे पहले मोबाइल/लैपटॉप बंद कर दें। सोशल कनेक्शन: दोस्तों या परिवार से बात करें। अकेलापन एंग्ज़ाइटी को बढ़ाता है। टाइम मैनेजमेंट: काम का बोझ कम करने के लिए टू-डू लिस्ट बनाएं और प्राथमिकता तय करें। स्क्रीन टाइम कम करें: सोशल मीडिया और न्यूज़ देखने से एंग्ज़ाइटी बढ़ सकती है। दिन में 1-2 घंटे से ज़्यादा स्क्रीन न देखें। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Mental Health & Daily Life) मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव लगातार थकान: दिमाग हमेशा अलर्ट रहता है, जिससे मानसिक थकावट होती है। डिप्रेशन का खतरा: एंग्ज़ाइटी और डिप्रेशन अक्सर साथ-साथ चलते हैं। लगातार डर से उदासी और निराशा बढ़ सकती है। आत्मविश्वास की कमी: “मैं कुछ नहीं कर सकता” जैसे विचार आने लगते हैं। सोशल फोबिया: लोगों से मिलने या बात करने से डर लगने लगता है, जिससे अकेलापन बढ़ता है। दैनिक जीवन पर प्रभाव काम पर असर: ध्यान केंद्रित न कर पाने से प्रोडक्टिविटी गिर जाती है। बार-बार छुट्टी लेनी पड़ सकती है। रिश्तों पर असर: चिड़चिड़ापन और गुस्से से परिवार और दोस्तों से दूरी बढ़ सकती है। शारीरिक स्वास्थ्य पर असर: लगातार तनाव से हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी, और पाचन समस्याएं हो सकती हैं। सामाजिक जीवन: पार्टी, शादी, या मीटिंग में जाने से बचने लगते हैं, जिससे सामाजिक अलगाव बढ़ता है। 7. 10 विस्तृत FAQs (लंबी-टेल सर्च क्वेरीज़ के लिए) 1. क्या एंग्ज़ाइटी डिसऑर्डर पूरी तरह ठीक हो सकता है? हाँ, एंग्ज़ाइटी डिसऑर्डर पूरी तरह ठीक हो सकता है, लेकिन इसमें समय लगता है। सही थेरेपी (जैसे CBT), दवाइयां, और जीवनशैली में बदलाव से 80-90% लोगों में लक्षण कम हो जाते हैं। कुछ लोगों को लंबे समय तक दवा लेनी पड़ सकती है, लेकिन यह सामान्य है। 2. क्या एंग्ज़ाइटी के लिए दवा लेना सुरक्षित है? जी हाँ, डॉक्टर की सलाह पर ली गई दवाइयां सुरक्षित हैं। SSRIs और SNRIs जैसी दवाओं के कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं (जैसे मतली, वजन बढ़ना), लेकिन ये आमतौर पर 2-3 हफ्तों में कम हो जाते हैं। बेंजोडायजेपाइन से लत लग सकती है, इसलिए इन्हें सिर्फ़ थोड़े समय के लिए लिया जाता है। 3. क्या बिना दवा के एंग्ज़ाइटी ठीक हो सकती है? हल्की एंग्ज़ाइटी को बिना दवा के भी ठीक किया जा सकता है – जैसे योग, मेडिटेशन, डाइट में बदलाव, और एक्सरसाइज से। लेकिन अगर एंग्ज़ाइटी गंभीर है (जैसे पैनिक अटैक आना), तो दवा की ज़रूरत हो सकती है। डॉक्टर से सलाह लें। 4. क्या एंग्ज़ाइटी के कारण दिल की धड़कन बढ़ सकती है? बिल्कुल! यह एंग्ज़ाइटी का सबसे आम लक्षण है। जब आपको एंग्ज़ाइटी होती है, तो एड्रेनालाईन रिलीज़ होता है, जो दिल की धड़कन को तेज़ कर देता है। इसे “पैल्पिटेशन” कहते हैं। अगर यह बार-बार होता है, तो हार्ट की जांच करवाएं। 5. क्या एंग्ज़ाइटी और डिप्रेशन एक ही चीज़ हैं? नहीं, ये अलग-अलग हैं। एंग्ज़ाइटी में “डर” और “घबराहट” होती है, जबकि डिप्रेशन में “उदासी” और “निराशा” होती है। लेकिन ये अक्सर साथ-साथ आते हैं – लगभग 50% लोगों को दोनों होते हैं। 