dabilong 150 capsule allopathy (Dabigatran Etexilate (150mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India
dabilong 150 capsule allopathy (Dabigatran Etexilate (150mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India manufactured by Micro Labs Ltd. Contains Dabigatran Etexilate (150mg).

dabilong 150 capsule - Uses, Price, Side Effects & Substitutes

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Dabigatran Etexilate (150mg) (Click to see all medicines with same salt)
🏭 Micro Labs Ltd 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 22, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is dabilong 150 capsule used for?

dabilong 150 capsule (Dabigatran Etexilate (150mg)) is used to treat cardiac. It contains Dabigatran Etexilate (150mg), which works by treating the condition effectively. Always consult your doctor before use. Take as prescribed.

  • Generic Name: Dabigatran Etexilate (150mg)
  • Manufacturer: Micro Labs Ltd
  • Medicine Form: Allopathy
  • Pregnancy Category: Consult doctor

🇮🇳 dabilong 150 capsule के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

dabilong 150 capsule का उपयोग मुख्य रूप से cardiac और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Dabigatran Etexilate (150mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? Over 80% of the antiretroviral drugs used globally to combat AIDS are supplied by Indian pharmaceutical companies.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Dabigatran Etexilate (150mg)
Brand Namedabilong 150 capsule
ManufacturerMicro Labs Ltd
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassCARDIAC
Action ClassDirect thrombin inhibitor- oral
Route of AdministrationOral
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Shelf LifeAs per manufacturer

💡 How and when to take dabilong 150 capsule?

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💊 dabilong 150 capsule Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

⚠️ What are the side effects of dabilong 150 capsule?

  • Nausea
  • Anemia (low number of red blood cells)
  • Gastrointestinal bleeding
  • Dyspepsia
  • Diarrhea
  • Abdominal pain
  • Nosebleeds
  • Skin bleeding

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🔬 Drug Interactions

🛡️ Safety & Warnings

🛑 Myths vs. Facts about dabilong 150 capsule

  • Myth: Generic substitutes of dabilong 150 capsule are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Dabigatran Etexilate (150mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of dabilong 150 capsule can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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Complete Guide to Stress Management - 02-06-2026

