dermus 150mg tablet allopathy (Fluconazole (150mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India
dermus 150mg tablet allopathy (Fluconazole (150mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India manufactured by Malcom Pharmaceuticals. Contains Fluconazole (150mg).

dermus 150mg tablet - Uses, Price, Side Effects & Substitutes

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Fluconazole (150mg) (Click to see all medicines with same salt)
🏭 Malcom Pharmaceuticals 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 21, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is dermus 150mg tablet used for?

dermus 150mg tablet (Fluconazole (150mg)) is used to treat anti infectives. It contains Fluconazole (150mg), which works by treating the condition effectively. Always consult your doctor before use. Take as prescribed.

  • Generic Name: Fluconazole (150mg)
  • Manufacturer: Malcom Pharmaceuticals
  • Medicine Form: Allopathy
  • Pregnancy Category: Consult doctor

🇮🇳 dermus 150mg tablet के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

dermus 150mg tablet का उपयोग मुख्य रूप से anti infectives और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Fluconazole (150mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? Over 80% of the antiretroviral drugs used globally to combat AIDS are supplied by Indian pharmaceutical companies.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Fluconazole (150mg)
Brand Namedermus 150mg tablet
ManufacturerMalcom Pharmaceuticals
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassANTI INFECTIVES
Action ClassFungal ergosterol synthesis inhibitor
Route of AdministrationOral
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Shelf LifeAs per manufacturer

💡 How and when to take dermus 150mg tablet?

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💊 dermus 150mg tablet Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

⚠️ What are the side effects of dermus 150mg tablet?

  • Headache
  • Nausea
  • Stomach pain

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🔬 Drug Interactions

🛡️ Safety & Warnings

🛑 Myths vs. Facts about dermus 150mg tablet

  • Myth: Generic substitutes of dermus 150mg tablet are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Fluconazole (150mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of dermus 150mg tablet can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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Tomato Seeds Kidney Stones Ka Risk? Sach Ya Myth? Mera Experience Batao!

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Complete Guide to Iron Deficiency Anemia - 29-05-2026

