Mucinac 600 Orange Sugar Free Effervescent Tablet - Uses, Price and Side Effects

Mucinac 600 Orange Sugar Free Effervescent Tablet: Uses, Price & Side Effects

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Acetylcysteine (600mg) (Click to see all medicines with same salt)
🏭 Cipla Ltd 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 13, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is Mucinac 600 Orange Sugar Free Effervescent Tablet used for? (Quick Answer)

🩺 Primary Use:
Mucinac 600 Orange Sugar Free Effervescent Tablet is primarily used for the treatment of .
🧪 Active Ingredient & Working:
It contains Acetylcysteine (600mg) which works by treating the underlying condition effectively.
⚠️ Safety Warning:
Always consult your doctor before using this medicine, especially to check if it is safe during pregnancy or if you suffer from liver or kidney issues.
💡 Did You Know? India has the highest number of USFDA-compliant plants outside the USA.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Acetylcysteine (600mg)
Manufacturer / BrandCipla Ltd
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic Class
Action Class
Prescription Required✓ Yes (Schedule H Drug)
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture

💊 Mucinac 600 Orange Sugar Free Effervescent Tablet Uses in Hindi & English (Ke Fayde)

Mucinac 600 Orange Sugar Free Effervescent Tablet is a prescription medicine used for reducing mucous secretion in various lung diseases like bronchitis, asthma and emphysema. It is also used to treat poisoning caused by paracetamol medicine overdose.Mucinac 600 Orange Sugar Free Effervescent Tablet can be taken with or without food, but take it at the same time to get the most benefit. It should be taken as your doctor's advice. The dose and how often you take it depends on what you are taking it for. Your doctor will decide how much you need to improve your symptoms. Dissolve the tablet in a glass of water and drink it immediately. You should take this medicine for as long as it is prescribed for you. In case, you have missed any doses than it is better to take the next dose as soon as you remember it. However, you should never take a double dose.The most common side effects of this medicine include fever, nausea, vomiting, and rash.  If these bother you or appear serious, let your doctor know. There may be ways of reducing or preventing them. Generally, it is advised to drink plenty of fluids while on treatment with this medicine.Before taking this medicine let your doctor know if you suffer from asthma, as close monitoring is required while taking this medicine. Your doctor should also know about all other medicines you are taking as many of these may make this medicine less effective or change the way it works. Inform your doctor if you are pregnant, planning pregnancy or breastfeeding.

💡 How to Take Mucinac 600 Orange Sugar Free Effervescent Tablet (Khane ka tarika)

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

⚠️ Side Effects of Mucinac 600 Orange Sugar Free Effervescent Tablet (Nuksan)

Common and serious side effects may include:

  • Fever
  • Nausea
  • Vomiting
  • Rash
  • Gastrointestinal discomfort

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

📖 Patient Counseling & Warnings

  • 🔹 Do not stop suddenly without consulting your doctor
  • 🔹 Inform your doctor about all other medications you're taking
  • 🔹 Avoid alcohol while taking this medication
  • 🔹 If you miss a dose, take it as soon as you remember
  • 🔹 Seek immediate medical help if you experience severe allergic reactions

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Complete Guide to Diabetes Diet Plan - 07-06-2026

