mabtas t 500mg injection - Uses, Price and Side Effects

mabtas t 500mg injection: Uses, Price & Side Effects

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Rituximab (500mg) (Click to see all medicines with same salt)
🏭 Intas Pharmaceuticals Ltd 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 10, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is mabtas t 500mg injection used for? (Quick Answer)

🩺 Primary Use:
mabtas t 500mg injection is primarily used for the treatment of anti neoplastics.
🧪 Active Ingredient & Working:
It contains Rituximab (500mg) which works by treating the underlying condition effectively.
⚠️ Safety Warning:
Always consult your doctor before using this medicine, especially to check if it is safe during pregnancy or if you suffer from liver or kidney issues.
💡 Did You Know? The first generic medicine was introduced in India in 1970 after the Patents Act was amended.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Rituximab (500mg)
Manufacturer / BrandIntas Pharmaceuticals Ltd
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassANTI NEOPLASTICS
Action ClassCD 20 Inhibitor
Prescription Required✓ Yes (Schedule H Drug)
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture

💊 mabtas t 500mg injection Uses in Hindi & English (Ke Fayde)

Detailed medical information is being added to our database.

💡 How to Take mabtas t 500mg injection (Khane ka tarika)

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

⚠️ Side Effects of mabtas t 500mg injection (Nuksan)

Common and serious side effects may include:

  • Headache
  • Weakness
  • Infection
  • Chills
  • Decreased white blood cell count (neutrophils)
  • Fever
  • Infusion site reaction
  • Lymphopenia
  • Abdominal pain
  • Back pain

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

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Complete Guide to Pregnancy Care - 01-06-2026

