albowin iv 6mg/400mg tablet allopathy (Ivermectin (6mg) + Albendazole (400mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India
albowin iv 6mg/400mg tablet allopathy (Ivermectin (6mg) + Albendazole (400mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India manufactured by Deltis Pharma Private Limited. Contains Ivermectin (6mg) + Albendazole (400mg).

albowin iv 6mg/400mg tablet - Uses, Price, Side Effects & Substitutes

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🏭 Deltis Pharma Private Limited 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 20, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is albowin iv 6mg/400mg tablet used for?

albowin iv 6mg/400mg tablet is primarily used for the treatment of ANTI INFECTIVES. It contains Ivermectin (6mg) + Albendazole (400mg) which works effectively. Always consult your doctor before using this medication.

  • Generic Name: Ivermectin (6mg) + Albendazole (400mg)
  • Manufacturer: Deltis Pharma Private Limited
  • Medicine Form: Allopathy
  • Pregnancy Category: Consult doctor

🇮🇳 albowin iv 6mg/400mg tablet के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

albowin iv 6mg/400mg tablet का उपयोग मुख्य रूप से anti infectives और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Ivermectin (6mg) + Albendazole (400mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? The Indian pharmaceutical market is expected to reach $130 billion by 2030.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Ivermectin (6mg) + Albendazole (400mg)
Brand Namealbowin iv 6mg/400mg tablet
ManufacturerDeltis Pharma Private Limited
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassANTI INFECTIVES
Action ClassInformation pending
Route of AdministrationOral
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Shelf LifeAs per manufacturer

💡 How and when to take albowin iv 6mg/400mg tablet?

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💊 albowin iv 6mg/400mg tablet Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

⚠️ What are the side effects of albowin iv 6mg/400mg tablet?

  • Nausea
  • Vomiting
  • Diarrhea
  • Loss of appetite
  • Increased liver enzymes
  • Itching
  • Dizziness
  • Swelling of lymph nodes

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🔬 Drug Interactions

🛡️ Safety & Warnings

🛑 Myths vs. Facts about albowin iv 6mg/400mg tablet

  • Myth: Generic substitutes of albowin iv 6mg/400mg tablet are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Ivermectin (6mg) + Albendazole (400mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of albowin iv 6mg/400mg tablet can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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Arthritis ka dard! Diet tips do, inflammation kam kaise karein?

Morning everyone 🙏 Aaj subah uthi toh fingers fir se jakad gaye the. Hamesha ki tarah chai banane me dikkat hui. Arthritis ka dard toh hai hi, par ab inflammation bhi badh raha hai lagta hai. Koi bata sakta hai ki diet se kya kam kar sakte hain? Maine suna hai haldi aur ginger ka kadha helpful hota hai, toh aaj subah wahi pi liya. Thoda aaram mila hai abhi. Lekin kya khaana chahiye aur kya avoid karna chahiye? Koi meri tarah RA patient ho toh please apna experience share karein. Mera doctor kehta hai processed food chhod do, par ghar me sab kuch fresh hi banate hain phir bhi dard hota hai. Aap log kya karte ho? Jaldi reply karo, please 🙏