डायबिटीज डाइट प्लान: एक संपूर्ण गाइड (Diabetes Diet Plan: A Complete Guide) डायबिटीज (मधुमेह) एक ऐसी बीमारी है जो आज के समय में भारत में तेज़ी से फैल रही है। इसे "साइलेंट किलर" भी कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण अक्सर धीरे-धीरे नज़र आते हैं। सही डाइट और जीवनशैली से इसे कंट्रोल किया जा सकता है। इस गाइड में हम आपको डायबिटीज के हर पहलू को विस्तार से समझाएंगे—बीमारी कैसे होती है, इसके लक्षण, सही खान-पान, दवाइयां, घरेलू उपाय, और मानसिक स्वास्थ्य पर इसका असर। यह गाइड पूरी तरह SEO-optimized है और भारतीय पाठकों के लिए हिंग्लिश (Hinglish) में लिखी गई है। 1. गहरी भूमिका और बीमारी का तंत्र (Deep Introduction & Disease Mechanism) डायबिटीज तब होती है जब आपका शरीर इंसुलिन (Insulin) नामक हार्मोन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता या पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता। इंसुलिन अग्न्याशय (Pancreas) में बनता है और इसका काम है ग्लूकोज (Glucose) को खून से कोशिकाओं तक पहुंचाना ताकि वह ऊर्जा में बदल सके। कैसे होती है बीमारी? टाइप 1 डायबिटीज: यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है जहां शरीर की इम्यून सिस्टम अग्न्याशय की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं (बीटा कोशिकाओं) पर हमला करती है। इससे इंसुलिन का उत्पादन लगभग बंद हो जाता है। यह आमतौर पर बचपन या किशोरावस्था में शुरू होता है। टाइप 2 डायबिटीज: यह सबसे आम प्रकार है (भारत में 90% से अधिक मामले)। इसमें शरीर इंसुलिन का विरोध करने लगता है (इंसुलिन रेजिस्टेंस) या पर्याप्त इंसुलिन नहीं बनाता। मोटापा, गलत खान-पान, और शारीरिक निष्क्रियता इसके मुख्य कारण हैं। गर्भकालीन डायबिटीज (Gestational Diabetes): गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलावों के कारण ब्लड शुगर बढ़ जाता है। यह आमतौर पर बच्चे के जन्म के बाद ठीक हो जाता है, लेकिन बाद में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ा देता है। शरीर के अंदर क्या होता है? जब आप खाना खाते हैं, तो कार्बोहाइड्रेट ग्लूकोज में टूट जाता है। ग्लूकोज खून में आता है और इंसुलिन इसे कोशिकाओं में ले जाने का काम करता है। डायबिटीज में यह प्रक्रिया बाधित होती है, जिससे खून में ग्लूकोज जमा हो जाता है (हाइपरग्लाइसेमिया)। लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से नसों, किडनी, आंखों, और हृदय को नुकसान पहुंच सकता है। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Common AND Rare Symptoms) डायबिटीज के लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं, इसलिए कई लोगों को पता ही नहीं चलता। यहां हम आम और कम ज्ञात लक्षणों को विस्तार से बता रहे हैं। सामान्य लक्षण (Common Symptoms): बार-बार पेशाब आना (Polyuria): खासकर रात में। शरीर अतिरिक्त ग्लूकोज को पेशाब के जरिए बाहर निकालने की कोशिश करता है। अत्यधिक प्यास लगना (Polydipsia): बार-बार पेशाब आने से शरीर डिहाइड्रेट हो जाता है, जिससे प्यास बढ़ती है। भूख का अधिक लगना (Polyphagia): कोशिकाओं तक ग्लूकोज नहीं पहुंचने से शरीर को ऊर्जा नहीं मिलती, जिससे भूख लगती है। अचानक वजन कम होना: खासकर टाइप 1 डायबिटीज में, शरीर ऊर्जा के लिए मांसपेशियों और वसा को तोड़ने लगता है। थकान और कमजोरी: शरीर में ग्लूकोज का सही उपयोग न होने से ऊर्जा की कमी होती है। धुंधला दिखना (Blurry Vision): हाई ब्लड शुगर आंखों के लेंस में तरल पदार्थ को प्रभावित करता है, जिससे दृष्टि धुंधली हो जाती है। घाव का धीरे-भरना: हाई शुगर रक्त प्रवाह और इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है, जिससे घाव जल्दी नहीं भरते। बार-बार संक्रमण होना: जैसे मूत्र मार्ग संक्रमण (UTI), त्वचा संक्रमण, या फंगल इंफेक्शन। दुर्लभ या कम ज्ञात लक्षण (Rare Symptoms): पैरों में जलन या झुनझुनी (Peripheral Neuropathy): "पैर में जलन" या "सुन्नपन" महसूस होना। यह नसों को नुकसान का संकेत है। त्वचा का काला पड़ना (Acanthosis Nigricans): गर्दन, बगल, या जांघों के आसपास त्वचा मोटी और काली हो जाती है। यह इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत है। यौन समस्याएं: पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन, महिलाओं में योनि का सूखापन या संक्रमण। मसूड़ों की समस्या: मसूड़ों में सूजन, खून आना, या दांतों का ढीला होना। हाथों-पैरों में ठंडक या सुन्नपन: खासकर टाइप 2 डायबिटीज में। बार-बार फंगल इंफेक्शन: जैसे मुंह में थ्रश (Candidiasis) या त्वचा पर खुजली। चेतावनी: अगर आपको ये लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डायबिटीज का जल्दी पता लगना बहुत जरूरी है। 3. विस्तृत डाइट प्लान: क्या खाएं और क्या न खाएं (Detailed Diet Plan: Kya Khaye and Kya Na Khaye) डायबिटीज डाइट का मतलब भूखा रहना नहीं है। इसका मतलब है सही चीज़ों को सही मात्रा में खाना। भारतीय खानपान में कई ऐसी चीज़ें हैं जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करती हैं। यहां हम एक पूरा डाइट प्लान दे रहे हैं। क्या खाएं (Kya Khaye) – ब्लड शुगर कंट्रोल करने वाले फूड्स: अनाज और दालें (Grains & Lentils): साबुत अनाज (Whole Grains): जैसे ब्राउन राइस, जई (Oats), क्विनोआ (Quinoa), और ज्वार (Sorghum)। ये फाइबर से भरपूर होते हैं और धीरे-धीरे ग्लूकोज छोड़ते हैं। दालें: मूंग दाल, मसूर दाल, चना दाल। प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत। रोटी: गेहूं की रोटी की जगह बाजरा, रागी (Finger Millet), या जौ (Barley) की रोटी खाएं। सब्जियां (Vegetables): हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक, मेथी, सरसों का साग। ये कैलोरी में कम और पोषक तत्वों में भरपूर होती हैं। क्रूसिफेरस सब्जियां: ब्रोकली, फूलगोभी, पत्ता गोभी। अन्य सब्जियां: करेला (Bitter Gourd), लौकी (Bottle Gourd), तोरी (Zucchini), शिमला मिर्च, और खीरा। जड़ वाली सब्जियां (सीमित मात्रा में): गाजर, चुकंदर (Beetroot) – इनमें नेचुरल शुगर होती है, इसलिए संयम से खाएं। फल (Fruits): कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फल: जामुन, सेब, नाशपाती, संतरा, अमरूद, कीवी, और बेरीज (स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी)। आम, केला, अंगूर, और चीकू: इनमें शुगर अधिक होती है, इसलिए बहुत कम मात्रा में खाएं या डॉक्टर से पूछकर खाएं। प्रोटीन (Protein): दालें और बीन्स: राजमा, छोले (सीमित मात्रा में), सोयाबीन। अंडे: प्रोटीन का अच्छा स्रोत। मछली: खासकर सैल्मन, मैकेरल (सालमन, बांगड़ा) – ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर। चिकन (बिना त्वचा के): ग्रिल या उबालकर खाएं। पनीर और दही: कम वसा वाला पनीर और दही (बिना मीठा) खाएं। डेयरी (Dairy): दूध: बिना मीठा या कम वसा वाला दूध। दही: प्रोबायोटिक्स से भरपूर, पाचन के लिए अच्छा। मक्खन या घी: सीमित मात्रा में (1-2 चम्मच रोजाना)। नट्स और बीज (Nuts & Seeds): बादाम, अखरोट, पिस्ता, और काजू: मुट्ठी भर (लगभग 10-12) रोजाना। अलसी के बीज (Flaxseeds), चिया सीड्स, और सूरजमुखी के बीज: फाइबर और ओमेगा-3 के लिए अच्छे। पेय पदार्थ (Beverages): पानी: दिन में कम से कम 8-10 गिलास। ग्रीन टी: एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर, ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद करती है। नारियल पानी: बिना मीठा, इलेक्ट्रोलाइट्स के लिए अच्छा। सब्जी का सूप: बिना क्रीम के। क्या न खाएं (Kya Na Khaye) – बचने के लिए फूड्स: रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट: सफेद चावल, मैदा (White Flour), ब्रेड, पास्ता, और नूडल्स। शक्कर और मीठी चीज़ें: चीनी, मिठाई (गुलाब जामुन, जलेबी, लड्डू), कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस, और आइसक्रीम। तले हुए खाद्य पदार्थ: समोसा, पकौड़ा, फ्रेंच फ्राइज, और भुजिया। फास्ट फूड: बर्गर, पिज्जा, और चाउमीन। अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थ: अचार, पापड़, और प्रोसेस्ड मीट (सॉसेज, बेकन)। अल्कोहल: खासकर बीयर और मीठी वाइन। अगर पीना है तो डॉक्टर से सलाह लें। फलों का जूस: भले ही ताजा हो, लेकिन इसमें फाइबर नहीं होता और शुगर तेज़ी से बढ़ती है। फल को पूरा खाएं। एक दिन का सैंपल डाइट प्लान (Sample Daily Diet Plan): समय भोजन सुबह (7:00 AM) 1 गिलास गुनगुना पानी + 1 चम्मच मेथी दाना (भिगोया हुआ) या 1 कप ग्रीन टी नाश्ता (8:00 AM) 1 कटोरी ओट्स या 2 बाजरे की रोटी + 1 कटोरी सब्जी + 1 अंडा उबला मिड-मॉर्निंग (10:30 AM) 1 सेब या 1 मुट्ठी बादाम दोपहर का खाना (1:00 PM) 1 कटोरी ब्राउन राइस + 1 कटोरी दाल + 1 कटोरी सब्जी + हरी सलाद शाम का नाश्ता (4:00 PM) 1 कप दही या 1 कप सब्जी का सूप रात का खाना (7:00 PM) 2 रोटी (गेहूं या रागी) + 1 कटोरी सब्जी + 1 कटोरी दाल सोने से पहले (9:30 PM) 1 गिलास दूध (बिना मीठा) + 1/2 चम्मच हल्दी नोट: यह एक सामान्य प्लान है। अपनी बीमारी और शरीर के अनुसार पोर्शन साइज़ और खाने की चीज़ों को डॉक्टर या डायटीशियन से कस्टमाइज़ करवाएं। 4. चिकित्सा प्रबंधन: दवाइयां और उनका काम (Medical Management: Medicines and How They Work) डायबिटीज का इलाज डाइट, एक्सरसाइज, और दवाइयों के संयोजन से होता है। यहां हम आमतौर पर प्रिस्क्राइब की जाने वाली दवाइयों के बारे में शैक्षिक जानकारी दे रहे हैं। ध्यान दें: यह जानकारी केवल शिक्षा के लिए है। कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। टाइप 1 डायबिटीज के लिए: इंसुलिन थेरेपी: टाइप 1 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन नहीं बनाता, इसलिए इंसुलिन इंजेक्शन या पंप के जरिए देना जरूरी है। इंसुलिन कई प्रकार के होते हैं: रैपिड-एक्टिंग इंसुलिन: खाने के तुरंत बाद काम करता है (जैसे लिस्प्रो, एस्पार्ट)। शॉर्ट-एक्टिंग इंसुलिन: खाने से 30 मिनट पहले लगाया जाता है (जैसे रेगुलर इंसुलिन)। इंटरमीडिएट-एक्टिंग इंसुलिन: दिन में दो बार लगाया जाता है (जैसे एनपीएच इंसुलिन)। लॉन्ग-एक्टिंग इंसुलिन: 24 घंटे तक काम करता है (जैसे ग्लार्जिन, डिटेमिर)। टाइप 2 डायबिटीज के लिए: मेटफॉर्मिन (Metformin): यह पहली पसंद की दवा है। यह लीवर में ग्लूकोज उत्पादन को कम करती है और इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाती है। सल्फोनील्यूरिया (Sulfonylureas): जैसे ग्लिपिजाइड, ग्लाइबुराइड। ये अग्न्याशय को अधिक इंसुलिन बनाने के लिए उत्तेजित करती हैं। डीपीपी-4 इनहिबिटर (DPP-4 Inhibitors): जैसे सीटाग्लिप्टिन, विल्डाग्लिप्टिन। ये इंसुलिन स्राव को बढ़ाती हैं और ग्लूकागन को कम करती हैं। एसजीएलटी2 इनहिबिटर (SGLT2 Inhibitors): जैसे डापाग्लिफ्लोज़िन, एम्पाग्लिफ्लोज़िन। ये किडनी के जरिए अतिरिक्त ग्लूकोज को पेशाब में बाहर निकालती हैं। जीएलपी-1 एगोनिस्ट (GLP-1 Agonists): जैसे लिराग्लूटाइड, सेमाग्लूटाइड। ये इंसुलिन बढ़ाती हैं, भूख कम करती हैं, और वजन घटाने में मदद करती हैं। थियाजोलिडाइनडायोन (Thiazolidinediones): जैसे पियोग्लिटाज़ोन। ये इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाती हैं। दवाइयां कैसे काम करती हैं? इंसुलिन बढ़ाना: कुछ दवाएं (जैसे सल्फोनील्यूरिया) अग्न्याशय को अधिक इंसुलिन बनाने के लिए कहती हैं। इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाना: मेटफॉर्मिन और पियोग्लिटाज़ोन कोशिकाओं को इंसुलिन के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती हैं। ग्लूकोज उत्पादन कम करना: मेटफॉर्मिन लीवर में ग्लूकोज उत्पादन को कम करती है। ग्लूकोज उत्सर्जन बढ़ाना: एसजीएलटी2 इनहिबिटर किडनी के जरिए ग्लूकोज को बाहर निकालती हैं। चेतावनी: दवाइयों के साइड इफेक्ट हो सकते हैं (जैसे मेटफॉर्मिन से पेट खराब, सल्फोनील्यूरिया से लो ब्लड शुगर)। डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न बदलें या बंद न करें। 5. सिद्ध घरेलू उपाय और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) डायबिटीज को कंट्रोल करने में घरेलू उपाय और जीवनशैली में बदलाव बहुत मददगार साबित हो सकते हैं। ये उपाय वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हैं और भारतीय घरों में आसानी से उपलब्ध हैं। घरेलू उपाय (Home Remedies): मेथी दाना (Fenugreek Seeds): रात भर 1 चम्मच मेथी दाना पानी में भिगो दें। सुबह खाली पेट पानी समेत पी लें। मेथी में फाइबर और कंपाउंड होते हैं जो ब्लड शुगर को कम करते हैं। करेला (Bitter Gourd): करेले का जूस या सब्जी खाएं। इसमें चारैंटिन (Charantin) नामक तत्व होता है जो ब्लड शुगर को कम करने में मदद करता है। जामुन (Indian Blackberry): जामुन के बीजों को पीसकर पाउडर बना लें और रोजाना 1 चम्मच पानी के साथ लें। जामुन में एंथोसायनिन और एलाजिक एसिड होता है जो इंसुलिन गतिविधि को बढ़ाता है। दालचीनी (Cinnamon): 1/2 चम्मच दालचीनी पाउडर को गुनगुने पानी या चाय में मिलाकर पिएं। यह इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाती है। गिलोय (Giloy): गिलोय की पत्तियों का जूस पिएं। यह इम्यूनिटी बढ़ाता है और ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है। हल्दी (Turmeric): 1 गिलास दूध में 1/2 चम्मच हल्दी मिलाकर पिएं। हल्दी में करक्यूमिन होता है जो सूजन कम करता है और ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है। आंवला (Indian Gooseberry): आंवला का जूस या चूर्ण लें। यह विटामिन सी से भरपूर है और अग्न्याशय की कोशिकाओं को स्वस्थ रखता है। जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes): नियमित व्यायाम: हर दिन कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि करें। जैसे तेज़ चलना, योग, साइकिल चलाना, या तैराकी। यह इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाता है और वजन कम करने में मदद करता है। वजन कम करें: अगर आप अधिक वजन वाले हैं, तो सिर्फ 5-10% वजन कम करने से ब्लड शुगर कंट्रोल में काफी सुधार हो सकता है। तनाव प्रबंधन: तनाव (Stress) ब्लड शुगर को बढ़ाता है। ध्यान (Meditation), प्राणायाम, और गहरी सांस लेने के व्यायाम करें। नींद पूरी करें: हर रात 7-8 घंटे की नींद लें। नींद की कमी से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है। धूम्रपान और शराब छोड़ें: धूम्रपान और शराब डायबिटीज के जोखिम को बढ़ाते हैं और दवाओं के प्रभाव को कम करते हैं। ब्लड शुगर मॉनिटरिंग: नियमित रूप से अपने ब्लड शुगर की जांच करें (खाली पेट और खाने के बाद)। इससे पता चलता है कि आपकी डाइट और दवाइयां कितनी प्रभावी हैं। पैरों की देखभाल: डायबिटीज में पैरों में संक्रमण का खतरा अधिक होता है। रोजाना पैरों को धोएं, सुख

