podocidal cv 200mg/125mg tablet - Uses, Price and Side Effects

podocidal cv 200mg/125mg tablet: Uses in Hindi (Fayde), Price, Side Effects & Substitutes

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🏭 Gonan Pharma 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 16, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is podocidal cv 200mg/125mg tablet used for? (Quick Answer)

🩺 Primary Use:
podocidal cv 200mg/125mg tablet (manufactured by Gonan Pharma) is a highly effective medicine primarily used for the treatment of anti infectives. It helps in relieving symptoms and improving your overall health. Find the complete list of podocidal cv 200mg/125mg tablet uses in Hindi, alternatives, price in India, and dosage on SaathiMed below.
🧪 Active Ingredient & Working:
It contains Cefpodoxime Proxetil (200mg) + Clavulanic Acid (125mg) which works by treating the underlying condition effectively.
⚠️ Safety Warning:
Always consult your doctor before using this medicine, especially to check if it is safe during pregnancy or if you suffer from liver or kidney issues.

🇮🇳 podocidal cv 200mg/125mg tablet के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

podocidal cv 200mg/125mg tablet का उपयोग मुख्य रूप से anti infectives और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Cefpodoxime Proxetil (200mg) + Clavulanic Acid (125mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? The Indian pharmaceutical market is expected to reach $130 billion by 2030.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Cefpodoxime Proxetil (200mg) + Clavulanic Acid (125mg)
Manufacturer / BrandGonan Pharma
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassANTI INFECTIVES
Action Class
Prescription Required✓ Yes (Schedule H Drug)
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Onset of Action:
30 to 60 minutes
Duration:
6 to 8 hours
Habit Forming:
No (Non-addictive)
Food:
Take after meal

💊 podocidal cv 200mg/125mg tablet Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

💡 How to Take podocidal cv 200mg/125mg tablet (Dosage & Khane ka tarika)

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💡 Expert Tips for Best Results

  • Follow the prescription: Always use podocidal cv 200mg/125mg tablet exactly as prescribed by your healthcare provider. Do not alter the dosage yourself.
  • Check Expiry: Never consume expired medicines. Always double-check the manufacturing and expiry date on the packaging before use.
  • Storage: Store the medicine in a cool, dry place away from direct sunlight and out of reach of children.
  • Report Side Effects: If you experience severe allergic reactions, swelling, or breathing issues after taking podocidal cv 200mg/125mg tablet, seek emergency medical help immediately.
  • Don't self-medicate: Do not share this medicine with others even if their symptoms seem similar to yours.

⚠️ podocidal cv 200mg/125mg tablet Side Effects (Nuksan) & Precautions

Common and serious side effects may include:

  • Nausea
  • Diarrhea
  • Stomach pain
  • Headache

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🛑 Myths vs. Facts about podocidal cv 200mg/125mg tablet

  • Myth: Generic substitutes of podocidal cv 200mg/125mg tablet are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Cefpodoxime Proxetil (200mg) + Clavulanic Acid (125mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of podocidal cv 200mg/125mg tablet can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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Bhai, diabetes aur driving ka jhanjhat: 12 ghante cab chalake sugar 280, pair soojhe, ab kya karein? 🥺

Yaar ye diabetes ka driving me kya karein kuch samajh nahi aa raha. Aaj 12 ghanta cab chalaya, subah 6 baje nikla tha raat 8 baje ghar aaya. Beech me kya khaun? Pet me jalan rehti hai, sugar level upar neeche hota rehta hai. Ek baar to aisa laga gadi side me laga ke so jaun. Pair bhi soojhe hue hain, brake clutch dabate dabate dard hota hai. Koi batao bhai, kya karein? Main socha tha gadi me biscuits aur chai rakh lunga, par doctor ne mana kiya, bola sugar badhegi. Phir kya khaun? Murgi ka chicken roll bhi nahi milta roz. Aur peeche se passengers hurry kar rahe hote hain, "bhaiya jaldi karo", to khana kaise khaun? Koi simple tip ho to batao. Aaj to ghar aake check kiya to sugar 280 tha. Pair me pani bhar gaya hai. Wife ro rahi hai. Life ka kya hoga pata nahi. 🥺

