bacend 250 tablet allopathy (Cefuroxime (250mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India
bacend 250 tablet allopathy (Cefuroxime (250mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India manufactured by Ealpharm Life Sciences Pvt Ltd. Contains Cefuroxime (250mg).

bacend 250 tablet - Uses, Price, Side Effects & Substitutes

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Cefuroxime (250mg) (Click to see all medicines with same salt)
🏭 Ealpharm Life Sciences Pvt Ltd 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 21, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is bacend 250 tablet used for?

bacend 250 tablet (Cefuroxime (250mg)) is used to treat anti infectives. It contains Cefuroxime (250mg), which works by treating the condition effectively. Always consult your doctor before use. Take as prescribed.

  • Generic Name: Cefuroxime (250mg)
  • Manufacturer: Ealpharm Life Sciences Pvt Ltd
  • Medicine Form: Allopathy
  • Pregnancy Category: Consult doctor

🇮🇳 bacend 250 tablet के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

bacend 250 tablet का उपयोग मुख्य रूप से anti infectives और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Cefuroxime (250mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? The first generic medicine was introduced in India in 1970 after the Patents Act was amended.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Cefuroxime (250mg)
Brand Namebacend 250 tablet
ManufacturerEalpharm Life Sciences Pvt Ltd
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassANTI INFECTIVES
Action ClassCephalosporins: 2nd generation
Route of AdministrationOral
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Shelf LifeAs per manufacturer

💡 How and when to take bacend 250 tablet?

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💊 bacend 250 tablet Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

⚠️ What are the side effects of bacend 250 tablet?

  • Rash
  • Vomiting
  • Allergic reaction
  • Increased liver enzymes
  • Nausea
  • Diarrhea

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🔄 Best Substitutes for bacend 250 tablet

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Medical Note: Always consult your doctor before switching medications. Generic alternatives with same salts are therapeutically equivalent.

🔬 Drug Interactions

🛡️ Safety & Warnings

🛑 Myths vs. Facts about bacend 250 tablet

  • Myth: Generic substitutes of bacend 250 tablet are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Cefuroxime (250mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of bacend 250 tablet can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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BP-Sugar ka khel, dil ka dard — kya aasan exercise ghar pe karein?

Namaste doston. Aaj subah thoda sa bazaar gaya tha, bas paas ki dukaan tak, lekin wapas aate aate saans phool gayi. Biwi ne kaha "itna kaam kyun kar rahe ho, aaram karo". Par main kya karun, ghar mein reh reh ke bore ho jaata hoon. Pichhle hafte doctor ne kaha tha ki BP aur sugar control mein rakho, lekin ye dil ka dard kabhi kabhi achanak aata hai. Ek chhota sa sawaal hai aap sab se - kya koi aisi aasan exercise hai jo ghar baithe kar sakte hoon? Pota kehta hai "dada ji aap yoga karo", par mujhe lagta hai ki zyada jhukna ya utna karna meri umar mein theek nahi. Kripya koi sahi raah bataye. Aur haan, subah uthke ek glass halka garam paani mein shahad aur nimbu le raha hoon, kya ye heart ke liye theek hai ya nahi? Aap sab ke anubhav ka intzaar rahega. Dhanyavaad.