तनाव प्रबंधन: एक संपूर्ण चिकित्सा मार्गदर्शिका (Stress Management: The Ultimate Medical Guide) नमस्ते! क्या आप भी उन लाखों भारतीयों में से हैं जो रोज़ाना तनाव (Stress) से जूझते हैं? ऑफिस का प्रेशर, परिवार की ज़िम्मेदारियाँ, ट्रैफिक जाम, या फिर पैसों की चिंता – ये सब मिलकर हमारी सेहत को अंदर ही अंदर खोखला कर रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि तनाव सिर्फ एक मानसिक समस्या नहीं, बल्कि एक पूरी शारीरिक प्रक्रिया है जो आपके शरीर के हर अंग को प्रभावित करती है? इस डीप मेडिकल गाइड में हम आपको तनाव की पूरी कहानी बताएंगे – कैसे ये होता है, इसके लक्षण क्या हैं, और सबसे ज़रूरी, इसे कैसे मैनेज करें। ये गाइड सिर्फ एक लेख नहीं, बल्कि आपकी सेहत का रोडमैप है। चलिए शुरू करते हैं! 1. गहरा परिचय और रोग तंत्र (Deep Introduction & Disease Mechanism) तनाव क्या है? (What is Stress?) तनाव कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर की एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है। जब भी आपका दिमाग किसी खतरे, चुनौती या दबाव को महसूस करता है, तो यह एक अलार्म सिस्टम की तरह काम करता है। इसे "फाइट-या-फ्लाइट रिस्पॉन्स" (Fight-or-Flight Response) कहते हैं। अंदर क्या होता है? (What Happens Inside the Body?) ब्रेन का अलार्म: जब आप तनाव में होते हैं, तो आपके मस्तिष्क का हाइपोथैलेमस (Hypothalamus) एक्टिव हो जाता है। यह एड्रिनल ग्लैंड्स (Adrenal Glands) को सिग्नल भेजता है, जो आपके किडनी के ऊपर बैठी होती हैं। हार्मोन का तूफान: एड्रिनल ग्लैंड्स दो मुख्य हार्मोन रिलीज़ करती हैं: एड्रेनालाईन (Adrenaline): यह दिल की धड़कन तेज़ कर देता है, ब्लड प्रेशर बढ़ा देता है, और आपको तुरंत एनर्जी देता है। कोर्टिसोल (Cortisol): यह "स्ट्रेस हार्मोन" है। यह शरीर में शुगर (ग्लूकोज) का लेवल बढ़ाता है ताकि आपके पास ऊर्जा हो। लेकिन लंबे समय तक यही हार्मोन आपको बीमार कर सकता है। पूरे शरीर पर असर: यह हार्मोनल तूफान आपके पाचन तंत्र को धीमा कर देता है (क्योंकि खतरे के समय खाना पचाना ज़रूरी नहीं), इम्यून सिस्टम को कमज़ोर करता है, और नींद को डिस्टर्ब करता है। तीन प्रकार के तनाव (Three Types of Stress) एक्यूट स्ट्रेस (Acute Stress): थोड़े समय का, जैसे कोई प्रेजेंटेशन देना या ब्रेक लगाना। यह सामान्य है और कभी-कभी फायदेमंद भी होता है। एपिसोडिक एक्यूट स्ट्रेस (Episodic Acute Stress): बार-बार आने वाला तनाव, जैसे हर रोज़ ऑफिस का डेडलाइन प्रेशर। क्रोनिक स्ट्रेस (Chronic Stress): लंबे समय तक चलने वाला तनाव, जैसे गरीबी, बीमारी, या खराब शादीशुदा जीवन। यह सबसे खतरनाक है और शरीर को अंदर से तोड़ देता है। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Common and Rare Symptoms) तनाव के लक्षण सिर्फ दिमाग तक सीमित नहीं हैं। यह आपके पूरे शरीर को प्रभावित करता है। यहाँ हर लक्षण को डिटेल में समझिए: सामान्य लक्षण (Common Symptoms) शारीरिक (Physical): सिरदर्द: खासकर तनाव वाला सिरदर्द (Tension Headache) – सिर पर भारीपन या बैंड जैसा दबाव। पेट की समस्याएँ: एसिडिटी, गैस, कब्ज, या डायरिया। तनाव से आंतों में सूजन (Gut Inflammation) हो सकती है। थकान: पूरी नींद लेने के बाद भी थकावट महसूस होना। नींद न आना (Insomnia): रात को बार-बार जागना या सुबह जल्दी उठ जाना। मांसपेशियों में दर्द: गर्दन, कंधे, और पीठ में अकड़न। भूख में बदलाव: कुछ लोग ज़्यादा खाते हैं (इमोशनल ईटिंग), कुछ को भूख ही नहीं लगती। मानसिक और भावनात्मक (Mental & Emotional): चिड़चिड़ापन (Irritability): छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना। चिंता (Anxiety): बिना वजह डर या बेचैनी महसूस करना। ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई: काम पर फोकस नहीं कर पाना। नकारात्मक सोच: हर चीज़ में बुराई देखना। व्यवहारिक (Behavioral): सामाजिक अलगाव: दोस्तों और परिवार से दूरी बनाना। शराब या सिगरेट का बढ़ता सेवन। प्रोक्रैस्टिनेशन: काम को टालना। दुर्लभ लक्षण (Rare Symptoms) बालों का झड़ना (Telogen Effluvium): गंभीर तनाव के 3-6 महीने बाद अचानक बाल झड़ने लगते हैं। त्वचा पर चकत्ते (Hives or Eczema): तनाव से इम्यून सिस्टम कमज़ोर होता है, जिससे त्वचा पर लाल दाने या खुजली हो सकती है। सेक्स ड्राइव में कमी (Low Libido): कोर्टिसोल का हाई लेवल सेक्स हार्मोन को दबा देता है। मुंह के छाले (Canker Sores): तनाव से इम्यून सिस्टम कमज़ोर होता है, जिससे मुंह में छाले हो सकते हैं। हाथ-पैरों में झुनझुनी (Tingling): यह चिंता और हाइपरवेंटिलेशन (तेज़ साँस लेने) के कारण होता है। सीने में दर्द (Non-cardiac Chest Pain): तनाव से सीने में जकड़न हो सकती है, जो दिल के दौरे जैसा लगता है, लेकिन दिल से संबंधित नहीं होता। 3. विस्तृत आहार योजना (Detailed Diet Plan) तनाव कम करने में खाने का बहुत बड़ा रोल है। सही खाना आपके हार्मोन को संतुलित रखता है और दिमाग को शांत करता है। यहाँ भारतीय खाने पर आधारित एक डिटेल प्लान है: क्या खाएं? (What to Eat?) कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट: ये सेरोटोनिन (Serotonin) – "हैप्पी हार्मोन" – को बढ़ाते हैं। दलिया (Oats): सुबह नाश्ते में दूध या पानी में पका कर खाएं। ब्राउन राइस: सफेद चावल की जगह इसका उपयोग करें। बाजरा और ज्वार की रोटी: गेहूँ से बेहतर विकल्प। शकरकंद (Sweet Potato): उबाल कर या भून कर खाएं। ओमेगा-3 फैटी एसिड: ये मस्तिष्क की सूजन कम करते हैं और मूड को सुधारते हैं। अलसी के बीज (Flaxseeds): दही या स्मूदी में मिलाएं। अखरोट (Walnuts): रोज़ 4-5 अखरोट खाएं। सरसों का तेल: खाना पकाने में उपयोग करें। मैग्नीशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ: यह मांसपेशियों को आराम देता है और नींद लाने में मदद करता है। पालक (Spinach): सब्जी या सूप में डालें। कद्दू के बीज (Pumpkin Seeds): स्नैक के रूप में खाएं। केला: रोज़ एक केला ज़रूर खाएं। डार्क चॉकलेट (70% से अधिक कोको): दिन में 1-2 टुकड़े। प्रोबायोटिक्स: आंत की सेहत दिमाग से जुड़ी है (Gut-Brain Axis)। दही (Curd): रोज़ाना एक कटोरी ताज़ा दही खाएं। छाछ (Buttermilk): दोपहर के खाने के साथ लें। अचार (Achar): घर का बना, बिना ज़्यादा नमक का। हर्बल चाय: कैमोमाइल चाय: सोने से पहले पिएं। अश्वगंधा चाय: तनाव कम करने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी। तुलसी की चाय: इम्यूनिटी बढ़ाती है और दिमाग शांत करती है। क्या न खाएं? (What to Avoid?) कैफीन: चाय, कॉफी, और एनर्जी ड्रिंक्स कोर्टिसोल बढ़ाते हैं। दिन में 1-2 कप से ज़्यादा न लें। चीनी और मीठी चीज़ें: मिठाई, कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस – ये ब्लड शुगर को ऊपर-नीचे करते हैं, जिससे चिंता बढ़ती है। प्रोसेस्ड फूड: पिज़्ज़ा, बर्गर, नूडल्स, और पैकेज्ड स्नैक्स में ट्रांस फैट और नमक होता है, जो सूजन बढ़ाता है। शराब: यह अस्थायी रूप से आराम देती है, लेकिन नींद और मूड को खराब करती है। तेल-मसाले वाला खाना: ज़्यादा तला-भुना खाना पाचन को खराब करता है और तनाव बढ़ाता है। 