duclor kid 125mg tablet allopathy (Cefaclor (125mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India
duclor kid 125mg tablet allopathy (Cefaclor (125mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India manufactured by Morepen Laboratories Ltd. Contains Cefaclor (125mg).

duclor kid 125mg tablet - Uses, Price, Side Effects & Substitutes

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Cefaclor (125mg) (Click to see all medicines with same salt)
🏭 Morepen Laboratories Ltd 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 21, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is duclor kid 125mg tablet used for?

duclor kid 125mg tablet (Cefaclor (125mg)) is used to treat anti infectives. It contains Cefaclor (125mg), which works by treating the condition effectively. Always consult your doctor before use. Take as prescribed.

  • Generic Name: Cefaclor (125mg)
  • Manufacturer: Morepen Laboratories Ltd
  • Medicine Form: Allopathy
  • Pregnancy Category: Consult doctor

🇮🇳 duclor kid 125mg tablet के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

duclor kid 125mg tablet का उपयोग मुख्य रूप से anti infectives और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Cefaclor (125mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

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📋 Drug Information

Generic Name(s)Cefaclor (125mg)
Brand Nameduclor kid 125mg tablet
ManufacturerMorepen Laboratories Ltd
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassANTI INFECTIVES
Action ClassCephalosporins: 2nd generation
Route of AdministrationOral
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Shelf LifeAs per manufacturer

💡 How and when to take duclor kid 125mg tablet?

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💊 duclor kid 125mg tablet Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

⚠️ What are the side effects of duclor kid 125mg tablet?

  • Abdominal pain
  • Skin rash
  • Gastrointesinal symptoms
  • Hypersensitivity
  • Drug eruptions
  • Increased white blood cell count (eosinophils)
  • Genital itching
  • Increased liver enzymes
  • Vaginal inflammation
  • Red spots or bumps