Complete Guide to Gestational Diabetes - 01-06-2026

गर्भकालीन मधुमेह (Gestational Diabetes) पर संपूर्ण गाइड: कारण, लक्षण, आहार और उपचार गर्भावस्था के दौरान शुगर का बढ़ना, जिसे गर्भकालीन मधुमेह (Gestational Diabetes Mellitus - GDM) कहते हैं, एक आम लेकिन गंभीर स्थिति है। यह तब होता है जब गर्भवती महिला के शरीर में इंसुलिन हार्मोन ठीक से काम नहीं करता, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। इस गाइड में हम आपको हर पहलू को बेहद आसान और विस्तार से समझाएंगे, ताकि आप इस स्थिति को बिना घबराए मैनेज कर सकें। 1. गहन परिचय और रोग तंत्र (Deep Introduction & Disease Mechanism) गर्भकालीन मधुमेह आमतौर पर गर्भावस्था के 24वें से 28वें सप्ताह के बीच विकसित होता है। यह एक अस्थायी स्थिति है, लेकिन अगर इसे नियंत्रित न किया जाए, तो माँ और बच्चे दोनों पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। यह शरीर के अंदर कैसे होता है? (Mechanism) प्लेसेंटा का रोल: गर्भावस्था में प्लेसेंटा (गर्भनाल) बच्चे को पोषण देने के लिए कई हार्मोन बनाता है, जैसे ह्यूमन प्लेसेंटल लैक्टोजन (hPL), एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन। ये हार्मोन इंसुलिन के प्रभाव को कम कर देते हैं (इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहते हैं)। इंसुलिन का काम: सामान्य परिस्थितियों में, इंसुलिन शुगर को कोशिकाओं में पहुंचाता है। लेकिन इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण, शरीर को अधिक इंसुलिन बनाना पड़ता है। कुछ महिलाओं का अग्न्याशय (पैंक्रियाज) इतना अतिरिक्त इंसुलिन नहीं बना पाता, जिससे ब्लड शुगर बढ़ जाता है। परिणाम: यह बढ़ी हुई शुगर प्लेसेंटा के जरिए बच्चे तक पहुंचती है, जिससे बच्चे का अग्न्याशय भी अधिक इंसुलिन बनाने लगता है। इससे बच्चा बहुत बड़ा (मैक्रोसोमिया) हो सकता है, जिससे डिलीवरी में कठिनाई होती है। जोखिम कारक: मोटापा, पारिवारिक इतिहास (डायबिटीज), 25 साल से अधिक उम्र, पिछली गर्भावस्था में GDM, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS), और कुछ जातियों (भारतीय, एशियाई) में अधिक संभावना। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Common & Rare Symptoms) गर्भकालीन मधुमेह में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, इसलिए इसे "साइलेंट किलर" कहा जाता है। लेकिन कुछ महिलाओं में ये लक्षण दिख सकते हैं: सामान्य लक्षण अत्यधिक प्यास (Polydipsia): बार-बार पानी पीने का मन करना, मुंह सूखना। बार-बार पेशाब आना (Polyuria): खासकर रात में कई बार उठना। थकान और कमजोरी: सामान्य से अधिक थकावट महसूस होना। भूख का बढ़ना (Polyphagia): खाने के बाद भी भूख लगना। धुंधला दिखना (Blurry Vision): आंखों के सामने धुंधलापन आना। दुर्लभ या गंभीर लक्षण हाथ-पैरों में जलन या सुन्नता (Tingling/Numbness): पैरों या हाथों में सुई चुभने जैसा महसूस होना, जो डायबिटिक न्यूरोपैथी का संकेत हो सकता है। बार-बार संक्रमण: यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI), यीस्ट इंफेक्शन (खुजली, सफेद डिस्चार्ज) जल्दी ठीक न होना। घाव का देर से भरना: छोटी चोट या कट को ठीक होने में अधिक समय लगना। मतली और उल्टी: सामान्य मॉर्निंग सिकनेस से अलग, लगातार उल्टी आना। नोट: यदि आपको ये लक्षण महसूस हों, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। गर्भावस्था के 24-28 सप्ताह में OGTT (ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट) जरूर करवाएं। 