4. चिकित्सा प्रबंधन (Medical Management) ध्यान दें: यह केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। डॉक्टर क्या लिख सकते हैं? (What Might a Doctor Prescribe?) एंटीडिप्रेसेंट्स (Antidepressants): SSRIs (Selective Serotonin Reuptake Inhibitors): जैसे एस्सिटालोप्राम (Escitalopram) या फ्लुओक्सेटीन (Fluoxetine)। ये दिमाग में सेरोटोनिन का लेवल बढ़ाते हैं, जो मूड को सुधारता है और चिंता कम करता है। SNRIs (Serotonin-Norepinephrine Reuptake Inhibitors): जैसे वेनलाफैक्सीन (Venlafaxine)। ये सेरोटोनिन और नॉरएपिनेफ्रिन दोनों को बढ़ाते हैं, जो ऊर्जा और फोकस में मदद करते हैं। एंटी-एंग्ज़ाइटी दवाएं (Anti-anxiety Medications): बेंजोडायजेपाइन (Benzodiazepines): जैसे अल्प्राजोलम (Alprazolam) या लोराज़ेपम (Lorazepam)। ये तुरंत असर करती हैं, लेकिन नशे की लत लग सकती है, इसलिए थोड़े समय के लिए दी जाती हैं। बीटा-ब्लॉकर्स (Beta-Blockers): जैसे प्रोप्रानोलोल (Propranolol)। ये तनाव के शारीरिक लक्षणों (तेज़ दिल की धड़कन, हाथ कांपना) को कम करते हैं, खासकर परफॉरमेंस एंग्ज़ाइटी (जैसे स्टेज पर बोलना) के लिए। नींद की दवाएं (Sleep Aids): जैसे मेलाटोनिन (Melatonin) सप्लीमेंट या ज़ोलपिडेम (Zolpidem), लेकिन इनका लंबे समय तक उपयोग सुरक्षित नहीं है। थेरेपी (Therapy) कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT): यह सबसे प्रभावी थेरेपी है। इसमें आपको सिखाया जाता है कि नकारात्मक सोच के पैटर्न को कैसे पहचानें और बदलें। माइंडफुलनेस-बेस्ड स्ट्रेस रिडक्शन (MBSR): इसमें ध्यान और योग के ज़रिए तनाव को कम किया जाता है। 5. सिद्ध घरेलू उपचार और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) घरेलू उपचार (Home Remedies) अश्वगंधा (Ashwagandha): यह आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी कोर्टिसोल के लेवल को 30% तक कम कर सकती है। रोज़ 300-500 mg का कैप्सूल या गर्म दूध में 1 चम्मच पाउडर मिलाकर लें। शंखपुष्पी (Shankhpushpi): यह दिमाग को शांत करती है और याददाश्त बढ़ाती है। रोज़ 1 चम्मच पाउडर पानी या दूध में लें। तुलसी के पत्ते: रोज़ 5-7 तुलसी के पत्ते चबाएं या चाय बनाकर पिएं। गर्म दूध में हल्दी (Golden Milk): हल्दी में करक्यूमिन (Curcumin) होता है, जो सूजन कम करता है और दिमाग को शांत करता है। नारियल पानी: इसमें पोटैशियम और मैग्नीशियम होता है, जो मांसपेशियों को आराम देता है। जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes) नियमित व्यायाम: रोज़ 30 मिनट की सैर, दौड़, या योग करें। व्यायाम से एंडोर्फिन (Endorphins) निकलते हैं, जो प्राकृतिक दर्द निवारक और मूड बूस्टर हैं। प्राणायाम (Breathing Exercises): 4-7-8 तकनीक: 4 सेकंड साँस लें, 7 सेकंड रोकें, 8 सेकंड छोड़ें। यह तुरंत शांत करता है। अनुलोम-विलोम: नाक से बारी-बारी से साँस लेना और छोड़ना। सोशल कनेक्शन: दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताएं। बातें करने से तनाव कम होता है। डिजिटल डिटॉक्स: सोने से 1 घंटा पहले फोन, लैपटॉप और TV बंद कर दें। ब्लू लाइट नींद को खराब करती है। समय प्रबंधन: काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटें और प्राथमिकता तय करें। "टू-डू लिस्ट" बनाएं। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Mental Health and Daily Life) तनाव सिर्फ एक भावना नहीं है; यह आपकी पूरी ज़िंदगी को बदल सकता है। यहाँ कुछ गंभीर प्रभाव हैं: डिप्रेशन (Depression): लगातार तनाव से मस्तिष्क में सेरोटोनिन का लेवल गिर जाता है, जिससे उदासी, निराशा, और आत्महत्या के विचार आ सकते हैं। चिंता विकार (Anxiety Disorders): पैनिक अटैक, फोबिया (जैसे भीड़ से डर), और जनरलाइज़्ड एंग्ज़ाइटी डिसऑर्डर (GAD) हो सकता है। रिश्तों पर असर: चिड़चिड़ापन और गुस्सा आपके पार्टनर, बच्चों, और दोस्तों से दूरी बना सकता है। काम पर प्रभाव: फोकस की कमी, गलतियाँ, और प्रोडक्टिविटी में गिरावट। शारीरिक बीमारियाँ: हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़, दिल की बीमारी, और मोटापा – ये सब क्रोनिक स्ट्रेस से जुड़े हैं। 