Complete Guide to Hyperthyroidism - 27-05-2026

हाइपरथायरॉइडिज्म (Hyperthyroidism) का संपूर्ण गाइड: कारण, लक्षण, इलाज और घरेलू उपाय नमस्ते! अगर आप या आपके परिवार में किसी को हाइपरथायरॉइडिज्म (Hyperthyroidism) है, या आप इस बीमारी के बारे में जानना चाहते हैं, तो आप सही जगह पर हैं। यह एक विस्तृत, आसान भाषा (हिंग्लिश) में लिखा गया मेडिकल गाइड है। हम इसे इतना डीटेल में कवर करेंगे कि आपको एक डॉक्टर से बात करने जैसा महसूस होगा। 1. गहरा परिचय और रोग तंत्र (Deep Introduction & Disease Mechanism) हाइपरथायरॉइडिज्म क्या है? यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपकी थायरॉइड ग्रंथि (Thyroid Gland) बहुत ज्यादा थायरॉइड हार्मोन (T3 और T4) बनाने लगती है। यह ग्रंथि आपकी गर्दन के सामने, एडम्स एप्पल के ठीक नीचे, तितली के आकार की होती है। यह शरीर के अंदर कैसे होता है? (Disease Mechanism) नॉर्मल फंक्शन: सामान्यतः, आपका पिट्यूटरी ग्रंथि (Pituitary Gland) (जो दिमाग में होती है) TSH (Thyroid Stimulating Hormone) रिलीज करती है। TSH थायरॉइड को संकेत देता है कि कितना हार्मोन बनाना है। हाइपरथायरॉइडिज्म में: इस प्रक्रिया में गड़बड़ी हो जाती है। थायरॉइड ग्रंथि TSH के संकेत को इग्नोर करके खुद-ब-खुद बहुत ज्यादा T3 (Triiodothyronine) और T4 (Thyroxine) बनाने लगती है। इससे मेटाबॉलिज्म (Metabolism) तेज हो जाता है, जैसे कोई इंजन बहुत तेज चल रहा हो। रिएक्शन: यह ज्यादा हार्मोन आपके हर अंग (Heart, Brain, Muscles, Intestine) को ओवरड्राइव में डाल देते हैं। इसलिए दिल तेज धड़कता है, वजन घटता है, और बेचैनी होती है। मुख्य कारण (Causes) ग्रेव्स डिजीज (Graves' Disease): यह सबसे कॉमन कारण है (60-80% मामले)। यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जहां शरीर की इम्यूनिटी थायरॉइड पर अटैक करके उसे ज्यादा हार्मोन बनाने के लिए उकसाती है। थायरॉइड नोड्यूल्स (Toxic Nodules): थायरॉइड में गांठें (Nodules) बन जाती हैं जो बिना किसी नियंत्रण के हार्मोन बनाती हैं। थायरॉइडाइटिस (Thyroiditis): थायरॉइड में सूजन (जैसे वायरल इंफेक्शन या प्रेग्नेंसी के बाद) के कारण स्टोर किया हुआ हार्मोन अचानक ब्लड में लीक हो जाता है। ज्यादा आयोडीन (Excess Iodine): दवाओं या सप्लीमेंट्स से ज्यादा आयोडीन लेना। 2. कॉमन और रेयर लक्षण (Common AND Rare Symptoms) लक्षण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। कुछ लोगों में ये बहुत हल्के होते हैं, तो कुछ में गंभीर। कॉमन लक्षण (Common Symptoms) तेजी से वजन घटना: भूख बढ़ने के बावजूद वजन कम होना। दिल का तेज धड़कना (Palpitations): दिल तेज या अनियमित रूप से धड़कता है, खासकर आराम करते वक्त। हाथों का कांपना (Tremors): हाथों में हल्का सा कंपन। ज्यादा पसीना और गर्मी लगना (Heat Intolerance): ठंडे मौसम में भी पसीना आना। चिड़चिड़ापन और बेचैनी (Anxiety & Irritability): बिना कारण घबराहट, गुस्सा या उदासी। थकान और कमजोरी (Fatigue): पर्याप्त नींद के बाद भी थकान महसूस होना। नींद