3. विस्तृत आहार योजना (Detailed Diet Plan - Kya Khaye aur Kya Na Khaye) गर्भकालीन मधुमेह को नियंत्रित करने में डाइट सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आपको छोटे-छोटे भोजन (हर 2-3 घंटे) लेने चाहिए, ताकि शुगर लेवल स्थिर रहे। क्या खाएं (Eat These Indian Foods) साबुत अनाज (Whole Grains): ब्राउन राइस, ओट्स, ज्वार, बाजरा, रागी (nachni), क्विनोआ। ये फाइबर से भरपूर होते हैं और शुगर धीरे-धीरे बढ़ाते हैं। प्रोटीन स्रोत: दालें (मूंग, मसूर, चना), पनीर, सोया, अंडे, चिकन (बिना त्वचा), मछली। प्रोटीन शुगर को स्थिर रखता है। सब्जियां: हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेथी, सरसों), करेला (कड़वा लेकिन बहुत फायदेमंद), लौकी, तोरी, खीरा, गाजर। कम स्टार्च वाली सब्जियां चुनें। फल (कम मीठे): सेब, नाशपाती, संतरा, जामुन, अमरूद, कीवी। केला और आम सीमित मात्रा में लें। हेल्दी फैट: मेवे (बादाम, अखरोट, पिस्ता), बीज (अलसी, चिया, कद्दू), जैतून का तेल, नारियल तेल। डेयरी: दूध (बिना मीठा), दही (ग्रीक योगर्ट बेहतर), छाछ। क्या न खाएं (Avoid These Foods) रिफाइंड कार्ब्स: सफेद चावल, मैदा (नान, पराठा, ब्रेड, पास्ता), सफेद आटा। मीठी चीजें: चीनी, गुड़, शहद, मिठाई (लड्डू, जलेबी, गुलाब जामुन), कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस, आइसक्रीम। तला-भुना: समोसा, पकौड़े, फ्रेंच फ्राइज, चिप्स। फलों का रस: भले ही ताजा हो, इसमें फाइबर नहीं होता और शुगर तेजी से बढ़ता है। रेडी-टू-ईट फूड: पैकेज्ड सूप, नूडल्स, सॉस (केचप, चिली सॉस) में छिपी चीनी होती है। नमूना डाइट प्लान (Sample Meal Plan) सुबह (7:00 AM): 1 गिलास गुनगुना पानी + 5-6 भीगे बादाम + 1 चम्मच मेथी दाना पाउडर। नाश्ता (8:30 AM): 2 मूंग दाल का चीला + हरी चटनी + 1 कप बिना मीठी चाय। मिड-मॉर्निंग (11:00 AM): 1 सेब या 1 कटोरी पपीता। दोपहर का खाना (1:00 PM): 1 कटोरी ब्राउन राइस + 1 कटोरी मूंग दाल + सब्जी (जैसे लौकी) + सलाद (खीरा, टमाटर) + 1 कटोरी दही। शाम (4:00 PM): 1 मुट्ठी मखाना/भुने चने + 1 कप ग्रीन टी। रात का खाना (7:00 PM): 2 ज्वार की रोटी + पालक पनीर + सलाद। सोने से पहले (9:30 PM): 1 गिलास गर्म दूध (हल्दी के साथ, बिना चीनी)। 4. चिकित्सा प्रबंधन (Medical Management) यदि डाइट और व्यायाम से शुगर नियंत्रित नहीं होता, तो डॉक्टर दवाएं लिख सकते हैं। यह केवल शैक्षिक जानकारी है। कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह के बिना न लें। आमतौर पर दी जाने वाली दवाएं मेटफॉर्मिन (Metformin): यह मौखिक दवा है जो लिवर में शुगर उत्पादन को कम करती है और इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाती है। यह गर्भावस्था में सुरक्षित मानी जाती है। इंसुलिन (Insulin): अगर मेटफॉर्मिन काम न करे या शुगर बहुत अधिक हो, तो इंसुलिन इंजेक्शन दिया जाता है। यह प्लेसेंटा को पार नहीं करता, इसलिए बच्चे के लिए सुरक्षित है। इसे आमतौर पर पेट या जांघ पर लगाया जाता है। ग्लाइबुराइड (Glyburide): कभी-कभी इसका उपयोग किया जाता है, लेकिन मेटफॉर्मिन और इंसुलिन को अधिक प्राथमिकता दी जाती है। दवाएं कैसे काम करती हैं? मेटफॉर्मिन: यह कोशिकाओं को इंसुलिन के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है, जिससे शुगर बेहतर तरीके से अवशोषित होता है। इंसुलिन: यह सीधे ब्लड शुगर को कोशिकाओं में पहुंचाता है, जिससे शुगर लेवल तेजी से गिरता है। मॉनिटरिंग: डॉक्टर आपको ग्लूकोमीटर से दिन में 4-5 बार शुगर चेक करने को कहेंगे (खाली पेट और खाने के 1-2 घंटे बाद)। लक्ष्य: फास्टिंग < 95 mg/dL, पोस्ट-मील < 140 mg/dL (1 घंटा) या < 120 mg/dL (2 घंटे)। 