boldclave 375 tablet - Uses, Price and Side Effects

boldclave 375 tablet: Uses in Hindi (Fayde), Price, Side Effects & Substitutes

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🏭 DSV Healthcare 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 14, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is boldclave 375 tablet used for? (Quick Answer)

🩺 Primary Use:
boldclave 375 tablet (manufactured by DSV Healthcare) is a highly effective medicine primarily used for the treatment of anti infectives. It helps in relieving symptoms and improving your overall health. Find the complete list of boldclave 375 tablet uses in Hindi, alternatives, price in India, and dosage on SaathiMed below.
🧪 Active Ingredient & Working:
It contains Amoxycillin (250mg) + Clavulanic Acid (125mg) which works by treating the underlying condition effectively.
⚠️ Safety Warning:
Always consult your doctor before using this medicine, especially to check if it is safe during pregnancy or if you suffer from liver or kidney issues.

🇮🇳 boldclave 375 tablet के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

boldclave 375 tablet का उपयोग मुख्य रूप से anti infectives और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Amoxycillin (250mg) + Clavulanic Acid (125mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? Over 80% of the antiretroviral drugs used globally to combat AIDS are supplied by Indian pharmaceutical companies.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Amoxycillin (250mg) + Clavulanic Acid (125mg)
Manufacturer / BrandDSV Healthcare
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassANTI INFECTIVES
Action Class
Prescription Required✓ Yes (Schedule H Drug)
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Onset of Action:
30 to 60 minutes
Duration:
6 to 8 hours
Habit Forming:
No (Non-addictive)
Food:
Take after meal

💊 boldclave 375 tablet Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

💡 How to Take boldclave 375 tablet (Dosage & Khane ka tarika)

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💡 Expert Tips for Best Results

  • Follow the prescription: Always use boldclave 375 tablet exactly as prescribed by your healthcare provider. Do not alter the dosage yourself.
  • Check Expiry: Never consume expired medicines. Always double-check the manufacturing and expiry date on the packaging before use.
  • Storage: Store the medicine in a cool, dry place away from direct sunlight and out of reach of children.
  • Report Side Effects: If you experience severe allergic reactions, swelling, or breathing issues after taking boldclave 375 tablet, seek emergency medical help immediately.
  • Don't self-medicate: Do not share this medicine with others even if their symptoms seem similar to yours.

⚠️ boldclave 375 tablet Side Effects (Nuksan) & Precautions

Common and serious side effects may include:

  • Vomiting
  • Nausea
  • Diarrhea

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🛑 Myths vs. Facts about boldclave 375 tablet

  • Myth: Generic substitutes of boldclave 375 tablet are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Amoxycillin (250mg) + Clavulanic Acid (125mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of boldclave 375 tablet can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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Complete Guide to Diabetic Neuropathy & Foot Pain - 08-06-2026