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जब आयरन की कमी होती है, तो शरीर पहले अपने स्टोर (जिगर, अस्थि मज्जा) से आयरन निकालना शुरू करता है। जब ये स्टोर खत्म हो जाते हैं, तो अस्थि मज्जा (bone marrow) में नई लाल रक्त कोशिकाएं बनना बंद हो जाती हैं या छोटी और पीली बनती हैं। इसे 'माइक्रोसाइटिक हाइपोक्रोमिक एनीमिया' कहते हैं। धीरे-धीरे हीमोग्लोबिन का स्तर गिरता जाता है, और शरीर के अंगों को ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Common and Rare Symptoms) सामान्य लक्षण (Common Symptoms): थकान और कमजोरी (Fatigue & Weakness): सबसे आम लक्षण। थोड़ा काम करने पर भी सांस फूलना या बहुत ज्यादा थकान महसूस होना। पीली त्वचा और नाखून (Pale Skin & Nails): चेहरा, होंठ, मसूड़े और नाखून के नीचे का हिस्सा पीला दिखना। सांस लेने में तकलीफ (Shortness of Breath): सीढ़ियां चढ़ने या तेज चलने पर सांस फूलना। चक्कर आना और सिरदर्द (Dizziness & Headaches): खासकर जल्दी उठने पर चक्कर आना। ठंडे हाथ-पैर (Cold Hands & Feet): खून के संचार में कमी के कारण। बेचैन पैर सिंड्रोम (Restless Legs Syndrome): रात में सोते समय पैरों में झटके या हिलने की इच्छा होना। दुर्लभ या कम ज्ञात लक्षण (Rare or Less Known Symptoms): पैरों में जलन या झुनझुनी (Burning or Tingling in Legs): नसों में ऑक्सीजन की कमी के कारण। गले में गांठ जैसा महसूस होना (Globus Sensation): निगलते समय गले में कुछ अटका हुआ लगना। बर्फ, मिट्टी या स्टार्च खाने की इच्छा (Pica): अनोखी भूख लगना – जैसे बर्फ चबाना, मिट्टी खाना, या कच्चा चावल खाना। यह आयरन की कमी का एक क्लासिक संकेत है। नाखूनों का चम्मच की तरह मुड़ना (Koilonychia): नाखून पतले होकर अंदर की ओर मुड़ जाते हैं। मुंह के कोनों में छाले (Angular Stomatitis): मुंह के कोनों में लाल, फटे हुए घाव। जीभ का चिकना और लाल होना (Glossitis): जीभ में सूजन और दर्द, स्वाद कम होना। 3. विस्तृत आहार योजना (Detailed Diet Plan) क्या खाएं (What to Eat) – आयरन से भरपूर भारतीय खाद्य पदार्थ: आयरन दो प्रकार का होता है: हीम आयरन (Heme Iron) जो जानवरों से मिलता है (आसानी से अवशोषित), और नॉन-हीम आयरन (Non-Heme Iron) जो पौधों से मिलता है (कम अवशोषित)। दोनों को मिलाकर खाने से फायदा होता है। हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक (spinach), मेथी (fenugreek), सरसों का साग, बथुआ। इन्हें पकाकर या सलाद में खाएं। दालें और फलियां: मसूर (red lentils), चना (chickpeas), राजमा (kidney beans), सोयाबीन (soybean)। बीज और मेवे: कद्दू के बीज (pumpkin seeds), तिल (sesame seeds), बादाम (almonds), काजू (cashews)। सूखे मेवे: किशमिश (raisins), खजूर (dates), अंजीर (figs)। अनाज: रागी (finger millet), जौ (barley), बाजरा (pearl millet), क्विनोआ (quinoa)। मांसाहारी विकल्प (यदि खाते हैं): लीवर (liver), रेड मीट (red meat), अंडे (eggs), मछली (fish) – विशेषकर सार्डिन और टूना। आयरन फोर्टिफाइड चीजें: आयरन युक्त अनाज, फोर्टिफाइड दूध या नमक। कैसे खाएं (How to Eat) – अवशोषण बढ़ाने के टिप्स: विटामिन C के साथ लें: आयरन वाली चीजों के साथ संतरा, नींबू, आंवला, टमाटर, या शिमला मिर्च खाएं। जैसे – पालक की सब्जी में नींबू निचोड़ें या दाल के साथ संतरा खाएं। चाय-कॉफी से बचें (खाने के तुरंत बाद): चाय और कॉफी में मौजूद टैनिन (tannins) आयरन के अवशोषण को रोकते हैं। खाने के 1-2 घंटे बाद ही चाय पिएं। कैल्शियम का ध्यान रखें: दूध, दही, पनीर में कैल्शियम होता है जो आयरन के अवशोषण को कम कर सकता है। आयरन सप्लीमेंट और दूध को अलग-अलग समय पर लें। क्या न खाएं (What to Avoid): फाइटेट्स (Phytates) वाले अनाज: चोकर (bran) वाली चीजें, साबुत अनाज (जैसे गेहूं का चोकर) ज्यादा मात्रा में न लें। ऑक्सलेट्स (Oxalates) वाली चीजें: पालक और चुकंदर में भी ऑक्सलेट्स होते हैं, लेकिन इन्हें पकाकर खाने से असर कम होता है। शराब (Alcohol): यह आयरन के अवशोषण को बाधित करती है और लीवर को नुकसान पहुंचाती है। एक दिन का नमूना आहार (Sample Daily Diet): नाश्ता: रागी का दलिया या पालक-पनीर पराठा + एक संतरा। दोपहर का खाना: चना/राजमा की सब्जी + बाजरे की रोटी + हरी सलाद (टमाटर, खीरा) + नींबू पानी। शाम का नाश्ता: मुट्ठी भर कद्दू के बीज और खजूर। रात का खाना: मसूर दाल + चावल + पालक की सब्जी + एक सेब। 4. चिकित्सा प्रबंधन (Medical Management) नोट: यह केवल शैक्षिक जानकारी है। कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। आयरन सप्लीमेंट्स (Iron Supplements): फेरस सल्फेट (Ferrous Sulfate): सबसे आम और सस्ता। इसमें एलिमेंटल आयरन 20% होता है। आमतौर पर 325 mg की गोली दिन में 1-3 बार ली जाती है। फेरस ग्लूकोनेट (Ferrous Gluconate): कम साइड इफेक्ट्स (जैसे कब्ज) होते हैं, लेकिन इसमें आयरन की मात्रा कम (12%) होती है। फेरस फ्यूमरेट (Ferrous Fumarate): इसमें 33% एलिमेंटल आयरन होता है। अक्सर प्रेग्नेंसी में दिया जाता है। आयरन सुक्रोज (Iron Sucrose) – IV: गंभीर एनीमिया या अवशोषण समस्या में नसों के जरिए दिया जाता है। दवाएं कैसे काम करती हैं? ये सप्लीमेंट्स शरीर को सीधा आयरन देते हैं, जो अस्थि मज्जा में जाकर हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है। आमतौर पर 2-4 हफ्तों में हीमोग्लोबिन बढ़ना शुरू हो जाता है, लेकिन स्टोर भरने में 3-6 महीने लग सकते हैं। साइड इफेक्ट्स और सावधानियां: कब्ज (Constipation): बहुत आम। खूब पानी पिएं और फाइबर वाली चीजें खाएं। पेट खराब या मतली: खाली पेट न लें। खाने के साथ लेने से कम होता है। काला मल (Black Stool): यह सामान्य है और दवा के कारण होता है। घबराएं नहीं। दांतों पर दाग: तरल आयरन से दांत काले हो सकते हैं। स्ट्रॉ से पिएं और बाद में मुंह धो लें। कब डॉक्टर से मिलें? अगर 2 हफ्ते में कोई सुधार न हो। अगर साइड इफेक्ट्स बहुत ज्यादा हों। अगर एनीमिया बहुत गंभीर हो (हीमोग्लोबिन 7 से कम) – तो IV आयरन या ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत हो सकती है। 5. सिद्ध घरेलू उपचार और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) घरेलू उपचार (Home Remedies): चुकंदर और गाजर का जूस: चुकंदर में आयरन और फोलेट होता है। रोज एक गिलास ताजा जूस पिएं। आंवला: विटामिन C का सबसे अच्छा स्रोत। आंवला का मुरब्बा या जूस लें। काली किशमिश और बादाम: रात भर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाएं। तिल और गुड़: तिल (sesame seeds) में आयरन और गुड़ (jaggery) में आयरन और मिनरल्स होते हैं। इनका लड्डू बनाकर खाएं। हल्दी वाला दूध: हल्दी में करक्यूमिन (curcumin) होता है जो आयरन के अवशोषण में मदद करता है। रात को सोने से पहले पिएं। जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes): नियमित व्यायाम: हल्की एक्सरसाइज (जैसे वॉक, योग) से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और ऑक्सीजन का उपयोग बेहतर होता है। लेकिन ज्यादा थकान होने पर आराम करें। पर्याप्त नींद: 7-8 घंटे की नींद शरीर को रिपेयर करने में मदद करती है। तनाव प्रबंधन: ध्यान (meditation) और गहरी सांस लेने से तनाव कम होता है, जो एनीमिया के लक्षणों को बढ़ा सकता है। हाइड्रेशन: दिन में 8-10 गिलास पानी पिएं। यह कब्ज और थकान दोनों में मदद करता है। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Mental Health and Daily Life) मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव: डिप्रेशन और चिंता: ऑक्सीजन की कमी से ब्रेन फॉग (brain fog) होता है, जिससे उदासी, चिड़चिड़ापन और चिंता बढ़ सकती है। कमजोर याददाश्त और ध्यान: काम या पढ़ाई में ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है। सोशल आइसोलेशन: थकान के कारण लोग दोस्तों और परिवार से मिलना-जुलना कम कर देते हैं, जिससे अकेलापन बढ़ता है। दैनिक जीवन पर प्रभाव: काम पर असर: उत्पादकता घट जाती है। बार-बार छुट्टी लेनी पड़ सकती है। रिश्तों पर तनाव: चिड़चिड़ापन और थकान के कारण परिवार में झगड़े बढ़ सकते हैं। शारीरिक गतिविधियां: सीढ़ियां चढ़ना, बाजार जाना जैसे सामान्य काम भी मुश्किल हो जाते हैं। क्या करें? मानसिक स्वास्थ्य के लिए काउंसलिंग लें, परिवार से बात करें, और छोटे-छोटे लक्ष्य रखें। याद रखें, एनीमिया ठीक होने पर ये समस्याएं भी खत्म हो जाएंगी। 7. 10 विस्तृत अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) 1. क्या आयरन की कमी से एनीमिया पूरी तरह ठीक हो सकता है? हां, बिल्कुल! सही इलाज (आयरन सप्लीमेंट्स और डाइट) से यह पूरी तरह ठीक हो सकता है। हालांकि, अगर कारण (जैसे भारी पीरियड्स) बना रहता है, तो दोबारा हो सकता है। इसलिए नियमित जांच कराते रहें। 2. क्या केवल शाकाहारी भोजन से आयरन की कमी पूरी हो सकती है? हां, लेकिन थोड़ी मेहनत लगती है। नॉन-हीम आयरन कम अवशोषित होता है, इसलिए विटामिन C के साथ लेना जरूरी है। पालक, दाल, बीज, और फोर्टिफाइड अनाज का सेवन करें। 3. क्या प्रेग्नेंसी में आयरन की कमी खतरनाक है? बहुत खतरनाक! इससे समय से पहले प्रसव, कम वजन का बच्चा, और मां में गंभीर थकान हो सकती है। प्रेग्नेंट महिलाओं को नियमित आयरन सप्लीमेंट लेना चाहिए। 4. क्या चाय पीने से एनीमिया बढ़ता है? हां, खासकर खाने के तुरंत बाद चाय पीने से आयरन का अवशोषण कम होता है। खाने के 1-2 घंटे बाद चाय पिएं या नींबू वाली चाय लें (विटामिन C मदद करता है)। 5. क्या थकान हमेशा एनीमिया का संकेत है? नहीं, थकान के कई कारण हो सकते हैं – नींद की कमी, तनाव, थायरॉइड, या डिप्रेशन। लेकिन अगर थकान के साथ पीला चेहरा, सांस फूलना, या चक्कर आए, तो तुरंत ब्लड टेस्ट कराएं। 6. क्या बच्चों में आयरन की कमी आम है? हां, खासकर 6 महीने से 2 साल के बच्चों में। इससे विकास धीमा हो सकता है। बच्चों को आयरन फोर्टिफाइड दूध, दाल का पानी, और फल दें। 7. क्या आयरन सप्लीमेंट से वजन बढ़ता है? नहीं, आयरन सप्लीमेंट से सीधे वजन नहीं बढ़ता। लेकिन एनीमिया ठीक होने पर भूख बढ़ सकती है, जिससे वजन बढ़ सकता है। यह सामान्य है। 8. क्या एनीमिया से बाल झड़ते हैं? हां, आयरन की कमी से बालों के रोम (hair follicles) को ऑक्सीजन नहीं मिलती, जिससे बाल पतले और कमजोर हो जाते हैं। एनीमिया ठीक होने पर बाल वापस घने हो सकते हैं। 9. क्या मैं आयरन सप्लीमेंट लेते समय दूध पी सकता हूं? बेहतर है कि नहीं, क्योंकि दूध में कैल्शियम आयरन के अवशोषण को रोकता है। दूध और आयरन सप्लीमेंट को कम से कम 2 घंटे के अंतर पर लें। 10. क्या एनीमिया से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है? हां, गंभीर एनीमिया से दिल को ज्यादा पंप करना पड़ता है, जिससे हार्ट फेलियर या अटैक का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए एनीमिया का इलाज समय पर करवाना बहुत जरूरी है। मेडिकल डिस्क्लेमर: यह लेख केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए हमेशा एक योग्य डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें। स्व-दवा से बचें।

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