5. सिद्ध घरेलू उपचार और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) दवाओं के साथ-साथ ये प्राकृतिक उपाय शुगर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं: घरेलू उपचार मेथी दाना (Fenugreek Seeds): रातभर 1 चम्मच मेथी दाना पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट चबाएं या पानी पिएं। इसमें फाइबर और गैलेक्टोमैनन होता है, जो शुगर अवशोषण धीमा करता है। करेला (Bitter Gourd): करेले का जूस (1/4 कप) रोज सुबह पिएं। इसमें पॉलीपेप्टाइड-P होता है, जो प्राकृतिक इंसुलिन की तरह काम करता है। दालचीनी (Cinnamon): 1/2 चम्मच दालचीनी पाउडर गुनगुने पानी या चाय में मिलाकर पिएं। यह इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाता है। आंवला (Indian Gooseberry): 1 आंवला रोज खाएं या इसका जूस पिएं। विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट शुगर को नियंत्रित करते हैं। हल्दी (Turmeric): गर्म दूध में हल्दी मिलाकर पिएं। करक्यूमिन इंसुलिन रेजिस्टेंस कम करता है। जीवनशैली में बदलाव नियमित व्यायाम: रोज 30 मिनट हल्का व्यायाम करें, जैसे तेज चलना, स्विमिंग, योग (विशेषकर प्राणायाम और आसन जो पेट पर दबाव न डालें)। व्यायाम से शुगर कोशिकाओं में तेजी से जाती है। तनाव प्रबंधन: तनाव हार्मोन (कोर्टिसोल) शुगर बढ़ाते हैं। ध्यान, गहरी सांस लेना, या संगीत सुनना मददगार है। नींद पूरी लें: 7-8 घंटे की नींद लें। नींद की कमी से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है। पानी अधिक पिएं: दिन में 8-10 गिलास पानी पिएं। यह किडनी को शुगर बाहर निकालने में मदद करता है। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Mental Health & Daily Life) गर्भकालीन मधुमेह सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव चिंता और तनाव: शुगर लेवल को लेकर लगातार चिंता, "क्या मैं कुछ गलत खा रही हूं?" का डर। अवसाद (Depression): हार्मोनल बदलाव और डायबिटीज के प्रबंधन से मूड स्विंग, उदासी, या अकेलापन महसूस होना। गिल्ट और शर्म: कुछ महिलाएं खुद को दोषी मानती हैं, "मैंने ही अपने बच्चे को नुकसान पहुंचाया।" दैनिक जीवन पर प्रभाव खाने की आदतों में बदलाव: हर समय शुगर चेक करना, डाइट प्लान का पालन करना, सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होना मुश्किल हो सकता है। थकान: शुगर के उतार-चढ़ाव से शारीरिक और मानसिक थकान बढ़ जाती है। डिलीवरी की चिंता: बच्चे के बड़े होने या सी-सेक्शन की संभावना से डर लगना। कैसे सामना करें? पार्टनर और परिवार से बात करें: अपनी भावनाओं को साझा करें। उनका सहयोग लें। सपोर्ट ग्रुप जॉइन करें: ऑनलाइन या ऑफलाइन GDM सपोर्ट ग्रुप में शामिल हों, जहां अन्य महिलाएं अपने अनुभव साझा करती हैं। प्रोफेशनल हेल्प लें: अगर चिंता या अवसाद ज्यादा हो, तो काउंसलर या साइकोलॉजिस्ट से मिलें। 7. 10 विस्तृत FAQ (Frequently Asked Questions) 1. क्या गर्भकालीन मधुमेह से बच्चे को नुकसान हो सकता है? हां, अगर नियंत्रित न किया जाए। बच्चे का वजन अधिक हो सकता है (मैक्रोसोमिया), जिससे डिलीवरी में कठिनाई होती है। जन्म के बाद बच्चे का शुगर लेवल अचानक गिर सकता है (हाइपोग्लाइसीमिया), और भविष्य में मोटापा या टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन सही प्रबंधन से ये जोखिम काफी कम हो जाते हैं। 2. क्या गर्भकालीन मधुमेह ठीक हो सकता है? हां, आमतौर पर डिलीवरी के बाद यह अपने आप ठीक हो जाता है। लेकिन 50% महिलाओं में बाद में टाइप 2 डायबिटीज विकसित होने का खतरा रहता है। इसलिए डिलीवरी के 6-12 सप्ताह बाद शुगर टेस्ट करवाना जरूरी है। 3. क्या मैं गर्भावस्था में मीठा खा सकती हूं? बहुत सीमित मात्रा में। प्राकृतिक मिठास जैसे फल (सेब, जामुन) ले सकती हैं, लेकिन चीनी, गुड़, मिठाई, केक, कोल्ड ड्रिंक से पूरी तरह बचें। अगर कुछ मीठा खाना ही है, तो डॉक्टर से अनुमति लें और शुगर चेक करें। 