anatrix 1000mg injection - Uses, Price and Side Effects

anatrix 1000mg injection: Uses in Hindi (Fayde), Price, Side Effects & Substitutes

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Ceftriaxone (1000mg) (Click to see all medicines with same salt)
🏭 Anabiosis Medisciences Ltd 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 16, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is anatrix 1000mg injection used for? (Quick Answer)

🩺 Primary Use:
anatrix 1000mg injection (manufactured by Anabiosis Medisciences Ltd) is a highly effective medicine primarily used for the treatment of anti infectives. It helps in relieving symptoms and improving your overall health. Find the complete list of anatrix 1000mg injection uses in Hindi, alternatives, price in India, and dosage on SaathiMed below.
🧪 Active Ingredient & Working:
It contains Ceftriaxone (1000mg) which works by treating the underlying condition effectively.
⚠️ Safety Warning:
Always consult your doctor before using this medicine, especially to check if it is safe during pregnancy or if you suffer from liver or kidney issues.

🇮🇳 anatrix 1000mg injection के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

anatrix 1000mg injection का उपयोग मुख्य रूप से anti infectives और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Ceftriaxone (1000mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? Over 80% of the antiretroviral drugs used globally to combat AIDS are supplied by Indian pharmaceutical companies.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Ceftriaxone (1000mg)
Manufacturer / BrandAnabiosis Medisciences Ltd
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassANTI INFECTIVES
Action ClassCephalosporins: 3 generation
Prescription Required✓ Yes (Schedule H Drug)
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Onset of Action:
30 to 60 minutes
Duration:
6 to 8 hours
Habit Forming:
No (Non-addictive)
Food:
Take after meal

💊 anatrix 1000mg injection Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

💡 How to Take anatrix 1000mg injection (Dosage & Khane ka tarika)

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💡 Expert Tips for Best Results

  • Follow the prescription: Always use anatrix 1000mg injection exactly as prescribed by your healthcare provider. Do not alter the dosage yourself.
  • Check Expiry: Never consume expired medicines. Always double-check the manufacturing and expiry date on the packaging before use.
  • Storage: Store the medicine in a cool, dry place away from direct sunlight and out of reach of children.
  • Report Side Effects: If you experience severe allergic reactions, swelling, or breathing issues after taking anatrix 1000mg injection, seek emergency medical help immediately.
  • Don't self-medicate: Do not share this medicine with others even if their symptoms seem similar to yours.

⚠️ anatrix 1000mg injection Side Effects (Nuksan) & Precautions

Common and serious side effects may include:

  • Diarrhea
  • Abnormal liver function tests
  • Rash

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🛑 Myths vs. Facts about anatrix 1000mg injection

  • Myth: Generic substitutes of anatrix 1000mg injection are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Ceftriaxone (1000mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of anatrix 1000mg injection can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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Complete Guide to Stress Management - 31-05-2026