न आना (Insomnia): रात को सोने में परेशानी। बार-बार पॉटी जाना (Frequent Bowel Movements): पाचन तंत्र तेज हो जाता है। गर्दन में सूजन (Goiter): थायरॉइड ग्रंथि बड़ी हो जाती है, जो दिखाई दे सकती है। रेयर या कम बताए जाने वाले लक्षण (Rare Symptoms) आंखों की समस्या (Graves' Ophthalmopathy): आंखें उभरी हुई (Bulging Eyes), लाल, सूजी हुई, या डबल विजन (Double Vision) होना। यह सिर्फ ग्रेव्स डिजीज में होता है। त्वचा में बदलाव (Pretibial Myxedema): पिंडलियों (Shins) या पैरों के ऊपर की त्वचा मोटी, लाल और खुजलीदार हो जाना। नेल्स का अलग होना (Nail Separation): नाखून उंगली से अलग होने लगते हैं (Plummer's Nails)। पीरियड्स में बदलाव: महिलाओं में पीरियड्स हल्के या बिल्कुल बंद हो जाना। हड्डियों का कमजोर होना (Osteoporosis): लंबे समय तक इलाज न करने पर हड्डियां पतली हो सकती हैं। थायरॉइड स्टॉर्म (Thyroid Storm): यह एक जानलेवा स्थिति है जिसमें तेज बुखार, बहुत तेज दिल की धड़कन, बेहोशी और भ्रम होता है। तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। 3. डिटेल डाइट प्लान: क्या खाएं और क्या न खाएं (Indian Foods) डाइट से हाइपरथायरॉइडिज्म ठीक नहीं होता, लेकिन लक्षणों को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। मुख्य फोकस आयोडीन और गोइट्रोजेनिक (Goitrogenic) फूड्स पर है। क्या खाएं (Kya Khayein) – थायरॉइड को शांत करने वाले फूड्स क्रूसिफेरस सब्जियां (Cruciferous Vegetables): ये थायरॉइड हार्मोन बनने को थोड़ा धीमा कर सकती हैं। इन्हें पकाकर खाएं। गोभी (Cabbage), फूलगोभी (Cauliflower), ब्रोकली (Broccoli) पत्ता गोभी (Kale), शलजम (Turnip), मूली (Radish) कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर फूड्स: हड्डियों को कमजोर होने से बचाने के लिए। दूध (Milk), दही (Yogurt), पनीर (Cottage Cheese) हरी पत्तेदार सब्जियां (Spinach, Methi) रागी (Finger Millet), बाजरा एंटी-इंफ्लेमेटरी फूड्स: सूजन कम करने के लिए। हल्दी (Turmeric), अदरक (Ginger), लहसुन (Garlic) हरी चाय (Green Tea) – सीमित मात्रा में जामुन (Blueberries), अनार (Pomegranate) हेल्दी फैट्स और प्रोटीन: मेटाबॉलिज्म को संतुलित रखने के लिए। दालें (Lentils), चना (Chickpeas), राजमा (Kidney Beans) अखरोट (Walnuts), बादाम (Almonds) – 4-5 रोज अंडे का सफेद भाग (Egg Whites) मछली (Fish) – सप्ताह में 2 बार (ओमेगा-3 के लिए) साबुत अनाज (Whole Grains): ऊर्जा के लिए। जौ (Barley), ओट्स (Oats), ब्राउन राइस (Brown Rice) गेहूं की रोटी (Whole Wheat Roti) क्या न खाएं (Kya Na Khayein) – परहेज करने वाले फूड्स आयोडीन से भरपूर फूड्स: ये हार्मोन बनने को और बढ़ा सकते हैं। समुद्री नमक (Sea Salt) की जगह सेंधा नमक (Rock Salt) या सादा नमक लें। समुद्री शैवाल (Seaweed, Nori, Kombu) – बिल्कुल न लें। आयोडीन युक्त मल्टीविटामिन सप्लीमेंट्स से बचें। फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड (जिनमें आयोडीन युक्त नमक होता है)। कैफीन (Caffeine): यह