7. 10 विस्तृत अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (10 Detailed FAQs) 1. क्या तनाव से बाल झड़ सकते हैं? हाँ, गंभीर तनाव से टेलोजेन एफ्लुवियम (Telogen Effluvium) हो सकता है, जिसमें बाल झड़ने लगते हैं। यह आमतौर पर तनाव के 3-6 महीने बाद शुरू होता है। तनाव कम होने पर यह ठीक हो जाता है। 2. क्या तनाव से वजन बढ़ता है? हाँ, कोर्टिसोल का हाई लेवल भूख बढ़ाता है, खासकर मीठा और फैटी खाने की क्रेविंग। यह पेट की चर्बी (Visceral Fat) बढ़ाता है, जो दिल की बीमारी का कारण बन सकता है। 3. तनाव और चिंता में क्या अंतर है? तनाव किसी बाहरी कारण (जैसे डेडलाइन) की प्रतिक्रिया है, जबकि चिंता बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार डर या बेचैनी है। तनाव आमतौर पर कारण खत्म होने पर चला जाता है, लेकिन चिंता लंबे समय तक रह सकती है। 4. क्या तनाव से दिल की बीमारी हो सकती है? हाँ, क्रोनिक स्ट्रेस से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, कोलेस्ट्रॉल लेवल बिगड़ता है, और दिल की धमनियों में सूजन होती है। यह हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ाता है। 5. तनाव कम करने के लिए सबसे अच्छा व्यायाम क्या है? योग और तेज़ चलना (Brisk Walking) सबसे अच्छे हैं। योग से श्वास और मांसपेशियों को आराम मिलता है, जबकि चलने से एंडोर्फिन निकलता है। 6. क्या तनाव से पेट में दर्द हो सकता है? हाँ, तनाव से आंतों में सूजन (Gut Inflammation) और इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) हो सकता है। इससे पेट में ऐंठन, गैस, और दस्त या कब्ज हो सकता है। 7. क्या बच्चों को भी तनाव होता है? हाँ, बच्चों को भी तनाव होता है – स्कूल का प्रेशर, दोस्तों के साथ झगड़ा, या परिवार में समस्याएँ। लक्षणों में चिड़चिड़ापन, नींद न आना, और पढ़ाई में मन न लगना शामिल है। 8. क्या तनाव से डायबिटीज़ हो सकती है? हाँ, क्रोनिक स्ट्रेस से कोर्टिसोल ब्लड शुगर बढ़ाता है, जिससे इंसुलिन रेज़िस्टेंस (Insulin Resistance) हो सकता है और टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा बढ़ जाता है। 9. तनाव कम करने के लिए कौन सी चाय पीनी चाहिए? कैमोमाइल चाय और तुलसी की चाय सबसे अच्छी हैं। कैमोमाइल में एपिजेनिन (Apigenin) होता है, जो दिमाग को शांत करता है। तुलसी में एडाप्टोजेनिक गुण होते हैं, जो शरीर को तनाव से लड़ने में मदद करते हैं। 10. क्या तनाव से याददाश्त कमज़ोर हो सकती है? हाँ, कोर्टिसोल का हाई लेवल मस्तिष्क के हिप्पोकैम्पस (Hippocampus) को नुकसान पहुँचाता है, जो याददाश्त और सीखने के लिए ज़िम्मेदार है। इससे भूलने की बीमारी (Memory Loss) हो सकती है। महत्वपूर्ण चिकित्सा अस्वीकरण (Medical Disclaimer): यह लेख केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान, या उपचार का विकल्प नहीं है। तनाव या किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए हमेशा एक योग्य डॉक्टर, मनोचिकित्सक, या मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से परामर्श लें। यहाँ दी गई जानकारी के आधार पर कोई भी दवा या उपचार शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना अनिवार्य है।