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🔬 Drug Interactions

🛡️ Safety & Warnings

🛑 Myths vs. Facts about duclor kid 125mg tablet

  • Myth: Generic substitutes of duclor kid 125mg tablet are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Cefaclor (125mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of duclor kid 125mg tablet can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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Complete Guide to Type 1 Diabetes - 30-05-2026

```html टाइप 1 डायबिटीज: एक संपूर्ण गाइड (कारण, लक्षण, डाइट और जीवनशैली) नमस्कार! यह गाइड आपको टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) के बारे में हर छोटी-बड़ी जानकारी देगी। चाहे आप खुद इस बीमारी से जूझ रहे हों या किसी परिवार के सदस्य की देखभाल कर रहे हों, यह लेख आपको पूरी तरह से शिक्षित और सशक्त बनाएगा। हम बात करेंगे शरीर के अंदर क्या होता है, कौन से लक्षण नज़रअंदाज़ नहीं करने चाहिए, कैसा खाना खाएं, कैसी दवाएं काम करती हैं, और मेंटल हेल्थ पर कैसे असर पड़ता है। नोट: यह जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी उपचार या दवा को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें। 1. गहन परिचय और रोग तंत्र (Disease Mechanism) टाइप 1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है। इसका मतलब है कि शरीर का अपना इम्यून सिस्टम गलती से अपने ही पैंक्रियाज (अग्न्याशय) के उन कोशिकाओं पर हमला कर देता है जो इंसुलिन बनाती हैं। इन कोशिकाओं को बीटा कोशिकाएं (Beta cells) कहते हैं। शरीर के अंदर क्या होता है? इंसुलिन की भूमिका: जब आप खाना खाते हैं, तो शरीर ग्लूकोज (शुगर) में तोड़ता है। इंसुलिन एक चाबी की तरह काम करता है जो कोशिकाओं के दरवाजे खोलता है ताकि ग्लूकोज अंदर जा सके और एनर्जी में बदल सके। टाइप 1 में क्या होता है: इम्यून सिस्टम बीटा कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। जब 80-90% कोशिकाएं खत्म हो जाती हैं, तो शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है। परिणाम: ग्लूकोज कोशिकाओं में नहीं जा पाता, खून में जमा हो जाता है, और शरीर को एनर्जी नहीं मिलती। इससे हाइपरग्लाइसीमिया (Hyperglycemia) होता है। टाइप 1 और टाइप 2 में अंतर टाइप 1: शरीर बिल्कुल इंसुलिन नहीं बनाता। यह ज्यादातर बच्चों और युवाओं में होता है, लेकिन किसी भी उम्र में हो सकता है। टाइप 2: शरीर इंसुलिन बनाता है लेकिन कोशिकाएं उसका सही जवाब नहीं देतीं (इंसुलिन रेजिस्टेंस)। यह अक्सर वयस्कों और अधिक वजन वाले लोगों में होता है। महत्वपूर्ण: टाइप 1 डायबिटीज को "इंसुलिन-डिपेंडेंट डायबिटीज" भी कहा जाता है। इसका कोई इलाज नहीं है, लेकिन इसे अच्छी तरह से मैनेज किया जा सकता है। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Symptoms) सामान्य लक्षण (Common Symptoms) बार-बार पेशाब आना (Polyuria): खून में अतिरिक्त शुगर किडनी के ज़रिए बाहर निकलती है, जिससे पेशाब ज्यादा आता है। रात में भी बार-बार उठना पड़ता है। अत्यधिक प्यास लगना (Polydipsia): पेशाब ज्यादा होने से शरीर डिहाइड्रेट हो जाता है, जिससे बहुत प्यास लगती है। अचानक वजन कम होना: शरीर को एनर्जी के लिए ग्लूकोज नहीं मिलता, तो वह फैट और मसल्स को तोड़ने लगता है। भूख बढ़ना (Polyphagia): कोशिकाओं को एनर्जी नहीं मिलती, इसलिए दिमाग बार-बार भूख का संकेत भेजता है। थकान