गर्भावस्था देखभाल: एक संपूर्ण और विस्तृत मार्गदर्शिका (Pregnancy Care Guide) नमस्कार, प्रिय पाठकों! गर्भावस्था हर महिला के जीवन का एक अद्भुत, लेकिन चुनौतीपूर्ण समय होता है। यह एक ऐसा सफर है जिसमें आपके शरीर में अनेक बदलाव आते हैं। इस गाइड में हम आपको प्रेग्नेंसी केयर के हर पहलू के बारे में विस्तार से बताएंगे - शरीर के अंदर क्या होता है, क्या लक्षण हो सकते हैं, क्या खाएं और क्या न खाएं, दवाइयां, घरेलू उपाय, मानसिक स्वास्थ्य, और भी बहुत कुछ। यह जानकारी आपको और आपके बच्चे को स्वस्थ रखने में मदद करेगी। 1. गहरा परिचय और रोग तंत्र (Deep Introduction & Disease Mechanism) गर्भावस्था कोई बीमारी नहीं है, बल्कि एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है। लेकिन इसे समझने के लिए हमें शरीर के अंदर होने वाले बदलावों को जानना होगा। गर्भावस्था कैसे शुरू होती है? (How Pregnancy Begins) फर्टिलाइजेशन (Fertilization): जब मासिक धर्म चक्र के मध्य में एक अंडाशय (Ovary) से अंडा (Egg) निकलता है, तो यह फैलोपियन ट्यूब (Fallopian Tube) में पहुंचता है। यहां शुक्राणु (Sperm) से मिलकर निषेचन (Fertilization) होता है। यह एक नई कोशिका, जिसे ज़ीगोट (Zygote) कहते हैं, बनाता है। इम्प्लांटेशन (Implantation): ज़ीगोट विभाजित होता है और गर्भाशय (Uterus) की ओर बढ़ता है। यह गर्भाशय की दीवार (Endometrium) में प्रत्यारोपित (Implant) हो जाता है। यह प्रक्रिया निषेचन के लगभग 6-12 दिन बाद होती है। यहीं से गर्भावस्था की शुरुआत मानी जाती है। शरीर के अंदर क्या होता है? (Internal Mechanism) हार्मोनल परिवर्तन (Hormonal Changes): गर्भावस्था को बनाए रखने के लिए शरीर में हार्मोन्स का स्तर नाटकीय रूप से बदलता है। ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (hCG): यह वह हार्मोन है जो प्रेग्नेंसी टेस्ट में पॉजिटिव आता है। यह प्लेसेंटा (Placenta) द्वारा बनाया जाता है और गर्भाशय को गर्भावस्था बनाए रखने में मदद करता है। प्रोजेस्टेरोन (Progesterone): इसे "गर्भावस्था हार्मोन" कहा जाता है। यह गर्भाशय की मांसपेशियों को आराम देता है ताकि बच्चा बढ़ सके और समय से पहले प्रसव न हो। यह स्तनों को दूध उत्पादन के लिए तैयार करता है। एस्ट्रोजन (Estrogen): यह प्लेसेंटा के विकास, गर्भाशय के आकार में वृद्धि और दूध नलिकाओं के विकास में मदद करता है। प्लेसेंटा का विकास (Placenta Development): प्लेसेंटा एक अंग है जो गर्भाशय में विकसित होता है। यह आपके और बच्चे के बीच ऑक्सीजन, पोषक तत्वों और अपशिष्ट उत्पादों के आदान-प्रदान का मुख्य माध्यम है। रक्त प्रवाह में वृद्धि (Increased Blood Flow): गर्भावस्था के दौरान शरीर में रक्त की मात्रा लगभग 50% तक बढ़ जाती है। इससे हृदय और रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। प्रतिरक्षा प्रणाली में बदलाव (Immune System Changes): शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली बच्चे को विदेशी न समझे, इसके लिए यह थोड़ी कमजोर हो जाती है। यही कारण है कि गर्भवती महिलाओं को संक्रमण का खतरा अधिक होता है। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Common & Rare Symptoms) गर्भावस्था के लक्षण हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ लक्षण बहुत आम हैं, जबकि कुछ कम देखने को मिलते हैं। सामान्य लक्षण (Common Symptoms) मॉर्निंग सिकनेस (Morning Sickness): जी मिचलाना और उल्टी आना। यह सिर्फ सुबह ही नहीं, बल्कि दिन के किसी भी समय हो सकता है। यह आमतौर पर 6वें सप्ताह से शुरू होता है और 12वें सप्ताह तक कम हो जाता है। थकान (Fatigue): शुरुआती दिनों में बहुत अधिक थकान महसूस होना। यह हार्मोनल बदलावों और बढ़ते रक्त प्रवाह के कारण होता है। स्तनों में बदलाव (Breast Changes): स्तनों में दर्द, भारीपन, या कोमलता। निप्पल (Nipple) का रंग गहरा हो सकता है और वे अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। बार-बार पेशाब आना (Frequent Urination): गर्भाशय के बढ़ने और हार्मोनल बदलावों के कारण बार-बार पेशाब जाने की इच्छा होना। खाने की इच्छा या अरुचि (Food Cravings or Aversions): कुछ खास चीजें खाने की तीव्र इच्छा होना (जैसे खट्टा, मीठा) या कुछ चीजों से अरुचि होना (जैसे कॉफी, मांस)। मूड स्विंग्स (Mood Swings): हार्मोनल बदलावों के कारण अचानक खुशी, उदासी, या चिड़चिड़ापन महसूस होना। कब्ज (Constipation): प्रोजेस्टेरोन हार्मोन पाचन तंत्र को धीमा कर देता है, जिससे कब्ज की समस्या हो सकती है। सीने में जलन (Heartburn): गर्भाशय के बढ़ने से पेट पर दबाव पड़ता है, जिससे एसिड ऊपर आ सकता है और सीने में जलन हो सकती है। दुर्लभ लक्षण (Rare Symptoms) अत्यधिक उल्टी (Hyperemesis Gravidarum): यह मॉर्निंग सिकनेस का गंभीर रूप है, जिसमें दिन में कई बार उल्टी होती है, जिससे निर्जलीकरण (Dehydration) और वजन कम हो सकता है। गर्भकालीन मधुमेह (Gestational Diabetes): गर्भावस्था के दौरान ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाना। इसके लक्षणों में अत्यधिक प्यास, बार-बार पेशाब आना, और थकान शामिल हैं। प्रीक्लेम्पसिया (Preeclampsia): यह एक गंभीर स्थिति है जिसमें हाई ब्लड प्रेशर और पेशाब में प्रोटीन आता है। इसके लक्षणों में गंभीर सिरदर्द, धुंधली दृष्टि, हाथों और चेहरे पर सूजन, और पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द शामिल हैं। त्वचा में खुजली (Intrahepatic Cholestasis of Pregnancy): गर्भावस्था के दौरान लीवर की कार्यप्रणाली में गड़बड़ी के कारण हथेलियों और तलवों में तेज खुजली होना। यह बच्चे के लिए खतरनाक हो सकता है। पैरों में सूजन और दर्द (Deep Vein Thrombosis - DVT): गर्भावस्था के दौरान रक्त के थक्के बनने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे पैरों में सूजन, दर्द और लालिमा हो सकती है। 3. विस्तृत आहार योजना (Detailed Diet Plan) गर्भावस्था में आपका आहार सीधे आपके और आपके बच्चे के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। यहां एक विस्तृत आहार योजना दी गई है जिसमें भारतीय खाद्य पदार्थों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। क्या खाएं (What to Eat) फोलिक एसिड (Folic Acid): यह बच्चे के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के विकास के लिए आवश्यक है। पालक, मेथी, सरसों का साग (Dark Green Leafy Vegetables) दालें (मसूर, चना, मूंग) संतरा, मौसमी (Citrus Fruits) फोर्टिफाइड अनाज (Fortified Cereals) आयरन (Iron): रक्त की कमी (Anemia) से बचने और बच्चे को ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करता है। चुकंदर, अनार हरी पत्तेदार सब्जियां खजूर, किशमिश मीट, मछली (यदि शाकाहारी नहीं हैं) आयरन को बेहतर अवशोषित करने के लिए विटामिन C (जैसे नींबू, आंवला) के साथ लें। कैल्शियम (Calcium): बच्चे की हड्डियों और दांतों के विकास के लिए। दूध, दही, पनीर रागी (Nachni) का आटा तिल, बादाम हरी पत्तेदार सब्जियां प्रोटीन (Protein): बच्चे के ऊतकों और अंगों के विकास के लिए। दालें, राजमा, छोले, सोयाबीन पनीर, अंडे चिकन, मछली (यदि मांसाहारी हैं) नट्स और बीज (अखरोट, बादाम, चिया सीड्स) ओमेगा-3 फैटी एसिड (Omega-3 Fatty Acids): बच्चे के मस्तिष्क और आंखों के विकास के लिए। अलसी के बीज (Flaxseeds) अखरोट चिया सीड्स मछली (सैल्मन, सार्डिन) फाइबर (Fiber): कब्ज से बचाने में मदद करता है। साबुत अनाज (गेहूं, जई, ब्राउन राइस) फल (सेब, नाशपाती, जामुन) सब्जियां (ब्रोकोली, गाजर) दालें और बीन्स क्या न खाएं (What Not to Eat) कच्चा या अधपका मांस और मछली: इनमें टोक्सोप्लाज्मा (Toxoplasma) और साल्मोनेला (Salmonella) जैसे बैक्टीरिया हो सकते हैं जो बच्चे को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कच्चे अंडे: साल्मोनेला संक्रमण का खतरा। अनपाश्चुराइज्ड दूध (Unpasteurized Milk) और सॉफ्ट चीज़: इनमें लिस्टेरिया (Listeria) बैक्टीरिया हो सकता है। हाई मरकरी वाली मछली: शार्क, स्वॉर्डफिश, किंग मैकेरल, टाइलफिश। मरकरी बच्चे के तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है। कैफीन (Caffeine): दिन में 200 मिलीग्राम से अधिक कैफीन (लगभग 1-2 कप कॉफी) न लें। अधिक कैफीन गर्भपात के खतरे को बढ़ा सकता है। शराब (Alcohol): गर्भावस्था में शराब का सेवन पूरी तरह से वर्जित है। यह फीटल अल्कोहल सिंड्रोम (Fetal Alcohol Syndrome) का कारण बन सकता है। पपीता (Papaya): कच्चा या अधपका पपीता खाने से बचें, क्योंकि इसमें लेटेक्स (Latex) होता है जो गर्भाशय के संकुचन को उत्तेजित कर सकता है। अनानास (Pineapple): इसमें ब्रोमेलैन (Bromelain) होता है, जो गर्भाशय ग्रीवा को नरम कर सकता है और प्रारंभिक प्रसव का कारण बन सकता है। हालांकि, पका हुआ अनानास सीमित मात्रा में सुरक्षित है। अत्यधिक मसालेदार या तला हुआ भोजन: यह सीने में जलन और अपच को बढ़ा सकता है। 4. चिकित्सा प्रबंधन (Medical Management) गर्भावस्था के दौरान कुछ दवाएं और चिकित्सा प्रक्रियाएं आवश्यक हो सकती हैं। यह समझना महत्वपूर्ण है कि ये कैसे काम करती हैं। प्रसवपूर्व विटामिन (Prenatal Vitamins) फोलिक एसिड: न्यूरल ट्यूब दोष (Neural Tube Defects) को रोकने के लिए। गर्भावस्था से पहले और शुरुआती हफ्तों में लेना शुरू करें। आयरन सप्लीमेंट: एनीमिया से बचाने के लिए। यह हीमोग्लोबिन के उत्पादन में मदद करता है। कैल्शियम सप्लीमेंट: हड्डियों के विकास और मां के कैल्शियम भंडार को बनाए रखने के लिए। विटामिन D: कैल्शियम के अवशोषण और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए। डीएचए (DHA): एक ओमेगा-3 फैटी एसिड जो बच्चे के मस्तिष्क और आंखों के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। गर्भावस्था की सामान्य समस्याओं के लिए दवाएं मॉर्निंग सिकनेस: विटामिन B6 (पाइरिडोक्सिन): यह मतली को कम करने में मदद करता है। डॉक्सिलामाइन (Doxylamine): एक एंटीहिस्टामाइन जो मॉर्निंग सिकनेस