6. क्या बच्चों को भी एंग्ज़ाइटी डिसऑर्डर हो सकता है? हाँ, बच्चों को भी हो सकता है। बच्चों में लक्षण अलग हो सकते हैं – जैसे स्कूल जाने से डरना, पेट में दर्द की शिकायत करना, या बहुत ज़्यादा चिपकना। अगर बच्चा लगातार परेशान रहता है, तो बाल मनोचिकित्सक से मिलें। 7. क्या एंग्ज़ाइटी के कारण सीने में दर्द हो सकता है? हाँ, यह एक आम लक्षण है। एंग्ज़ाइटी के कारण मांसपेशियां तन जाती हैं, जिससे सीने में जकड़न या दर्द होता है। लेकिन अगर दर्द बहुत तेज़ है या सांस लेने में तकलीफ है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें – यह हार्ट अटैक का संकेत भी हो सकता है। 8. क्या एंग्ज़ाइटी के लिए योग कारगर है? बहुत कारगर! योग और प्राणायाम (जैसे अनुलोम-विलोम, भ्रामरी) नर्वस सिस्टम को शांत करते हैं। रोज़ 20 मिनट योग करने से कोर्टिसोल का स्तर कम होता है और एंग्ज़ाइटी में 30-40% तक कमी आ सकती है। 9. क्या एंग्ज़ाइटी डिसऑर्डर आनुवंशिक है? हाँ, इसका जेनेटिक कारण हो सकता है। अगर आपके माता-पिता या भाई-बहन को एंग्ज़ाइटी है, तो आपको होने का खतरा 2-3 गुना बढ़ जाता है। लेकिन पर्यावरणीय कारक (जैसे तनाव) भी बहुत मायने रखते हैं। 10. क्या एंग्ज़ाइटी के कारण नींद नहीं आती? बिल्कुल! यह एक क्लासिक लक्षण है। एंग्ज़ाइटी में दिमाग रात में भी “अलर्ट” रहता है, जिससे नींद नहीं आती या बार-बार जागना होता है। नींद की कमी से एंग्ज़ाइटी और बढ़ती है – यह एक vicious cycle है। इसके लिए नींद की स्वच्छता (Sleep Hygiene) अपनाएं और डॉक्टर से सलाह लें। मेडिकल डिस्क्लेमर (Medical Disclaimer): यह लेख केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी भी प्र

PCOD ka chakkar babu bhaiya: dog wale reel pe ro rahi, colleague ke message pe gussa aa raha 😭

ugh guys, it’s that time of the month again and i swear my PCOD mood swings are on another level today. like, i was perfectly fine in the morning—chai peeli, office ka kaam thik tha—but by afternoon i was literally crying over a stupid instagram reel about a dog reuniting with its owner. then five minutes later i wanted to throw my phone at the wall because my colleague didn’t reply to my message. 😭 my periods are due in like 4-5 days and i can already feel the emotional rollercoaster starting. hostel life makes it worse—can’t control my diet, hostel ka khana is all oily and carb-heavy, and i’m too tired to cook something healthy. tried having some dark chocolate today to calm myself down, but honestly? it just made me crave more junk. 🙃 anyone else feel like their hormones just hijack their brain before periods? how do you deal without losing it on people around you? i don’t want to snap at my roommate for breathing too loudly but i’m THIS close. help a sister out please. 🥲

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