और कमजोरी: शरीर में ग्लूकोज का सही उपयोग नहीं हो पाता, जिससे एनर्जी कम हो जाती है। धुंधला दिखना (Blurry Vision): हाई ब्लड शुगर आंखों के लेंस में तरल पदार्थ को प्रभावित करता है, जिससे धुंधलापन आता है। हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नता (Tingling/Numbness): लंबे समय तक हाई शुगर नसों को नुकसान पहुंचा सकता है (न्यूरोपैथी)। दुर्लभ लक्षण (Rare Symptoms) त्वचा में खुजली या ड्राईनेस: डिहाइड्रेशन और खराब ब्लड सर्कुलेशन के कारण। बार-बार इन्फेक्शन (Frequent Infections): जैसे कि यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI), फंगल इन्फेक्शन (जैसे मुंह में या जननांगों पर)। धीरे-धीरे घाव भरना (Slow Healing): हाई शुगर ब्लड फ्लो और इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है। केटोएसिडोसिस (DKA): यह एक जानलेवा स्थिति है। जब शरीर में इंसुलिन नहीं होता, तो फैट तेजी से टूटता है और कीटोन्स (Ketones) बनते हैं। लक्षण: उल्टी, पेट दर्द, फल जैसी सांस, गहरी सांस लेना, कंफ्यूजन। कब डॉक्टर से मिलें? अगर आपको या आपके बच्चे को उपरोक्त लक्षण दिखें, तो तुरंत ब्लड शुगर टेस्ट कराएं। टाइप 1 डायबिटीज का निदान रैंडम ब्लड शुगर टेस्ट (200 mg/dL से ऊपर) और HbA1c टेस्ट से होता है। 3. विस्तृत डाइट प्लान (क्या खाएं, क्या न खाएं) टाइप 1 डायबिटीज में डाइट का मतलब है कार्बोहाइड्रेट काउंटिंग और ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) को समझना। इंसुलिन की डोज़ खाने के कार्ब्स के हिसाब से लगाई जाती है। क्या खाएं (What to Eat) साबुत अनाज (Whole Grains): जई (Oats), ब्राउन राइस, क्विनोआ, ज्वार, बाजरा, रागी (Nachni)। ये धीरे-धीरे शुगर बढ़ाते हैं। दालें और फलियां (Legumes): मूंग, चना, राजमा, सोयाबीन। प्रोटीन और फाइबर से भरपूर। हरी सब्जियां (Green Vegetables): पालक, मेथी, ब्रोकली, करेला, लौकी, तोरी। कम कार्ब और विटामिन से भरपूर। प्रोटीन स्रोत (Protein Sources): अंडे, चिकन (बिना त्वचा के), मछली (सैल्मन, टूना), पनीर, टोफू। हेल्दी फैट (Healthy Fats): नट्स (बादाम, अखरोट), बीज (चिया, फ्लैक्स), एवोकाडो, जैतून का तेल। फल (Fruits in Moderation): जामुन (ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी), सेब, नाशपाती, संतरा। केला और आम कम मात्रा में खाएं। डेयरी (Dairy): दही (ग्रीक योगर्ट), दूध (लो-फैट), छाछ। क्या न खाएं (What to Avoid) रिफाइंड कार्ब्स (Refined Carbs): सफेद चावल, मैदा (सफेद ब्रेड, नान, पराठा), पास्ता, बिस्कुट। मीठी चीजें (Sugary Foods): सोडा, जूस, मिठाई (गुलाब जामुन, जलेबी), आइसक्रीम, केक, कैंडी। फ्राइड फूड (Fried Foods): समोसा, पकौड़े, फ्रेंच फ्राइज। ट्रांस फैट इंसुलिन को बाधित करता है। प्रोसेस्ड फूड (Processed Foods): चिप्स, पैकेज्ड स्नैक्स, सॉसेज, बेकन। हाई-जीआई फल (High-GI Fruits): तरबूज, खजूर, अंगूर (ज्यादा मात्रा में)। भारतीय डाइट का उदाहरण (Sample Indian Meal Plan) नाश्ता (Breakfast): 1 कटोरी ओट्स (दूध या पानी के साथ) + मुट्ठी भर बादाम + 1 सेब। लंच (Lunch): 2 रोटी (आटा या ज्वार) + 1 कटोरी मूंग दाल + सब्जी (जैसे लौकी या करेला) + सलाद। शाम का नाश्ता (Snack): 1 कप ग्रीन टी + 2 मूंग दाल चीला (बिना तेल के)। डिनर (Dinner): 1 कटोरी ब्राउन राइस + 1 कटोरी राजमा + सब्जी (जैसे ब्रोकली) + दही। सोने से पहले (Bedtime): 1 गिलास गर्म दूध (बिना चीनी) + 1 चम्मच चिया सीड्स। महत्वपूर्ण: हर भोजन के बाद ब्लड शुगर चेक करें और इंसुलिन की डोज़ एडजस्ट करें। डाइटीशियन से सलाह ज़रूर लें। 