डायबिटिक न्यूरोपैथी और पैरों का दर्द: एक संपूर्ण गाइड (Diabetic Neuropathy & Foot Pain) नमस्ते! अगर आप या आपके परिवार में कोई डायबिटीज (मधुमेह) से जूझ रहा है, तो 'डायबिटिक न्यूरोपैथी' और 'पैरों का दर्द' एक बहुत ही आम लेकिन गंभीर समस्या है। यह गाइड आपको हर छोटी-बड़ी बात समझाएगी, जैसे कोई एक्सपर्ट डॉक्टर आपको समझा रहा हो। हम बात करेंगे कि यह बीमारी शरीर के अंदर कैसे होती है, इसके लक्षण, खान-पान, दवाइयां, घरेलू उपाय और मानसिक स्वास्थ्य पर इसका असर। 1. गहन परिचय और रोग तंत्र (Deep Introduction & Disease Mechanism) डायबिटिक न्यूरोपैथी क्या है? डायबिटिक न्यूरोपैथी एक प्रकार की नसों (nerves) की बीमारी है जो लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर (hyperglycemia) के कारण होती है। जब आपका ब्लड शुगर लगातार बढ़ा रहता है, तो यह आपके शरीर की नसों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। यह नुकसान खासकर पैरों और हाथों की नसों में ज्यादा होता है, जिसे 'पेरिफेरल न्यूरोपैथी' कहते हैं। शरीर के अंदर क्या होता है? (Disease Mechanism) ग्लूकोज का जहर (Glucose Toxicity): जब ब्लड शुगर बहुत ज्यादा होता है, तो ग्लूकोज के अणु नसों की कोशिकाओं (neurons) में जमा हो जाते हैं। यह कोशिकाओं के अंदर 'सोर्बिटोल' और 'फ्रक्टोज' नाम के केमिकल बनाता है, जो नसों को नुकसान पहुंचाते हैं। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (Oxidative Stress): हाई शुगर से शरीर में फ्री रेडिकल्स बढ़ जाते हैं, जो नसों की सुरक्षात्मक परत (myelin sheath) को नष्ट कर देते हैं। इससे नसों का सिग्नल धीमा या गलत हो जाता है। खून की नसों को नुकसान (Microvascular Damage): डायबिटीज छोटी रक्त वाहिकाओं (capillaries) को भी नुकसान पहुंचाती है, जो नसों को ऑक्सीजन और पोषण देती हैं। जब नसों को पर्याप्त खून नहीं मिलता, तो वे कमजोर हो जाती हैं और मरने लगती हैं। सूजन (Inflammation): हाई शुगर से शरीर में सूजन बढ़ती है, जो नसों के आसपास के टिश्यू को नुकसान पहुंचाती है और दर्द को बढ़ाती है। यह प्रक्रिया धीरे-धीरे होती है, इसलिए शुरुआत में लक्षण नजर नहीं आते। लेकिन समय के साथ, पैरों में जलन, सुन्नपन, झुनझुनी और दर्द शुरू हो जाता है। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Common & Rare Symptoms) सामान्य लक्षण (Common Symptoms) पैरों में जलन (Burning Sensation): "पैरों में आग लग रही है" जैसा महसूस होना। यह रात में ज्यादा बढ़ जाता है। झुनझुनी या सुन्नपन (Tingling/Numbness): पैरों के तलवों या उंगलियों में सुई चुभने जैसा महसूस होना या फिर कुछ भी महसूस न होना। तेज दर्द (Sharp Pain): पैरों में बिजली के झटके जैसा दर्द या छुरा चुभने जैसा दर्द। स्पर्श के प्रति संवेदनशीलता (Hypersensitivity): हल्का सा छूना या कपड़ा रगड़ना भी बहुत दर्दनाक लगना। मांसपेशियों की कमजोरी (Muscle Weakness): पैरों या हाथों में कमजोरी, चलने में परेशानी, या चीजें गिराना। त्वचा में बदलाव (Skin Changes): पैरों की त्वचा सूखी, फटी हुई या पपड़ीदार हो जाना। संतुलन की समस्या (Balance Issues): अंधेरे में या बिना देखे चलने पर गिरने का डर। दुर्लभ लक्षण (Rare Symptoms) ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी (Autonomic Neuropathy): पाचन तंत्र पर असर (कब्ज, दस्त, उल्टी), ब्लड प्रेशर का अचानक गिरना (खड़े होने पर चक्कर), पसीना कम आना, या यौन समस्याएं (impotence)। प्रॉक्सिमल न्यूरोपैथी (Proximal Neuropathy): जांघों, कूल्हों या नितंबों में अचानक तेज दर्द और कमजोरी, जिससे सीढ़ियां चढ़ने या कुर्सी से उठने में मुश्किल होती है। फोकल न्यूरोपैथी (Focal Neuropathy): एक तरफ के चेहरे, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या दर्द (जैसे बेल्स पाल्सी या कार्पल टनल सिंड्रोम)। चारकोट फुट (Charcot Foot): पैर की हड्डियों का कमजोर होकर टूटना या विकृत होना, जिससे पैर का आकार बदल जाता है। यह बहुत दुर्लभ लेकिन गंभीर है। 