axidazole i oral suspension Allopathy - Uses, Price and Side Effects

axidazole i oral suspension - Uses, Price, Side Effects & Substitutes

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🏭 Axico Healthcare 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 17, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is axidazole i oral suspension used for? (Quick Answer)

🩺 Primary Use:
axidazole i oral suspension (manufactured by Axico Healthcare) is a highly effective medicine primarily used for the treatment of anti infectives. It helps in relieving symptoms and improving your overall health. Find the complete list of axidazole i oral suspension uses in Hindi, alternatives, price in India, and dosage on SaathiMed below.
🧪 Active Ingredient & Working:
It contains Ivermectin (1.5mg) + Albendazole (200mg) which works by treating the underlying condition effectively.
⚠️ Safety Warning:
Always consult your doctor before using this medicine, especially to check if it is safe during pregnancy or if you suffer from liver or kidney issues.

🇮🇳 axidazole i oral suspension के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

axidazole i oral suspension का उपयोग मुख्य रूप से anti infectives और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Ivermectin (1.5mg) + Albendazole (200mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? India is the largest provider of generic medicines globally, supplying over 50% of global vaccine demand.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Ivermectin (1.5mg) + Albendazole (200mg)
Manufacturer / BrandAxico Healthcare
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassANTI INFECTIVES
Action Class
Prescription Required✓ Yes (Schedule H Drug)
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Onset of Action:
30 to 60 minutes
Duration:
6 to 8 hours
Habit Forming:
No (Non-addictive)
Food:
Take after meal

💊 axidazole i oral suspension Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

💡 How to Take axidazole i oral suspension (Dosage & Khane ka tarika)

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💡 Expert Tips for Best Results

  • Follow the prescription: Always use axidazole i oral suspension exactly as prescribed by your healthcare provider. Do not alter the dosage yourself.
  • Check Expiry: Never consume expired medicines. Always double-check the manufacturing and expiry date on the packaging before use.
  • Storage: Store the medicine in a cool, dry place away from direct sunlight and out of reach of children.
  • Report Side Effects: If you experience severe allergic reactions, swelling, or breathing issues after taking axidazole i oral suspension, seek emergency medical help immediately.
  • Don't self-medicate: Do not share this medicine with others even if their symptoms seem similar to yours.

⚠️ axidazole i oral suspension Side Effects (Nuksan) & Precautions

Common and serious side effects may include:

  • Vomiting
  • Nausea
  • Dizziness
  • Headache
  • Abdominal pain
  • Loss of appetite
  • Hair loss
  • Fever
  • Sore throat

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

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🛑 Myths vs. Facts about axidazole i oral suspension