Lower Back Dard Left Side! Pichle Saal Stone Tha, Kya Wapis Aa Gaya?

Yaar, kal se meri lower back mein dard hai. Left side pe, right side pe nahi. Pichle saal stone ke time bhi aisa hi hota tha. Ab dar lag raha hai ki wapis to nahi aa gaya? Pehle beer peeta tha, ab bilkul band kar di hai. Din mein 4-5 liter paani peeta hoon. Phir bhi ye dard kyun ho raha hai? Kya ye muscle ka pain ho sakta hai ya phir stone ki warning hai? Koi batao, kyun ki kal subah se hi thoda sa pain hai, aaj thoda zyada ho gaya. Main ne aaj subah nimbu paani piya, kuch fark nahi pada. Kya koi aur ghar ka nuskha hai? Ya direct doctor ke paas jaana chahiye? Please koi guide karo, main bahut paranoid ho gaya hoon.

BP 150/100 par bhi kachori kha liya? Ab sar dard ka ilaaj batao ya gali do!

Yaar kal raat se sar dard ho raha hai, pet ke upar waala hissa bhi bhaari ho gaya. Dukaan pe kaam zyada tha, chain se nahi betha. Ghar aaya toh biwi ne bola "BP check karo". Check kiya toh 150/100 dikha raha tha. Ghabrahat bhi ho rahi thi thodi. Doctor ne pehle hi bola hai tension nahi lene ka, par dukaan ka hisaab-kitaab, bachon ki padhai, sab dimaag mein ghoomta rehta hai. Ek goli kha li apni BP waali, aur thoda aaram kiya. Sar dard thoda kam hua par pura nahi gaya. Koi gharelu nuskha bata do bhai log? Nimbu paani piya toh kaam karta hai kya? Ya phir sirf goli hi sahara hai? Aur haan, aaj subah office jaate waqt kachori kha li thi. Pata hai oily cheez mana hai par muh kaise rokta hai. Bada mushkil hai yaar. Kisi ko bhi aisa experience ho toh batana, kaise control karte ho khud ko.

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