Complete Guide to Type 1 Diabetes - 07-06-2026

टाइप 1 डायबिटीज: एक संपूर्ण मेडिकल गाइड (हिंग्लिश में) नमस्ते! यह गाइड आपको टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) के बारे में हर छोटी-बड़ी बात बताएगी। अगर आप या आपके परिवार में किसी को यह बीमारी है, तो यह लेख आपके लिए एक वरदान साबित हो सकता है। हम इसे बहुत ही सरल भाषा (हिंग्लिश) में समझाएंगे, ताकि हर कोई इसे समझ सके। चलिए, शुरू करते हैं! 1. डीप इंट्रोडक्शन और डिजीज मैकेनिज्म (बीमारी कैसे और क्यों होती है?) टाइप 1 डायबिटीज क्या है? टाइप 1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी (Autoimmune disease) है। इसका मतलब है कि आपके शरीर का इम्यून सिस्टम (जो आमतौर पर बैक्टीरिया और वायरस से लड़ता है) गलती से आपके अपने ही पैंक्रियाज (Pancreas) के बीटा सेल्स (Beta cells) पर हमला करना शुरू कर देता है। ये बीटा सेल्स ही इंसुलिन (Insulin) नामक हार्मोन बनाते हैं। इंसुलिन का काम क्या है? इंसुलिन एक चाबी की तरह है जो आपके शरीर की कोशिकाओं के दरवाजे खोलता है, ताकि ब्लड से शुगर (ग्लूकोज) कोशिकाओं में जा सके और एनर्जी में बदल सके। जब इंसुलिन नहीं बनता, तो शुगर ब्लड में ही रह जाती है, जिससे ब्लड शुगर लेवल बहुत बढ़ जाता है। टाइप 1 डायबिटीज कैसे होती है? जेनेटिक कारण (Genetic Factors): कुछ जीन (जैसे HLA-DR3, HLA-DR4) इस बीमारी का खतरा बढ़ाते हैं। ट्रिगर (Triggers): कोई वायरल इंफेक्शन (जैसे कोक्ससैकी वायरस, रूबेला) या एनवायरनमेंटल फैक्टर इम्यून सिस्टम को गलत तरीके से एक्टिवेट कर देता है। बीटा सेल्स का नाश: धीरे-धीरे 80-90% बीटा सेल्स खत्म हो जाते हैं। जब तक 10-20% सेल्स बचे होते हैं, तब तक लक्षण दिखने लगते हैं। नोट: टाइप 1 डायबिटीज आमतौर पर बचपन या किशोरावस्था में होती है, लेकिन कभी-कभी 30-40 साल की उम्र में भी हो सकती है (Latent Autoimmune Diabetes in Adults – LADA)। 2. लक्षण: कॉमन और रेयर दोनों कॉमन लक्षण (जो ज्यादातर लोगों में दिखते हैं) बार-बार पेशाब आना (Polyuria): खासकर रात में। शरीर ब्लड से एक्स्ट्रा शुगर निकालने के लिए ज्यादा पानी छोड़ता है। बहुत ज्यादा प्यास लगना (Polydipsia): पेशाब के साथ पानी निकलने के कारण बार-बार प्यास लगती है। बहुत ज्यादा भूख लगना (Polyphagia): शरीर कोशिकाओं में शुगर नहीं पहुंच पाती, इसलिए ब्रेन को लगता है कि शरीर को एनर्जी चाहिए। अचानक वजन कम होना: शरीर एनर्जी के लिए फैट और मसल्स को तोड़ने लगता है। थकान और कमजोरी: कोशिकाओं को एनर्जी नहीं मिलती। धुंधला दिखना (Blurry vision): हाई ब्लड शुगर आंखों के लेंस में सूजन पैदा कर सकता है। रेयर लक्षण (जो कम लोगों में देखे जाते हैं) पैरों में जलन या झुनझुनी (Tingling/Numbness): हाई शुगर नसों को नुकसान पहुंचाती है (Diabetic neuropathy)। स्किन इंफेक्शन: बार-बार फोड़े, फुंसी या फंगल इंफेक्शन (जैसे पैरों के बीच खुजली)। मुंह से फल जैसी गंध (Fruity breath): यह कीटोएसिडोसिस (DKA) का संकेत हो सकता है – एक जानलेवा कंडीशन। सांस लेने में तकलीफ: DKA में शरीर एसिडिक हो जाता है। बेहोशी या कोमा: अगर ब्लड शुगर बहुत ज्यादा बढ़ जाए या बहुत कम हो जाए। जरूरी: अगर आपको या आपके बच्चे को ऊपर दिए गए कोई भी लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। टाइप 1 डायबिटीज का जल्दी पता लगना बहुत जरूरी है। 