  • Myth: Generic substitutes of axidazole i oral suspension are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Ivermectin (1.5mg) + Albendazole (200mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of axidazole i oral suspension can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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वजन घटाने की संपूर्ण मेडिकल गाइड: साइंस, डाइट और लाइफस्टाइल का परफेक्ट कॉम्बिनेशन नमस्ते! अगर आप वजन कम करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो यह गाइड आपके लिए ही है। यहां हम सिर्फ "कम खाओ, ज्यादा चलो" नहीं बताएंगे, बल्कि शरीर के अंदर क्या होता है, क्यों होता है, और कैसे इसे ठीक किया जाए — यह सब हिंग्लिश में, बिल्कुल आसान भाषा में समझाएंगे। 1. गहरा परिचय और रोग तंत्र (Deep Introduction & Disease Mechanism) वजन बढ़ना सिर्फ कैलोरी का खेल नहीं है वजन बढ़ने की सबसे बड़ी वजह एनर्जी बैलेंस (Energy Balance) का बिगड़ना है। जब आप जितनी कैलोरी लेते हैं, उससे ज्यादा कैलोरी बर्न नहीं करते, तो बची हुई एनर्जी फैट (वसा) के रूप में जमा हो जाती है। लेकिन यह सिर्फ सतही बात है। शरीर के अंदर क्या होता है? इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance): जब आप ज्यादा मीठा या रिफाइंड कार्ब्स (जैसे सफेद चावल, मैदा) खाते हैं, तो पैंक्रियाज से इंसुलिन ज्यादा बनता है। समय के साथ कोशिकाएं इंसुलिन को इग्नोर करने लगती हैं, जिससे ब्लड शुगर बढ़ता है और फैट स्टोरेज बढ़ जाता है। हार्मोनल असंतुलन: लेप्टिन (Leptin) नामक हार्मोन भूख को कंट्रोल करता है। मोटापे में लेप्टिन रेजिस्टेंस हो जाता है, यानी दिमाग को भूख का सिग्नल नहीं मिलता, जिससे आप ज्यादा खाते हैं। घ्रेलिन (Ghrelin) हार्मोन भूख बढ़ाता है, जो नींद पूरी न होने पर ज्यादा बनता है। माइटोकॉन्ड्रियल डिसफंक्शन: कोशिकाओं के अंदर ऊर्जा बनाने वाले माइटोकॉन्ड्रिया खराब हो जाते हैं, जिससे मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। गट बैक्टीरिया (Gut Microbiome): आंत में अच्छे बैक्टीरिया कम और बुरे बैक्टीरिया ज्यादा हो जाते हैं, जिससे फैट स्टोरेज बढ़ता है और सूजन (inflammation) बढ़ती है। क्रोनिक स्ट्रेस और कोर्टिसोल: लगातार तनाव से कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो पेट की चर्बी (visceral fat) बढ़ाने का मुख्य कारण है। क्यों होता है वजन बढ़ना? जेनेटिक्स (Genetics): कुछ लोगों के जीन्स फैट स्टोर करने के लिए डिज़ाइन होते हैं (थ्रिफ्टी जीन थ्योरी)। प्रोसेस्ड फूड: पैकेट वाले स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक्स, और तले हुए भोजन में हाई फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप होता है, जो लीवर में फैट बनाता है। नींद की कमी: 7-8 घंटे से कम नींद से भूख बढ़ाने वाले हार्मोन एक्टिव हो जाते हैं। थायराइड और पीसीओएस: हाइपोथायराइडिज्म (थायराइड हार्मोन कम) और पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देते हैं। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Common & Rare Symptoms) सामान्य लक्षण (जो ज्यादातर लोगों को होते हैं): पेट के आसपास चर्बी बढ़ना: खासकर विसरल फैट (अंदरूनी चर्बी) जो दिखती नहीं लेकिन सेहत के लिए खतरनाक है। थकान और सुस्ती: मेटाबॉलिज्म धीमा होने से एनर्जी कम हो जाती है। भूख का बढ़ना: खासकर मीठा या कार्ब्स की क्रेविंग (craving) होना। सांस फूलना: मामूली काम करने पर भी सांस फूलने लगती है। जोड़ों में दर्द: घुटनों और कमर पर अतिरिक्त वजन का दबाव। नींद न आना या नींद में खलल: स्लीप एपनिया (sleep apnea) का खतरा बढ़ जाता है। दुर्लभ लक्षण (जिन्हें अक्सर नजरअंदाज किया जाता है): त्वचा पर काले धब्बे (Acanthosis Nigricans): गर्दन, बगल या जांघों के बीच गहरे रंग के मखमली धब्बे — यह इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत है। पैरों में सूजन (Edema): शरीर में पानी जमा होने से टखने और पैर सूज जाते हैं। बालों का झड़ना: थायराइड या पीसीओएस के कारण हार्मोनल असंतुलन। मासिक धर्म में अनियमितता: महिलाओं में पीरियड्स का देर से आना या न आना। लगातार प्यास लगना और बार-बार पेशाब आना: यह डायबिटीज का शुरुआती लक्षण हो सकता है। त्वचा पर छोटे-छोटे उभार (Skin Tags): इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़े हो सकते हैं। 