के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सीने में जलन (Heartburn): एंटासिड्स (Antacids): जैसे कैल्शियम कार्बोनेट या मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड। ये पेट के एसिड को बेअसर करते हैं। कब्ज (Constipation): फाइबर सप्लीमेंट: जैसे साइलियम (Psyllium) या मिथाइलसेलुलोज (Methylcellulose)। स्टूल सॉफ्टनर: जैसे डॉक्यूसेट (Docusate) जो मल को नरम करता है। गर्भकालीन मधुमेह (Gestational Diabetes): इंसुलिन (Insulin): यदि आहार और व्यायाम से ब्लड शुगर नियंत्रित नहीं होता है, तो इंसुलिन इंजेक्शन दिए जा सकते हैं। मेटफॉर्मिन (Metformin): कुछ मामलों में मौखिक दवा के रूप में दी जाती है। प्रीक्लेम्पसिया (Preeclampsia): एंटीहाइपरटेंसिव दवाएं: जैसे लेबेटालोल (Labetalol) या निफेडिपिन (Nifedipine) ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए। मैग्नीशियम सल्फेट (Magnesium Sulfate): दौरे (Seizures) को रोकने के लिए। महत्वपूर्ण चिकित्सा परीक्षण अल्ट्रासाउंड (Ultrasound): बच्चे के विकास, लिंग, और किसी भी असामान्यता की जांच के लिए। ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (Glucose Tolerance Test): गर्भकालीन मधुमेह की जांच के लिए। रक्त परीक्षण (Blood Tests): एनीमिया, संक्रमण, और ब्लड ग्रुप की जांच के लिए। ग्रुप बी स्ट्रेप टेस्ट (Group B Strep Test): प्रसव से पहले यह जांच की जाती है कि कहीं बैक्टीरिया तो नहीं है जो बच्चे को संक्रमित कर सकता है। 5. सिद्ध घरेलू उपाय और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) दवाओं के अलावा, कुछ प्राकृतिक उपाय और जीवनशैली में बदलाव गर्भावस्था के लक्षणों को कम करने में बहुत मददगार हो सकते हैं। घरेलू उपाय (Home Remedies) मॉर्निंग सिकनेस के लिए: सुबह उठते ही कुछ सूखा नमकीन (जैसे पटाखा, बिस्कुट) खाएं। अदरक की चाय या अदरक का पानी पिएं। नींबू पानी या पुदीने की चाय पिएं। दिन में कई बार छोटे-छोटे भोजन करें। सीने में जलन के लिए: खाने के तुरंत बाद न लेटें। छोटे-छोटे भोजन करें और मसालेदार, तले हुए भोजन से बचें। ठंडा दूध पिएं या बादाम चबाएं। तकिया ऊंचा रखकर सोएं। कब्ज के लिए: खूब पानी पिएं और फाइबर युक्त भोजन करें। सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पिएं। अलसी के बीज या चिया सीड्स पानी में भिगोकर खाएं। हल्का व्यायाम करें, जैसे वॉक। पैरों में सूजन के लिए: पैरों को ऊंचा रखकर आराम करें। ठंडे पानी से पैरों की सिकाई करें। नमक का सेवन कम करें। आरामदायक जूते पहनें। अनिद्रा (Insomnia) के लिए: सोने से पहले गुनगुना दूध पिएं। हल्का संगीत सुनें या किताब पढ़ें। सोने का समय नियमित रखें। जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes) नियमित व्यायाम: गर्भावस्था के लिए सुरक्षित व्यायाम जैसे वॉकिंग, स्विमिंग, प्रेग्नेंसी योगा करें। यह रक्त संचार को बेहतर बनाता है, मूड को ठीक रखता है, और प्रसव में मदद करता है। पर्याप्त नींद: रात में 7-9 घंटे की नींद लें। बाईं ओर करवट लेकर सोने से रक्त प्रवाह बेहतर होता है। तनाव प्रबंधन: ध्यान (Meditation), गहरी सांस लेने के व्यायाम (Deep Breathing), और प्रार्थना करें। तनाव को कम करने के लिए अपने पार्टनर या दोस्तों से बात करें। हाइड्रेशन: दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं। नारियल पानी, नींबू पानी, और सूप भी अच्छे विकल्प हैं। धूम्रपान और शराब से दूरी: ये बच्चे के विकास को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। यात्रा: गर्भावस्था के दौरान लंबी यात्रा से बचें, खासकर आखिरी महीनों में। हवाई यात्रा के लिए डॉक्टर से सलाह लें। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Mental Health and Daily Life) गर्भावस्था सिर्फ शारीरिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह आपके मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन को भी गहराई से प्रभावित करती है। मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव (Impact on Mental Health) चिंता (Anxiety): बच्चे के स्वास्थ्य, प्रसव के दर्द, और भविष्य की जिम्मेदारियों को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है। अवसाद (Depression): हार्मोनल बदलावों के कारण कुछ महिलाओं में प्रसवपूर्व अवसाद (Prenatal Depression) हो सकता है। इसके लक्षणों में लगातार उदासी, भूख न लगना, और रुचि खोना शामिल हैं। मूड स्विंग्स (Mood Swings): हार्मोन्स में उतार-चढ़ाव के कारण अचानक खुशी, गुस्सा, या रोना आ सकता है। बॉडी इमेज इश्यू (Body Image Issues): वजन बढ़ने और शरीर में बदलावों के कारण कुछ महिलाएं असहज या अनाकर्षक महसूस कर सकती हैं। दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Daily Life) कामकाज: थकान और मॉर्निंग सिकनेस के कारण काम पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो सकता है। रिश्ते: पार्टनर के साथ संबंधों में बदलाव आ सकता है। एक-दूसरे को सम

