dentoclav 200mg/28.5mg dry syrup - Uses, Price and Side Effects

dentoclav 200mg/28.5mg dry syrup: Uses in Hindi (Fayde), Price, Side Effects & Substitutes

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🏭 Sapiens Labs Pvt Ltd 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 16, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is dentoclav 200mg/28.5mg dry syrup used for? (Quick Answer)

🩺 Primary Use:
dentoclav 200mg/28.5mg dry syrup (manufactured by Sapiens Labs Pvt Ltd) is a highly effective medicine primarily used for the treatment of anti infectives. It helps in relieving symptoms and improving your overall health. Find the complete list of dentoclav 200mg/28.5mg dry syrup uses in Hindi, alternatives, price in India, and dosage on SaathiMed below.
🧪 Active Ingredient & Working:
It contains Amoxycillin (200mg) + Clavulanic Acid (28.5mg) which works by treating the underlying condition effectively.
⚠️ Safety Warning:
Always consult your doctor before using this medicine, especially to check if it is safe during pregnancy or if you suffer from liver or kidney issues.

🇮🇳 dentoclav 200mg/28.5mg dry syrup के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

dentoclav 200mg/28.5mg dry syrup का उपयोग मुख्य रूप से anti infectives और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Amoxycillin (200mg) + Clavulanic Acid (28.5mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? The Indian pharmaceutical market is expected to reach $130 billion by 2030.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Amoxycillin (200mg) + Clavulanic Acid (28.5mg)
Manufacturer / BrandSapiens Labs Pvt Ltd
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassANTI INFECTIVES
Action Class
Prescription Required✓ Yes (Schedule H Drug)
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Onset of Action:
30 to 60 minutes
Duration:
6 to 8 hours
Habit Forming:
No (Non-addictive)
Food:
Take after meal

💊 dentoclav 200mg/28.5mg dry syrup Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

💡 How to Take dentoclav 200mg/28.5mg dry syrup (Dosage & Khane ka tarika)

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💡 Expert Tips for Best Results

  • Follow the prescription: Always use dentoclav 200mg/28.5mg dry syrup exactly as prescribed by your healthcare provider. Do not alter the dosage yourself.
  • Check Expiry: Never consume expired medicines. Always double-check the manufacturing and expiry date on the packaging before use.
  • Storage: Store the medicine in a cool, dry place away from direct sunlight and out of reach of children.
  • Report Side Effects: If you experience severe allergic reactions, swelling, or breathing issues after taking dentoclav 200mg/28.5mg dry syrup, seek emergency medical help immediately.
  • Don't self-medicate: Do not share this medicine with others even if their symptoms seem similar to yours.

⚠️ dentoclav 200mg/28.5mg dry syrup Side Effects (Nuksan) & Precautions

Common and serious side effects may include:

  • Nausea
  • Vomiting
  • Abdominal pain
  • Diarrhea
  • Allergy
  • Skin rash

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🛑 Myths vs. Facts about dentoclav 200mg/28.5mg dry syrup

  • Myth: Generic substitutes of dentoclav 200mg/28.5mg dry syrup are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Amoxycillin (200mg) + Clavulanic Acid (28.5mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of dentoclav 200mg/28.5mg dry syrup can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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Complete Guide to Hyperthyroidism - 26-05-2026