3. विस्तृत डाइट प्लान (Detailed Diet Plan) क्या खाएं (Eat These): सुबह (7:00-8:00 AM) - मेटाबॉलिज्म बूस्ट करें गुनगुना पानी + नींबू + शहद: पाचन तंत्र को साफ करता है। भीगे हुए बादाम (4-5) + अखरोट (2): हेल्दी फैट और प्रोटीन। दलिया (Oats) या मूंग दाल चीला: फाइबर और प्रोटीन से भरपूर। नाश्ता (10:00-11:00 AM) - भूख कंट्रोल करें एक फल: सेब, नाशपाती, या जामुन (केला और आम से बचें अगर वजन ज्यादा है)। ग्रीन टी या नारियल पानी: एंटीऑक्सीडेंट्स और हाइड्रेशन। दोपहर का भोजन (1:00-2:00 PM) - संतुलित थाली सलाद (खीरा, टमाटर, गाजर, चुकंदर): भोजन से पहले खाएं। रोटी (गेहूं या बाजरा): 1-2 रोटी (सफेद चावल की जगह)। दाल (मूंग, मसूर, चना): प्रोटीन और फाइबर। सब्जी (हरी पत्तेदार या मौसमी): फाइबर और विटामिन। दही (बिना मीठा): प्रोबायोटिक्स और कैल्शियम। शाम का नाश्ता (4:00-5:00 PM) - एनर्जी बूस्ट मखाना (भुना हुआ): कम कैलोरी और प्रोटीन। रोस्टेड चना या स्प्राउट्स: फाइबर और आयरन। बिना चीनी की कॉफी या ग्रीन टी। रात का भोजन (7:00-8:00 PM) - हल्का और जल्दी सूप (टमाटर, पालक, या मिक्स वेजिटेबल): भूख शांत करे। ग्रिल्ड पनीर या चिकन (100 ग्राम): प्रोटीन। सब्जी या दाल का पानी: कार्ब्स कम लें। क्या न खाएं (Avoid These): प्रोसेस्ड फूड: चिप्स, बिस्कुट, नूडल्स, पैकेट वाला जूस। मीठे पेय: कोल्ड ड्रिंक्स, शरबत, मीठी चाय/कॉफी। सफेद चावल और मैदा: इनमें फाइबर नहीं होता, ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है। तला हुआ भोजन: समोसा, पकौड़ा, भटूरा, फ्रेंच फ्राइज। ज्यादा नमक और चीनी: सोडियम और शुगर वॉटर रिटेंशन और फैट बढ़ाते हैं। रेड मीट (ज्यादा मात्रा में): सैचुरेटेड फैट ज्यादा होता है। पानी पीने का नियम: दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं। खाने से 30 मिनट पहले पानी पिएं, खाने के बीच में नहीं। 4. मेडिकल मैनेजमेंट (Medical Management) नोट: यह सिर्फ शैक्षिक जानकारी है। कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। डॉक्टर कब दवाएं लिखते हैं? जब BMI 30 से ज्यादा हो, या BMI 27+ हो और डायबिटीज, हाई बीपी जैसी बीमारी हो, तो डॉक्टर दवाएं दे सकते हैं। आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली दवाएं: मेटफॉर्मिन (Metformin): यह इंसुलिन रेजिस्टेंस कम करता है और लीवर में ग्लूकोज बनना कम करता है। खासकर पीसीओएस और प्री-डायबिटीज में दिया जाता है। ओर्लिस्टैट (Orlistat): यह पेट और आंतों में फैट के अवशोषण को रोकता है। इससे फैटी स्टूल (तेल जैसा मल) हो सकता है। GLP-1 एगोनिस्ट (जैसे सेमाग्लूटाइड / Wegovy): यह इंजेक्शन है जो भूख कम करता है और पेट को धीमी गति से खाली करता है। यह नई पीढ़ी की दवा है, लेकिन महंगी है और कुछ दुष्प्रभाव (मतली, उल्टी) हो सकते हैं। थायराइड हार्मोन (जैसे लेवोथायरोक्सिन): अगर हाइपोथायराइडिज्म है, तो यह मेटाबॉलिज्म को सामान्य करता है। सर्जरी के विकल्प (Bariatric Surgery): जब BMI 35+ हो और डाइट-एक्सरसाइज से कोई फर्क न पड़े, तो गैस्ट्रिक बाईपास या स्लीव गैस्ट्रेक्टॉमी जैसी सर्जरी की जा सकती है। यह पेट का आकार कम करती है और भूख हार्मोन को बदलती है। 