3. डिटेल्ड डाइट प्लान: क्या खाएं और क्या न खाएं (भारतीय खाना) टाइप 1 डायबिटीज में डाइट का मतलब कार्बोहाइड्रेट काउंटिंग (Carb counting) है। आपको यह जानना होगा कि आप कितने कार्ब्स खा रहे हैं, ताकि उसके हिसाब से इंसुलिन ले सकें। क्या खाएं (Eat these) हाई फाइबर वाली चीजें: ओट्स, जौ (Barley), बाजरा, रागी (Finger millet) साबुत गेहूं की रोटी, ब्राउन राइस दालें (मूंग, चना, मसूर) प्रोटीन से भरपूर: अंडे, चिकन, मछली (ग्रिल्ड या उबला हुआ) पनीर, सोया चंक्स, टोफू नट्स (बादाम, अखरोट) – एक मुट्ठी अच्छे फैट: घी (सीमित मात्रा में), ऑलिव ऑयल, नारियल तेल एवोकाडो, फ्लैक्ससीड्स, चिया सीड्स लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Low GI) फल: सेब, नाशपाती, जामुन, संतरा, पपीता कीवी, तरबूज (सीमित मात्रा में) सब्जियां: पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेथी, सरसों का साग) करेला, लौकी, तोरी, बैंगन, फूलगोभी खीरा, टमाटर, गाजर (सलाद में) क्या न खाएं (Avoid these) हाई शुगर वाली चीजें: मिठाई (गुलाब जामुन, रसगुल्ला, जलेबी) कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस, एनर्जी ड्रिंक्स केक, पेस्ट्री, कुकीज, आइसक्रीम रिफाइंड कार्ब्स: सफेद चावल, सफेद आटा (मैदा), ब्रेड पिज्जा, बर्गर, चाउमीन फ्राइड और जंक फूड: समोसा, पकौड़े, फ्रेंच फ्राइज, चिप्स हाई फैट डेयरी: फुल क्रीम दूध, मलाई, पनीर (सीमित मात्रा में ही) फल (हाई GI): केला, अंगूर, आम, चीकू (खासकर डायबिटीज कंट्रोल न होने पर) भारतीय डाइट का उदाहरण (एक दिन का) नाश्ता (8:00 AM): 1 कटोरी ओट्स या 2 रागी डोसा + 1 कप ग्रीन टी स्नैक (11:00 AM): 1 सेब + 10 बादाम लंच (1:30 PM): 2 मल्टीग्रेन रोटी + 1 कटोरी मूंग दाल + 1 कटोरी तोरी सब्जी + सलाद स्नैक (4:00 PM): 1 कप चना भुना या 1 कटोरी फल डिनर (7:30 PM): 1 कटोरी ब्राउन राइस + 1 कटोरी पालक पनीर + 1 कटोरी दही टिप: हर मील के बाद ब्लड शुगर चेक करें और इंसुलिन डोज को एडजस्ट करें। डाइटीशियन से सलाह लेना न भूलें। 4. मेडिकल मैनेजमेंट: दवाइयां और इंसुलिन टाइप 1 डायबिटीज का कोई इलाज नहीं है, लेकिन इसे कंट्रोल किया जा सकता है। मुख्य इलाज है इंसुलिन थेरेपी। इंसुलिन के प्रकार (Types of Insulin) रैपिड-एक्टिंग इंसुलिन (Rapid-acting): जैसे लिस्प्रो (Humalog), एस्पार्ट (Novolog), ग्लुलिसिन (Apidra)। यह 15 मिनट में काम करना शुरू करता है और 2-4 घंटे तक असर करता है। खाने से पहले लिया जाता है। शॉर्ट-एक्टिंग इंसुलिन (Short-acting): जैसे रेगुलर इंसुलिन (Humulin R, Novolin R)। यह 30 मिनट में काम करना शुरू करता है और 3-6 घंटे तक असर करता है। इंटरमीडिएट-एक्टिंग इंसुलिन (Intermediate-acting): जैसे एनपीएच इंसुलिन (Humulin N, Novolin N)। यह 2-4 घंटे में काम करना शुरू करता है और 12-18 घंटे तक असर करता है। लॉन्ग-एक्टिंग इंसुलिन (Long-acting): जैसे ग्लार्जीन (Lantus, Toujeo), डिटेमिर (Levemir), डीग्लुडेक (Tresiba)। यह दिन में एक बार लिया जाता है और 24 घंटे तक बेसल इंसुलिन प्रदान करता है। इंसुलिन कैसे लें? इंजेक्शन (Injections): इंसुलिन पेन या सीरिंज से दिन में 4-5 बार लेना पड़ता है। इंसुलिन पंप (Insulin Pump): एक छोटा डिवाइस जो लगातार इंसुलिन देता है। यह ज्यादा सुविधाजनक है, लेकिन महंगा है। अन्य दवाइयां (कभी-कभी) मेटफॉर्मिन: कभी-कभी टाइप 1 में भी दी जाती है, खासकर अगर इंसुलिन रेजिस्टेंस हो। प्रैमलिनटाइड (Pramlintide): यह खाने के बाद ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करता है। चेतावनी: यह जानकारी सिर्फ शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। कोई भी दवा या इंसुलिन डॉक्टर की सलाह के बिना न लें। 5. प्रूवन होम रेमेडीज और लाइफस्टाइल चेंजेस होम रेमेडीज (जो डॉक्टर की सलाह से करें) करेला (Bitter Gourd): करेले का जूस या सब्जी ब्लड शुगर कम करने में मदद कर सकता है। रोजाना 1 गिलास जूस पिएं (डॉक्टर से पूछकर)। दालचीनी (Cinnamon): 1 चम्मच दालचीनी पाउडर रोजाना खाने से इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ सकती है। मेथी दाना (Fenugreek Seeds): रातभर भिगोकर सुबह खाली पेट खाएं। यह शुगर को कंट्रोल करता है। आंवला (Indian Gooseberry): आंवला पाउडर या जूस रोजाना लें। इसमें एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो पैंक्रियाज के लिए फायदेमंद हैं। हल्दी (Turmeric): हल्दी वाला दूध या हल्दी की गोलियां लें। करक्यूमिन इंफ्लेमेशन कम करता है। लाइफस्टाइल चेंजेस एक्सरसाइज रूटीन: रोजाना 30-45 मिनट वॉक, योग, या स्विमिंग करें। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (वेट लिफ्टिंग) मसल्स को बढ़ाती है, जिससे इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है। एक्सरसाइज से पहले और बाद में ब्लड शुगर चेक करें। स्ट्रेस मैनेजमेंट: मेडिटेशन, डीप ब्रीदिंग, या प्राणायाम (अनुलोम-विलोम) करें। स्ट्रेस हार्मोन (कोर्टिसोल) ब्लड शुगर बढ़ा सकते हैं। नींद पूरी लें: रोज 7-8 घंटे की नींद लें। नींद की कमी से शुगर लेवल बिगड़ सकता है। पानी पिएं: दिन में 8-10 गिलास पानी पिएं। डिहाइड्रेशन शुगर लेवल को बढ़ा सकता है। 