Influencer banne ke chakkar mein body ki le li! 😰 Cardiac scare aaya, ab kya karoon?

Yaar, aaj maine apne aap ko mirror mein dekha toh laga main kya kar rahi hoon. Fitness influencer banne ke chakkar mein maine apne body ko literally torture kiya hai. Supplements ka overdose, ek ke baad ek extreme workout, aur phir bhi result nahi mil raha tha toh aur zyada karte gayi. Last week, suddenly chest mein heaviness aur breathlessness hui. Doctor ne bola, "Beta, cardiac checkup karwao." Main toh sunke hi freeze ho gayi. Mummy ro rahi thi, "Tujhe kya ho gaya, itna kyun kar rahi hai?" Unka heart weak hai, unhe stress nahi dena chahati par main khud panic mode mein hoon. Ab main soch rahi hoon—yeh influencer lifestyle actually unsustainable hai. Body ka burnout ho raha hai, phir bhi log mujhe follow karte hain "perfect body" ke liye. Mera social life bhi zero ho gaya, family se door ho gayi. Aaj kal toh khana bhi properly nahi kha pati, bas supplements aur coffee pe jee rahi hoon. Koi hai jo similar phase se guzra ho? Kya karna chahiye? Should I take a complete break from social media or just reduce workouts slowly? Main confuse hoon. Please share your experiences.

Collapse hoke gym jaana padega? Influencer life ne heart kharab kar diya! 😰

Yaar, I don't even know where to start. Yesterday I literally collapsed during my morning shoot for a supplement brand. One minute I'm posing with my pre-workout, next thing I'm on the floor with my heart racing like crazy. Doctor finally said what I've been dreading—cardiac check-up needed. My BP was 160/100 on the spot. Main issue? This influencer lifestyle is just not sustainable. 5 AM shoots, 3 workouts a day, 1200 calories, 8 different supplements, and then pretending everything is perfect on camera. My mom called after seeing my reel and said "beta, tum toh bahut thin ho gayi ho, kya ho raha hai?" I just laughed it off but inside I was crying. Now I'm trying to actually eat proper food—ghee, roti, sabzi—for the first time in 2 years. It feels weird. My body is so confused. First day I had actual rice, I got bloated and anxious. Family thinks I'm being dramatic but they don't understand the pressure. Has anyone here gone from extreme fitness back to normal eating? How do you stop feeling guilty about resting or eating carbs? I'm genuinely scared I've damaged my heart for likes.

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