दिल की धड़कन और बेचैनी को बढ़ा सकता है। चाय (Tea), कॉफी (Coffee), एनर्जी ड्रिंक्स (Energy Drinks) चॉकलेट (Dark Chocolate) – सीमित मात्रा में ग्लूटेन (Gluten): कुछ लोगों में ग्रेव्स डिजीज ग्लूटेन से ट्रिगर हो सकती है। गेहूं (Wheat), जौ (Barley), राई (Rye) से बने उत्पाद (ब्रेड, पास्ता, बिस्कुट) सोया उत्पाद (Soy Products): सोया थायरॉइड दवाओं (जैसे मेथिमाजोल) के अवशोषण को कम कर सकता है। टोफू (Tofu), सोया मिल्क (Soy Milk), सोया चंक्स (Soy Chunks) – दवा लेने के 4 घंटे बाद ही लें। अल्कोहल (Alcohol): यह लीवर को प्रभावित करता है और हार्मोन मेटाबॉलिज्म को खराब कर सकता है। नमूना डाइट चार्ट (Sample Diet Plan) सुबह (6-7 AM): गुनगुना पानी + 2 भीगे बादाम + 1 अखरोट नाश्ता (8-9 AM): 1 कटोरी ओट्स/दलिया (दूध के साथ) + 1 सेब मिड-मॉर्निंग (11 AM): 1 कप ग्रीन टी + 2-3 अंजीर (Figs) लंच (1-2 PM): 2 रोटी (गेहूं/बाजरा) + 1 कटोरी दाल + हरी सब्जी (गोभी/फूलगोभी) + दही शाम (4-5 PM): 1 कप नारियल पानी या छाछ (Buttermilk) + मूंगफली (मुट्ठी भर) डिनर (7-8 PM): 1 कटोरी खिचड़ी (मूंग दाल + चावल) + हरी सब्जी + सलाद (खीरा, टमाटर) सोने से पहले (10 PM): 1 गिलास गर्म दूध (हल्दी डालकर) 4. मेडिकल मैनेजमेंट (Medical Management – Educational Only) यह जानकारी केवल शिक्षा के उद्देश्य से है। कोई भी दवा शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। दवाएं (Medicines) एंटी-थायरॉइड ड्रग्स (Antithyroid Drugs): मेथिमाजोल (Methimazole/Tapazole): यह सबसे कॉमन दवा है। यह थायरॉइड में हार्मोन बनने की प्रक्रिया को ब्लॉक करती है। आमतौर पर 6-12 महीने तक लेनी होती है। प्रोपिलथायोरासिल (Propylthiouracil/PTU): यह पुरानी दवा है, जो प्रेग्नेंसी के पहले तीन महीनों में या मेथिमाजोल से एलर्जी होने पर दी जाती है। बीटा-ब्लॉकर्स (Beta-Blockers): प्रोप्रानोलोल (Propranolol), एटेनोलोल (Atenolol): ये दवाएं थायरॉइड हार्मोन को कम नहीं करतीं, बल्कि उनके लक्षणों (तेज दिल, कांपना, बेचैनी) को कंट्रोल करती हैं। ये तुरंत राहत देती हैं। अन्य उपचार (Other Treatments) रेडियोएक्टिव आयोडीन थेरेपी (Radioactive Iodine Therapy – RAI): यह एक कैप्सूल या तरल रूप में ली जाती है। रेडियोएक्टिव आयोडीन सिर्फ थायरॉइड ग्रंथि में जाता है और धीरे-धीरे ओवरएक्टिव कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। इसके बाद आमतौर पर हाइपोथायरॉइडिज्म (थायरॉइड कम होना) हो जाता है, जिसे जीवनभर थायरॉक्सिन (Thyroxine) दवा से मैनेज किया जाता है। सर्जरी (Thyroidectomy): थायरॉइड ग्रंथि का कुछ या पूरा हिस्सा निकाल दिया जाता है। यह तब किया जाता है जब दवाएं काम न करें, बड़ी गांठ हो, या प्रेग्नेंसी में समस्या हो। मॉनिटरिंग (Monitoring) नियमित रूप से थायरॉइड फंक्शन टेस्ट (TFT) करवाएं (TSH, T3, T4)। दवा के साइड इफेक्ट्स (जैसे लिवर डैमेज, व्हाइट ब्लड सेल्स कम होना) के लिए ब्लड टेस्ट करवाएं। 