6. मेंटल हेल्थ और डेली लाइफ पर असर टाइप 1 डायबिटीज सिर्फ एक शारीरिक बीमारी नहीं है, यह मानसिक और भावनात्मक रूप से भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। मेंटल हेल्थ पर असर डायबिटीज डिस्ट्रेस (Diabetes Distress): ब्लड शुगर को मैनेज करने का लगातार दबाव। लगता है कि जिंदगी इंसुलिन, डाइट और चेकिंग के चक्कर में फंस गई है। डिप्रेशन और एंग्जाइटी: टाइप 1 वाले लोगों में डिप्रेशन का खतरा 2-3 गुना ज्यादा होता है। हाइपोग्लाइसीमिया का डर (Fear of Hypoglycemia): ब्लड शुगर कम होने का डर, जो बेहोशी या कोमा का कारण बन सकता है। ईटिंग डिसऑर्डर: कुछ लोग वजन कंट्रोल करने के लिए इंसुलिन की डोज छोड़ देते हैं (Diabulimia)। डेली लाइफ पर असर स्कूल/ऑफिस: बार-बार ब्लड शुगर चेक करना, इंसुलिन लेना, और स्नैक्स रखना पड़ता है। सोशल लाइफ: पार्टियों में खाने-पीने का डर। दोस्तों को समझाना पड़ता है। रिश्ते: परिवार के सदस्यों पर भी तनाव आता है। खासकर माता-पिता अपने बच्चे की बीमारी को लेकर चिंतित रहते हैं। कैसे मैनेज करें? सपोर्ट ग्रुप: डायबिटीज से जुड़े ग्रुप (जैसे फेसबुक ग्रुप, स्थानीय मीटिंग्स) में शामिल हों। काउंसलिंग: मनोवैज्ञानिक या डायबिटीज एजुकेटर से बात करें। फैमिली को शामिल करें: परिवार को बीमारी के बारे में पढ़ाएं, ताकि वे आपका साथ दे सकें। सेल्फ-केयर: अपने लिए समय निकालें। शौक पूरे करें, मूवी देखें, या किताब पढ़ें। 7. 10 डिटेल्ड FAQs (लॉन्ग-टेल सर्च क्वेरीज) FAQ 1: क्या टाइप 1 डायबिटीज ठीक हो सकती है? जवाब: नहीं, फिलहाल टाइप 1 डायबिटीज का कोई स्थायी इलाज नहीं है। हालांकि, इंसुलिन थेरेपी, डाइट और एक्सरसाइज से इसे बहुत अच्छी तरह कंट्रोल किया जा सकता है। रिसर्च में स्टेम सेल थेरेपी और आइलेट सेल ट्रांसप्लांटेशन पर काम चल रहा है, लेकिन यह अभी व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है। FAQ 2: टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज में क्या अंतर है? जवाब: टाइप 1 में पैंक्रियाज इंसुलिन बनाना बंद कर देता है (ऑटोइम्यून), जबकि टाइप 2 में शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता (इंसुलिन रेजिस्टेंस)। टाइप 1 आमतौर पर बचपन में होता है, टाइप 2 वयस्कों में। टाइप 1 के मरीजों को रोजाना इंसुलिन लेना जरूरी है, जबकि टाइप 2 में कभी-कभी गोलियों से भी काम चल सकता है। FAQ 3: क्या टाइप 1 डायबिटीज में शादी और गर्भधारण संभव है? जवाब: हां, बिल्कुल संभव है। हालांकि, गर्भावस्था से पहले और दौरान ब्लड शुगर को बहुत अच्छी तरह कंट्रोल करना जरूरी है। डॉक्टर और डायबिटीज एजुकेटर के साथ मिलकर प्लान बनाना चाहिए। हाई ब्लड शुगर से बच्चे को जन्म दोष हो सकते हैं, इसलिए नियमित चेकअप जरूरी है। FAQ 4: टाइप 1 डायबिटीज में कौन से टेस्ट होते हैं? जवाब: मुख्य टेस्ट हैं: फास्टिंग ब्लड शुगर (FBS), HbA1c (पिछले 3 महीने का औसत शुगर), C-peptide टेस्ट (देखता है कि पैंक्रियाज कितना इंसुलिन बना रहा है), और ऑटोएंटीबॉडी टेस्ट (जैसे GAD, IA-2, ZnT8 एंटीबॉडी)। ये टेस्ट टाइप 1 की पुष्टि करते हैं। FAQ 5: क्या टाइप 1 डायबिटीज में फल खा सकते हैं? जवाब: हां, लेकिन सीमित मात्रा में और सही समय पर। लो GI फल (सेब, नाशपाती, जामुन) खाएं। हाई GI फल (केला, आम, अंगूर) से बचें या बहुत कम खाएं। फल खाने के बाद ब्लड शुगर चेक करें और इंसुलिन डोज एडजस्ट करें। FAQ 6: टाइप 1 डायबिटीज में हाइपोग्लाइसीमिया (लो शुगर) कैसे मैनेज करें? जवाब: अगर ब्लड शुगर 70 mg/dL से कम हो, तो तुरंत 15 ग्राम फास्ट-एक्टिंग कार्ब्स लें – जैसे 3-4 ग्लूकोज टैबलेट, आधा गिलास फलों का जूस, या 1 चम्मच शहद। 