5. सिद्ध घरेलू उपाय और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) घरेलू उपाय (Home Remedies): गुनगुना पानी + अदरक + नींबू: सुबह खाली पेट पीने से मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है और पाचन सुधरता है। दालचीनी (Cinnamon): एक चुटकी दालचीनी पाउडर गर्म पानी में डालकर पीने से ब्लड शुगर कंट्रोल होता है और क्रेविंग कम होती है। मेथी दाना (Fenugreek): रातभर भिगोकर सुबह खाली पेट चबाएं। यह फाइबर से भरपूर है और भूख कम करता है। जीरा पानी: एक चम्मच जीरा पानी में उबालकर पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और फैट बर्न होता है। ग्रीन टी + पुदीना: दिन में 2-3 कप ग्रीन टी पीने से एंटीऑक्सीडेंट मिलते हैं और मेटाबॉलिज्म 4-5% तक बढ़ सकता है। जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes): नींद पूरी करें: हर रात 7-8 घंटे की गहरी नींद लें। नींद की कमी से कोर्टिसोल और घ्रेलिन बढ़ता है। तनाव कम करें: ध्यान (meditation), प्राणायाम (अनुलोम-विलोम), या संगीत सुनने से कोर्टिसोल कम होता है। खाने का समय नियमित रखें: रात का खाना सोने से 3 घंटे पहले खत्म करें। देर रात खाने से फैट स्टोरेज बढ़ता है। चीनी का सेवन कम करें: चाय-कॉफी में चीनी की जगह स्टीविया (Stevia) या गुड़ (थोड़ा सा) इस्तेमाल करें। खाने की डायरी रखें: आप जो कुछ भी खाते हैं, लिखें। इससे आपको पता चलेगा कि कहां ज्यादा कैलोरी ले रहे हैं। एक्सरसाइज (Exercise) - कितना और कैसे? कार्डियो (Cardio): हफ्ते में 5 दिन, 30-45 मिनट तेज चलना, दौड़ना, साइकिल चलाना या स्विमिंग करें। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (Weight Training): हफ्ते में 3 दिन, 20-30 मिनट वेट उठाना या बॉडीवेट एक्सरसाइज (स्क्वैट्स, पुश-अप्स) करें। मसल्स बढ़ने से मेटाबॉलिज्म 24x7 बूस्ट रहता है। योगा: सूर्य नमस्कार, कपालभाति (कपालभाति प्राणायाम) और अनुलोम-विलोम से फैट बर्न होता है और तनाव कम होता है। NEAT (Non-Exercise Activity Thermogenesis): दिनभर में ज्यादा से ज्यादा हिलते रहें — लिफ्ट की जगह सीढ़ियां, बैठने की जगह खड़े होकर काम करें। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Mental Health & Daily Life) मानसिक स्वास्थ्य पर असर: सेल्फ-एस्टीम कम होना: वजन बढ़ने से अक्सर लोग खुद को बदसूरत या कमजोर समझने लगते हैं। डिप्रेशन और एंग्जायटी: सोशल मीडिया पर परफेक्ट बॉडी देखकर और खुद को कंपेयर करके मानसिक तनाव बढ़ता है। ईटिंग डिसऑर्डर: कुछ लोग बहुत ज्यादा डाइटिंग करके बुलिमिया या एनोरेक्सिया जैसी समस्याओं में फंस जाते हैं। सोशल आइसोलेशन: मोटापे के कारण लोग पार्टियों या सामाजिक मेलजोल से दूर रहने लगते हैं। दैनिक जीवन पर असर: थकान और कम उत्पादकता: वजन ज्यादा होने से रोजमर्रा के काम (जैसे सीढ़ियां चढ़ना) मुश्किल हो जाते हैं। नींद की समस्या: स्लीप एपनिया के कारण नींद पूरी नहीं होती, जिससे दिनभर सुस्ती रहती है। रिश्तों पर असर: पार्टनर या परिवार के साथ झगड़े बढ़ सकते हैं, खासकर अगर खाने-पीने की आदतों को लेकर टकराव हो। कैसे सुधारें मानसिक स्वास्थ्य? सेल्फ-लव: खुद को स्वीकार करें। वजन कम करना एक प्रक्रिया है, जल्दीबाजी न करें। प्रोफेशनल हेल्प: अगर डिप्रेशन या ईटिंग डिसऑर्डर है, तो काउंसलर या साइकोलॉजिस्ट से मिलें। सोशल सपोर्ट: परिवार और दोस्तों से बात करें। वजन घटाने के लिए किसी ग्रुप या पार्टनर के साथ जुड़ें। 7. 10 विस्तृत अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) 1. क्या सिर्फ पानी पीने से वजन कम हो सकता है? नहीं, लेकिन पानी मेटाबॉलिज्म को 24-30% तक बढ़ा सकता है (एक अध्ययन के अनुसार)। खाने से पहले 2 गिलास पानी पीने से आप 22% कम कैलोरी लेते हैं। लेकिन वजन घटाने के लिए डाइट और एक्सरसाइज जरूरी है। 2. क्या केला खाने से वजन बढ़ता है? केला में कार्ब्स और पोटैशियम होता है, लेकिन इसमें फाइबर भी होता है जो पेट भरता है। एक केला (100 ग्राम) में लगभग 90 कैलोरी होती है। अगर आप दिन में 1 केला खाते हैं और बाकी डाइट बैलेंस रखते हैं, तो वजन नहीं बढ़ेगा। हां, ज्यादा खाने से (3-4 केले) कैलोरी बढ़ सकती है। 