तनाव प्रबंधन (Stress Management): एक विस्तृत चिकित्सा मार्गदर्शिका नमस्ते! आज हम बात करेंगे एक ऐसे विषय पर जो आजकल हर किसी की ज़िंदगी का हिस्सा बन गया है – तनाव (Stress)। यह सिर्फ़ एक मानसिक समस्या नहीं, बल्कि एक पूरी शारीरिक प्रक्रिया है जो आपके शरीर के हर अंग को प्रभावित कर सकती है। इस गाइड में हम आपको बताएँगे कि तनाव कैसे काम करता है, इसके लक्षण क्या हैं, और इसे कैसे कंट्रोल किया जा सकता है – पूरी तरह से हिंग्लिश में, आपकी सुविधा के लिए। 1. गहरा परिचय और रोग तंत्र (Deep Introduction & Disease Mechanism) तनाव क्या है? तनाव (Stress) कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर की एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है जो किसी खतरे या चुनौती के जवाब में होती है। इसे "फाइट या फ्लाइट रिस्पॉन्स" (Fight or Flight Response) कहते हैं। जब आपका दिमाग किसी खतरे को भांपता है (चाहे वह असली हो या काल्पनिक), तो यह आपके शरीर को एक्शन के लिए तैयार करता है। शरीर के अंदर क्या होता है? (Mechanism) हाइपोथैलेमस-पिट्यूटरी-एड्रिनल एक्सिस (HPA Axis): दिमाग का हाइपोथैलेमस हिस्सा एक हार्मोन (CRH) छोड़ता है, जो पिट्यूटरी ग्रंथि को ACTH हार्मोन बनाने का संकेत देता है। यह ACTH आपकी एड्रिनल ग्रंथियों (किडनी के ऊपर) को कोर्टिसोल (Cortisol) और एड्रेनालिन (Adrenaline) छोड़ने के लिए कहता है। कोर्टिसोल का काम: यह "स्ट्रेस हार्मोन" है। यह ब्लड शुगर बढ़ाता है (ताकि आपके पास ऊर्जा हो), इम्यून सिस्टम को दबाता है (ताकि शरीर खतरे से लड़ने पर फोकस करे), और पाचन, प्रजनन जैसी "गैर-ज़रूरी" प्रक्रियाओं को धीमा कर देता है। एड्रेनालिन का काम: यह दिल की धड़कन तेज़ करता है, ब्लड प्रेशर बढ़ाता है, और मांसपेशियों में खून का प्रवाह बढ़ाता है – ताकि आप तेज़ दौड़ सकें या लड़ सकें। समस्या तब होती है जब यह तंत्र लगातार चालू रहता है (क्रॉनिक स्ट्रेस)। तब कोर्टिसोल का लेवल हमेशा ऊँचा रहता है, जो शरीर को नुकसान पहुँचाने लगता है – जैसे कि वजन बढ़ना, इम्यूनिटी कमज़ोर होना, और दिमागी कोशिकाओं (हिप्पोकैम्पस) का सिकुड़ना। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Common & Rare Symptoms) सामान्य लक्षण (Common Symptoms) – ये लगभग हर किसी को होते हैं: शारीरिक (Physical): सिरदर्द (tension headache), गर्दन और कंधों में अकड़न, थकान, नींद न आना (insomnia), पेट खराब होना (gas, acidity, diarrhea), बार-बार पेशाब आना, हाथ-पैर ठंडे होना। मानसिक (Mental): चिड़चिड़ापन, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, भूलने की आदत, हर बात में नकारात्मकता ढूँढना, बेचैनी। व्यवहारिक (Behavioral): ज़्यादा खाना या भूख न लगना, सिगरेट/शराब की लत बढ़ना, सामाजिक मेलजोल से बचना, काम में टालमटोल करना। दुर्लभ लक्षण (Rare Symptoms) – जिन्हें लोग अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं: हाथ-पैरों में झनझनाहट (Tingling/Numbness): लगातार तनाव से नसों पर दबाव पड़ सकता है, जिससे हाथों या पैरों में सुन्नता या चुभन महसूस होती है। बालों का झड़ना (Telogen Effluvium): अचानक बहुत ज़्यादा तनाव से बालों के रोम (hair follicles) आराम की अवस्था में चले जाते हैं, जिससे 2-3 महीने बाद बाल झड़ने लगते हैं। दांत पीसना (Bruxism): रात में सोते समय दांत पीसना या जबड़े भींचना, जिससे जबड़े में दर्द और दांत घिसने लगते हैं। त्वचा पर चकत्ते (Skin Rashes): तनाव से हिस्टामाइन रिलीज़ होता है, जिससे एक्ज़िमा, सोरायसिस या पित्ती (hives) जैसी समस्याएँ बढ़ सकती हैं। बार-बार बीमार पड़ना: क्रॉनिक स्ट्रेस इम्यून सिस्टम को कमज़ोर कर देता है, जिससे सर्दी-ज़ुकाम या इन्फेक्शन जल्दी पकड़ लेते हैं। 