हाइपरथायरॉइडिज्म (Hyperthyroidism) का संपूर्ण गाइड: कारण, लक्षण, इलाज और घरेलू उपाय नमस्ते! क्या आप या आपके परिवार में किसी को हाइपरथायरॉइडिज्म (थायरॉइड का अत्यधिक सक्रिय होना) की समस्या है? यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपकी थायरॉइड ग्रंथि बहुत ज़्यादा थायरॉइड हार्मोन (T3 और T4) बनाने लगती है। इससे आपका मेटाबॉलिज्म तेज़ हो जाता है, जो शरीर के हर अंग को प्रभावित करता है। इस गाइड में हम आपको हर छोटी-बड़ी बात बताएंगे – बीमारी कैसे होती है, इसके लक्षण, खान-पान, दवाइयाँ, घरेलू उपाय और मानसिक स्वास्थ्य पर असर। चलिए, शुरू करते हैं! 1. गहरा परिचय और बीमारी का तंत्र (Deep Introduction & Disease Mechanism) हाइपरथायरॉइडिज्म क्या है? थायरॉइड ग्रंथि आपकी गर्दन के सामने, एडम्स एप्पल के नीचे तितली के आकार की होती है। यह ग्रंथि थायरॉइड हार्मोन (T3 और T4) बनाती है, जो शरीर की ऊर्जा, हृदय गति, तापमान और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करते हैं। हाइपरथायरॉइडिज्म में यह ग्रंथि बहुत ज़्यादा हार्मोन बनाने लगती है, जिससे शरीर की मशीनरी "ओवरड्राइव" मोड में चली जाती है। यह कैसे होता है? (Mechanism) पिट्यूटरी ग्रंथि का रोल: दिमाग में मौजूद पिट्यूटरी ग्रंथि TSH (थायरॉइड स्टिम्युलेटिंग हार्मोन) बनाती है, जो थायरॉइड को संकेत देता है कि कितना हार्मोन बनाना है। हाइपरथायरॉइडिज्म में यह संतुलन बिगड़ जाता है। ग्रेव्स डिजीज (Graves' Disease): यह सबसे आम कारण है (70-80% मामले)। इसमें शरीर की इम्यून सिस्टम गलती से थायरॉइड पर हमला करती है और उसे लगातार हार्मोन बनाने के लिए उत्तेजित करती है। थायरॉइड नोड्यूल्स: थायरॉइड में गांठें (नोड्यूल्स) बन जाती हैं, जो अतिरिक्त हार्मोन बनाने लगती हैं। थायरॉइडाइटिस: थायरॉइड में सूजन (जैसे वायरल इन्फेक्शन या प्रसव के बाद) के कारण हार्मोन लीक हो जाते हैं। अत्यधिक आयोडीन: आयोडीन युक्त दवाइयाँ या सप्लीमेंट्स लेने से भी यह समस्या हो सकती है। शरीर पर प्रभाव: ज़्यादा T3/T4 हार्मोन हृदय गति बढ़ाते हैं, मेटाबॉलिज्म तेज़ करते हैं, और शरीर के ऊर्जा भंडार को खत्म करते हैं। इससे वजन घटना, घबराहट, और कमज़ोरी होती है। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Common & Rare Symptoms) सामान्य लक्षण (जो ज़्यादातर लोगों में होते हैं): वजन घटना: भूख बढ़ने के बावजूद वजन कम होना (तेज़ मेटाबॉलिज्म के कारण)। तेज़ दिल की धड़कन (Palpitations): दिल तेज़ी से धड़कता है या अनियमित लगता है (100 बीट प्रति मिनट से ऊपर)। हाथों का कांपना (Tremor): हाथों में हल्का कंपन, खासकर जब हाथ फैलाए हों। गर्मी असहनशीलता (Heat Intolerance): गर्मी में बहुत पसीना आना, ठंडी जगह पसंद करना। भूख में वृद्धि: लगातार भूख लगना, लेकिन वजन न बढ़ना। थकान और कमज़ोरी: मांसपेशियों में कमज़ोरी, खासकर बाहों और जांघों में। नींद न आना (Insomnia): रात को सोने में परेशानी या बार-बार जागना। मूड स्विंग्स: चिड़चिड़ापन, बेचैनी, या अचानक गुस्सा आना। गर्दन में सूजन (Goiter): थायरॉइड ग्रंथि का बढ़ जाना, जो गर्दन के सामने दिखाई दे सकता है। आँखों की समस्या: आँखों का बाहर निकलना (Exophthalmos) – खासकर ग्रेव्स डिजीज में। दुर्लभ और कम ज्ञात लक्षण: त्वचा में बदलाव: पैरों या पिंडलियों पर मोटी, लाल, खुजलीदार त्वचा (Pretibial Myxedema)। नाखूनों का अलग होना (Nail Separation): नाखून उंगली से अलग होना (Plummer's Nails)। पीरियड्स में बदलाव: महिलाओं में अनियमित पीरियड्स या बिल्कुल बंद होना। बालों का झड़ना: सिर के बाल पतले होना या झड़ना। हड्डियों में दर्द: लंबे समय तक हाइपरथायरॉइडिज्म रहने से हड्डियाँ कमज़ोर हो सकती हैं (Osteoporosis)। पैरों में जलन या सुन्नता (Peripheral Neuropathy): पैरों या हाथों में झुनझुनी या जलन। पुरुषों में स्तन वृद्धि (Gynecomastia): दुर्लभ मामलों में पुरुषों के स्तन बढ़ सकते हैं। 