4. चिकित्सा प्रबंधन (Medical Management) टाइप 1 डायबिटीज का एकमात्र इलाज इंसुलिन थेरेपी है। यह मरीज के जीवनभर चलती है। यहां दवाओं और उनके काम करने के तरीके को समझें: इंसुलिन के प्रकार (Types of Insulin) रैपिड-एक्टिंग इंसुलिन (Rapid-acting): जैसे लिस्प्रो (Humalog), एस्पार्ट (NovoLog)। यह 15 मिनट में काम शुरू करता है, 1-2 घंटे में पीक पर होता है, और 3-5 घंटे तक रहता है। इसे खाने से ठीक पहले लिया जाता है। शॉर्ट-एक्टिंग इंसुलिन (Short-acting): जैसे रेगुलर इंसुलिन (Humulin R)। 30 मिनट में शुरू, 2-4 घंटे में पीक, 5-8 घंटे तक असर। इंटरमीडिएट-एक्टिंग इंसुलिन (Intermediate-acting): जैसे NPH (Humulin N)। 1-2 घंटे में शुरू, 4-8 घंटे में पीक, 10-18 घंटे तक रहता है। लॉन्ग-एक्टिंग इंसुलिन (Long-acting): जैसे ग्लार्जिन (Lantus), डिटेमिर (Levemir)। 1-2 घंटे में शुरू, कोई पीक नहीं, 24 घंटे तक असर। बेसल इंसुलिन के रूप में दिन में एक बार लिया जाता है। इंसुलिन डिलीवरी के तरीके (Delivery Methods) इंसुलिन पेन (Insulin Pen): पहले से भरी हुई डिवाइस, जिसमें डोज़ सेट करके इंजेक्ट करते हैं। सुविधाजनक और कम दर्दनाक। इंसुलिन पंप (Insulin Pump): एक छोटी मशीन जो लगातार इंसुलिन देती है। इसमें एक कैथेटर त्वचा के नीचे लगा होता है। बेहतर कंट्रोल के लिए। इंसुलिन सिरिंज (Syringe): पारंपरिक तरीका, जिसमें शीशी से इंसुलिन निकालकर इंजेक्ट किया जाता है। ब्लड शुगर मॉनिटरिंग (Blood Sugar Monitoring) ग्लूकोमीटर (Glucometer): दिन में 4-8 बार फिंगरप्रिक करके ब्लड शुगर चेक करें। CGM (Continuous Glucose Monitor): जैसे Dexcom, Freestyle Libre। यह त्वचा के नीचे एक सेंसर लगाकर हर 5 मिनट में शुगर रीडिंग देता है। ट्रेंड देखने में मददगार। अन्य दवाएं (Other Medications) प्रामलिंटाइड (Pramlintide): इंसुलिन के साथ लिया जाता है। यह पेट खाली होने की गति को धीमा करता है और भूख कम करता है। मेटफॉर्मिन (Metformin): कभी-कभी टाइप 1 में भी दी जाती है, खासकर अगर इंसुलिन रेजिस्टेंस हो। ध्यान दें: टाइप 1 में मुंह से ली जाने वाली दवाएं (जैसे सल्फोनील्यूरिया) काम नहीं करतीं। केवल इंसुलिन ही जीवनरक्षक है। 5. सिद्ध घरेलू उपचार और जीवनशैली में बदलाव (Home Remedies & Lifestyle) घरेलू उपचार (Home Remedies) – सहायक लेकिन प्रतिस्थापन नहीं करेला (Bitter Gourd): इसमें पॉलीपेप्टाइड-पी (p-insulin) होता है, जो ब्लड शुगर को कम कर सकता है। जूस पिएं या सब्जी खाएं। मेथी दाना (Fenugreek Seeds): रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाएं। फाइबर शुगर अब्जॉर्प्शन को धीमा करता है। दालचीनी (Cinnamon): इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ा सकती है। 1-2 ग्राम रोजाना लें (चाय या पाउडर के रूप में)। आंवला (Indian Gooseberry): विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर। जूस या मुरब्बा (बिना चीनी) लें। हल्दी (Turmeric): करक्यूमिन इंसुलिन फंक्शन को बेहतर करता है। दूध में मिलाकर पिएं। जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes) नियमित व्यायाम (Regular Exercise): रोजाना कम से कम 30 मिनट की एक्सरसाइज (जैसे तेज चलना, साइकिलिंग, योगा)। यह इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाता है। तनाव प्रबंधन (Stress Management): तनाव से कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो ब्लड शुगर को बढ़ाता है। ध्यान (Meditation), डीप ब्रीदिंग, या हॉबी अपनाएं। नींद (Sleep): 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें। नींद की कमी से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है। हाइड्रेशन (Hydration): दिन में 8-10 गिलास पानी पिएं। डिहाइड्रेशन से शुगर लेवल बढ़ सकता है। फुट केयर (Foot Care): रोजाना पैरों का निरीक्षण करें। न्यूरोपैथी के कारण छोटे घाव भी नज़र नहीं आते। सूती मोजे पहनें और नाखून सीधे काटें। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Mental Health & Daily Life) टाइप 1 डायबिटीज सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक चुनौती भी है। मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डायबिटीज डिस्ट्रेस (Diabetes Distress): ब्लड शुगर को मैनेज करने का लगातार दबाव, डर और थकान। यह डिप्रेशन से अलग है लेकिन ओवरलैप हो सकता है। डिप्रेशन और चिंता (Depression & Anxiety): हाई और लो शुगर के चक्कर, इंसुलिन की डोज़ का डर, और सामाजिक अलगाव (जैसे पार्टी में खाना न खा पाना) मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। हाइपोग्लाइसीमिया का डर (Fear of Hypoglycemia): लो ब्लड शुगर (हाइपो) का डर, जो बेहोशी या दौरे का कारण बन सकता है। दैनिक जीवन में चुनौतियां स्कूल और कॉलेज: बच्चों को बार-बार शुगर चेक करना और इंसुलिन लेना पड़ता है। शिक्षकों और दोस्तों को जागरूक करना ज़रूरी है। नौकरी और करियर: शिफ्ट ड्यूटी, ट्रैवल, या स्ट्रेसफुल जॉब में शुगर मैनेज करना मुश्किल हो सकता है। सामाजिक जीवन: शादी, पार्टी, या रेस्तरां में खाने का चुनाव सीमित हो जाता है। कैसे संभालें (How to Cope) सपोर्ट ग्रुप (Support Groups): ऑनलाइन या ऑफलाइन डायबिटीज कम्युनिटी से जुड़ें। अनुभव साझा करने से मन हल्का होता है। काउंसलिंग (Counseling): मनोवैज्ञानिक या थेरेपिस्ट से बात करें। संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (CBT) बहुत मददगार हो सकती है। परिवार और दोस्तों को शामिल करें: उन्हें डायबिटीज के बारे में शिक्षित करें ताकि वे इमरजेंसी में मदद कर सकें। टेक्नोलॉजी का उपयोग: CGM, इंसुलिन पंप, और स्मार्टफोन ऐप्स (जैसे MySugr) मैनेजमेंट को आसान बनाते हैं। 7. 10 विस्तृत FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न) 1. क्या टाइप 1 डायबिटीज ठीक हो सकता है? नहीं, फिलहाल इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है। लेकिन इंसुलिन थेरेपी, डाइट, और एक्सरसाइज से इसे पूरी तरह से मैनेज किया जा सकता है। कुछ रिसर्च (जैसे आइलेट सेल ट्रांसप्लांट) चल रही है, लेकिन यह अभी व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है। 2. क्या टाइप 1 डायबिटीज वंशानुगत है? हां, आनुवंशिक प्रवृत्ति (genetic predisposition) होती है। अगर माता-पिता को टाइप 1 है, तो बच्चे में जोखिम 5-10% तक बढ़ जाता है। लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर बच्चे को हो। 3. क्या टाइप 1 डायबिटीज में मीठा खाना पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए? पूरी तरह से नहीं, लेकिन सीमित मात्रा में। आप कम मात्रा में मीठा खा सकते हैं, लेकिन उसके हिसाब से इंसुलिन की डोज़ एडजस्ट करनी होगी। बेहतर होगा कि नेचुरल मिठास (जैसे स्टीविया) का उपयोग करें। 4. क्या टाइप 1 डायबिटीज में प्रेग्नेंसी संभव है? हां, बिल्कुल संभव है। लेकिन प्रेग्नेंसी से पहले और दौरान ब्लड शुगर को बहुत सख्ती से कंट्रोल करना जरूरी है। डॉक्टर और डायबिटीज एजुकेटर की निगरानी में रहें। हाई शुगर से बच्चे को नुकसान हो सकता है। 