3. विस्तृत आहार योजना (Detailed Diet Plan) आपका खाना सीधे आपके मूड और तनाव के स्तर को प्रभावित करता है। यहाँ Indian foods पर आधारित एक पूरी गाइड है। क्या खाएँ (Kya Khaye) – तनाव कम करने वाले फूड्स: कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट: ये सेरोटोनिन (खुशी का हार्मोन) बढ़ाते हैं। खाएँ: जई (oats), ब्राउन राइस, बाजरा, रागी (finger millet), साबुत गेहूँ की रोटी। ओमेगा-3 फैटी एसिड: ये दिमागी सूजन कम करते हैं। खाएँ: अलसी के बीज (flaxseeds), चिया सीड्स, अखरोट (walnuts), सरसों का तेल, मछली (अगर नॉन-वेज खाते हैं)। मैग्नीशियम से भरपूर फूड्स: मैग्नीशियम मांसपेशियों को आराम देता है और कोर्टिसोल को कंट्रोल करता है। खाएँ: पालक (spinach), कद्दू के बीज, बादाम, केला, डार्क चॉकलेट (70% कोको)। विटामिन B कॉम्प्लेक्स: ये नर्वस सिस्टम को हेल्दी रखते हैं। खाएँ: अंडे, दूध, दही, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, मूंग दाल। एंटीऑक्सीडेंट्स: ये शरीर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाते हैं। खाएँ: जामुन (blueberries, blackberries), आँवला, हल्दी, अदरक, ग्रीन टी। प्रोबायोटिक्स: गट-ब्रेन एक्सिस को मज़बूत करते हैं। खाएँ: दही, छाछ, किमची, अचार (प्राकृतिक रूप से किण्वित)। क्या न खाएँ (Kya Na Khaye) – तनाव बढ़ाने वाले फूड्स: प्रोसेस्ड फूड और रिफाइंड शुगर: जैसे कि बिस्कुट, केक, कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस। ये ब्लड शुगर को तेज़ी से बढ़ाते और गिराते हैं, जिससे मूड स्विंग होता है। ज़्यादा कैफीन: चाय और कॉफी सीमित मात्रा में (दिन में 1-2 कप) ठीक है, लेकिन ज़्यादा लेने से एड्रेनालिन बढ़ता है और नींद खराब होती है। शराब और सिगरेट: ये अस्थायी रूप से आराम देते हैं, लेकिन लंबे समय में तनाव को और बढ़ाते हैं और नींद की गुणवत्ता खराब करते हैं। तली-भुनी चीज़ें (Trans Fats): समोसे, पकौड़े, फ्रेंच फ्राइज़ – ये शरीर में सूजन बढ़ाते हैं और दिमागी कार्यक्षमता को कम करते हैं। नमक का अधिक सेवन: ब्लड प्रेशर बढ़ाता है, जो तनाव को और बढ़ा सकता है। 4. चिकित्सा प्रबंधन (Medical Management) ध्यान दें: यह केवल शैक्षिक जानकारी है। कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। तनाव के लिए दवाएँ आमतौर पर तब दी जाती हैं जब यह गंभीर हो (जैसे कि एंग्ज़ाइटी डिसऑर्डर या डिप्रेशन)। आमतौर पर दी जाने वाली दवाएँ: SSRIs (Selective Serotonin Reuptake Inhibitors): जैसे एस्सिटालोप्राम (Escitalopram) या फ्लुओक्सेटीन (Fluoxetine)। ये दिमाग में सेरोटोनिन (खुशी का हार्मोन) का लेवल बढ़ाते हैं। इन्हें काम करने में 2-4 हफ्ते लगते हैं। SNRIs (Serotonin-Norepinephrine Reuptake Inhibitors): जैसे वेनलाफैक्सिन (Venlafaxine) या डुलोक्सेटीन (Duloxetine)। ये सेरोटोनिन और नॉरएड्रेनालिन दोनों को बढ़ाते हैं, जिससे ऊर्जा और फोकस बेहतर होता है। बेंज़ोडायज़ेपींस (Benzodiazepines): जैसे क्लोनाज़ेपम (Clonazepam) या लोराज़ेपम (Lorazepam)। ये तुरंत आराम देते हैं (15-30 मिनट में), लेकिन इनकी लत लग सकती है, इसलिए केवल थोड़े समय के लिए दी जाती हैं। बीटा-ब्लॉकर्स (Beta-Blockers): जैसे प्रोप्रानोलोल (Propranolol)। ये तनाव के शारीरिक लक्षणों (जैसे कि तेज़ दिल की धड़कन, हाथ काँपना) को कम करते हैं। अक्सर परीक्षा या सार्वजनिक भाषण से पहले दी जाती हैं। दवाएँ कैसे काम करती हैं? ये दवाएँ दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर (रासायनिक संदेशवाहक) को संतुलित करती हैं। उदाहरण के लिए, SSRIs सेरोटोनिन को न्यूरॉन्स के बीच अधिक समय तक रहने देते हैं, जिससे मूड बेहतर होता है। बीटा-ब्लॉकर्स एड्रेनालिन के प्रभाव को रोकते हैं, जिससे शरीर शांत रहता है। 