3. विस्तृत डाइट प्लान (Detailed Diet Plan) - क्या खाएं और क्या न खाएं डायबिटिक न्यूरोपैथी में डाइट का सबसे बड़ा रोल है। सही खाना ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है और नसों की मरम्मत में मदद करता है। क्या खाएं (Kya Khaye) - भारतीय खाद्य पदार्थ फाइबर से भरपूर अनाज: ज्वार, बाजरा, रागी (nachni), ओट्स, ब्राउन राइस, क्विनोआ। ये धीरे-धीरे शुगर बढ़ाते हैं। हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक, मेथी, सरसों का साग, ब्रोकली। इनमें विटामिन B और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो नसों के लिए फायदेमंद हैं। प्रोटीन के स्रोत: दालें (मूंग, मसूर, चना), सोया, पनीर, अंडे, चिकन (बिना त्वचा के), मछली (सैल्मन या मैकेरल - ओमेगा-3 के लिए)। हेल्दी फैट्स: अलसी के बीज (flaxseeds), चिया सीड्स, अखरोट, बादाम, जैतून का तेल, नारियल का तेल (सीमित मात्रा में)। फल (कम मीठे): जामुन, सेब, नाशपाती, पपीता, संतरा, कीवी। आम और अंगूर से बचें। मसाले और जड़ी-बूटियां: हल्दी (दूध में), अदरक, दालचीनी, मेथी दाना (भिगोकर), लहसुन। ये सूजन कम करते हैं। ड्रिंक्स: नारियल पानी, नींबू पानी (बिना चीनी), ग्रीन टी, मेथी का पानी। क्या न खाएं (Kya Na Khaye) - बचने वाले खाद्य पदार्थ रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट: सफेद चावल, मैदा, ब्रेड, पास्ता, नूडल्स। ये तुरंत शुगर बढ़ाते हैं। मीठी चीजें: मिठाई (गुलाब जामुन, जलेबी), कोल्ड ड्रिंक, पैक्ड जूस, आइसक्रीम, केक। तला-भुना और जंक फूड: समोसा, पकौड़ा, चिप्स, बर्गर, पिज्जा। ये सूजन बढ़ाते हैं। रेड मीट और प्रोसेस्ड मीट: सॉसेज, बेकन, मटन (सीमित करें)। ज्यादा नमक: अचार, पापड़, चटनी, पैक्ड सूप। नमक ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है और नसों पर दबाव डाल सकता है। शराब और सिगरेट: ये नसों को और नुकसान पहुंचाते हैं और दर्द बढ़ाते हैं। नमूना डाइट चार्ट (Sample Diet Plan) सुबह (7:00 AM): गुनगुने पानी में नींबू + मेथी दाना (भिगोया हुआ) या ग्रीन टी। नाश्ता (8:30 AM): ज्वार या बाजरे की रोटी + सब्जी + दही, या ओट्स इडली + सांबर। मिड-मॉर्निंग (11:00 AM): एक सेब या मुट्ठी भर बादाम/अखरोट। दोपहर का खाना (1:00 PM): ब्राउन राइस + मूंग दाल + पालक की सब्जी + सलाद (खीरा, टमाटर, गाजर)। शाम का नाश्ता (4:00 PM): नारियल पानी या भुने हुए चने + ग्रीन टी। रात का खाना (7:30 PM): मल्टीग्रेन रोटी + बैंगन की सब्जी + मिक्स दाल का सूप। सोने से पहले (10:00 PM): हल्दी वाला दूध (बिना चीनी) या एक चम्मच अलसी के बीज। 4. चिकित्सा प्रबंधन (Medical Management) - दवाइयां और उनका काम नोट: यह केवल शैक्षिक जानकारी है। कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। ब्लड शुगर कंट्रोल करने वाली दवाइयां मेटफॉर्मिन (Metformin): यह लीवर में ग्लूकोज बनना कम करता है और इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाता है। यह न्यूरोपैथी की शुरुआत को धीमा करता है। इंसुलिन (Insulin): टाइप 1 डायबिटीज या गंभीर मामलों में, इंसुलिन इंजेक्शन ब्लड शुगर को तेजी से कंट्रोल करते हैं। एसजीएलटी2 इनहिबिटर्स (SGLT2 Inhibitors): जैसे डापाग्लिफ्लोजिन, ये किडनी के जरिए शुगर को बाहर निकालते हैं और नसों की सुरक्षा करते हैं। दर्द और न्यूरोपैथी के लिए दवाइयां गैबापेंटिन (Gabapentin) और प्रीगैबालिन (Pregabalin): ये एंटी-कन्वल्सेंट दवाएं हैं जो नसों के दर्द को कम करती हैं। ये