5. प्रोवेन होम रेमेडीज और लाइफस्टाइल चेंजेस (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) ये उपाय डॉक्टर के इलाज के साथ-साथ मददगार हो सकते हैं, लेकिन इन्हें इलाज का विकल्प न समझें। होम रेमेडीज (Home Remedies) अश्वगंधा (Ashwagandha): यह एक आयुर्वेदिक जड़ी है जो थायरॉइड हार्मोन को संतुलित करने में मदद कर सकती है। लेकिन सावधानी: यह हाइपरथायरॉइडिज्म में हार्मोन को और बढ़ा सकता है। डॉक्टर से सलाह लेकर ही लें। नीम (Neem): नीम की पत्तियों का काढ़ा बनाकर पीने से इम्यूनिटी कंट्रोल हो सकती है (ग्रेव्स डिजीज में)। गुग्गुल (Guggul): यह आयुर्वेदिक रेजिन है जो थायरॉइड फंक्शन को सपोर्ट करता है। लेकिन हाइपरथायरॉइडिज्म में इसका उपयोग डॉक्टर की देखरेख में ही करें। लिकोरिस रूट (Mulethi): यह एड्रेनल ग्रंथि को सपोर्ट करता है और तनाव कम करता है। चाय में मिलाकर पी सकते हैं। लैवेंडर ऑयल (Lavender Oil): बेचैनी और अनिद्रा के लिए, लैवेंडर ऑयल की कुछ बूंदें तकिए पर डालें या डिफ्यूजर में डालें। लाइफस्टाइल चेंजेस (Lifestyle Changes) स्ट्रेस मैनेजमेंट: स्ट्रेस हार्मोन (कोर्टिसोल) को बढ़ाता है, जो थायरॉइड को और उत्तेजित कर सकता है। रोज 10-15 मिनट मेडिटेशन (Meditation) या प्राणायाम (Pranayam) करें। गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज (Deep Breathing) करें। नींद का ध्यान रखें: रोज 7-8 घंटे की नींद लें। सोने का समय फिक्स करें। हल्की एक्सरसाइज: जोरदार एक्सरसाइज से बचें, क्योंकि यह दिल पर दबाव डाल सकता है। योग (Yoga) – विशेष रूप से शीर्षासन (Headstand) से बचें। तेज चलना (Brisk Walking) – 20-30 मिनट रोज। तैराकी (Swimming) – यह कूलिंग इफेक्ट देती है। आंखों की देखभाल: अगर आंखें उभरी हुई हैं, तो धूप का चश्मा पहनें, कंप्यूटर पर काम करते समय ब्रेक लें, और आंखों में नमी बनाए रखने के लिए आई ड्रॉप्स का उपयोग करें। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Mental Health & Daily Life) हाइपरथायरॉइडिज्म सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी बहुत प्रभावित करता है। मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव चिंता और पैनिक अटैक (Anxiety & Panic Attacks): हार्मोन का असंतुलन दिमाग के एमिग्डाला (Amygdala) को ओवरएक्टिव कर देता है, जिससे बेवजह डर और घबराहट होती है। डिप्रेशन (Depression): कुछ लोगों में उदासी, निराशा और रोने का मन करता है। ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई (Brain Fog): काम पर फोकस नहीं होता, चीजें याद नहीं रहतीं। मूड स्विंग्स (Mood Swings): एक पल खुश, अगले पल गुस्सा या उदास। दैनिक जीवन पर प्रभाव काम पर असर: थकान और बेचैनी के कारण ऑफिस का काम प्रभावित होता है। रिश्तों पर असर: चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स से परिवार और दोस्तों से दूरी बढ़ सकती है। सामाजिक जीवन: ज्यादा पसीना और कांपने के कारण लोगों से मिलने में शर्मिंदगी महसूस हो सकती है। क्या करें? अपने डॉक्टर को अपनी मेंटल हेल्थ के बारे में बताएं। वे एंटी-डिप्रेसेंट या एंटी-एंजायटी दवाएं लिख सकते हैं। काउंसलिंग (Counselling) या थेरेपी (Therapy) लें। परिवार से बात करें और उन्हें समझाएं कि यह बीमारी का हिस्सा है। 