3. विस्तृत डाइट प्लान (Kya Khaye aur Kya Na Khaye) हाइपरथायरॉइडिज्म में डाइट बहुत महत्वपूर्ण है। सही खाना हार्मोन को संतुलित करने और लक्षणों को कम करने में मदद करता है। क्या खाएं (Foods to Eat): कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर खाद्य पदार्थ: हड्डियों को मज़बूत रखने के लिए। जैसे दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियाँ (पालक, मेथी), रागी (nachni), और सोया उत्पाद। एंटी-ऑक्सीडेंट वाले फल और सब्जियाँ: बेरीज़ (ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी), टमाटर, शिमला मिर्च, ब्रोकली, और गाजर। प्रोटीन से भरपूर आहार: मांसपेशियों की कमज़ोरी कम करने के लिए। जैसे अंडे, चिकन, मछली (सीमित मात्रा में), दालें, चना, सोयाबीन, और टोफू। साबुत अनाज (Whole Grains): ऊर्जा स्तर बनाए रखने के लिए। जैसे ब्राउन राइस, ओट्स, क्विनोआ, जई, और बाजरा। स्वस्थ वसा (Healthy Fats): नारियल तेल, जैतून का तेल, एवोकाडो, और बादाम (सीमित मात्रा में)। हर्बल चाय: कैमोमाइल, लेमन बाम, या पुदीना की चाय – तनाव कम करने और नींद सुधारने में मददगार। क्या न खाएं (Foods to Avoid): आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थ: थायरॉइड को और उत्तेजित कर सकते हैं। जैसे समुद्री शैवाल (seaweed), आयोडीन युक्त नमक, मछली (जैसे टूना, सैल्मन – सीमित करें), और आयोडीन सप्लीमेंट। कैफीन: चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स, और एनर्जी ड्रिंक्स – दिल की धड़कन और घबराहट बढ़ा सकते हैं। प्रोसेस्ड और तले हुए खाद्य पदार्थ: पिज़्ज़ा, बर्गर, चिप्स, और पैकेज्ड स्नैक्स – इनमें ट्रांस फैट और एडिटिव्स होते हैं जो सूजन बढ़ा सकते हैं। अत्यधिक मीठा और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट: मिठाई, केक, पेस्ट्री, सफेद ब्रेड, और सफेद चावल – ब्लड शुगर को असंतुलित कर सकते हैं। ग्लूटेन (कुछ मामलों में): अगर आपको ग्रेव्स डिजीज है, तो ग्लूटेन (गेहूं, जौ, राई) से एलर्जी हो सकती है। गेहूं की रोटी की जगह बाजरा या ज्वार की रोटी खाएं। शराब और धूम्रपान: ये थायरॉइड फंक्शन को बिगाड़ सकते हैं और आँखों की समस्या को बढ़ा सकते हैं। नमूना डाइट चार्ट (Sample Diet Plan): सुबह (7:00 AM): गुनगुने पानी में नींबू और शहद – मेटाबॉलिज्म को शांत करने के लिए। नाश्ता (8:00 AM): ओट्स या दलिया (दूध के साथ) + मुट्ठी भर बादाम और अखरोट। मिड-मॉर्निंग (10:30 AM): एक सेब या नाशपाती + हर्बल चाय। दोपहर का भोजन (1:00 PM): ब्राउन राइस + दाल (मूंग या तुअर) + हरी सब्जी (जैसे लौकी या तोरी) + दही का कटोरा। शाम का नाश्ता (4:00 PM): मूंगफली या चने का चाट + नारियल पानी। रात का भोजन (7:00 PM): बाजरा या ज्वार की रोटी + पालक पनीर + खीरे का सलाद। सोने से पहले (9:30 PM): गर्म दूध में हल्दी – नींद के लिए। 