5. सिद्ध घरेलू उपचार और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) घरेलू उपचार (Home Remedies): अश्वगंधा (Ashwagandha): यह आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी कोर्टिसोल के स्तर को 30% तक कम कर सकती है। रोज़ाना 300-500 mg लें (डॉक्टर से पूछकर)। तुलसी के पत्ते (Holy Basil): 5-6 ताज़ी तुलसी के पत्ते रोज़ सुबह चबाएँ। यह एड्रिनल ग्रंथियों को संतुलित करता है। गर्म दूध में हल्दी (Turmeric Milk): रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में चुटकी भर हल्दी और थोड़ी सी इलायची मिलाकर पिएँ। यह नसों को शांत करता है। ब्राह्मी (Bacopa Monnieri): यह मेमोरी और फोकस बढ़ाता है, और तनाव को कम करता है। आप इसका पाउडर या कैप्सूल ले सकते हैं। ग्रीन टी में शहद: ग्रीन टी में L-theanine होता है, जो दिमाग को शांत करता है। इसमें थोड़ा सा शहद मिलाने से एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव बढ़ जाता है। जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes): प्राणायाम और ध्यान (Pranayama & Meditation): रोज़ाना 10 मिनट अनुलोम-विलोम (alternate nostril breathing) करें। इससे पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिवेट होता है, जो तनाव को कम करता है। नियमित व्यायाम: हफ्ते में 5 दिन, 30 मिनट की तेज़ चाल (brisk walking) या योग करें। व्यायाम से एंडोर्फिन (feel-good hormones) रिलीज़ होते हैं, जो प्राकृतिक पेनकिलर की तरह काम करते हैं। नींद की दिनचर्या (Sleep Hygiene): हर रात एक ही समय पर सोएँ और सुबह एक ही समय पर उठें। सोने से 1 घंटे पहले मोबाइल/लैपटॉप बंद कर दें। सोशल कनेक्शन: दोस्तों या परिवार से बात करें। सिर्फ़ 10 मिनट की बातचीत भी कोर्टिसोल को कम कर सकती है। डिजिटल डिटॉक्स: दिन में कम से कम 1 घंटा बिना स्क्रीन के बिताएँ। किताब पढ़ें, बागवानी करें, या बस खिड़की से बाहर देखें। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Mental Health & Daily Life) मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव: एंग्ज़ाइटी और डिप्रेशन: क्रॉनिक स्ट्रेस दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर को असंतुलित कर देता है, जिससे चिंता (anxiety) और उदासी (depression) का खतरा बढ़ जाता है। नकारात्मक सोच (Negative Thinking): तनाव में दिमाग "एमिग्डाला" (डर का केंद्र) ज़्यादा सक्रिय हो जाता है, जिससे हर चीज़ में बुराई नज़र आने लगती है। याददाश्त कमज़ोर होना: लगातार ऊँचा कोर्टिसोल हिप्पोकैम्पस (याददाश्त का केंद्र) को सिकोड़ सकता है, जिससे चीज़ें भूलने लगती हैं। दैनिक जीवन पर प्रभाव: काम पर फोकस कम होना: तनाव से ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है, जिससे काम में गलतियाँ बढ़ जाती हैं और प्रोडक्टिविटी गिर जाती है। रिश्तों में तनाव: चिड़चिड़ापन और गुस्सा आने से परिवार और दोस्तों से झगड़े बढ़ जाते हैं। शारीरिक बीमारियाँ: तनाव से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़, और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। सामाजिक अलगाव (Social Withdrawal): लोग पार्टियों या मिलन-जुलन से बचने लगते हैं, जिससे अकेलापन और बढ़ता है। 7. 10 विस्तृत FAQs (Long-Tail Search Queries) 1. क्या तनाव से वजन बढ़ सकता है? (Can stress cause weight gain?) हाँ, बिल्कुल! तनाव से कोर्टिसोल बढ़ता है, जो शरीर को "बेली फैट" (पेट की चर्बी) जमा करने के लिए प्रेरित करता है। साथ ही, तनाव में लोग ज़्यादा खाना (खासकर मीठा और तला हुआ) खाने लगते हैं, जिससे वजन बढ़ता है। इसे "स्ट्रेस ईटिंग" कहते हैं। 