मस्तिष्क में दर्द के सिग्नल को ब्लॉक करती हैं। साइड इफेक्ट्स: चक्कर, नींद आना। डुलोक्सेटीन (Duloxetine) और अमिट्रिप्टिलाइन (Amitriptyline): ये एंटीडिप्रेसेंट हैं, लेकिन न्यूरोपैथिक दर्द में बहुत कारगर हैं। ये मस्तिष्क में सेरोटोनिन और नॉरएड्रेनालिन के स्तर को बढ़ाकर दर्द कम करते हैं। ट्रामाडोल (Tramadol): यह एक ओपिओइड दर्द निवारक है, लेकिन इसका उपयोग केवल गंभीर दर्द में और डॉक्टर की निगरानी में किया जाता है। कैप्साइसिन क्रीम (Capsaicin Cream): मिर्च से बनी यह क्रीम त्वचा पर लगाने से दर्द को कम करती है। यह 'पदार्थ P' (substance P) नामक दर्द रसायन को खत्म करती है। लिडोकेन पैच (Lidocaine Patch): यह एक स्थानीय एनेस्थेटिक है जो दर्द वाली जगह पर लगाया जाता है। नसों की मरम्मत के लिए सप्लीमेंट्स विटामिन B12 (Methylcobalamin): नसों की मरम्मत के लिए जरूरी। डायबिटीज के मरीजों में अक्सर B12 की कमी होती है, खासकर मेटफॉर्मिन लेने वालों में। अल्फा-लिपोइक एसिड (Alpha-Lipoic Acid): यह एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो नसों के दर्द और जलन को कम करता है। 600-1200 mg प्रतिदिन लाभदायक हो सकता है। बेनफोटियामाइन (Benfotiamine): यह विटामिन B1 का एक रूप है जो नसों को ग्लूकोज के नुकसान से बचाता है। 5. सिद्ध घरेलू उपाय और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) घरेलू उपाय (Home Remedies) गुनगुने पानी में पैर भिगोएं (Warm Water Soak): रोज रात को 10-15 मिनट के लिए पैरों को गुनगुने पानी (गर्म नहीं) में डालें। इसमें 1 चम्मच नमक और 2-3 बूंद लैवेंडर या टी ट्री ऑयल मिलाएं। यह रक्त संचार बढ़ाता है और दर्द कम करता है। सावधानी: पानी का तापमान जांचने के लिए थर्मामीटर या कोहनी का उपयोग करें, क्योंकि पैरों में सुन्नपन होने पर जल सकते हैं। हल्दी और दूध (Turmeric Milk): रात को सोने से पहले एक गिलास गुनगुने दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर पिएं। हल्दी में करक्यूमिन होता है, जो सूजन और दर्द कम करता है। मेथी दाना (Fenugreek Seeds): रात भर एक चम्मच मेथी दाना पानी में भिगो दें। सुबह खाली पेट पानी सहित चबाएं। यह ब्लड शुगर कंट्रोल करता है और नसों को फायदा पहुंचाता है। एप्सम सॉल्ट (Epsom Salt): गुनगुने पानी में एप्सम सॉल्ट (मैग्नीशियम सल्फेट) डालकर पैर भिगोएं। मैग्नीशियम मांसपेशियों को आराम देता है और दर्द कम करता है। एलोवेरा जेल (Aloe Vera Gel): ताजे एलोवेरा के पत्ते से जेल निकालकर पैरों पर लगाएं। यह ठंडक देता है और जलन को शांत करता है। व्यायाम (Exercise): हल्का व्यायाम जैसे पैरों की स्ट्रेचिंग, योग (विशेषकर पादहस्तासन), और तैराकी। यह रक्त संचार बढ़ाता है और नसों को सक्रिय रखता है। जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes) पैरों की नियमित जांच (Daily Foot Check): रोज शाम को पैरों को अच्छी तरह से जांचें। कहीं कोई कट, छाला, लालिमा या सूजन तो नहीं है? अगर खुद नहीं देख सकते, तो परिवार के किसी सदस्य से जांच करवाएं या शीशे का उपयोग करें। सही जूते पहनें (Proper Footwear): हमेशा मुलायम, चौड़े और अच्छी कुशनिंग वाले जूते पहनें। सैंडल या चप्पल से बचें जो पैरों को चोट पहुंचा सकते हैं। डॉक्टर से 'डायबिटिक शूज' के बारे में पूछें। मॉइस्चराइजर का उपयोग करें (Moisturize): पैरों की त्वचा को रोज मॉइस्चराइजर लगाएं, लेकिन उंगलियों के बीच न लगाएं (वहां फंगल इंफेक्शन हो सकता है)। धूम्रपान और शराब छोड़ें (Quit Smoking & Alcohol): ये दोनों नसों के रक्त संचार को खराब करते हैं और दर्द बढ़ाते हैं। तनाव प्रबंधन (Stress Management): ध्यान (meditation), गहरी सांस लेना, या संगीत सुनना। तनाव ब्लड शुगर बढ़ाता है और दर्द को और खराब करता है। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Mental Health and Daily Life) मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डायबिटिक न्यूरोपैथी सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी बहुत थका देने वाली है। लगातार दर्द, जलन और सुन्नपन के कारण मरीज अक्सर इन समस्याओं का सामना करते हैं: डिप्रेशन (Depression): लगातार दर्द और थकान से उदासी, निराशा और जीवन में रुचि कम हो जाती है। चिंता (Anxiety): पैरों में छाले या इंफेक्शन का डर, गिरने का डर, और बीमारी के बढ़ने का डर लगातार बना रहता है। नींद की समस्या (Insomnia): रात में दर्द बढ़ने के कारण नींद पूरी नहीं होती, जिससे दिनभर थकान रहती है। सामाजिक अलगाव (Social Isolation): दर्द के कारण घूमने-फिरने, दोस्तों से मिलने या परिवार के साथ समय बिताने में कठिनाई होती है, जिससे अकेलापन बढ़ता है। दैनिक जीवन पर प्रभाव चलने-फिरने में कठिनाई: पैरों में दर्द और कमजोरी के कारण सीढ़ियां चढ़ना, बाजार जाना या लंबी दूरी तक चलना मुश्किल हो जाता है। काम पर असर: नौकरी में ध्यान केंद्रित करना मुश्किल होता है, खासकर अगर काम में खड़े रहना या चलना शामिल है। स्वतंत्रता खत्म होना: गंभीर मामलों में, मरीज को चलने के लिए वॉकर या व्हीलचेयर की जरूरत पड़ सकती है, जिससे आत्मनिर्भरता कम हो जाती है। आर्थिक बोझ: दवाइयां, डॉक्टर की फीस, विशेष जूते और इलाज का खर्च परिवार पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है। समाधान: परिवार का सहयोग, काउंसलिंग, और सपोर्ट ग्रुप से जुड़ना बहुत मददगार हो सकता है। डॉक्टर से मानसिक स्वास्थ्य के बारे में खुलकर बात करें। 7. 10 विस्तृत अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (10 Detailed FAQs) 1. क्या डायबिटिक न्यूरोपैथी ठीक हो सकती है? डायबिटिक न्यूरोपैथी पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकती, लेकिन इसे कंट्रोल किया जा सकता है। ब्लड शुगर को सख्ती से कंट्रोल करके, सही दवाइयां लेकर और जीवनशैली में बदलाव करके नसों को और नुकसान होने से रोका जा सकता है और दर्द को कम किया जा सकता है। शुरुआती चरण में पकड़े जाने पर, कुछ मामलों में नसों की मरम्मत भी हो सकती है। 2. पैरों में जलन (Burning Feet) के लिए तुरंत क्या करें? तुरंत राहत के लिए, पैरों को ठंडे पानी (बर्फ नहीं) में 10 मिनट डुबोएं। एलोवेरा जेल या कैप्साइसिन क्रीम लगाएं। गुनगुने दूध में हल्दी मिलाकर पिएं। अगर दर्द बहुत ज्यादा है, तो डॉक्टर से प्रीगैबालिन या डुलोक्सेटीन जैसी दवा के बारे में पूछें। 3. क्या डायबिटिक न्यूरोपैथी में पैरों की मालिश करनी चाहिए? हां, हल्की मालिश फायदेमंद हो सकती है, लेकिन बहुत सावधानी से। मालिश से रक्त संचार बढ़ता है और दर्द कम होता है। लेकिन अगर पैरों में सुन्नपन है, तो जोर से मालिश न करें, क्योंकि चोट लग सकती है और पता नहीं चलेगा। हमेशा मुलायम हाथों से और तेल (जैसे नारियल या सरसों का तेल) का उपयोग करके मालिश करें। 4. क्या डायबिटिक न्यूरोपैथी से पैर काटना (Amputation) पड़ सकता है? हां, अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो न्यूरोपैथी के कारण पैरों में छाले, इंफेक्शन और गैंग्रीन हो सकता है, जिससे अंततः पैर काटने की नौबत आ सकती है। लेकिन नियमित पैरों की देखभाल, ब्लड शुगर कंट्रोल और डॉक्टर की सलाह से इस जोखिम को बहुत कम किया जा सकता है। 5. क्या डायबिटिक न्यूरोपैथी में चावल खाना चाहिए? सफेद चावल से बचना चाहिए क्योंकि यह तुरंत ब्लड शुगर बढ़ाता है। इसके बजाय ब्राउन राइस, ज्वार या बाजरे की रोटी खाएं। अगर चावल खाना ही है, तो बहुत कम मात्रा में और सब्जियों के साथ खाएं। 6. क्या डायबिटिक न्यूरोपैथी में पैरों में सूजन (Swelling