4. चिकित्सा प्रबंधन (Medical Management) ध्यान दें: यह केवल शैक्षिक जानकारी है। कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। आमतौर पर दी जाने वाली दवाइयाँ: एंटी-थायरॉइड दवाएं (Antithyroid Drugs): मेथिमाज़ोल (Methimazole) – यह थायरॉइड हार्मोन के उत्पादन को कम करता है। यह सबसे आम दवा है। प्रोपिलथायोरासिल (Propylthiouracil – PTU) – यह भी हार्मोन बनने को रोकता है, लेकिन इसके साइड इफेक्ट्स ज़्यादा हो सकते हैं (जैसे लिवर डैमेज)। गर्भावस्था में PTU को प्राथमिकता दी जाती है। बीटा-ब्लॉकर्स (Beta-Blockers): प्रोप्रानोलोल (Propranolol) या एटेनोलोल (Atenolol) – ये दिल की तेज़ धड़कन, हाथों का कांपना, और घबराहट को कम करते हैं। ये हार्मोन के स्तर को नहीं बदलते, बल्कि लक्षणों को नियंत्रित करते हैं। रेडियोएक्टिव आयोडीन थेरेपी (Radioactive Iodine Therapy): यह एक गोली या तरल रूप में ली जाती है। रेडियोएक्टिव आयोडीन थायरॉइड कोशिकाओं को नष्ट कर देता है, जिससे हार्मोन उत्पादन कम होता है। इसके बाद अक्सर हाइपोथायरॉइडिज्म (थायरॉइड का कम सक्रिय होना) हो जाता है, जिसे थायरॉइड हार्मोन गोलियों से ठीक किया जाता है। सर्जरी (Thyroidectomy): थायरॉइड ग्रंथि का पूरा या आंशिक निकालना। यह तब किया जाता है जब दवाएँ काम न करें, बड़ा गोइटर हो, या कैंसर का संदेह हो। दवाओं के साइड इफेक्ट्स: मेथिमाज़ोल/PTU: त्वचा पर लाल चकत्ते, जोड़ों में दर्द, बुखार, और दुर्लभ मामलों में लिवर या बोन मैरो डैमेज। बीटा-ब्लॉकर्स: थकान, ठंडे हाथ-पैर, नींद में परेशानी। 5. सिद्ध घरेलू उपाय और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) घरेलू उपाय (Home Remedies): अश्वगंधा (Ashwagandha): यह एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है जो थायरॉइड हार्मोन को संतुलित करने में मदद कर सकती है। लेकिन ध्यान दें: हाइपरथायरॉइडिज्म में इसका उपयोग सावधानी से करें, क्योंकि यह थायरॉइड को और उत्तेजित कर सकता है। डॉक्टर से सलाह लें। लेमन बाम (Lemon Balm): यह हर्बल चाय तनाव कम करती है और थायरॉइड हार्मोन के प्रभाव को शांत कर सकती है। मुलेठी (Licorice Root): यह एड्रेनल ग्रंथि को सहारा देती है और थकान कम करती है। लेकिन उच्च रक्तचाप वाले लोग इससे बचें। ग्रीन टी: इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं, लेकिन कैफीन की मात्रा कम होने के कारण यह कॉफी से बेहतर है। नारियल तेल: खाना पकाने में नारियल तेल का उपयोग करें – यह मेटाबॉलिज्म को धीमा करने में मदद कर सकता है। जीवनशैली में बदलाव: तनाव प्रबंधन: योग, ध्यान (मेडिटेशन), और प्राणायाम (जैसे अनुलोम-विलोम) करें। तनाव हार्मोन कोर्टिसोल को बढ़ाता है, जो थायरॉइड को और प्रभावित करता है। नींद को प्राथमिकता दें: हर रात 7-8 घंटे की नींद लें। सोने से पहले स्क्रीन से दूर रहें और एक रूटीन बनाएं। हल्का व्यायाम: तेज़ दौड़ने या भारी वर्कआउट से बचें। इसके बजाय, तेज़ चलना, तैराकी, या स्ट्रेचिंग करें। ठंडी जगह पर रहें: गर्मी से बचने के लिए पंखे या एसी का उपयोग करें। ठंडे पानी से नहाएं। धूम्रपान और शराब छोड़ें: ये आँखों की समस्या और हृदय संबंधी जटिलताओं को बढ़ा सकते हैं। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Mental Health and Daily Life) हाइपरथायरॉइडिज्म सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी बहुत प्रभावित करता है। आइए समझते हैं: मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव: चिंता और घबराहट (Anxiety): तेज़ मेटाबॉलिज्म के कारण दिमाग में "फाइट या फ्लाइट" मोड चालू हो जाता है, जिससे बिना वजह डर या बेचैनी होती है। मूड स्विंग्स: अचानक गुस्सा, रोना, या उदासी आ सकती है। यह हार्मोनल असंतुलन के कारण होता है। डिप्रेशन: कुछ लोगों में लंबे समय तक हाइपरथायरॉइडिज्म रहने से डिप्रेशन के लक्षण (थकान, निराशा) विकसित हो सकते हैं। ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई: दिमाग तेज़ी से काम करता है, लेकिन एक चीज़ पर फोकस नहीं कर पाता – इसे "ब्रेन फॉग" कहते हैं। दैनिक जीवन पर प्रभाव: काम पर असर: थकान और घबराहट के कारण ऑफिस में प्रोडक्टिविटी कम हो सकती है। रिश्तों पर असर: चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स से परिवार और दोस्तों के साथ तनाव बढ़ सकता है। नींद की कमी: रात को नींद न आने से दिनभर सुस्ती और चिड़चिड़ापन रहता है। सामाजिक जीवन: गर्मी असहनशीलता और पसीने के कारण बाहर जाने में हिचक हो सकती है। कैसे संभालें? परिवार को अपनी स्थिति समझाएं, थेरेपी या काउंसलिंग लें, और छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं। याद रखें, इलाज से ये लक्षण धीरे-धीरे कम हो जाते हैं। 7. 10 विस्तृत FAQs (लॉन्ग-टेल सर्च क्वेरीज़) 1. क्या हाइपरथायरॉइडिज्म पूरी तरह ठीक हो सकता है? हाँ, ज़्यादातर मामलों में यह नियंत्रित किया जा सकता है। दवाओं, रेडियोएक्टिव आयोडीन, या सर्जरी से हार्मोन का स्तर सामान्य हो जाता है। हालांकि, कुछ लोगों को जीवनभर दवा लेनी पड़ सकती है (जैसे हाइपोथायरॉइडिज्म होने पर) । 2. क्या हाइपरथायरॉइडिज्म में गर्भवती होना सुरक्षित है? गर्भावस्था से पहले थायरॉइड को नियंत्रित करना बहुत ज़रूरी है। अनियंत्रित हाइपरथायरॉइडिज्म से गर्भपात, समय से पहले जन्म, या बच्चे में थायरॉइड समस्या हो सकती है। डॉक्टर PTU दवा (गर्भावस्था में सुरक्षित) लिख सकते हैं। 3. क्या हाइपरथायरॉइडिज्म से बाल झड़ते हैं? हाँ, तेज़ मेटाबॉलिज्म और हार्मोनल बदलावों के कारण बाल पतले हो सकते हैं या झड़ सकते हैं। इलाज शुरू होने के बाद यह आमतौर पर ठीक हो जाता है। 4. क्या हाइपरथायरॉइडिज्म में दिल का दौरा पड़ सकता है? हाँ, अनियंत्रित हाइपरथायरॉइडिज्म से हृदय गति बहुत तेज़ हो सकती है (Atrial Fibrillation), जिससे स्ट्रोक या दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए समय पर इलाज ज़रूरी है। 5. क्या हाइपरथायरॉइडिज्म में आयोडीन युक्त नमक खाना चाहिए? नहीं, आयोडीन थायरॉइड को और उत्तेजित कर सकता है। सेंधा नमक (Rock Salt) या कम आयोडीन वाला नमक इस्तेमाल करें। 6. क्या हाइपरथायरॉइडिज्म से आँखों की रोशनी प्रभावित होती है? ग्रेव्स डिजीज में आँखों के पीछे की मांसपेशियाँ सूज जाती हैं, जिससे आँखें बाहर निकल सकती हैं (Exophthalmos) और डबल विजन या रोशनी कम हो सकती है। धूम्रपान इसे बढ़ाता है। 7. क्या हाइपरथायरॉइडिज्म में व्यायाम करना चाहिए? हल्का व्यायाम (जैसे योग, तेज़ चलना) फायदेमंद है, लेकिन भारी वर्कआउट या दौड़ने से बचें, क्योंकि इससे दिल पर दबाव बढ़ सकता है। 8. क्या हाइपरथायरॉइडिज्म का आयुर्वेदिक इलाज संभव है? आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ (जैसे अश्वगंधा, शतावरी) सहायक हो सकती हैं, लेकिन इन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना न लें। ये दवाओं के साथ इंटरैक्ट कर सकती हैं। 9. क्या हाइपरथायरॉइडिज्म में वजन बढ़ाना मुश्किल है? हाँ, तेज़ मेटाबॉलिज्म के कारण वजन बढ़ाना मुश्किल होता है। इलाज के बाद वजन स्थिर हो जाता है। अधिक कैलोरी वाला, पौष्टिक आहार लें (जैसे नट्स, एवोकाडो, दूध)। 10. क्या हाइपरथायरॉइडिज्म का पारिवारिक इतिहास होने पर खतरा बढ़ जाता है? हाँ, यह ऑटोइम्यून बीमारी है, इसलिए परिवार में किसी को थायरॉइड समस्या होने पर आपको भी खतरा हो सकता है। नियमित जांच करवाएं। मेडिकल डिस्क्लेमर: यह गाइड केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी चिकित्सकीय सलाह, निदान, या उपचार का विकल्प नहीं है। हाइपरथायरॉइडिज्म एक गंभीर स्थिति है, जिसका इलाज केवल एक योग्य डॉक्टर (एंडोक्राइनोलॉजिस्ट) की देखरेख में ही किया जान