5. क्या टाइप 1 डायबिटीज में एक्सरसाइज करना सुरक्षित है? हां, लेकिन सावधानी बरतें। एक्सरसाइज से ब्लड शुगर कम हो सकता है (हाइपोग्लाइसीमिया)। हमेशा अपने साथ ग्लूकोज टैबलेट या जूस रखें। एक्सरसाइज से पहले और बाद में शुगर चेक करें। 6. क्या टाइप 1 डायबिटीज में शराब पी सकते हैं? सीमित मात्रा में और डॉक्टर की सलाह से। शराब ब्लड शुगर को कम कर सकती है, खासकर अगर खाली पेट पीते हैं। हमेशा खाने के साथ पिएं और शुगर चेक करते रहें। 7. क्या टाइप 1 डायबिटीज में केटोएसिडोसिस (DKA) से बचा जा सकता है? हां, नियमित इंसुलिन लेने, ब्लड शुगर मॉनिटर करने, और बीमारी के दौरान कीटोन्स चेक करने से। अगर उल्टी या पेट दर्द हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। 8. क्या टाइप 1 डायबिटीज में आयुर्वेदिक दवाएं काम करती हैं? कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि आयुर्वेदिक दवाएं टाइप 1 को ठीक कर सकती हैं। ये सहायक हो सकती हैं, लेकिन इंसुलिन का विकल्प नहीं। किसी भी आयुर्वेदिक उपचार को शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। 9. क्या टाइप 1 डायबिटीज में वज

**Steroid se mera face balloon ban gaya! Bahu ne hasi uda di, dil toota 😢**

Beta, main aaj bahut dukhi hoon. Autoimmune hepatitis ka ilaaj chal raha hai, steroids le rahi hoon. Doctor ne kaha tha ke side effects honge, lekin itna badal jaunga nahi socha tha. Mera moonface ho gaya hai, gaal phool gaye, aankhein bhi chhoti lagti hain. Kal meri bahu ne apni friend se phone pe baat karte hue kaha, "Mummy ka face dekh, koi balloon jaisa ho gaya hai." Usne hasi bhi di. Main sun rahi thi, dil toot gaya. Unhone mujhe directly kuch nahi kaha, lekin yeh sunke bahut bura laga. Maine apni dose kam karne ki koshish ki hai, lekin doctor ne mana kiya. Liver enzymes stable rakhne ke liye yeh zaroori hai. Ab main ghar se bahar bhi kam nikalti hoon, log kya sochenge? Pati ko bhi pata hai, woh samajhte hain lekin bahu ka comment bahut hurt kiya. Kya koi aur bhi is situation se guzra hai? Yeh steroid face kab theek hota hai? Koi natural remedy ya tips hain jo swelling kam kar sake? Please help karo, bahut akelapan feel ho raha hai.

36 weeks high risk pregnancy, diabetes aur bed rest - kaise deal karun boredom aur anxiety se?

Yaar, aaj bahut heavy feel ho raha hai. 36 weeks ka high risk pregnancy hai, gestational diabetes ke saath. Doctor ne strict bed rest diya hai aur insulin bhi chal raha hai. Ghar mein reh reh ke dimaag kharab ho gaya hai. Baccha toh theek hai, alhamdulillah, but main emotionally exhausted feel kar rahi hoon. Koi na koi tension rehti hai - sugar level, weight, baby ki movements. Aaj subah uthi toh mann kiya kuch karun, par uthna mana hai. Bas bed mein padi rehni hai. Ajeeb depression sa aa raha hai. Pata hai zaroori hai, but koi suggestion hai is boredom aur anxiety se cope karne ka? Koi light activity ya distraction? Please share your experiences. Bahut akelapan feel ho raha hai.

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