Log dekhte hain smile, andar robot hoon main - kya koi aur bhi aisa feel karta hai?

Logging in after so many days... aaj subah uthi toh ek weird feeling tha. Sab kuch normal lag raha tha - ghar saaf tha, chai bani hui thi, husband ne bhi phone karke puch liya "kaise ho". Par andar se kuch hollow hollow sa. Maine socha, main toh theek hoon na? Ghar ka kaam karti hoon, neighbours se milti hoon, kuch nahi bigda. Par phir realize hua - main pichle 3 hafte se nahi nahaayi hoon properly. Bas face wash karke kaam kar leti hoon. Aur kisi ko pata bhi nahi hai. Sabko lagta hai sab theek hai. Yehi hai na "high functioning depression"? Log dekhte hain smile karte hue, lekin andar se ek robot ki tarah kaam ho raha hai. Koi nahi puchta "tum sach mein theek ho?" Kyunki dikhta nahi hai. Aaj thoda experiment kiya - deliberately 10 minute baith ke royi. Bas socha try karti hoon. Feel halka hua. Par ab phir wahi cycle - lagega ki drama kar rahi hoon. Kisi aur ko bhi aisa lagta hai? Ki sab kuch normal dikhe par andar se tumhare saath kya ho raha hai, woh invisible ho? Kya karte ho tum log?

Hyperthyroidism ka khatarnaak side effect: Khana kha ke bhi khaali lagta hai?

Yaar ye kya bimari hai. Aaj maine socha khana zyada kha lungi to energy aayegi. Pura plate paratha, sabzi, daal kha liya. Par 1 ghante baad bhi mera haath kaanp raha tha aur aisa lag raha tha jaise saans nahi aa rahi. Pet bhi bhar gaya tha phir bhi weakness aisi ki lag raha tha abhi gir jaungi. Doctor ne kaha hai hyperthyroidism mein metabolism zyada ho jaata hai. Matlab jo khao wo jaldi burn ho jaata hai. To weight loss to hota hi hai, saath mein heart palpitations aur weakness bhi. Par sabko lagta hai main diet kar rahi hoon. Aaj hi mere neighbour ne kaha "tum toh bohot slim ho gayi, kya secret hai?" Main ne kaha "thyroid hai didi, secret nahi hai." Usko laga main mazak kar rahi hoon. Kisi ko bhi ye problem hai? Kya karte ho weakness ke liye? Maine aaj ek banana kha liya thoda relief mila. Par ye halat roz ka hai. Koi permanent solution nahi hai kya?

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