Bhai, onion juice se baal aaye ya bas aankhon mein paani? 😭

Bhai log, serious doubt hai. Minoxidil try kar raha hu but side effects ka dar hai toh kisine bola onion juice laga lo. 2 hafte se roz lagaa raha hu, bas aankhen jal rahi hai aur koi result nahi dikh raha 🥲. Kya ye sab fake hai ya real mein kaam karta hai? Kisine experience kiya hai toh batao. Ya fir bas aise hi trend chal raha hai? Mera toh hairline aur crown dono thin ho rahe hai, friends "takle" bolke chidhate hain, ab toh ghar pe bhi mom ne "bald look suits you" bol diya 😭. Seriously, kya koi natural remedy actually works? Onion juice se growth ho sakti hai ya ye just internet ka gyaan hai? Please help a brother out!

Bed rest pe depression ho raha hai! Koi gharelu mood fixer batao ya main pagal ho jaaungi

Yaar koi batao, bed rest pe baitha rehna ab depression de raha hai. Mera second pregnancy hai, 36 ki age mein, aur gestational diabetes bhi hai. Doctor ne kaha hai “full bed rest” lekin ghar mein reh reh ke dimaag kharab ho raha hai. Aaj toh pata nahi kyun rona aa gaya. Baccha bhi ulta seedha kar raha hai andar, aur main hoon ki uth bhi nahi sakti. Insulin bhi chal raha hai, needle se bhi dar lagta hai lekin ab aadat ho gayi. Koi ghar ka kaam nahi kar sakti, TV dekh dekh ke bore ho gayi. Aaj maine socha phone pe kuch positive videos dekhu, lekin sab motivational log bhi “enjoy your rest” bolte hain — bhai, yeh rest nahi, punishment hai! Kya koi gharelu nuskha hai jo mood theek kare? Ya koi aisi cheez jo bed pe baith ke kar sakte hain? Please suggest karo, warna main pagal ho jaaungi.

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