7. 10 डिटेल FAQs (Frequently Asked Questions) प्रश्न 1: क्या हाइपरथायरॉइडिज्म से वजन बढ़ सकता है? जवाब: आमतौर पर नहीं। ज्यादातर मामलों में वजन तेजी से घटता है। लेकिन कुछ दुर्लभ मामलों में, खासकर जब भूख बहुत ज्यादा बढ़ जाए, तो वजन स्थिर रह सकता है या थोड़ा बढ़ सकता है। इलाज के बाद जब हार्मोन नॉर्मल होते हैं, तो वजन वापस आ सकता है। प्रश्न 2: क्या हाइपरथायरॉइडिज्म प्रेग्नेंसी में खतरनाक है? जवाब: हां, यह प्रेग्नेंसी में जोखिम भरा हो सकता है। अनियंत्रित हाइपरथायरॉइडिज्म से मिसकैरेज, प्री-एक्लेमप्सिया (High BP), प्रीमैच्योर डिलीवरी, और बच्चे में थायरॉइड समस्या हो सकती है। प्रेग्नेंसी के दौरान PTU या मेथिमाजोल दवा डॉक्टर की सलाह से ली जा सकती है। नियमित मॉनिटरिंग जरूरी है। प्रश्न 3: क्या हाइपरथायरॉइडिज्म से बाल झड़ते हैं? जवाब: हां, यह एक कॉमन लक्षण है। तेज मेटाबॉलिज्म के कारण बालों के रोम (Hair Follicles) कमजोर हो जाते हैं और बाल झड़ने लगते हैं। इलाज शुरू होने के बाद आमतौर पर बाल वापस उगने लगते हैं। प्रश्न 4: क्या हाइपरथायरॉइडिज्म में दूध पीना चाहिए? जवाब: हां, दूध पीना फायदेमंद है। इसमें कैल्शियम और विटामिन D होता है, जो हड्डियों को कमजोर होने से बचाता है। लेकिन अगर आपको लैक्टोज इंटॉलरेंस है, तो लैक्टोज-फ्री दूध या दही लें। प्रश्न 5: क्या हाइपरथायरॉइडिज्म में व्यायाम करना चाहिए? जवाब: हां, लेकिन हल्का व्यायाम। तेज दौड़ना, वेट लिफ्टिंग या जोरदार कार्डियो से बचें, क्योंकि इससे दिल पर दबाव पड़ सकता है। योग, तेज चलना, और तैराकी अच्छे विकल्प हैं। व्यायाम से पहले और बाद में अपनी हार्ट रेट चेक करें। प्रश्न 6: क्या हाइपरथायरॉइडिज्म ठीक हो सकता है? जवाब: हां, यह ठीक हो सकता है। ग्रेव्स डिजीज में दवाओं से

Angioplasty ke baad running? Doctor kya kehte hain aur dil ka darr kaise hatayein?

Yaar, ek doubt hai. Post-angioplasty (almost 2 months ho gaye) main walking kar raha hoon, roz 30-40 mins. Lekin mujhe lagta hai ki zyada kuch ho nahi raha, thoda slow progress hai. Mera ek friend bolta hai “bhai running start kar, heart strong hoga”. But mujhe darr lagta hai, kahi strain na aa jaye. Kal hi maine 5 mins very slow jogging try kiya, aur thoda breathless feel hua. Heart rate monitor pe 135 dikh raha tha. Ab doctor ne kaha hai “moderate intensity” rakho, but what is moderate for a heart patient? Kya walking hi sufficient hai ya running bhi zaroori hai? Meri age 48, sedentary lifestyle tha pichle 10 saal. Ab lifestyle change karna chah raha hoon. Koi experienced bhai hai jiska bhi heart issue hua ho? Walking se kaam chal jayega? Ya running ka koi safe way hai? Plz share your experience, main confuse hoon.

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