15 मिनट बाद फिर चेक करें। अगर शुगर अभी भी कम है, तो दोबारा लें। हमेशा अपने पास ग्लूकागन इमरजेंसी किट रखें। FAQ 7: क्या टाइप 1 डायबिटीज में एक्सरसाइज करना सुरक्षित है? जवाब: हां, एक्सरसाइज बहुत फायदेमंद है। लेकिन सावधानी बरतें: एक्सरसाइज से पहले, दौरान और बाद में ब्लड शुगर चेक करें। अगर शुगर 250 mg/dL से ज्यादा है और कीटोन्स हैं, तो एक्सरसाइज न करें। हमेशा अपने साथ स्नैक्स (जैसे बिस्कुट, फल) रखें। FAQ 8: टाइप 1 डायबिटीज में कीटोएसिडोसिस (DKA) क्या है? जवाब: DKA एक जानलेवा कंडीशन है जो तब होती है जब शरीर में इंसुलिन बहुत कम होता है। शरीर एनर्जी के लिए फैट तोड़ता है, जिससे कीटोन्स बनते हैं। लक्षणों में उल्टी, पेट दर्द, फल जैसी सांस, और बेहोशी शामिल हैं। तुरंत हॉस्पिटल जाएं। FAQ 9: क्या टाइप 1 डायबिटीज वंशानुगत है? जवाब: हां, जेनेटिक रूप से इसका खतरा बढ़ सकता है। अगर माता-पिता को टाइप 1 है, तो बच्चे को होने का खतरा 2-5% है। अगर भाई-बहन को है, तो खतरा 5-10% है। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर किसी को हो। FAQ 10: टाइप 1 डायबिटीज में क्या जटिलताएं हो सकती हैं? जवाब: लंबे समय तक अनियंत्रित शुगर से कई जटिलताएं हो सकती हैं: आंखों की बीम

53 saal ka hoon, gussa control nahi hota, BP 158/98! Koi instant remedy batao?

Yaar, aaj fir se gussa aagya. Office me ek staff ne late report di to maine aise chillaya ki sab sun rahe the. Baad me pata chala uski ghar me problem hai. Bahut bura laga. BP bhi check kiya to 158/98 dikhaya. Bivi ne bhi kaha - "tumhara gussa tumhe mita dega ek din." Maine 2 hafte se breathing exercise try kiya hai. Subah 10 minute deep breathing karta hoon. Lekin jab trigger hota hai to sab bhool jaata hoon. Koi remedy batao jo instant kaam kare. Kya koi specific breathing pattern hai jo gussa aane pe turant help kare? Ya koi aasan sa mantra ya trick? Doctor ne kaha hai ki agar BP control nahi hua to medicine lena padega permanently. Lekin main nahi chahta. Umar 53 hai, abhi business me active hoon. Par health kharab ho rahi hai stress se. Bivi se roz kalesh hota hai, fir baad me regret hota hai. Koi batao kaise sudhar sakte hain? Kya yoga se fayda hua kisi ko? Ya phir koi professional help lena chahiye? Please share your experiences.

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