3. क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग (IF) भारतीयों के लिए सुरक्षित है? हां, 16:8 फास्टिंग (16 घंटे भूखे रहें, 8 घंटे में खाएं) भारतीयों के लिए सुरक्षित हो सकता है, लेकिन शुरुआत में हल्का रखें। अगर आपको डायबिटीज, लो बीपी, या पेट की समस्या है, तो डॉक्टर से सलाह लें। भारतीय डाइट में दाल-चावल जैसे कार्ब्स होते हैं, इसलिए फास्टिंग के दौरान प्रोटीन और फैट पर ध्यान दें। 4. क्या देसी घी खाने से वजन बढ़ता है? देसी घी में हेल्दी फैट (MCT) होता है जो मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है। रोजाना 1-2 चम्मच घी खाने से फायदा होता है, लेकिन ज्यादा खाने से (3-4 चम्मच) कैलोरी बढ़ सकती है। घी को तलने के लिए नहीं, बल्कि रोटी या दाल पर डालकर खाएं। 5. क्या वजन घटाने के लिए सप्लीमेंट्स (जैसे ग्रीन कॉफी, गार्सिनिया कैम्बोगिया) कारगर हैं? ज्यादातर सप्लीमेंट्स का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। कुछ में कैफीन होता है जो मेटाबॉलिज्म को थोड़ा बढ़ा सकता है, लेकिन यह डाइट और एक्सरसाइज का विकल्प नहीं है। सप्लीमेंट्स लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें, क्योंकि इनके साइड इफेक्ट्स (जैसे लिवर डैमेज) हो सकते हैं। 6. क्या पीसीओएस में वजन कम करना मुश्किल है? हां, पीसीओएस में इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण वजन कम करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन असंभव नहीं। कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला भोजन (जैसे बाजरा, दाल, हरी सब्जियां), नियमित एक्सरसाइज, और मेटफॉर्मिन (डॉक्टर की सलाह से) मदद कर सकते हैं। 7. क्या रात में दूध पीना चाहिए? अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो रात में दूध पीने से बचें, क्योंकि इसमें लैक्टोज (शुगर) होता है जो फैट स्टोरेज बढ़ा सकता है। अगर पीना ही है, तो बिना चीनी का गुनगुना दूध (आधा कप) पिएं, और सोने से 2 घंटे पहले। 8. क्या तेज चलना (Brisk Walking) वजन घटाने के लिए काफी है? तेज चलना (5-6 km/hour) एक बेहतरीन कार्डियो एक्सरसाइज है, लेकिन केवल चलने से वजन कम नहीं होगा अगर डाइट खराब है। हफ्ते में 5 दिन, 45 मिनट तेज चलने से 200-300 कैलोरी बर्न होती है। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (जैसे स्क्वैट्स) जोड़ने से ज्यादा फायदा होगा। 9. क्या वजन घटाने के लिए नींबू पानी पीना फायदेमंद है? नींबू पानी (बिना चीनी) में विटामिन सी होता है जो इम्यूनिटी बढ़ाता है, लेकिन यह सीधे तौर पर फैट नहीं जलाता। हां, यह पाचन में मदद करता है और पेट भरता है, जिससे कैलोरी इनटेक कम हो सकता है। 10. क्या वजन घटाने के लिए सोने का समय मायने रखता है? बिल्कुल! देर रात तक जागने से घ्रेलिन (भूख हार्मोन) बढ़ता है और लेप्टिन (भूख कम करने वाला हार्मोन) घटता है। इससे आप ज्यादा ख

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Mujhe subah uthke sabse pehle fingers ka akad jana aam baat hai. Aaj to atta gundne me bhi dard ho raha tha. Socha kuch diet change karun inflammation kam karne ke liye. Kisine bataya tha ki haldi wala doodh aur adrak ki chai helpful hai. Maine try kiya hai, thoda aaram milta hai par pura nahi. Kya koi bata sakta hai ki aur kya khaun? Jaise methi, tulsi, ya koi aur ghar ke nuskhe? Aur kya omega-3 wali cheezein jaise flaxseed ya walnuts daily lena safe hai? Mera BP bhi thoda high rehta hai, toh nimbu pani aur neem bhi suna hai. Par kya ye sab sach me kaam karta hai ya bas time waste hai? Please share your experience. Main 58 ki hoon, arthritis ka dard kabhi kabhi bahot disturb karta hai. Koi natural remedy ho toh batao.

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