2. तनाव से सिरदर्द क्यों होता है? (Why does stress cause headaches?) तनाव से गर्दन, कंधों और सिर की मांसपेशियाँ तन जाती हैं, जिससे टेंशन हेडेक होता है। यह सिर के दोनों तरफ़ दबाव जैसा दर्द होता है। साथ ही, तनाव से माइग्रेन भी ट्रिगर हो सकता है। 3. क्या तनाव से बाल झड़ते हैं? (Does stress cause hair loss?) हाँ, तीन तरह से: (1) Telogen Effluvium – अचानक तनाव से बाल झड़ना, (2) Alopecia Areata – इम्यून सिस्टम बालों के रोम पर हमला करता है, (3) Trichotillomania – तनाव में बाल खींचने की आदत। 4. तनाव कम करने के लिए सबसे अच्छा व्यायाम कौन सा है? (Best exercise for stress relief?) योग और तेज़ चाल (brisk walking) सबसे अच्छे हैं। योग से शरीर और दिमाग दोनों को आराम मिलता है, जबकि तेज़ चाल से एंडोर्फिन रिलीज़ होता है। सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली एक्सरसाइज़ करें। 5. क्या तनाव से पेट खराब हो सकता है? (Can stress cause stomach problems?) हाँ, इसे "गट-ब्रेन एक्सिस" कहते हैं। तनाव से पेट में एसिड बढ़ता है, जिससे एसिडिटी, गैस, और IBS (Irritable Bowel Syndrome) के लक्षण बढ़ जाते हैं। कई लोगों को तनाव में दस्त या कब्ज़ भी होता है। 6. तनाव और चिंता में क्या अंतर है? (Difference between stress and anxiety?) तनाव (Stress) किसी बाहरी कारण (जैसे काम का दबाव) की प्रतिक्रिया है, जो उस कारण के हटते ही कम हो जाता है। चिंता (Anxiety) बिना किसी स्पष्ट कारण के भी हो सकती है, और यह लंबे समय तक बनी रहती है। चिंता में हमेशा डर या बेचैनी बनी रहती है। 7. क्या तनाव से दिल की बीमारी हो सकती है? (Can stress cause heart disease?) हाँ, क्रॉनिक स्ट्रेस दिल के लिए बहुत खतरनाक है। यह ब्लड प्रेशर बढ़ाता है, कोलेस्ट्रॉल लेवल को बिगाड़ता है, और दिल की धमनियों में सूजन पैदा करता है। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। 8. क्या बच्चों को भी तनाव होता है? (Can children get stressed?) हाँ, बच्चों को भी तनाव होता है, खासकर पढ़ाई, परीक्षा, या दोस्तों के साथ झगड़े की वजह से। बच्चों में तनाव के लक्षण – चिड़चिड़ापन, पेट दर्द, सिरदर्द, या स्कूल जाने से मना करना हो सकते हैं। 9. क्या तनाव से नींद न आने की समस्या ठीक हो सकती है? (Can stress cause insomnia and how to fix it?) हाँ, तनाव नींद न आने (insomnia) का सबसे बड़ा कारण है। कोर्टिसोल का ऊँचा लेवल दिमाग को जगाए रखता है। इसे ठीक करने के लिए: (1) सोने से पहले 10 मिनट ध्यान करें, (2) गर्म पानी से पैर धोएँ, (3) बेडरूम में अंधेरा और शांति रखें। 10. क्या तनाव से इम्यूनिटी कमज़ोर होती है? (Can stress weaken the immune system?) हाँ, क्रॉनिक स्ट्रेस इम्यून सिस्टम को दबा देता है। कोर्टिसोल का ऊँचा स्तर व्हाइट ब्लड सेल्स (जो इन्फेक्शन से लड़ते हैं) की संख्या और कार्यक्षमता को कम कर देता है। इसलिए तनाव में लोग जल्दी बीमार पड़ते हैं और घाव भी धीरे भरते हैं। महत्वपूर्ण चिकित्सा अस्वीकरण (Medical Disclaimer): यह लेख केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान, या उपचार का विकल्प नहीं है। तनाव या किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए हमेशा एक योग्य चिकित्सक (डॉक्टर) से परामर्श करें। किसी भी दवा, सप्लीमेंट, या आहार में बदलाव करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना अनिवार्य है। लेखक या प्रकाशक किसी भी प्रकार की क्षति या स्वास्थ्य समस्या के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