Relative ne face dekha toh ghar ke nuskhe pe lecture de diya 😭 Cystic acne scars ka koi asli solution do yaar!

Yaar itni frustration ho rahi hai 😭. Kal mera ek relative aaya and straight up bola, “Beta face pe ye kya ho gaya? Chandan lagao, besan lagao.” Jaise maine kuch try nahi kiya! I know they mean well but itna irritating hota hai jab woh samajhte hain ki ghar ke nuskhe se sab theek ho jayega. Cystic acne hai bhai, ye normal pimple nahi hai. Aur maine jo pimple popping ki aadat daali hai na, uske daag ab permanently hi dikhte hain lagta hai. Koi genuine tips do please. I’m currently using niacinamide serum and aloe vera gel, but scars ka koi fark nahi pad raha. Koi specific cream ya dermatologist ka koi remedy batado jo kaam kare? Sunscreen bhi lagati hoon lekin glow nahi aa raha. Filter ke bina selfie lene ka mann nahi karta ab. 😔 Aur haan, please “haldi aur doodh” mat bolna, woh try kar chuki hoon. Kuch actual skincare routine chahiye jo cystic acne scars ke liye effective ho. Pls help! 🙏

Holter monitor laga liya, par neend uda di! Kya koi aur bhi pareshan hai?

Aaj hi Holter monitor laga ke aayi hoon. Bahut dar lag raha tha pehle, but doctor ne kaha bas 24 ghante normal kaam karo. Toh maine socha chalo karti hoon. Par problem yeh hai ki wires bahut tang kar rahe hain, aur neend nahi aa rahi. Raat ko uth ke baitha raha hoon. Pata nahi ismein kya pata chalega. Kya kisi aur ne bhi karwaya hai? Kya sach mein isse dil ki bechaini pata chal jaati hai? Main toh sochti hoon shayad machine hi mere dil ko aur pareshan kar de. Blood thinner bhi le rahi hoon, toh koi chot lagne ka dar bhi hai. Doctor ne kaha ki Holter monitor se koi nuksaan nahi hota, lekin mujhe toh ab bhi ghabrahat ho rahi hai. Batao apna experience.

📖 Patient Counseling & Warnings

  • 🔹 Do not stop suddenly without consulting your doctor
  • 🔹 Inform your doctor about all other medications you're taking
  • 🔹 Avoid alcohol while taking this medication
  • 🔹 If you miss a dose, take it as soon as you remember
  • 🔹 Seek immediate medical help if you experience severe allergic reactions
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