4. क्या व्यायाम करना सुरक्षित है? हां, लेकिन डॉक्टर की सलाह से। हल्का व्यायाम जैसे चलना, स्विमिंग, प्रीनेटल योग बहुत फायदेमंद है। भारी वजन उठाने, दौड़ने या पेट पर दबाव डालने वाले व्यायाम से बचें। अगर चक्कर आए या ब्लीडिंग हो, तो तुरंत रुकें। 5. क्या गर्भकालीन मधुमेह से सी-सेक्शन जरूरी हो जाता है? जरूरी नहीं, लेकिन संभावना बढ़ जाती है। अगर बच्चा बहुत बड़ा (4 किलो से अधिक) हो जाए, तो डॉक्टर सी-सेक्शन की सलाह दे सकते हैं। लेकिन अगर शुगर नियंत्रित है और बच्चे का वजन सामान्य है, तो नॉर्मल डिलीवरी संभव है। 6. क्या मैं स्तनपान कर सकती हूं? हां, स्तनपान करना बहुत फायदेमंद है। यह आपके शुगर लेवल को कम करने में मदद करता है और बच्चे को भविष्य में मोटापा और डायबिटीज से बचाता है। स्तनपान के दौरान भी डाइट का ध्यान रखें। 7. क्या मेथी दाना वाकई शुगर कम करता है? हां, कई अध्ययनों से साबित हुआ है। मेथी में घुलनशील फाइबर होता है, जो शुगर अवशोषण को धीमा करता है। लेकिन इसे दवा का विकल्प न समझें, बल्कि डाइट का हिस्सा बनाएं। अधिक मात्रा में लेने से पेट खराब हो सकता है। 8. क्या तनाव से शुगर बढ़ सकता है? हां, बिल्कुल। तनाव हार्मोन (कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन) लिवर से अधिक शुगर रिलीज करते हैं। इसलिए तनाव कम करने के उपाय जैसे ध्यान, गहरी सांस लेना, या हल्का संगीत सुनना बहुत जरूरी है। 9. क्या मैं बाद में टाइप 2 डायबिटीज से बच सकती हूं? हां, जीवनशैली में बदलाव से बच सकती हैं। स्वस्थ वजन बनाए रखें, नियमित व्यायाम करें, संतुलित आहार लें, और हर 1-3 साल में शुगर टेस्ट करवाती रहें। डिलीवरी के बाद 6-12 सप्ताह में OGTT जरूर करवाएं। 10. क्या गर्भकालीन मधुमेह में कुछ फल खाने से मना है? सभी फल खा सकती हैं, लेकिन मात्रा का ध्यान रखें। केला, आम, अंगूर, चीकू में शुगर अधिक होता है, इन्हें सीमित मात्रा में (जैसे आधा केला या कुछ अंगूर) खाएं। सेब, नाशपाती, जामुन, संतरा, अमरूद कम शुगर वाले होते हैं। फलों का जूस न पिएं, बल्कि पूरा फल खाएं। महत्वपूर्ण चिकित्सा अस्वीकरण (Medical Disclaimer): यह लेख केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। गर्भावस्था के दौरान किसी भी आहार, व्यायाम या दवा को शुरू करने से पहले हमेशा अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ, एंडोक्रिनोलॉजिस्ट या डायटीशियन से परामर्श करें। प्रत्येक महिला की स्थिति अलग होती है, और व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह आवश्यक है। लेखक या प्रकाशक किसी भी प्रकार की क्षति या स्वास्थ्य समस्या के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।

Agarbatti jala ke saans phool raha hai? Kya asthma ka naya trigger mil gaya?

Aaj subah pooja kar rahi thi, agarbatti jali. Bade din baad mann kiya to lakdi wali agarbatti li thi, woh bhi chandan wali. Bas 5 minute mein hi meri saans phoolne lagi. Chhati pe jaise koi bhaari patthar rakh diya ho. Bahar nikal ke baith gayi, tab jaake thoda aaram aaya. Pati bol rahe the "kitni der lagti hai pooja karne mein" par unhe pata nahi mujhe kya hota hai. Pehle sochti thi ki chinta mat karo, thodi khasi hai. Ab dheere dheere samajh aa raha hai ki ye asthma ka hi effect hai. Kya koi aur bhi hai jisko agarbatti ya dhoop ke dhue se problem hoti hai? Koi natural remedy batao jo kaam kare. Maine suna hai steam lene se aaram milta hai, par kitni der? Ya fir bas pooja ke time door rehna chahiye? Bahut pareshan hoon yaar. Ghar mein sab ko bhi samjhana mushkil hai.

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