Subah kitchen mein gir gayi! Kya karein? Koi aasan upaay batayein?

Namaste doston. Aaj subah kitchen mein ja rahi thi toh achanak se sar ghoom gaya aur chakkar aakar gir padi. Bahut dar lag gaya. Weakness bhi hai diabetes ki wajah se, doctor ne kaha tha. Ghol mein haath laga liya, chot nahi aayi par bachhon ko dekh ke bura lagta hai. Kya karein? Koi aasan upaay batayein? Main roz subah nimbu paani pi leti hoon, phir bhi aisa hota hai. Koi ayurvedic nuskha ho toh batao.

Beta log, chai me gud daalun ya nahi? Diabetes aur retinopathy me safe hai kya? Pls koi batao! 🙏

Beta log, aaj subah uthke chai banayi toh soch me pad gayi. Gud daalu ki na daalu? Mera doctor kehta hai diabetes me mitha chij kam karo, lekin purane zamane se toh gud ko healthy mante aaye hain. Kuch din pehle ek padosi ne bataya ki gud me iron hota hai aur constipation nahi hoti. Par humari aankhon ki roshni pe bhi asar padta hai kya? Meri diabetic retinopathy hai, isliye har chij soch samajh karti hoon. Aaj toh chai bina gud ke pi li, lekin mann nahi laga. Thoda sa dal doon toh kya hoga? Weakness bhi rehti hai, kabhi kabhi pair fisal jata hai ghar me. Kya koi bata sakta hai ki thoda sa gud safe hai ya nahi? Koi home remedy batao jo diabetes me safe ho. 🙏

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